बुधवार, 30 नवंबर 2016

गौरवशाली इतिहास को नयी पीढी को बताना राष्ट्रीय कर्तव्य - परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय भागवत जी



समाज को अपना सत्व पहचानने का आग्रह  - मोहनराव जी भागवत 



‘राष्ट्रीय तीर्थ-प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर’ का लोकार्पण







गौरवशाली इतिहास को सहेज कर नयी पीढी को बताना यह राष्ट्रीय कर्तव्य - परम पूजनीय सरसंघचालक




             उदयपुर : 28 नवम्बर महाराणा प्रताप के जीवन को समर्पित मेवाड एवं भारत के गौरवशाली इतिहास को जीवन्त करने वाले ‘राष्ट्रीय तीर्थ-प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर’ का लोकार्पण आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव जी भागवत एवं राजस्थान की मुख्यमंत्री माननीया वसुंधराराजे जी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में  केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री भारत सरकार श्री महेश गिरि जी  एवं राजस्थान सरकार के गृहमन्त्री एवं स्थानीय विधायक श्री गुलाबचन्द जी कटारिया  भी मंच पर उपस्थित थे।

         कार्यक्रम में परम पूजनीय सरसंघचालक माननीय मोहनराव जी भागवत ने स्वामी विवेकानन्द के बताये दृष्टांत से अपना उद्बोधन प्रारम्भ करते हुए समाज को अपना सत्व पहचानने का आग्रह किया। उन्होने कहा किसी भी देश को आगे बढने के लिए अपना अतीत जानना आवश्यक है, गौरवशाली अतीत ही नयी पीढी को आगे बढने की प्रेरणा देता है। किसी भी समाज के लिए अपने गौरवशाली इतिहास को सहेज कर नयी पीढी को बताना यह राष्ट्रीय कर्तव्य है।  प्रताप गौरव केन्द्र का निर्माण  इस उद्देश्य पूर्ति का अंश मात्र है ।

            इस प्रकार के प्रयासों  से ही देश का स्वाभिमान जाग्रत होकर समाज की उन्नति सम्भव है । सत्व के बल पर ही श्री राम एवं लक्ष्मण ने त्रिलोकजयी रावण को परास्त कर दिया महाराणा प्रताप का जीवन भी सत्व के बल पर संघर्ष की प्रेरणा देने वाला जीवन है, महाराणा प्रताप ने अकबर को न केवल युद्ध में परास्त किया अपितु शान्तिकाल में 12 वर्षों तक चावण्ड़ को राजधानी बनाकर सुशासन स्थापित कर स्वराज्य एवं सुराज्य भी चलाया। उनके शासनकाल पर शोध कर सीख लेने की आवश्यकता है।

                     कार्यक्रम के प्रारम्भ मे प्रताप गौरव केन्द्र न्यास के सदस्य श्री ओमप्रकाश जी ने अब तक हुए निर्माण की जानकारी देते हुए बताया की अब तक लगभग 40 करोड़ की लागत से हुए निर्माण कार्यों के क्रम में 57 फिट ऊंचाई की महाराणा प्रताप की प्रतिमा, लाईट एण्ड साउण्ड के साथ अखण्ड भारत के दर्शन, मेवाड के इतिहास की घटनाओं को लाईव मेकेनिकल मॉडल दीर्घाओं के माध्यम से दर्शाना, दो फिल्म थियेटर, भारत माता मन्दिर एवं ध्यान कक्ष के निर्माण की जानकारी देते हुए शेष बचे 60 फीसदी कार्यां में तन-मन-धन से सहयोगी होने का आग्रह किया।


        मुख्यमंत्री ने प्रताप गौरव केन्द्र के विकास एवं विस्तार के कार्यों में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में बेहतर योगदान देंगे। आने वाला समय में यह एक ऐसा राष्ट्रीय तीर्थ बन जाएगा और लेकसिटी की अन्तर्राष्ट्रीय पहचान में ऐतिहासिक तीर्थ होने का एक और गौरव जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि मन्दिरों, लोक देवताओं आदि आस्था स्थलों, इतिहास और परम्पराओं की जानकारी न हो तो समाज अधूरा रह जाता है। मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप के बारे में वर्ल्ड क्लास राष्ट्रीय तीर्थ निर्माण को अचंभा बताते हुए इसके निर्माण में जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि शांति के साथ इतना भव्य काम करने वाली पूरी टीम की मेहनत अकल्पनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा काम हुआ है कि जिससे आने वाली पीढ़ियां याद करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रताप सभी के लिए हैं और जरूरत है कि हम सभी प्रताप के जीवन और गाथाओं से प्रेरणा पाएं और उन्हें आचरण में लाएं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केन्द्रिय पर्यटन एवं सस्कृति मन्त्री श्री महेश गिरि ने 120 करोड़ रुपये की लागत से हेरिटेज सर्किट निर्माण की घोषणा मंच से की।

     कार्यक्रम को श्री गुलाबचन्द जी कटारिया ने भी सम्बोधित किया, संचालन गोरव केन्द्र के महामन्त्री श्री मदनमोहन टाक ने एवं आभार प्रकटीकरण केन्द्र के अध्यक्ष डॉ के.एस. गुप्ता ने किया, काव्यगीत श्री रवि बोहरा ने गाया।




मंगलवार, 29 नवंबर 2016

जम्मू और कश्मीर हिंदुत्व की ही बपौती




पिछले दिनों , जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान अध‍िकृत कश्मीर (पीओके) पर भारत के दावे को लेकर विवादित बयान दिया है। अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके भारत की बपौती नहीं है जिसे वह हासिल कर ले। इसके साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को चुनौती दी कि वह पाकिस्तान के कब्जे से पीओके को लेकर दिखाए।

      फारूक अब्दुल्ला का यह  बयान  मात्र पाकिस्तान को खुश करने वाला था , वे स्वयं जानते हैं की कश्मीर और उनके भी  पूर्वज  हिन्दू थे ! समस्त जम्बू दीप यानि कि एशिया महादीप सनातन संस्कृति था ! अफगानिस्थान से लेकर सुदूर म्यमांर मलेशिया इंडोनेशिया तक जो बड़ी बड़ी बोद्ध प्रतिमाएं है या नष्ट की हैं वे चीख चीख कर कह रहीं हैं की यह सारा का सारा प्रायदीप सनातन सभ्यता का  हैं ! इसलिये  फारूक अब्दुल्ला ये समझलें कि मानव सभ्यता के जन्म से कश्मीर हिंदुत्व की बपौती है !
- अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान 9414180151 / 9509559131  

मानव सभ्यता के जन्म से , जम्मू और कश्मीर हिंदुत्व की ही बपौती 


जम्मू और कश्मीर के लिए राजतरंगिणी तथा नीलम पुराण नामक दो प्रामाणिक ग्रंथों में यह आख्‍यान मिलता है कि कश्मीर की घाटी कभी बहुत बड़ी झील हुआ करती थी। इस कथा के अनुसार कश्यप ऋषि ने यहाँ से पानी निकाल लिया और इसे मनोरम प्राकृतिक स्थल में बदल दिया, किंतु भूगर्भशास्त्रियों का कहना है कि भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण खदियानयार, बारामुला में पहाड़ों के धंसने से झील का पानी बहकर निकल गया और इस तरह 'पृथ्वी पर स्वर्ग' कहलाने वाली कश्मीर की घाटी अस्तित्‍व में आई।

ऐतिहासिक उल्लेख
ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रसार किया। बाद में कनिष्क ने इसकी जड़ें और गहरी कीं। छठी शताब्दी के आरंभ में कश्मीर पर हूणों का अधिकार हो गया। यद्यपि सन् 530 में घाटी फिर स्वतंत्र हो गई लेकिन इसके तुरंत बाद इस पर उज्जैन साम्राज्य का नियंत्रण हो गया। विक्रमादित्य राजवंश के पतन के पश्‍चात कश्‍मीर पर स्‍थानीय शासक राज करने लगे। वहां हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का मिश्रित रूप विकसित हुआ। कश्मीर के हिन्दू राजाओं में ललितादित्य (सन 697 से सन् 738) सबसे प्रसिद्ध राजा हुए जिनका राज्य पूर्व में बंगाल तक, दक्षिण में कोंकण, उत्तर-पश्चिम में तुर्किस्तान, और उ‍त्तर-पूर्व में तिब्बत तक फैला था। ललितादित्य ने अनेक भव्‍य भवनों का निर्माण किया।

इस्‍लाम का आगमन

कश्मीर में इस्लाम का आगमन 13 वीं और 14वीं शताब्दी में हुआ। मुस्लिम शासको में जैन-उल-आबदीन (1420-70) सबसे प्रसिद्ध शासक हुए, जो कश्‍मीर में उस समय सत्ता में आए, जब तातरों के हमले के बाद हिन्दू राजा सिंहदेव भाग गए। बाद में चक शासकों ने जैन-उल-आवदीन के पुत्र हैदरशाह की सेना को खदेड़ दिया और सन् 1586 तक कश्मीर पर राज किया। सन् 1586 में अकबर ने कश्मीर को जीत लिया। सन् 1752 में कश्मीर तत्कालीन कमज़ोर मुग़ल शासक के हाथ से निकलकर अफ़ग़ानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली के हाथों में चला गया। 67 साल तक पठानों ने कश्मीर घाटी पर शासन किया।

अन्य उल्लेख

जम्मू का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। हाल में अखनूर से प्राप्‍त हड़प्‍पा कालीन अवशेषों तथा मौर्य, कुषाण और गुप्त काल की कलाकृतियों से जम्मू के प्राचीन स्‍वरूप पर नया प्रकाश पड़ा है। जम्मू 22 पहाड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। डोगरा शासक राजा मालदेव ने कई क्षेत्रों को जीतकर अपने विशाल राज्य की स्थापना की। सन् 1733 से 1782 तक राजा रंजीत देव ने जम्मू पर शासन किया किंतु उनके उत्तराधिकारी दुर्बल थे, इसलिए महाराजा रणजीत सिंह ने जम्मू को पंजाब में मिला लिया। बाद में उन्‍होंने डोगरा शाही ख़ानदान के वंशज राजा गुलाब सिंह को जम्मू राज्य सौंप दिया। 1819 में यह पंजाब के सिक्ख शासन के अंतर्गत आया और 1846 में डोगरा राजवंश के अधीन हो गया। गुलाब सिं‍ह रणजीत सिंह के गवर्नरों में सबसे शक्तिशाली बन गए और लगभग समूचे जम्मू क्षेत्र को उन्होंने अपने राज्य में मिला लिया।

वर्तमान स्वरूप
अपने वर्तमान स्वरूप में जम्मू - कश्मीर का अंचल, 1846 में रूपायित हुआ। जब प्रथम सिक्ख युद्ध के अंत में लाहौर और अमृतसर की संधियों के द्वारा जम्मू के डोगरा शासक राजा गुलाब सिंह एक विस्तृत, लेकिन अनिश्चित से हिमालय क्षेत्रीय राज्य, जिसे 'सिंधु नदी के पूर्व की ओर रावी नदी के पश्चिम की ओर' शब्दावली द्वारा परिभाषित किया गया था, के महाराजा बन गए।

अंग्रेज़ों के लिए इस संरक्षित देशी रियासत की रचना ने उनके साम्राज्य के उत्तरी भाग को सुरक्षित बना दिया था, जिससे वे 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के दौरान सिंधु नदी तक और उसके आगे बढ़ सकें। इस प्रकार यह राज्य एक जटिल राजनीतिक मध्यवर्ती क्षेत्र का भाग बन गया जिसे अंग्रेज़ों ने उत्तर में अपने भारतीय साम्राज्य और रूसी व चीनी साम्राज्य के बीच स्थापित कर दिया था। गुलाब सिंह का इस पर्वतीय अंचल पर शासनाधिकार मिल जाने से लगभग एक - चौथाई सदी से पंजाब के सिक्ख साम्राज्य की उत्तरी सीमा रेखा के पास की छोटी - छोटी रियासतों के बीच चल रही मुहिम और कूटनीतिक चर्चा का अंत हो गया।
19वीं सदी के इस अंचल की सीमा - निर्धारण के कुछ प्रयास किए गए, लेकिन सुस्पष्ट परिभाषा करने के प्रयत्न अक्सर इस भूभाग की प्रकृति और ऐसे विशाल क्षेत्रों के कारण, जो स्थायी बस्तियों से रहित थे, सफल नहीं हो पाए। उदाहरणार्थ - सुदूर उत्तर में महाराजा की सत्ता कराकोरम पर्वत श्रेणी तक फैली हुई थी। लेकिन उसके आगे तुर्किस्तान और मध्य एशिया के सिक्यांग क्षेत्रों की सीमा रेखा पर एक विवादास्पद क्षेत्र बना रहा और सीमा रेखा कभी निश्चित नहीं हो पाई। इसी प्रकार की शंकाएँ उस सीमा क्षेत्र के बारे में रही, जो उत्तर में अक्साई चिन को आस पास से घेरे हुए है और आगे जाकर तिब्बत की सुस्पष्ट सीमा रेखा से मिलता है और जो सदियों से लद्दाख क्षेत्र की पूर्वी सीमा पर बना हुआ था। पश्चिमोत्तर में सीमाओं का स्वरूप 19वीं शताब्दी के आख़िरी दशक में अधिक स्पष्ट हुआ। जब ब्रिटेन ने पामीर क्षेत्र में सीमा निर्धारण सम्बन्धी समझौते अफ़ग़ानिस्तान और रूस के साथ सम्पन्न किए। इस समय गिलगित, जो हमेशा कश्मीर का भाग समझा जाता था, रणनीतिक कारणों से 1889 में एक ब्रिटिश एजेंट के तहत एक विशेष एजेंसी के रूप में गठित किया गया। सन् 1947 में जम्मू पर डोगरा शासकों का शासन रहा। इसके बाद महाराज हरि सिंह ने 26 अक्‍तूबर, 1947 को भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्‍ताक्षर कर दिये।

अनुच्छेद 370

ब्रिटिश हुकूमत की समाप्ति के साथ ही जम्मू और कश्मीर भी आज़ाद हुआ। शुरू में इसके शासक महाराज हरीसिंह ने फैसला किया कि वह भारत या पाकिस्तान में सम्मिलित न होकर स्वतंत्र रहेंगे, लेकिन 20 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थक आज़ाद कश्मीर सेना ने राज्य पर आक्रमण कर दिया, जिससे महाराज हरीसिंह ने राज्य को भारत में मिलाने का फैसला लिया। उस विलय पत्र पर 26 अक्टूबर, 1947 को पण्डित जवाहरलाल नेहरू और महाराज हरीसिंह ने हस्ताक्षर किये। इस विलय पत्र के अनुसार- "राज्य केवल तीन विषयों- रक्षा, विदेशी मामले और संचार -पर अपना अधिकार नहीं रखेगा, बाकी सभी पर उसका नियंत्रण होगा। उस समय भारत सरकार ने आश्वासन दिया कि इस राज्य के लोग अपने स्वयं के संविधान द्वारा राज्य पर भारतीय संघ के अधिकार क्षेत्र को निर्धारित करेंगे। जब तक राज्य विधान सभा द्वारा भारत सरकार के फैसले पर मुहर नहीं लगाया जायेगा, तब तक भारत का संविधान राज्य के सम्बंध में केवल अंतरिम व्यवस्था कर सकता है। इसी क्रम में भारतीय संविधान में 'अनुच्छेद 370' जोड़ा गया, जिसमें बताया गया कि जम्मू-कश्मीर से सम्बंधित राज्य उपबंध केवल अस्थायी है, स्थायी नहीं।

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*** अवन्तीपुर (कश्मीर) : कश्मीर की पूर्व  राजधानी


पहलगाम  जाते हुए अवन्तीपुर जो श्रीनगर से लगभग ३० किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है.  बहुत पहले यहीं कश्मीर की कभी राजधानी हुआ करती थी.





१२ वीं सदी कश्मीर के एक महान संस्कृत कवि एवं विद्वान् “कल्‍हण”  की रचना राजतरंगिनी (राज वंशों का इतिहास) में उल्लेख है कि उत्पल राजवंश के राजाअवन्तिवर्मन के द्वारा विश्वैकसरा नामके स्थल पर अवन्तीपुर नामके नगर की स्थापना की गयी थी.  संभवतः यहाँ मृत्यु पश्चात आत्माओं के स्वर्गारोहण के लिए विशेष कर्मकांड किये जाते थे. इससे अनुमान लगता है कि अवन्तीपुर की स्थापना/नामकरण के पूर्व ही से यह कोई धार्मिक स्थल रहा है. नजदीक ही झेलम (प्राचीन नाम वितस्ता) नदी की उपस्थिति  भी अनुकूल है.  अवन्तिवर्मन मृत्यु पर्यंत एक परम वैष्णव बना रहा. ९ वीं सदी में उसी ने इस नगर में एक विष्णु का भव्य मंदिर बनवाया और गर्भगृह में  विष्णु महाराज अवन्तिस्वमिन के नाम से प्रतिष्ठित हुए. राजा का मंत्री “सुरा” शिव का आराधक था इसलिए लगभग एक किलोमीटर दूरी पर एक और भव्य मंदिर, जिसेअवन्तीश्वर कहा जाता है,  शिवजी के लिए भी बनवाया गया. अब दोनों ही अपनी अतीत की याद में आंसू बहा रहे हैं. शिव मंदिर के भग्नावशेष इतने करीब होंगे, नहीं मालूम था. अन्यथा उसे भी देख आते.
अपने आध्यात्मिक गुरु मीर सैय्यद  अली हमादानी की प्रेरणा एवं उन्हें खुश करने के लिए कश्मीर के १४ वीं सदी के शासक सुल्तान सिकंदर बुतशिकन ने पूरे कश्मीर में क्रूरता की सभी हदें पार कर दीं.  बुतशिकन का शाब्दिक अर्थ ही होता है मूर्ति भंजक. आजकल के तालिबान भी उसके सामने फीके पड़ जायेंगे.  बड़े व्यापक रूप से धर्मांतरण हुए और साथ ही कत्ले आम भी. नृत्य, संगीत, मदिरा पान पूरी तरह प्रतिबंधित थे. चुन चुन के सभी मंदिरों को धराशायी कर दिया. अवन्तिपुर का विष्णु मंदिर भी इसी कारण अन्य मंदिरों की तरह  वर्तमान अवस्था में है. लेकिन मंदिर इतना मजबूत था कि उसे तोड़ने में एक साल लग गया था. किन्तु संयोग से सिकंदर का द्वितीय पुत्र जैन-उल-अबिदीन  (१४२३ -१४७४) जो अपने बड़े भाई के मक्का रवानगी के बाद सुलतान बना था, अपने पिता के स्वभाव के विपरीत  अत्यधिक सहिष्णु था.  परन्तु उसके आते तक तो सभी हिन्दू धर्मस्थल जमींदोज़ हो चुके थे.



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हिंदू हैं शेख अबदुल्ला के पूर्वज, 

परदादा का नाम था बालमुकुंद कौल

BHASKAR NEWS | Nov 27, 2014
(शेख अब्दुल्ला)
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में इस बार किसके सिर पर होगा ताज और किसको मिलेगा राजनीतिक वनवास। क्या यहां भी चलेगा मोदी का जादू या फिर पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस या कांग्रेस की बनेगी सरकार। आखिर कश्मीर की राजनीति में क्या है खास। dainikbhaskar.com आपको बता रहा है यहां के चुनाव से जुड़ी हर वो बात जो जानना चाहते हैं आप। इसी कड़ी में आज हम आपको बता रहे हैं शेख अब्दुल्ला के बारे में।

श्रीनगर। मुस्लिम कॉन्फ्रेंस (नेशनल कॉन्फ्रेंस) के संस्थापक शेख अब्दुल्ला कश्मीर को भारत में विलय से पहले एक मुस्लिम देश बनाना चाहते थे। शेख अब्दुल्ला के पूर्वज हिंदू (कश्मीरी पंडित) थे। शेख अब्दुल्ला ने अपनी आत्मकथा को जो किताबी रूप दिया है उसमें उन्होंने इस बारे विस्तार से बताया है। आजाद कश्मीर का सपना देखने वाले शेख अब्दुल्ला ने स्वयं अपनी आत्मकथा ‘आतिशे चीनार’ में स्वीकार किया है कि कश्मीरी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे। उनके पूर्वज कश्मीरी पंडित थे और परदादा का नाम बालमुकुंद कौल था। किताब में लिखा है कि श्रीनगर के निकट सूरह नामक बस्ती में शेख़़ मुहम्मद अब्दुल्लाह का जन्म हुआ था। उनके पूर्वज मूलतः सप्रू गोत्र के कश्मीरी ब्राह्मण थे। अफग़ानों के शासनकाल में उनके एक पूर्वज रघूराम ने एक सूफी के हाथों इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। परिवार पश्मीने का व्यापार करता था और अपने छोटे से निजी कारख़ाने में शाल और दुशाले तैयार कराके बाज़ार में बेचता था।
इनके पिता शेख़़ मुहम्मद इब्राहीम ने आरंभ में एक छोटे पैमाने पर काम शुरू किया किन्तु मेहनत और लगन के कारण शीघ्र मझोले दर्जे के कारख़ानेदार की हैसियत तक पहुँच गए। शेख़़ साहब के परिवार की स्थिति एक औसत दर्जे के घराने की थी। इसके बावजूद भारत के प्रति शेख अब्दुल्ला का रवैया भारत विरोधी कैसे हो गया यह बात समझ से परे है। शेख अब्दुल्ला के पुत्र डा. फारुख अब्दुल्ला स्वयं कई बार कश्मीर के बाहर दिए गए साक्षात्कार और भाषणों में अपने पूर्वजों के हिंदू होने का जिक्र कर चुके हैं। उन्हें कई बार मंदिरों में पूजा करते हुए भी देखा गया है।

काशी के बाद कश्मीर
नीलमत पुराण में कश्मीर किस तरह बसा, उसका उल्लेख है। कश्यप मुनि को इस भूमि का निर्माता माना जाता है। उनके पुत्र नील इस प्रदेश के पहले राजा थे। चौदहवीं सदी तक बौद्ध और शैव मत यहां पर बढ़ते गए। काशी के बाद कश्मीर को ज्ञान की नगरी के नाम से जाना जाता था। जब अरबों की सिंध पर विजय हुई तो सिंध के राजा दाहिर के पुत्र राजकुमार जयसिंह ने कश्मीर में शरण ली थी। राजकुमार के साथ सीरिया निवासी उसका मित्र हमीम भी था। कश्मीर की धरती पर पांव रखने वाला पहला मुस्लिम यही था। अंतिम हिंदू शासिका कोटारानी के आत्म बलिदान के बाद पर्शिया से आए मुस्लिम मत प्रचारक शाहमीर ने राजकाज संभाला और यहीं से दारूल हरब को दारूल इस्लाम में तब्दील करने का सिलसिला चल पड़ा।


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कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ :
हाँ भई हाँ फारुख अब्दुल्ला जी!
कश्मीर हमारे बाप दादाओं का ही है
By मेकिंग इंडिया ऑनलाइन डेस्क - 26th November 2016

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सिन्धु भुलाया दाहिर का
गांधारी का गंधार
कैसे मैं कश्मीर भूलाऊँ
भू का स्वर्गागार
वह कल्हण कश्मीरी था
राज तरंगिनी लिखने वाला
वो विल्हण भी कश्मीरी था
चौर पंचाशिका रचने वाला
शैवागम दर्शन जग वन्दित
जिसका आनंदवाद प्रतिपाद्य
कश्मीरी पंडित जन की देन
शिव पार्वती जिनके आराध्य
अकलुष जीवन दृष्टि की
जहाँ से निःसृत पावन धार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गागार


यहीं अवस्थित तक्षशिला थी
विश्व विश्रुत था विद्यालय
थे आचार्य प्रवर कौटिल्य
साक्षी देखो खड़ा हिमालय
विविधांचल से सकल विश्व के
विद्या व्यसनी आते थे
निखिल वांग्मय की शिक्षा से
जीवन सफल बनाते थे
जहाँ गुरु को शीश झुकाने आता था संसार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गागार


आतंकवाद के सहगामी हैं
आज महर्षि पाणिनि की संताने
आज खड़ी निर्ममता से
संगीने भारत माँ पर ताने
कश्यप के पुनीत वंशधर
धर्मान्तरित हो छल से बल से
इंगित करते हमें सदा ही
हारा मानव काल प्रबल से
जहाँ वर्ष हजारों से होती
धर्म सनातन की जयकार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्ग गार



शास्त्र विहित इक्यावन पीठों में
वैष्णो देवी का पावन पीठ
श्रद्धालु जनों का श्रद्धा स्थल
जिस पर लगी शत्रु की दीठ
जहाँ छड़ी मुबारक होती है
हम जाते अमरनाथ के धाम
शैव पंथ का पावन स्थल
भक्त जन करते जिन्हें प्रणाम
भारत के कोने कोने से भक्तो का जहाँ उमड़ता ज्वार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गागार

तुम लूट रहे सदियों से
हम फुटपरस्ती में सोये
चीर दिया भारत की छाती
हम फुट फुट कर रोये
स्कार्दू चित्रा गिलगित रोया
रोया डेरा बाबा नानक
ढाका और कराची रोया
गाँधी अखिल राष्ट्र का नायक
संगठन का दृढ मंत्र महा
गूंजे जय भारत का महोच्चार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्गगार

कल रूसो बलख हमारा था
इरानो अरब हमारा था
भूतपूर्व ऐ बुतपरस्तों
कल सारा चमन हमारा था
पाते सुकून तुम चूम जिन्हें
वो मक्केश्वर शिवलिंग हमारा था
स्वत्व न छीना कभी किसी का
जग फिर भी हमसे हारा था
अरब भुलाया ईरान भुलाया
कैसे भूलूं अपना आँगन द्वार
कैसे मैं कश्मीर भुलाऊँ भू का स्वर्ग गार
‘उत्सर्ग’ कविता संग्रह से द्वारा डॉ श्रीराम पाण्डेय, जगदेव नगर, आरा (बिहार)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - गरीबों के हक़ की राशि का उन्हीं के कल्याण में इस्तेमाल







गरीबों से लूटी गई राशि का उन्हीं के कल्याण में इस्तेमाल करने के लिए 


PM मोदी ने BJP सांसदों-विधायकों से मांगा नोटबंदी के बाद खातों का ब्यौरा
By Kishor Joshi Publish Date:Tue, 29 Nov 2016


नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों तथा विधायकों को निर्देश दिया है कि वे 8 नवंबर से 31 दिसंबर, 2016 के बीच हुए अपने-अपने बैंक खातों के लेनदेन का पूरा ब्यौरा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौंपें।

भाजपा संसदीय दल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकसभा में पेश किया गया आयकर संशोधन विधेयक कालेधन को सफेद में बदलने के लिए नहीं, बल्कि गरीबों से लूटी गई राशि का उन्हीं के कल्याण में इस्तेमाल करने के लिए है।

दरअसल विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि नोटबंदी की जानकारी भाजपा नेताओं को पहले से थी। ऐसे में गृहमंत्री ने सोमवार को कहा था कि उनकी मंशा पर शक न किया जाए। वहीं मंगलवार को पीएम ने अपनी पार्टी के सासंदों और विधायकों का बैंक खातों का ब्यौरा मांगकर विपक्षी पार्टियों को अपनी ईमानदारी का सूबूत देने की कोशिश की है। वैसे विदेशों में जमा नेताओं के कालेधन का मुद्दा काफी पुराना है। यूपीए सरकार के वक्त भी भाजपा द्वारा यह मुद्दा उठाया गया था उस वक्त भाजपा सासंदों और विधायकों ने घोषणा कर कहा था कि उनका विदेशों में कोई खाता नहीं है। ऐसे में पीएम की यह कार्रवाई पार्टी नेताओं के दावों की हकीकत जानने में मदद करेगी।

विपक्ष इसे लेकर भी पीएम की मंशा पर सवाल उठा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि 8 नवंबर से पहले ही पैसे ठिकाने लगा दिए गए थे। पीएम को अपने सासंदों और विधायकों के 6 महीने पहले के बैंक खातों का हिसाब मांगना चाहिए, साथ ही अपने अमीर दोस्तों के भी 6 महीने के ब्यौरे भी निकालने चाहिए।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन की प्रशंसा की, 
कहा - लोग भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे

भाषा की रिपोर्ट, अंतिम अपडेट: मंगलवार नवम्बर 29, 2016

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि पिछले कुछ दिनों में लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन दर्शाता है कि लोग सर्वांगीण विकास चाहते हैं और वे भ्रष्टाचार एवं कुशासन बर्दाश्त नहीं करेंगे.

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘पिछले कुछ दिनों में हमने पूरे भारत में विभिन्न चुनावों- लोकसभा, विधानसभाओं एवं स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे देखे हैं. ’’ उन्होंने लिखा, ‘‘चाहे पूर्वोत्तर हो, या पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र या गुजरात... भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है. मैं लोगों को धन्यवाद देता हूं. ’’ उन्होंने कहा कि देशभर के ये नतीजे दर्शाते हैं कि लोग सर्वांगीण प्रगति चाहते हैं और वे भ्रष्टाचार एवं कुशासन को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

भाजपा ने असम और मध्यप्रदेश में एक-एक लोकसभा सीट (उपचुनाव में) जीती एवं मध्यप्रदेश, गुजरात एवं अरुणाचल प्रदेश में कई विधानसभा सीटें (उपचुनाव में) जीतीं. पार्टी महाराष्ट्र एवं गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में विजयी होकर उभरी

अपने गृह राज्य गुजरात का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा में निरंतर विश्वास व्यक्त करने के लिए मैं गुजरात के लोगों को सलाम करता हूं. स्थानीय निकायों में भाजपा की बड़ी जीत विकास की राजनीति में लोगों के दृढ़ विश्वास को दर्शाती है. ’’ उन्होंने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जीतू वघानी समेत राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं को राज्यभर में उनके कठिन परिश्रम के लिए बधाई दी.मोदी ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की कल सराहना की थी.


नोटबंदी को जनता का समर्थन : गुजरात में भी भाजपा को भारी जीत मिली

 


गुजरात: नोटबंदी को जनता का समर्थन! निकाय-पंचायत चुनाव में खिला 'कमल', कांग्रेस को झटका
By Amitabh Kumar | Updated Date: Nov 29 2016

अहमदाबाद : गुजरात में जिला पंचायत, तहसील पंचायत और नगरपालिका की 125 सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भारी जीत मिली है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 125 सीटों में से भाजपा ने 109 पर कब्जा जमाकर सभी को आश्‍चर्यचकित कर दिया है. इससे पहले 125 में से 64 के करीब भाजपा के पास सीटें थीं. 64 से सीधे 109 सीटों पर आ जाना भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. इसके उलट कांग्रेस को इस चुनाव  में  125 सीटों में से मात्र 16 सटें मिलीं हैं. इससे पहले कांग्रेस की करीब 52 सीटें थीं.
उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के फैसले के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है , लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात के नतीजों से सारे अनुमान और राजनीति के जानकारों की बातें खोखली साबित होती नजर आ रही है. दरअसल नोटबंदी को लेकर विपक्ष का आरोप है कि जनता को खासी दिक्कत हो रही है और जनता चुनावों में भाजपा को सबक सिखाएगी.

यहां बताते चलें कि नोटबंदी को लेकर देशभर में चल रहे अफरा-तफरी के बीच महाराष्ट्र नगर परिषद के चुनाव हुए जिसमें भी भाजपा ने अपनी ताकत दिखाकर साबित कर दिया कि जनता उसके साथ है. चुनाव के नतीजे कल सामने आए जिसमें 2501 सीटों में भाजपा ने 610 सीटों पर कब्जा जमाया. वहीं शिवसेना 402 सीट, एनसीपी 482 सीट, कांग्रेस 408, मनसे 12 व बीएसपी 4 सीटों  में जीत दर्ज की. अन्य दलों के हिस्से में 583 सीटें आयी. इस जीत के बाद पीएम मोदी ने कहा कि मुझे लगता है निकाय चुनाव में महाराष्ट्र के लोगों ने भाजपा पर विश्वास जताया है. यह जीत गरीब के हित और विकास की जीत है.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने इस जीत पर कहा कि चुनाव के नतीजे साफ तौर पर बताते हैं कि पीएम मोदी के कड़े फैसलों का असर हुआ है. वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी की दमदार जीत बताती है कि लोग काले धन के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ हैं.

भारतबंद बुरी तरह विफल हुआ - अरविन्द सिसोदिया





भारतबंद बुरी तरह विफल हुआ है। किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता में यह दम नहीुं हुआ कि वे दुकानें बंद करवानें निकल सकें। बंगाल में मामूली असर सिर्फ केरल और त्रिपुरा में रहा बांकी सिर्फ फोटो खिचवाई और न्यूज बनवाई तक ही सीमित रहा बंद । कुल मिलाकर बुरी तरह से फैल हुआ भारत बंद । 
- अरविन्द सिसोदिया, जिला महामंत्री, भाजपा कोटा, राजस्थान 94141 80151 


नोटबंदी: विपक्ष का देश भर में विरोध प्रदर्शन, भाजपा बोली, फ्लॉप शो
एजेंसी/ नई दिल्लीUpdated Tue, 29 Nov 2016
http://www.amarujala.com
नोटबंदी के फैसले के खिलाफ विपक्षी दलों ने सोमवार को देश भर में विरोध प्रदर्शन किया। यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में कांग्रेस, लेफ्ट, तृणमूल कांग्रेस व अन्य कई विपक्षी दलों के नेता सड़कों पर उतरे और नोटबंदी के लिए मोदी सरकार की आलोचना की। हालांकि वामदल शासित केरल और त्रिपुरा के बंद को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर आम जनजीवन सामान्य रहा।

वामदलों ने सोमवार को 12 घंटे के बंद के आह्वान किया था, जिसके चलते केरल और त्रिपुरा में जनजीवन ठप रहा। जबकि कांग्रेस, तृणमूल और अन्य कई दलों ने आक्रोश दिवस के तहत सिर्फ विरोध प्रदर्शन किए। जदयू और बीजद ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। भाजपा ने विपक्ष के विरोध और बंद को फ्लॉप शो करार दिया और कहा कि विपक्षी दलों की अपील को जनता ने खारिज कर दिया। जनता ने बता दिया है कि उसे बंद और विरोध प्रदर्शन की अपील करने वाले दागी दलों में कोई भरोसा नहीं है।

कांग्रेस और आप समेत अन्य दलों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया और नोटबंदी से लोगों को हो रही परेशानी को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला। यूपी के लखनऊ समेत तमाम शहरों में कांग्रेस, वामदलों और आप ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में आक्रोश दिवस रैली के दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष दर्शन सिंह की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

कमिश्नर को ज्ञापन देने के बाद वह अचानक गिर पड़े। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, मगर उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। बिहार में बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। वाम दलों ने कई जगहों पर जोरदार प्रदर्शन किया। कई जिलों में सड़क मार्ग जाम कर दिया, तो कहीं रेल के परिचालन को ही रोक दिया। तमिलनाडु में एमके स्टालिन समेत द्रमुक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी दी। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस और एनसीपी ने विरोध प्रदर्शन किए।

वामपंथी दलों की बंद की अपील का पश्चिम बंगाल में कोई खास असर नहीं नजर आया। यहां सुबह से ही ट्रेनें, बसों, और ट्रामों का संचालन सामान्य रहा। तमाम दफ्तर भी खुले रहे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बंद का विरोध किया था। 

सोमवार, 28 नवंबर 2016

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में नोटबंदी की बड़ी जीत



नोटबंदी के बाद महाराष्ट्र के नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव के परिणाम आ गये हैं। अब तक के परिणामों के अनुसार कुल 164 सीटों में बीजेपी 57, शिवसेना 27, कांग्रेस 23, एनसीपी 21 और अन्य को अभी तक 25 सीटें मिली हैं।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में नोटबंदी की जीत

Published: Mon, 28 Nov 2016

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर महाराष्ट्र की जनता ने मुहर लगा दी है। नोटबंदी के फैसले के 19 दिन बाद रविवार को राज्य के स्थानीय निकाय के लिए हुए चुनावों के परिणाम सोमवार को आ गए।

इनमें भाजपा को सहयोगी शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के मुकाबले ज्यादा सीटों पर जीत मिली है। पहले चरण के तहत 25 जिलों में 3,705 सीटों के लिए मत डाले गए थे। अब तक घोषित नतीजों में भाजपा 851 सीटों पर जीत हासिल कर शीर्ष पर है।

147 नगर परिषद अध्यक्ष के लिए भी मतदान हुआ था। 140 पदों के लिए घोषित परिणाम में भाजपा 51 सीटें जीतकर शीर्ष पर है। भाजपा और शिवसेना स्थानीय निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ रही है।

नोटबंदी के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री विपक्षी दलों के अलावा केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना के भी निशाने पर हैं। शिवसेना लगातार इसकी आलोचना कर रही है। ऐसे में स्थानीय निकाय के नतीजों पर सारी निगाह थी। ऐसे में पहले चरण के चुनाव नतीजों में भाजपा को महत्वपूर्ण बढ़त मिली है।

चुनावी गठजोड़ के बावजूद मतगणना के दौरान भी नोटबंदी पर शिवसेना का तेवर तल्ख रहा। सोमवार को प्रकाशित पार्टी के मुखपत्र "सामना" में नोटबंदी पर राकांपा सांसद उदयन राज भोसले के बयान को सही ठहराया गया।

उदयन ने कहा था यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो जनता बैंकों को लूटना शुरू कर देगी। राकांपा और कांग्रेस ने स्थानीय निकाय चुनाव में नोटबंदी को मुद्दा भी बनाया था।

राज्य में सभी 212 स्थानीय निकाय के लिए चुनाव होने हैं। इनमें नगर परिषद और नगर पंचायत की भी सीटें हैं। ये चुनाव चार चरणों में हो रहे हैं। दूसरे, तीसरे और चौथे चरण के लिए क्रमशः 14 दिसंबर, 18 दिसंबर और आठ जनवरी को मत डाले जाएंगे।

स्थानीय निकाय की सीटें

कुल सीटें : 3705 (3510 के नतीजे घोषित)

भाजपा : 851

शिवसेना : 514

राकांपा : 638

कांग्रेस : 643

अन्य : 724

नगर परिषद अध्यक्ष

कुल सीटें : 147 (140 के परिणाम घोषित)

भाजपा : 51

शिवसेना : 24

राकांपा : 19

कांग्रेस : 21

अन्य : 25

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महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में भाजपा की जीत,
पीएम ने कहा, विकास की जीत है


By Pankaj Kumar Pathak | Updated Date: Nov 28 2016

http://www.prabhatkhabar.com


मुंबई : नोटबंदी को लेकर देशभर में चल रहे अफरा-तफरी के बीच महाराष्ट्र नगर परिषद के चुनाव नतीजे सामने आ गये हैं. भारतीय जनता पार्टी ने निकाय चुनाव में जीत हासिल की है.  कुल 2501 सीटों में भाजपा 610 सीट जीत चुकी है. शिवसेना 402 सीट, एनसीपी 482 सीट, कांग्रेस 408, मनसे 12 व बीएसपी 4 सीटों  में जीत दर्ज की है . अन्य दल 583 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है.

गौरतलब है कि नोटबंदी के फैसले के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि बीजेपी को इस फैसले की कीमत चुकानी पड़ेगी लेकिन भाजपा स्थानीय निकायों के चुनाव में जीत के बाद सारे अनुमान गलत साबित हो गये. जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को बधाई दी. उन्होने सारे कार्यकर्ता का भी उत्साहवर्धन किया. पीएम ने लिखा मुझे लगता है निकाय चुनाव में महाराष्ट्र के लोगों ने भाजपा पर विश्वास जताया है. यह जीत गरीब के हित और विकास की जीत है.


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महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजे, BJP को मिली बढ़त

By: एबीपी न्यूज़ | Last Updated: Monday, 28 November 2016
http://abpnews.abplive.in

मुंबई:  नोटबंदी के बाद महाराष्ट्र में हुए नगर निकाय के चुनाव में बीजेपी बड़ी जीत की ओर है. पिछले चुनाव में बीजेपी तीसरे नंबर की पार्टी रही लेकिन इस बार विजेता बनकर उभरी है. 147 नगरपालिकाओं के चुनाव में बीजेपी के 52 अध्यक्ष जीते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने भी महाराष्ट्र की जनता का शुक्रिया किया है.

बीजेपी की ये जीत दो मायनों में अहम है. पहली तो ये कि नगर निकाय में तीसरे नंबर की पार्टी नंबर वन हो गई है और दूसरी ये कि मोदी सरकार के नोटबंदी वाले फैसले पर जनता ने मुहर लगा दी है.

पहली बार राज्य मे नगर अध्यक्ष को सीधे जनता ने चुना है, यानी लोगों को एक वोट नगरसेवक के लिए करना था और दूसरा वोट नगरअध्यक्ष के लिए. नतीजा ये हुआ कि कोंकण की खेड नगरपालिका में बहुमत तो शिवसेना को मिला लेकिन नगरअध्यक्ष पर जीत मिली राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के उम्मीदवार को. जिस नगर निकाय में कांग्रेस और एनसीपी का सिक्का चलता था आज वहां कमल का फूल खिल गया है.

2011 में बीजेपी के पास 15, शिवसेना के पास 12, कांग्रेस के पास 43 और एनसीपी के पास 47 नगर अध्यक्ष थे. माना जा रहा था कि इस चुनाव में मराठा आरक्षण आंदोलन का भी असर देखने को मिलेगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं दिखा.

नोटबंदी के बाद स्थानीय स्तर के चुनाव में मिली इस जीत से बीजेपी गदगद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, ”नगर निगम चुनाव में बीजेपी पर भरोसा जताने के लिए महाराष्ट्र की जनता का शुक्रिया. ये जीत गरीबी के खिलाफ और विकास के लिए है.”

इस चुनाव में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन भी नहीं था और ना ही कांग्रेस एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था. कल पहले दौर की वोटिंग हुई थी अभी तीन चरणों के चुनाव बाकी हैं.

मिनी विधानसभा चुनाव?

रविवार को करीब 70 प्रतिशत मतदान हुआ. इन चुनावों को मिनी विधानसभा चुनाव माना जा रहा है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन
सत्तारूढ बीजेपी और शिवसेना ने जहां चुनावों के लिए गठबंधन किया है वहीं विपक्षी कांग्रेस और एनसीपी ने औपचारिक रूप से कोई गठबंधन नहीं बनाया है.

नगरपालिका और नगर पंचायतों की 3,706 सीटों पर कुल 15,827 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे.

नरेंद्र मोदी - ‘मन की बात’ : 70 साल की बीमारियों से मुक्ति का अभियान






Mann Ki Baat, November 2016

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार |

पिछले महीने हम सब दिवाली का आनंद ले रहे थे | हर वर्ष की तरह इस बार दिवाली के मौके पर, मैं फिर एक बार जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिये, चीन की सीमा पर, सरहद पर गया था | ITBP के जवान, सेना के जवान - उन सबके साथ हिमालय की ऊंचाइयों में दिवाली मनाई | मैं हर बार जाता हूँ, लेकिन इस दिवाली का अनुभव कुछ और था | देश के सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने, जिस अनूठे अंदाज़ में, यह दिवाली सेना के जवानों को समर्पित की, सुरक्षा बलों को समर्पित की, इसका असर वहाँ हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था | वो भावनाओं से भरे-भरे दिखते थे और इतना ही नहीं, देशवासियों ने जो शुभकामनायें-सन्देश भेजे, अपनी ख़ुशियों में देश के सुरक्षा बलों को शामिल किया, एक अद्भुत response था | और लोगों ने सिर्फ़ सन्देश भेजे, ऐसा नहीं, मन से जुड़ गए थे; किसी ने कविता लिखी, किसी ने चित्र बनाए, किसी ने कार्टून बनाए, किसी ने वीडियो बनाए, यानि न जाने हर घर सेनानियों की जैसे चौकी बन गया था | और जब भी ये चिट्ठियाँ मैं देखता था, तो मुझे भी बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि कितनी कल्पकता है, कितनी भावनायें भरी हैं और उसी में से MyGov को विचार आया कि कुछ चुनिन्दा चीज़ें निकाल करके उसकी एक Coffee Table Book बनाई जाए | काम चल रहा है, आप सबके योगदान से, देश के सेना के जवानों की भावनाओं को आप सबकी कल्पकता से, देश के सुरक्षा बलों के प्रति आपका जो भाव-विश्व है, वह इस ग्रन्थ में संकलित होगा |

सेना के एक जवान ने मुझे लिखा - प्रधानमंत्री जी, हम सैनिकों के लिये  होली, दिवाली हर त्योहार सरहद पर ही होता है, हर वक्त देश की हिफाज़त में डूबे रहते हैं | हाँ, फिर भी त्योहारों के समय घर की याद आ ही जाती है | लेकिन सच कहूँ, इस बार ऐसा नहीं लगा | ऐसा कतई feel नहीं हुआ कि त्योहार है और मैं घर नहीं हूँ | ऐसा महसूस हुआ मानो हम भी, सवा-सौ करोड़ भारतवासियों के साथ दिवाली मना  रहे हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, जो अहसास इस दिवाली, इस माहौल में जो अनुभूति, हमारे देश के सुरक्षा बलों के बीच, जवानों के बीच जगा है, क्या ये सिर्फ़ कुछ मौकों पर ही सीमित रहना चाहिये ? मेरी आपसे appeal है कि हम, एक समाज के रूप में, राष्ट्र के रूप में, अपना  स्वभाव बनाएँ, हमारी प्रकृति बनाएँ | कोई भी उत्सव हो, त्योहार हो, खुशी का माहौल हो, हमारे देश के सेना के जवानों को हम किसी-न- किसी रूप में ज़रूर याद करें | जब सारा राष्ट्र सेना के साथ खड़ा होता है, तो सेना की ताक़त 125 करोड़ गुना बढ़ जाती है |

कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर से, वहाँ के गाँव के सारे प्रधान मिलने आये थे | Jammu-Kashmir Panchayat Conference के ये लोग थे | कश्मीर घाटी से अलग-अलग गाँवों से आए थे | क़रीब 40-50 प्रधान थे | काफ़ी देर तक उनसे मुझे बातें करने का अवसर मिला | वे अपने गाँव के विकास की कुछ बातें लेकर के आए थे, कुछ माँगें लेकर के आए थे, लेकिन जब बात का दौर चल पड़ा, तो स्वाभाविक था, घाटी के हालात, क़ानून व्यवस्था, बच्चों का भविष्य, ये सारी बातें निकलना बड़ा स्वाभाविक था | और इतने प्यार से, इतने खुलेपन से, गाँव के इन प्रधानों ने बातें की, हर चीज़ मेरे दिल को छूने वाली थी | बातों-बातों में, कश्मीर में जो स्कूलें जलाई जाती थीं, उसकी चर्चा भी हुई और मैंने देखा कि जितना दुःख हम देशवासियों को होता है, इन प्रधानों को भी इतनी ही पीड़ा थी और वो भी मानते थे कि स्कूल नहीं, बच्चों का भविष्य जलाया गया है | मैंने उनसे आग्रह किया था कि आप जाकर के इन बच्चों के भविष्य पर अपना ध्यान केन्द्रित करें | आज मुझे ख़ुशी हो रही है कि कश्मीर घाटी से आए हुए इन सभी प्रधानों ने मुझे जो वचन दिया था, उसको भली-भाँति निभाया; गाँव में जाकर के सब दूर लोगों को जागृत किया | अभी कुछ दिन पहले जब Board की exam हुई, तो कश्मीर के बेटे और बेटियों ने क़रीब 95%, पचानबे फ़ीसदी कश्मीर के छात्र-छात्राओं ने Board की परीक्षा में हिस्सा लिया | Board की परीक्षाओं में इतनी बड़ी तादाद में छात्रों का सम्मिलित होना, इस बात की ओर इशारा करता है कि जम्मू-कश्मीर के हमारे बच्चे उज्ज्वल भविष्य के लिये, शिक्षा के माध्यम से - विकास की नई ऊँचाइयों को पाने के लिये कृतसंकल्प हैं | उनके इस उत्साह के लिये, मैं छात्रों को तो अभिनन्दन करता हूँ, लेकिन उनके माता-पिता को, उनके परिजनों को, उनके शिक्षकों को और सभी ग्राम प्रधानों को भी ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ |

प्यारे भाइयो और बहनों, इस बार जब मैंने ‘मन की बात’ के लिये लोगों के सुझाव मांगे, तो मैं कह सकता हूँ कि एकतरफ़ा ही सबके सुझाव आए | सब कहते थे कि 500/- और 1000/- वाले नोटों पर और विस्तार से बातें करें | वैसे 8 नवम्बर, रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए, देश में सुधार लाने के एक महाभियान का आरम्भ करने की मैंने चर्चा की थी | जिस समय मैंने ये निर्णय किया था, आपके सामने प्रस्तुत रखा था, तब भी मैंने सबके सामने कहा था कि निर्णय सामान्य नहीं है, कठिनाइयों से भरा हुआ है | लेकिन निर्णय जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही उस निर्णय को लागू करना है | और मुझे ये भी अंदाज़ था कि हमारे सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की नयी–नयी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा | और तब भी मैंने कहा था कि निर्णय इतना बड़ा है, इसके प्रभाव में से बाहर निकलने में 50 दिन तो लग ही जाएँगे | और तब जाकर के normal अवस्था की ओर हम क़दम बढ़ा पाएँगे | 70 साल से जिस बीमारियों को हम झेल रहे हैं उस बीमारियों से मुक्ति का अभियान सरल नहीं हो सकता है | आपकी कठिनाइयों को मैं भली-भांति समझ सकता हूँ | लेकिन जब मैं आपका समर्थन देखता हूँ, आपका सहयोग देखता हूँ; आपको भ्रमित करने के लिये ढेर सारे प्रयास चल रहे हैं, उसके बावजूद भी, कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनायें सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है, देशहित की इस बात को भली-भांति आपने स्वीकार किया है |

पाँच सौ और हज़ार के नोट और इतना बड़ा देश, इतनी करेंसियों की भरमार, अरबों-खरबों नोटें और ये निर्णय - पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है, हर कोई अर्थशास्त्री इसका बहुत analysis कर रहा है, मूल्यांकन कर रहा है | पूरा विश्व इस बात को देख रहा है कि हिन्दुस्तान के सवा-सौ करोड़ देशवासी कठिनाइयाँ झेल करके भी सफलता प्राप्त करेंगे क्या ! विश्व के मन में शायद प्रश्न-चिन्ह हो सकता है ! भारत को भारत के सवा-सौ करोड़ देशवासियों के प्रति, सिर्फ़ श्रद्धा ही श्रद्धा है, विश्वास ही विश्वास है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे | और हमारा देश, सोने की तरह हर प्रकार से तप करके, निखर करके निकलेगा और उसका कारण इस देश का नागरिक है, उसका कारण आप हैं, इस सफलता का मार्ग भी आपके कारण ही संभव हुआ है |

पूरे देश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की सारी इकाइयाँ, एक लाख तीस हज़ार bank branch, लाखों बैंक कर्मचारी, डेढ़ लाख से ज़्यादा पोस्ट ऑफिस, एक लाख से ज़्यादा बैंक-मित्र - दिन-रात इस काम में जुटे हुए हैं, समर्पित भाव से जुटे हुए हैं | भाँति-भाँति के तनाव के बीच, ये सभी लोग बहुत ही शांत-चित्त रूप से, इसे देश-सेवा का एक यज्ञ मान करके, एक महान परिवर्तन का प्रयास मान करके कार्यरत हैं | सुबह शुरू करते हैं, रात कब पूरा होगा, पता तक नहीं रहता है, लेकिन सब कर रहे हैं | और उसी का कारण है कि भारत इसमें सफल होगा, ये स्पष्ट दिखाई दे रहा है | और मैंने देखा है कि इतनी कठिनाइयों के बीच बैंक के, पोस्ट ऑफिस के सभी लोग काम कर रहे हैं | और जब मानवता के मुद्दे की बात आ जाए, तो वो दो क़दम आगे दिखाई देते हैं | किसी ने मुझे कहा कि खंडवा में एक बुज़ुर्ग इंसान का accident हो गया | अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ गई | वहाँ स्थानीय बैंक के कर्मचारी के ध्यान में आया और मुझे ये जान करके खुशी हुई कि ख़ुद जाकर के उनके घर, उस बुज़ुर्ग को उन्होंने पैसे पहुँचाए, ताकि इलाज़ में मदद हो जाए | ऐसे तो अनगिनत किस्से हर दिन टी.वी. में, मीडिया में, अख़बारों में, बातचीत में सामने आते हैं | इस महायज्ञ के अन्दर परिश्रम करने वाले, पुरुषार्थ करने वाले इन सभी साथियों का भी मैं ह्रदय से धन्यवाद करता हूँ | शक्ति की पहचान तो तब होती है, जब कसौटी से पार उतरते हैं | मुझे बराबर याद है, जब प्रधानमंत्री के द्वारा जन-धन योजना का अभियान चल रहा था और बैंक के कर्मचारियों ने जिस प्रकार से उसको अपने कंधे पर उठाया था और जो काम 70 साल में नहीं हुआ था, उन्होंने करके दिखाया था | उनके सामर्थ्य का परिचय हुआ | आज फिर एक बार, उस चुनौती को उन्होंने लिया है और मुझे विश्वास है कि सवा-सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प, सबका सामूहिक पुरुषार्थ, इस राष्ट्र को एक नई ताक़त बना करके प्रशस्त करेगा |

 लेकिन बुराइयाँ इतनी फैली हुई हैं कि आज भी कुछ लोगों की बुराइयों की आदत जाती नहीं है | अभी भी कुछ लोगों को लगता है कि ये भ्रष्टाचार के पैसे, ये काले धन, ये बेहिसाबी पैसे, ये बेनामी पैसे, कोई-न-कोई रास्ता खोज करके व्यवस्था में फिर से ला दूँ | वो अपने पैसे बचाने के फ़िराक़ में गैर-क़ानूनी रास्ते ढूंढ़ रहे हैं | दुःख की बात ये है कि इसमें भी उन्होंने ग़रीबों का उपयोग करने का रास्ता चुनने का पसंद किया है | ग़रीबों को भ्रमित कर, लालच या प्रलोभन की बातें करके, उनके खातों में पैसे डाल करके या उनसे कोई काम करवा करके, पैसे बचाने की कुछ लोग कोशिश कर रहे हैं | मैं ऐसे लोगों से आज कहना चाहता हूँ - सुधरना, न सुधरना आपकी मर्ज़ी, क़ानून का पालन करना, न करना आपकी मर्ज़ी, वो क़ानून देखेगा क्या करना ? लेकिन, मेहरबानी करके आप ग़रीबों की ज़िंदगी के साथ मत खेलिए | आप ऐसा कुछ न करें कि record पर ग़रीब का नाम आ जाए और बाद में जब जाँच हो, तब मेरा प्यारा ग़रीब आपके पाप के कारण मुसीबत में फँस जाए | और बेनामी संपत्ति का इतना कठोर क़ानून बना है, जो इसमें लागू हो रहा है, कितनी कठिनाई आएगी | और सरकार नहीं चाहती है कि हमारे देशवासियों को कोई कठिनाई आए |

मध्य प्रदेश के कोई श्रीमान आशीष ने इस पाँच सौ और हज़ार के माध्यम से भ्रष्टाचार और काले धन के ख़िलाफ़ जो लड़ाई छेड़ी गयी है, उन्होंने मुझे टेलीफ़ोन किया है, उसे सराहा है: -

“सर नमस्ते, मेरा नाम आशीष पारे है | मैं ग्राम तिराली, तहसील तिराली, ज़िला हरदा, मध्य प्रदेश का एक आम नागरिक हूँ | आप के द्वारा जो मुद्रा हज़ार-पाँच सौ के नोट बंद किए गए हैं, यह बहुत ही सराहनीय है | मैं चाहता हूँ कि ‘मन की बात’ में कई उदाहरण लोगों को बताइए कि लोगों ने असुविधा सहन करने के बावजूद भी उन्होंने राष्ट्र उन्नति के लिये यह कड़ा क़दम के लिए स्वागत किया है, जिससे लोग एक तरह से उत्साहवर्द्धित होंगे और राष्ट्र निर्माण के लिए cashless प्रणाली बहुत आवश्यक है और मैं पूरे देश के साथ हूँ और मैं बहुत खुश हूँ कि आपने हज़ार-पाँच सौ के नोट बंद करा दिए |’

वैसा ही मुझे एक फ़ोन कर्नाटक के श्रीमान येलप्पा वेलान्कर जी की तरफ़ से आया है: -

‘मोदी जी नमस्ते, मैं कर्नाटक का कोप्पल डिस्ट्रिक्ट का इस गाँव से येलप्पा वेलान्कर बात कर रहा हूँ | आपको मन से मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि आपने कहा था कि अच्छे दिन आएँगे, लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा कि ऐसा बड़ा क़दम आप उठाएँगे | पाँच सौ का और हज़ार का नोट, ये सब देखकर के काला धन और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाया | हर एक भारत के नागरिक को इससे अच्छे दिन कभी नहीं आएँगे | इसी के लिए मैं आपको मनपूर्ण धन्यवाद करना चाहता हूँ |

कुछ बातें मीडिया के माध्यम से, लोगों के माध्यम से, सरकारी सूत्रों के माध्यम से जानने को मिलती हैं, तो काम करने का उत्साह भी बहुत बढ़ जाता है | इतना आनंद होता है, इतना गर्व होता है कि मेरे देश में सामान्य मानव का क्या अद्भुत सामर्थ्य है | महाराष्ट्र के अकोला में National Highway NH-6 वहाँ कोई एक restaurant है | उन्होंने एक बहुत बड़ा board लगाया है कि अगर आप की जेब में पुराने नोट हैं और आप खाना खाना चाहते हैं, तो आप पैसों की चिंता न करें, यहाँ से भूखा मत जाइए, खाना खा के ही जाइए और फिर कभी इस रास्ते से गुजरने का आ जाए आपको मौका, तो ज़रूर पैसे दे कर के जाना | और लोग वहाँ जाते हैं, खाना खाते हैं और 2-4-6 दिन के बाद जब वहाँ से फिर से गुजरते हैं, तो फिर से पैसे भी लौटा देते हैं | ये है मेरे देश की ताक़त, जिसमें सेवा-भाव, त्याग-भाव भी है और प्रामाणिकता भी है |

मैं चुनाव में चाय पर चर्चा करता था और सारे विश्व में ये बात पहुँच गई थी | दुनिया के कई देश के लोग चाय पर चर्चा शब्द भी बोलना सीख गए थे | लेकिन मुझे पता नहीं कि चाय पर चर्चा में, शादी भी होती है | मुझे पता चला कि 17 नवम्बर को सूरत में, एक ऐसी शादी हुई, जो शादी चाय पर चर्चा के साथ हुई | गुजरात में सूरत में एक बेटी ने अपने यहाँ शादी में जो लोग आए, उनको सिर्फ़ चाय पिलाई और कोई जलसा नहीं किया, न कोई खाने का कार्यक्रम, कुछ नहीं - क्योंकि नोटबंदी के कारण कुछ कठिनाई आई थी पैसों की | बारातियों ने भी उसे इतना ही सम्मान माना | सूरत के भरत मारू और दक्षा परमार - उन्होंने अपनी शादी के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ़, काले धन के खिलाफ़, ये जो लड़ाई चल रही है, उसमें जो योगदान किया है, ये अपने आप में प्रेरक है | नवपरिणीत भरत और दक्षा को मैं बहुत-बहुत आशीर्वाद भी देता हूँ और शादी के मौके को भी इस महान यज्ञ में परिवर्तित करके एक नये अवसर में पलट देने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ | और जब ऐसे संकट आते हैं, लोग रास्ते भी बढ़िया खोज लेते हैं |

मैंने एक बार टीवी न्यूज़ में देखा, रात देर से आया था, तो देख रहा था | असम में धेकियाजुली करके एक छोटा सा गाँव है | Tea-worker रहते हैं और Tea-worker को साप्ताहिक रूप से पैसे मिलते हैं | अब 2000 रुपये का नोट मिला, तो उन्होंने क्या किया ? चार अड़ोस-पड़ोस की महिलायें इकट्ठी हो गयी और चारों ने साथ जाकर के ख़रीदी की और 2000 रुपये का नोट payment किया, तो उनको छोटी currency की जरुरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि चारों ने मिलकर ख़रीदा और तय किया कि अगले हफ़्ते मिलेंगे, तब उसका हिसाब हम कर लेंगे बैठ करके | लोग अपने-आप रास्ते खोज रहे हैं | और इसका बदलाव भी देखिए ! सरकार के पास एक message आया, असम के Tea garden के लोग कह रहे हैं कि हमारे यहाँ ATM लगाओ | देखिए, किस प्रकार से गाँव के जीवन में भी बदलाव आ रहा है | इस अभियान का कुछ लोगों को तत्काल लाभ मिल गया है | देश को तो लाभ आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन कुछ लोगों को तो तत्काल लाभ मिल गया है | थोड़ा हिसाब पूछा, क्या हुआ है, तो मैंने छोटे-छोटे जो शहर हैं, वहाँ की थोड़ी जानकारी पाई | क़रीब 40-50 शहरों की जानकारी जो मुझे मिली कि इस नोट बंद करने के कारण उनके जितने पुराने पैसे बाक़ी थे, लोग पैसे नहीं देते थे tax के - पानी का tax नहीं, बिजली का नहीं, पैसे देते ही नहीं थे और आप भली-भाँति जानते हैं - ग़रीब लोग 2 दिन पहले जा कर के पाई-पाई चुकता करने की आदत रखते हैं | ये जो बड़े लोग होते हैं न, जिनकी पहुँच होती है, जिनको पता है कि कभी भी उनको कोई पूछने वाला नहीं है, वो ही पैसे नहीं देते हैं | और इसके लिए काफ़ी बकाया रहता है | हर municipality को tax का मुश्किल से 50% आता है | लेकिन इस बार 8 तारीख़ के इस निर्णय के कारण सब लोग अपने पुराने नोटें जमा कराने के लिए दौड़ गए | 47 शहरी इकाइयों में पिछले साल इस समय क़रीब तीन-साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपये का tax आया था | आपको जान कर के आश्चर्य होगा, आनंद भी होगा - इस एक सप्ताह में उनको 13 हज़ार करोड़ रुपये जमा हो गया | कहाँ तीन-साढ़े तीन हज़ार और कहाँ 13 हज़ार ! और वो भी सामने से आकर के | अब उन municipality में 4 गुना ये पैसा आ गया, तो स्वाभाविक है, ग़रीब बस्तियों में गटर की व्यवस्था होगी, पानी की व्यवस्था होगी, आंगनबाड़ी की व्यवस्था होगी | ऐसे तो कई उदाहरण मिल रहे हैं कि जिसमें इसका सीधा-सीधा लाभ भी नज़र आने लगा है |

भाइयो-बहनो, हमारा गाँव, हमारा किसान ये हमारे देश की अर्थव्यवस्था की एक मज़बूत धुरी हैं | एक तरफ़ अर्थव्यवस्था के इस नये बदलाव के कारण, कठिनाइयों के बीच, हर कोई नागरिक अपने आपको adjust कर रहा है | लेकिन मैं मेरे देश के किसानों का आज विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहता हूँ | अभी मैं इस फ़सल की बुआई के आँकड़े ले रहा था | मुझे ख़ुशी हुई, चाहे गेहूँ हो, चाहे दलहन हो, चाहे तिलहन हो; नवम्बर की 20 तारीख़ तक का मेरे पास हिसाब था, पिछले वर्ष की तुलना में काफ़ी मात्रा में बुआई बढ़ी है | कठिनाइयों के बीच भी, किसान ने रास्ते खोजे हैं | सरकार ने भी कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं, जिसमें किसानों को और गाँवों को प्राथमिकता दी है | उसके बाद भी कठिनाइयाँ तो हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि जो किसान हमारी हर कठिनाइयाँ, प्राकृतिक कठिनाइयाँ हो, उसको झेलते हुए भी हमेशा डट करके खड़ा रहता है, इस समय भी वो डट करके खड़ा है |

हमारे देश के छोटे व्यापारी, वे रोजगार भी देते हैं, आर्थिक गतिविधि भी बढ़ाते हैं | पिछले बजट में हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया था कि बड़े-बड़े mall की तरह गाँव के छोटे-छोटे दुकानदार भी अब चौबीसों घंटा अपना व्यापार कर सकते हैं, कोई क़ानून उनको रोकेगा नहीं | क्योंकि मेरा मत था, बड़े-बड़े mall को 24 घंटे मिलते हैं, तो गाँव के ग़रीब दुकानदार को क्यों नहीं मिलना चाहिये ? मुद्रा-योजना से उनको loan देने की दिशा में काफी initiative लिए | लाखों-करोड़ों रुपये मुद्रा-योजना से ऐसे छोटे-छोटे लोगों को दिए, क्योंकि ये छोटा कारोबार, करोड़ों की तादाद में लोग करते हैं और अरबों-खरबों रुपये के व्यापार को गति देते हैं | लेकिन इस निर्णय के कारण उनको भी कठिनाई होना स्वाभाविक था | लेकिन मैंने देखा है कि अब तो हमारे इन छोटे-छोटे व्यापारी भी technology के माध्यम से, Mobile App के माध्यम से, मोबाइल बैंक के माध्यम से, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से, अपने-अपने तरीक़े से ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं, विश्वास के आधार पर भी कर रहे हैं | और मैं अपने छोटे व्यापारी भाइयो-बहनों से कहना चाहता हूँ कि मौका है, आप भी digital दुनिया में प्रवेश कर लीजिए | आप भी अपने मोबाइल फ़ोन पर बैंकों की App download कर दीजिए | आप भी क्रेडिट कार्ड के लिए POS मशीन रख लीजिए | आप भी बिना नोट कैसे व्यापार हो सकता है, सीख लीजिए | आप देखिए, बड़े-बड़े मॉल technology के माध्यम से अपने व्यापार को जिस प्रकार से बढ़ाते हैं, एक छोटा व्यापारी भी इस सामान्य user friendly technology से अपना व्यापार बढ़ा सकता है | बिगड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता है, बढ़ाने का अवसर है | मैं आप को निमंत्रण देता हूँ कि  cashless society बनाने में आप बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं, आप अपने व्यापार को बढ़ाने में, mobile phone पर पूरी banking व्यवस्था खड़ी कर सकते हैं और आज नोटों के सिवाय अनेक रास्ते हैं, जिससे हम कारोबार चला सकते हैं | technological रास्ते हैं, safe  है, secure है और त्वरित है | मैं चाहूँगा कि आप सिर्फ़ इस अभियान को सफल करने के लिए मदद करें, इतना नहीं, आप बदलाव का भी नेतृत्व करें और मुझे विश्वास है, आप बदलाव का नेतृत्व कर सकते हैं | आप पूरे गाँव के कारोबार में ये technology के आधार पर काम कर सकते हैं, मेरा विश्वास है |I मैं मज़दूर भाइयों-बहनों को भी कहना चाहता हूँ, आप का बहुत शोषण हुआ है | कागज़ पर एक पगार होता है और जब हाथ में दिया जाता है, तब दूसरा होता है | कभी पगार पूरा मिलता है, तो बाहर कोई खड़ा होता है, उसको cut देना पड़ता है और मज़दूर मजबूरन इस शोषण को जीवन का हिस्सा बना देता है | इस नई व्यवस्था से हम चाहते हैं कि आपका बैंक में खाता हो, आपके पगार के पैसे आपके बैंक में जमा हों, ताकि minimum wages  का पालन हो | आपको पूरा पैसा मिले, कोई cut ना करे | आपका शोषण न हो | और एक बार आपके बैंक खाते में पैसे आ गए, तो आप भी तो छोटे से मोबाइल फ़ोन पर - कोई बड़ा smart phone  की ज़रूरत नहीं हैं, आजकल तो आपका mobile phone भी ई-बटुवे का काम करता है - आप उसी mobile phone से अड़ोस-पड़ोस की छोटी-मोटी दुकान में जो भी खरीदना है, खरीद भी सकते हैं, उसी से पैसे भी दे सकते हैं | इसलिए मैं मज़दूर भाइयों-बहनों को इस योजना में भागीदार बनने के लिए विशेष आग्रह करता हूँ, क्योंकि आखिरकार इतना बड़ा मैंने निर्णय देश के ग़रीब के लिये, किसान के लिये, मज़दूर के लिये, वंचित के लिये, पीड़ित के लिये लिया है, उसका benefit उसको मिलना चाहिए |

आज मैं विशेष रूप से युवक मित्रों से बात करना चाहता हूँ | हम दुनिया में गाजे-बाजे के साथ कहते हैं कि भारत ऐसा देश है कि जिसके पास 65% जनसंख्या, 35 साल से कम उम्र की है | आप मेरे देश के युवा और युवतियाँ, मैं जानता हूँ, मेरा निर्णय तो आपको पसन्द आया है | मैं ये भी जानता हूँ कि आप इस निर्णय का समर्थन करते हैं | मैं ये भी जानता हूँ कि आप इस बात को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने के लिए बहुत योगदान भी करते हैं | लेकिन दोस्तो, आप मेरे सच्चे सिपाही हो, आप मेरे सच्चे साथी हो | माँ भारती की सेवा करने का एक अद्भुत मौका हमारे सामने आया है, देश को आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर आया है | मेरे नौजवानो, आप मेरी मदद कर सकते हो क्या ? मुझे साथ दोगे, इतने से बात बनने वाली नहीं है | जितना आज की दुनिया का अनुभव आपको है, पुरानी पीढ़ी को नहीं है | हो सकता है, आपके परिवार में बड़े भाई साहब को भी मालूम नहीं होगा और माता-पिता, चाचा-चाची, मामा-मामी को भी शायद मालूम नहीं होगा | आप App क्या होती है, वो जानते हो, online banking  क्या होता है, जानते हो, online ticket booking कैसे होता है, आप जानते हो | आपके लिये चीज़ें बहुत सामान्य हैं और आप उपयोग भी करते हो | लेकिन आज देश जिस महान कार्य को करना चाहता है, हमारा सपना है cashless society | ये ठीक है कि शत-प्रतिशत cashless society संभव नहीं होती है | लेकिन क्यों न भारत less-cash society की तो शुरुआत करे | एक बार अगर आज हम less-cash society की शुरुआत कर दें, तो cashless society की मंज़िल दूर नहीं होगी | और मुझे इसमें आपकी physical मदद चाहिए, ख़ुद का समय चाहिए, ख़ुद का संकल्प चाहिए | और आप मुझे कभी निराश नहीं करोगे, मुझे विश्वास है, क्योंकि हम सब हिंदुस्तान के ग़रीब की ज़िंदगी बदलने की इच्छा रखने वाले लोग हैं | आप जानते हैं, cashless society के लिये, digital banking के लिये या mobile banking के लिये आज कितने सारे अवसर हैं | हर बैंक online सुविधा देता है | हिंदुस्तान के हर एक बैंक की अपनी mobile app है | हर बैंक का अपना wallet है | wallet का सीधा-सीधा मतलब है e-बटुवा | कई तरह के card उपलब्ध हैं | जन-धन योजना के तहत भारत के करोड़ों-करोड़ ग़रीब परिवारों के पास Rupay Card है और 8 तारीख़ के बाद तो जो Rupay Card का बहुत कम उपयोग होता था, गरीबों ने Rupay Card का उपयोग करना शुरू किया और क़रीब-करीब 300% उसमें वृद्धि हुई है | जैसे mobile phone में prepaid card आता है, वैसा बैंकों में भी पैसा ख़र्च करने के लिये prepaid card मिलता है | एक बढ़िया platform है, कारोबार करने की UPI, जिससे आप ख़रीदी भी कर सकते हैं, पैसे भी भेज सकते हैं, पैसे ले भी सकते हैं | और ये काम इतना simple है जितना कि आप WhatsApp भेजते हैं | कुछ भी ना पढ़ा-लिखा व्यक्ति होगा, उसको भी आज WhatsApp कैसे भेजना है, वो आता है, forward कैसे करना है, आता है | इतना ही नहीं, technology इतनी सरल होती जा रही है कि इस काम के लिए कोई बड़े smart phone की भी आवश्यकता नहीं है | साधारण जो feature phone होता है, उससे भी cash transfer हो सकती है | धोबी हो, सब्ज़ी बेचनेवाला हो, दूध बेचनेवाला हो, अख़बार बेचनेवाला हो, चाय बेचनेवाला हो, चने बेचनेवाला हो, हर कोई इसका आराम से उपयोग कर सकता है | और मैंने भी इस व्यवस्था को और अधिक सरल बनाने के लिए और ज़ोर दिया है | सभी बैंक इस पर लगी हुई हैं, कर रही हैं | और अब तो हमने ये online surcharge का भी ख़र्चा आता था, वो भी cancel कर दिया है | और भी इस प्रकार के कार्ड वगैरह का जो ख़र्चा आता था, उसे आपने देखा होगा पिछले 2-4 दिन में अख़बारों में, सारे ख़र्चे ख़त्म कर दिए, ताकि cashless society की movement को बल मिले |

मेरे नौजवान दोस्तो, ये सब होने के बाद भी एक पूरी पीढ़ी ऐसी है कि जो इससे अपरिचित है | और आप सभी लोग, मैं भली-भांति जानता हूँ, इस महान कार्य में सक्रिय हैं | WhatsApp पर जिस प्रकार के creative message आप देते हैं - slogan, कवितायेँ, किस्से, cartoon, नयी-नयी कल्पना, हंसी-मज़ाक - सब कुछ मैं देख रहा हूँ और चुनौतियों के बीच ये हमारी युवा पीढ़ी की जो सृजन शक्ति है, तो ऐसा लग रहा है, जैसे ये भारत भूमि की विशेषता है कि किसी ज़माने में युद्ध के मैदान में गीता का जन्म हुआ था, वैसे ही आज इतने बड़े बदलाव के काल से हम गुजर रहे हैं, तब आपके अन्दर भी मौलिक creativity प्रकट हो रही है | लेकिन मेरे प्यारे नौजवान मित्रो, मैं फिर एक बार कहता हूँ, मुझे इस काम में आपकी मदद चाहिए | जी-जी-जी, मैं दुबारा कहता हूँ, मुझे आपकी मदद चाहिए और आप, आप मुझे विश्वास है मेरे देश के करोड़ों नौजवान इस काम को करेंगे | आप एक काम कीजिए, आज से ही संकल्प लीजिए कि आप स्वयं cashless society के लिए ख़ुद एक हिस्सा बनेंगे | आपके mobile phone पर online ख़र्च करने की जितनी technology है, वो सब मौजूद होगी |  इतना ही नहीं, हर दिन आधा-घंटा, घंटा, दो घंटा निकाल करके कम से कम 10 परिवारों को आप ये technology क्या है, technology का कैसे उपयोग करते हैं, कैसे अपनी बैंकों की App download करते हैं ? अपने खाते में जो पैसे पड़े हैं, वो पैसे कैसे ख़र्च किए जा सकते हैं ? कैसे दुकानदार को दिए जा सकते हैं ? दुकानदार को भी सिखाइये कि कैसे व्यापार किया जा सकता है ? आप स्वेच्छा से इस cashless society, इन नोटों के चक्कर से बाहर लाने का महाभियान, देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का अभियान, काला-धन से मुक्ति दिलाने का अभियान, लोगों को कठिनाइयों-समस्याओं से मुक्त करने का अभियान - इसका नेतृत्व करना है आपको | एक बार लोगों को Rupay Card का उपयोग कैसे हो, ये आप सिखा देंगे, तो ग़रीब आपको आशीर्वाद देगा | सामान्य नागरिक को ये व्यवस्थायें सिखा दोगे, तो उसको तो शायद सारी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी और ये काम अगर हिंदुस्तान के सारे नौजवान लग जाएँ, मैं नहीं मानता हूँ, ज्यादा समय लगेगा | एक महीने के भीतर-भीतर हम विश्व के अन्दर एक नये आधुनिक हिंदुस्तान के रूप में खड़े हो सकते हैं और ये काम आप अपने mobile phone के ज़रिये कर सकते हो, रोज़ 10 घरों में जाकर के कर सकते हो, रोज़ 10 घरों को इसमें जोड़ करके कर सकते हो | मैं आपको निमंत्रण देता हूँ – आइए, सिर्फ समर्थन नहीं, हम इस परिवर्तन के सेनानी बनें और परिवर्तन लेकर ही रहेंगे | देश को भ्रष्टाचार और काले-धन से मुक्त करने की ये लड़ाई को हम आगे बढ़ाएँगे और दुनिया में बहुत देश हैं, जहाँ के नौजवानों ने उस राष्ट्र के जीवन को बदल दिया है और ये बात माननी पड़ेगी, जो बदलाव लाता है, वो नौजवान लाता है, क्रांति करता है, वो युवा करता है | केन्या, उसने बीड़ा उठाया, M-PESA ऐसी एक mobile व्यवस्था खड़ी की, technology का उपयोग किया, M-PESA नाम रखा और आज क़रीब-क़रीब Africa के इस इलाक़े में केन्या में पूरा कारोबार इस पर shift होने की तैयारी में आ गया है | एक बड़ी क्रांति की है इस देश ने |

मेरे नौजवानो, मैं फिर एक बार, फिर एक बार बड़े आग्रह से आपको कहता हूँ कि आप इस अभियान को आगे बढ़ाइए | हर school, college, university, NCC, NSS, सामूहिक रूप से, व्यक्तिगत रूप से इस काम को करने के लिए मैं आपको निमंत्रण देता हूँ | हम इस बात को आगे बढ़ाएँ | देश की उत्तम सेवा करने का हमें अवसर मिला है, मौक़ा गंवाना नहीं है |

प्यारे भाइयो-बहनो, हमारे देश के एक महान कवि - श्रीमान हरिवंशराय बच्चन जी का आज जन्म-जयंती का दिन है और आज हरिवंशराय जी के जन्मदिन पर श्रीमान अमिताभ बच्चन जी ने “स्वच्छता अभियान” के लिये एक नारा दिया है | आपने देखा होगा, इस सदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कलाकार अमिताभ जी स्वच्छता के अभियान को बहुत जी-जान से आगे बढ़ा रहे हैं | जैसे लग रहा है कि स्वच्छता का विषय उनके रग-रग में फैल गया है और तभी तो अपने पिताजी की जन्म-जयंती पर भी उनको स्वच्छता का ही काम याद आया I| उन्होंने लिखा है कि हरिवंशराय जी की एक कविता है और उसकी एक पंक्ति उन्होंने लिखी है –“” “””‘मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन, मेरा परिचय’ | हरिवंशराय जी इसके माध्यम से अपना परिचय दिया करते थे I‘मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षण भर जीवन, मेरा परिचय’, तो उनके सुपुत्र श्रीमान अमिताभ जी ने, जिसकी रगों में स्वच्छता का mission दौड़ रहा है, उन्होंने मुझे लिखकर के भेजा है हरिवंशराय जी की कविता का उपयोग करते हुए - “‘स्वच्छ तन, स्वच्छ मन, स्वच्छ भारत, मेरा परिचय”’ | मैं हरिवंशराय जी को आदर-पूर्वक नमन करता हूँ | श्रीमान अमिताभ जी को भी ‘मन की बात’ में इस प्रकार से जुड़ने के लिये और स्वच्छता के काम को आगे बढ़ाने के लिये भी धन्यवाद करता हूँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, अब तो ‘मन की बात’ के माध्यम से आपके विचार, आपकी भावनायें आपके पत्रों के माध्यम से, MyGov पर, NarendraModiApp पर लगातार मुझे आपको जोड़ करके रखती हैं | अब तो 11 बजे ये ‘मन की बात’ होती है, लेकिन प्रादेशिक भाषाओं में इसे पूरा करने के तुरंत बाद शुरू करने वाले हैं | मैं आकाशवाणी का आभारी हूँ, ये नया उन्होंने जो Initiative लिया है, ताकि जहाँ पर हिंदी भाषा प्रचलित नहीं है, वहाँ के भी मेरे देशवासियों को ज़रूर इससे जुड़ने का अवसर मिलेगा | आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद |

रविवार, 27 नवंबर 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - 'भ्रष्टाचार बंद हो या भारत'?




कुशीनगर रैली में पीएम नरेंद्र मोदी, पूछा- 'भ्रष्टाचार बंद हो या भारत'?
उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो सरकार बैठी है, वह पूरी तरह गरीबों, किसानों, समाज के वंचितों आदि को समर्पित है

By Indo-Asian News Service | Published: November 27, 2016
http://www.india.com/hindi-news
कुशीनगर, 27 नवम्बर| उत्तर प्रदेश में बुद्घ की धरती कुशीनगर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो सरकार बैठी है, वह पूरी तरह गरीबों, किसानों, समाज के वंचितों आदि को समर्पित है। आप लोगों का भरोसा टूटने नहीं दूंगा। मोदी ने कुशीनगर में कसया हवाई पट्टी पर जनसभा को संबोधित किया। मोदी की सभा को लेकर कुशीनगर में जोरदार तैयारियां की गई थीं। मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी भाषा में की।
मोदी ने रैली स्थल पर आई भीड़ के बारे में कहा कि आज के बराबर लोकसभा चुनाव में भी भीड़ नहीं आई थी। उन्होंने कहा, “हम सेवक हैं, आपकी सेवा के लिए आए हैं। आपके कष्ट, हमारे कष्ट हैं।” उन्होंने अपने भाषण में चीनी मिल का भी मुद्दा उठाया। मोदी ने कहा, “चीनी मिल के मालिक मेरे पास पैकेज लेने आए थे। मैंने कहा कि पैकेज लेने की आपकी आदत पुरानी है, लेकिन मोदी नया है। सरकार गन्ना किसानों का पैसा सीधे खाते में जमा करा रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “उप्र का भला तब तक नहीं होगा, जब तक पूर्वी उत्तर प्रदेश का विकास नहीं होगा। विकास के लिए भारत सरकार अरबों-करोड़ों रुपये लगा रही है। भारत सरकार ने फैसला लिया है कि गोरखपुर में एम्स की स्थापना की जाएगी।” मोदी ने कहा, “हड्डियां पिघल जाए, ऐसी ठंड में किसान को यूरिया लेने के लिए कतार में खड़ा रहना पड़ता था और किसी को इससे फर्क नहीं पड़ता था। लेकिन अब किसान को लाइन में नहीं लगना पड़ता है। सारा यूरिया किसान के खेत में जाता है। चोरी बंद हुई है, क्योंकि हमने यूरिया पर नीम कोटिंग कर दी है।”
मोदी ने नोटबंदी के बाद अपने ऊपर उठ रहे सवालों पर कहा कि वह जनता के विश्वास को टूटने नहीं देंगे।
इससे पहले उन्होंने भोजपुरी में जनता को प्रणाम किया। भाषण की शुरुआत उन्होंने भोजपुरी से की। मोदी ने कहा कि जनता परिवर्तन की तैयारी कर ले। उन्होंने कहा, “आप लोगों का कर्ज चुकाने उप्र आया हूं। अब बदलाव होगा उत्तर प्रदेश में। हम सेवक हैं, जनता की सेवा करने आए हैं। कुशीनगर भगवान महावीर की धरती है, कबीर जी इसी धरती के हैं।”

मोदी ने प्रदेश की अखिलेश सरकार पर वार करते हुए कहा, “सपा सरकार ने गन्ना किसानों को मरने के लिए छोड़ दिया था। हमारी सरकार ने गन्ना किसानों को 12 हजार करोड़ रुपए की मदद दी। गन्ना किसानों पर बकाया 20 हजार करोड़ के कर्ज हमारी सरकार ने चुका दिए हैं। हमारी सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर देश में किसान विकास होगा तो देश का विकास अपने-आप होगा। इसलिए हमारी सरकार किसानों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे





100 फीसदी कैशलेस संभव नहीं, 
लेकिन लेस-कैश तो संभव है : 
मन की बात में बोले पीएम नरेंद्र मोदी

राजीव मिश्र द्वारा संपादित, अंतिम अपडेट: रविवार नवम्बर 27, 2016

खास बातें :-
1-नोटबंदी : निर्णय सामान्य नहीं है कठिनाइयों से भरा हुआ है.
2-ये निर्णय-पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है.
3-भारत को विश्वास है कि देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे.


नई दिल्ली: देश के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए कई बातें कहीं. उन्होंने देश की सुरक्षा से लेकर नोटबंदी के मुद्दे पर बात की. पेश है उनके भाषण के मुख्य अंश -

देश के सुरक्षा बलों के प्रति आपका जो भाव है, वह प्रशंसनीय है.

देशवासियों ने जो शुभकामनायें-सन्देश भेजे,अपनी ख़ुशियों में देश के सुरक्षा बलों को शामिल किया,उसका एक अद्भुत रिसपॉन्स था.

देशवासियों ने जिस अनूठे अंदाज़ में यह दिवाली जवानों को समर्पित की इसका असर वहां हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था

हर वर्ष की तरह इस बार दिवाली पर मैं जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिये, चीन की सीमा पर, सरहद पर गया था .

कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर के प्रधान मिलने आये थे . इतने प्यार से, इतने खुलेपन से, गांव के इन प्रधानों ने बातें की.

जब सारा राष्ट्र सेना के साथ खड़ा होता है, तो सेना की ताक़त 125 करोड़ गुना बढ़ जाती है.

मेरी आपसे अपील है कि हम अपना स्वभाव बनाएं, कोई भी उत्सव हो, देश के जवानों को हम किसी-न-किसी रूप में ज़रूर याद करें.

मैं छात्रों का अभिनन्दन करता हूँ, उनके माता-पिता को उनके परिजनों, शिक्षकों को और ग्राम प्रधानों को भी ह्रदय से बधाई देता हूं.

परीक्षाओं में बड़ी तादाद में छात्रों का सम्मिलित होना इशारा करता है कि जम्मू कश्मीर के बच्चे विकास की ऊंचाइयों को पाने के लिये कृतसंकल्पित हैं.

कुछ दिन पहले जब बोर्ड की परीक्षा हुई, तो क़रीब 95% कश्मीर के छात्र-छात्राओं ने बोर्ड की परीक्षा में हिस्सा लिया.

आज मुझे ख़ुशी हो रही है कि कश्मीर घाटी से आए हुए इन सभी प्रधानों ने गांव में जाकर के दूरदराज के लोगों को जागृत किया.

कश्मीर में जो स्कूल जलाए गए थे, उसकी चर्चा भी हुई और जितना दुःख हम देशवासियों को होता है, इन प्रधानों को भी इतनी ही पीड़ा थी

मैंने ‘मन की बात’ के लिये लोगों के सुझाव मांगे, एकतरफ़ा ही सबके सुझाव आए, सब कहते थे कि 500,1000रुपये पर विस्तार से बातें करें.

जिस समय मैंने ये निर्णय किया था तब भी मैंने सबके सामने कहा था कि निर्णय सामान्य नहीं है कठिनाइयों से भरा हुआ है.

मुझे ये भी अंदाज़ था कि हमारे सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की नई–नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

निर्णय इतना बड़ा है इसके प्रभाव से बाहर निकलने में 50 दिन तो लग जाएंगे, तब जाकर के नॉर्मल अवस्था की ओर हम बढ़ पाएंगे.

आपकी कठिनाइयों को मैं समझता हूं, भ्रमित करने के प्रयास चल रहे हैं फिर भी देशहित की इस बात को आपने स्वीकार किया है.

कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनायें सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है.

500,1000 रुपये और इतना बड़ा देश इतनी करेंसियों की भरमार और ये निर्णय-पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है.

पूरा विश्व देख रहा है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी कठिनाइयां झेल करके भी सफलता प्राप्त करेंगे क्या!

विश्व के मन में प्रश्न-चिह्न हो सकता है लेकिन भारत को विश्वास है कि देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे.

हमारा देश सोने की तरह तप कर, निखर कर निकलेगा और उसका कारण इस देश का नागरिक है, उसका कारण आप हैं.

केंद्र, राज्य, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की इकाइयां, बैंक कर्मचारी, पोस्ट ऑफिस-दिन-रात इस काम में जुटे हुए हैं.

तनाव के बीच, ये सभी लोग बहुत ही शांत-चित्त रूप से, इसे देश-सेवा का एक यज्ञ मान करके कार्यरत हैं.

सुबह शुरू करते हैं, रात कब पूरा होगा, पता तक नहीं रहता है और उसी का कारण है कि भारत इसमें सफल होगा.

कठिनाइयों के बीच बैंक,पोस्ट ऑफिस के लोग काम कर रहे हैं और जब मानवता के मुद्दे की बात आ जाए तो वो दो क़दम आगे हैं.

इस महायज्ञ के अन्दर परिश्रम करने वाले, पुरुषार्थ करने वाले इन सभी साथियों का भी मैं ह्रदय से धन्यवाद करता हूं.

जन-धन योजना को बैंक कर्मचारियों ने जिस प्रकार से अपने कंधे पर उठाया था उनके सामर्थ्य का परिचय हुआ.

फिर से एक चुनौती को उन्होंने लिया है मुझे विश्वास है देशवासियों का संकल्प,सबका सामूहिक पुरुषार्थ, इस राष्ट्र को नई ताक़त बनाएगा.

लेकिन बुराइयां इतनी फैली हुई हैं कि आज भी कुछ लोगों की बुराइयों की आदत जाती नहीं है.

वैसा ही मुझे एक फ़ोन कर्नाटक के श्रीमान येलप्पा वेलान्कर जी की तरफ़ से आया है.
यह जानकार आनंद होता है, इतना गर्व होता है कि मेरे देश में सामान्य मानव का क्या अद्भुत सामर्थ्य है.

मैं चुनाव में चाय पर चर्चा करता था लेकिन मुझे पता नहीं कि चाय पर चर्चा में, शादी भी होती है.

असम के धेकियाजुली गांव में चाय बागान मजदूर को 2000 रुपये का नोट मिला, तो चार अड़ोस-पड़ोस की महिलायें ने साथ जाकर के ख़रीदी की.

नगर निगम को टैक्स का मुश्किल से 50% आता है लेकिन इस बार 8 तारीख़ के निर्णय से उनके पास 13 हज़ार करोड़ रुपये जमा हो गए

भाइयो-बहनो ! हमारा गांव, हमारा किसान. ये हमारे देश की अर्थव्यवस्था की एक मज़बूत धुरी हैं.

अर्थव्यवस्था के बदलाव के कारण,कठिनाइयों के बीच,हर नागरिक अपने को एडजेस्ट कर रहा है लेकिन मैं किसानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं.

कठिनाइयों के बीच भी किसान ने रास्ते खोजे हैं. सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं, जिसमें किसानों को और गांवों को प्राथमिकता दी है.

कठिनाइयां तो हैं,लेकिन मुझे विश्वास है जो किसान हर कठिनाइयां झेलते हुए डटकर खड़ा रहता है,इस समय भी वो डट कर के खड़ा है.

हमारे देश के छोटे व्यापारी, वे रोजगार भी देते हैं, आर्थिक गतिविधि भी बढ़ाते हैं.

पिछले बजट में महत्वपूर्ण निर्णय किया था कि गांव के छोटे दुकानदार भी अब 24 घंटा अपना व्यापार कर सकते हैं, कोई क़ानून उनको रोकेगा नहीं.

मुद्रा-योजना से उनको लोन देने की दिशा में काफी इनिशिएटिव लिए. लाखों-करोड़ों रुपये मुद्रा-योजना से ऐसे छोटे-छोटे लोगों को दिए.

अर्थव्यवस्था के बदलाव के निर्णय के कारण छोटे-छोटे व्यापारी को भी कठिनाई होना स्वाभाविक था.

लेकिन मैंने देखा कि छोटे व्यापारी भी टेक्नोलॉजी, मोबाइल ऐप, मोबाइल बैंक, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं.

मैं अपने छोटे व्यापारी भाइयो-बहनों से कहना चाहता हूं कि मौका है, आप भी डिजीटल दुनिया में प्रवेश कर लीजिए.

मॉल टेक्नोलॉजी के माध्यम से व्यापार को जिस प्रकार से बढ़ाते हैं, छोटा व्यापारी भी  यूजर फ्रेंडली टेक्नोलॉजी से व्यापार बढ़ा सकता है.

आप कैशलेश सोसाइटी बनाने में बड़ा योगदान दे सकते हैं, व्यापार बढ़ाने में मोबाइल फोन पर पूरी बैंकिंग व्यवस्था खड़ी कर सकते हैं.

आज नोटों के सिवाय अनेक रास्ते हैं, जिससे हम कारोबार चला सकते हैं. टेक्नोलोजिकल रास्ते हैं, सेफ है, सिक्योर है और त्वरित है.

मैं चाहूँगा कि आप सिर्फ़ इस अभियान को सफल करने के लिए मदद करें, इतना नहीं, आप बदलाव का भी नेतृत्व करें.

मज़दूर भाइयों-बहनों को कहना चाहता हूं, आपका बहुत शोषण हुआ है. कागज़ पर पगार होता है और जब हाथ में दिया जाता है तब दूसरा होता है.

कभी पगार पूरा मिलता है, तो बाहर कोई खड़ा होता है, उसको कट देना पड़ता है और मज़दूर मजबूरन इस शोषण को जीवन का हिस्सा बना देता है.

नई व्यवस्था से हम चाहते हैं कि आपका बैंक में खाता हो, आपकी पगार के पैसे आपके बैंक में जमा हों, ताकि मिनिमम वेजेस का पालन हो.

एक बार आपके बैंक खाते में पैसे आ गए तो आप भी छोटे से मोबाइल फ़ोन को ई-बटुवे की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.

आप उसी मोबाइल फोन से अड़ोस-पड़ोस की छोटी-मोटी दुकान से जो भी खरीदना है, खरीद सकते हैं, उसी से पैसे भी दे सकते हैं.

इतना बड़ा निर्णय मैंने ग़रीब, किसान, मज़दूर, वंचित, पीड़ित के लिये लिया है, उसका बेनेफिट उसको मिलना चाहिए.

मेरे देश के युवा और युवतियां, मैं जानता हूं, मेरा निर्णय आपको पसन्द आया है, आप इस निर्णय का समर्थन करते हैं.

मेरे नौजवानो, आप मेरी मदद कर सकते हो क्या. जितना आज की दुनिया का अनुभव आपको है, पुरानी पीढ़ी को नहीं है.

हो सकता है, आपके परिवार में बड़े भाई साहब को भी मालूम नहीं होगा और माता-पिता, चाचा-चाची, मामा-मामी को भी शायद मालूम नहीं होगा.

ऐप क्या होती है, आप वो जानते हो, ऑनलाइन बैंकिंग क्या होता है, ऑनलाइन टिकट बुकिंग कैसे होता है, आप जानते हो.

हमारा सपना है कैशलैस सोसाइटी का, ये ठीक है शत-प्रतिशत कैशलेस सोसाइटी संभव नहीं, लेकिन क्यों न लैस-कैश सोसाइटी की तो शुरुआत करें.

मुझे इसमें आपकी मदद चाहिए, ख़ुद का समय चाहिए, ख़ुद का संकल्प चाहिए और आप मुझे कभी निराश नहीं करोगे.

हर बैंक ऑनलाइन सुविधा देता है. हर बैंक की अपनी मोबाइल ऐप है,कई तरह के कार्ड हैं, अपना वालेट है, वालेट का सीधा मतलब है ई-बटुवा.

8 तारीख़ के बाद तो जो रुपये कार्ड का बहुत कम उपयोग होता था, गरीबों ने रुपये कार्ड का उपयोग करना शुरू किया और करीब 300% वृद्धि हुई.

एक बढ़िया प्लैटफॉर्म है, कारोबार करने की यूपीआई, जिससे आप ख़रीदी भी कर सकते हैं, पैसे भी भेज सकते हैं, पैसे ले भी सकते हैं.

साधारण फीचर वाला जो फोन होता है, उससे भी कैश ट्रांसफर हो सकता है. हर कोई इसका आराम से उपयोग कर सकता है.

व्यवस्था को अधिक सरल बनाने के लिए ज़ोर दिया है. सभी बैंक इस पर लगे हुए हैं. अब तो ऑनलाइन सरचार्ज का ख़र्चा भी कैंसिल कर दिया है.

मुझे विश्वास है नौजवान हर दिन कुछ समय निकाल कर 10 परिवारों को ये तकनीक क्या है, तकनीक का कैसे उपयोग करते हैं बताएंगे.

एक बार लोगों को रुपये कार्ड का उपयोग कैसे हो, ये आप सिखा देंगे, तो ग़रीब आपको आशीर्वाद देगा.

सामान्य नागरिक को ये व्यवस्थायें सिखा दोगे,तो उसको सारी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी. सारे नौजवान लग जाएं तो ज्यादा समय नहीं लगेगा.

मैं आपको निमंत्रण देता हूं – आइए, सिर्फ समर्थन नहीं, हम इस परिवर्तन के सेनानी बनें और परिवर्तन लेकर ही रहेंगे.

देश को भ्रष्टाचार और काले-धन से मुक्त करने की ये लड़ाई को हम आगे बढ़ाएंगे. ये बात माननी पड़ेगी, जो बदलाव लाता है, वो नौजवान लाता है, क्रांति करता है, वो युवा करता है.

केन्या ने एम-पेसा मोबाइल व्यवस्था खड़ी की, तकनीक का उपयोग किया, आज केन्या में पूरा कारोबार इस पर शिफ्ट होने की तैयारी में है.

मेरे नौजवानो, मैं फिर एक बार आग्रह से आपको कहता हूँ कि आप इस अभियान को आगे बढ़ाइए.

आज हरिवंशराय बच्चन जी के जन्मदिन पर अमिताभ बच्चन जी ने “स्वच्छता अभियान” के लिये एक नारा दिया है.

आपने देखा होगा,अमिताभ जी स्वच्छता के अभियान को बहुत जी-जान से आगे बढ़ा रहे हैं. जैसे स्वच्छता का विषय उनके रग-रग में फैल गया है.

तभी तो अपने पिताजी की जन्म-जयंती पर उनको स्वच्छता का ही काम याद आया. उन्होंने हरिवंशराय जी की कविता की पंक्ति लिखी है. हरिवंशराय जी इसके माध्यम से अपना परिचय दिया करते थे.

मैं हरिवंशराय जी को आदर-पूर्वक नमन करता हूं. अमिताभ जी को भी स्वच्छता के काम को आगे बढ़ाने के लिये भी धन्यवाद करता हूं.

मन की बात के माध्यम से आपके विचार, आपकी भावनायें आपके पत्रों के माध्यम से, माइ गव (MyGov),नरेंद्र मोदी ऐप (NarendraModiApp) पर मुझे आपको जोड़ कर रखती हैं.

अब तो 11 बजे ये ‘मन की बात’ होती है, लेकिन प्रादेशिक भाषाओं में इसे पूरा करने के तुरंत बाद शुरू करने वाले हैं.

मैं आकाशवाणी का आभारी हूं, ये उन्होंने इनिशिएटिव लिया है, ताकि जहां हिंदी भाषा प्रचलित नहीं है, वहां भी इससे जुड़ने का अवसर मिलेगा.


एक और मौका : बेहिसाब धन रखने वालों के लिए



एक और मौका: बेहिसाब धन रखने वालों के लिए सरकार लाएगी नई स्कीम
इकनॉमिकटाइम्स.कॉम | Updated: Nov 25, 2016

दीपशिखा सिकरवार
नोटबंदी के बाद बैंकों में बड़े पैमाने पर अघोषित धन जमा कराने वाले लोगों के लिए मोदी सरकार एक बार फिर से डिसक्लोजर स्कीम लॉन्च कर सकती है। इस योजना के तहत अघोषित आय रखने वाले लोगों के धन पर 50 पर्सेंट का टैक्स लगेगा और उन्हें अपनी राशि को 4 साल के लिए भूलना होगा। यदि इस स्कीम को न मानने वाले लोगों पर 60 पर्सेंट से अधिक तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है। इसके अलावा अगले सप्ताह केंद्र सरकार इनकम टैक्स ऐक्ट में संशोधन भी कर सकती है।

केंद्र सरकार की ओर से यह योजना कैबिनेट की ओर से टैक्स कानूनों को मंजूर किए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। बता दें कि देश भर में 8 नवंबर की रात से 1000 और 500 रुपये के नोट महज 'कागज का टुकड़ा' रह गए हैं। नोटबंदी के बाद से विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर 'आम जनता की तकलीफों' को आधार बनाकर निशाना साध रहा है।

शुक्रवार को संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचारियों को मौका नहीं मिला, इसलिए वे नाराजगी जता रहे हैं। प्रधनमंत्री ने कहा, ‘भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक बहुत बड़ी लड़ाई देश लड़ रहा है।

देश का सामान्य नागरिक इसका सिपाही बना है। सरकार के निर्णय पर बहुत कम आलोचना हो रही है लेकिन कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार ने तैयारी नहीं की। असल में उन लोगों को दुःख इस बात का है कि सरकार ने किसी को तैयारी करने का समय नहीं दिया।’
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GDP में आएगी कमी, 3 महीने तक कैश किल्लत: पनगढ़िया

भाषा | Updated: Nov 26, 2016,

मुंबई
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने स्वीकार किया है कि सरकार के नोटबंदी के कदम से नकदी की तंगी के चलते देश में आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा और और वृद्धि दर प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि प्रणाली में नकदी की कमी तीन महीने तक रह सकती है। पनगढ़िया ने यहां एशिया सोसायटी के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘फौरी तौर पर, नकदी की कमी होगी। इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा और यह हो रहा है। समस्या धीरे-धीरे सुलझाई जा रही है, प्रणाली में नकदी डाली जा रही है और जिस गति से हम यह काम कर रहे हैं उसके मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एक तिमाही तक कमी रह सकती है।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रणाली में नकदी की स्थिति एक पखवाड़े पहले की तुलना में अब काफी बेहतर है।

उन्होंने कहा कि तिमाही के आखिरी महीने में पखवाड़े के दौरान तरलता की कमी बहुत छोटी होगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद से अर्थव्यवस्था में नकदी की तंगी बनी हुई है और लोग नए नोट पाने के लिए बैंकों में लाइन लगाकर खड़े हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में सरकार के नोटबंदी के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि इससे देश की आर्थिक वृद्धि में दो प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसके एक दिन बाद ही पनगढ़िया ने यह बात कही है, उन्होंने कहा कि यह एक तिमाही की बात है। इसका आर्थिक वृद्धि पर कितना असर होगा यह देखने की बात है।

शनिवार, 26 नवंबर 2016

नोटबंदी : फैसला राष्ट्रीय हित में : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ




नोटबंदी पर मोदी सरकार को मिला आरएसएस का समर्थन, कहा - फैसला राष्ट्रीय हित में
भाषा की रिपोर्ट, अंतिम अपडेट: शनिवार नवम्बर 26, 2016

नई दिल्ली: नोटबंदी के फैसले को उचित ठहराते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शुक्रवार को कहा कि यह पारदर्शी मौद्रिक चलन शुरू करने के 'ईमानदार इरादे' के साथ राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम है जिससे देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित होगी और इसमें तेजी आएगी.

आरएसएस के संचार विभाग के प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि देश में सभी राष्ट्रविरोधी, अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियां अचानक ठहर सी गई प्रतीत होती हैं तथा नतीजतन एक लंबे समय बाद कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति बहाल हुई है.

उन्होंने कहा कि यह जाहिर है कि लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि देश में वित्तीय सुदृढ़ता और जवाबदेही की दिशा में यह एक सख्त कदम है और इसका मकसद अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और जीवंत बनाना है.

वैद्य ने कहा कि नोटबंदी का सरकार का फैसला राष्ट्रीय हित में है. उन्होंने कहा कि इसका असर हर जगह महसूस किया जा रहा है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे देश में पारदर्शिता लाने में सरकार को सहयोग करें.

' नोटबंदी का मोदी का कदम बहुत ही साहसिक है। '- चीन की सरकारी मीडिया



नोटबंदी: भारत के 'जुए' से सबक सीखेगा चीन, 
मोदी के कदम को बताया बहुत साहसिक

पीटीआई | Updated: Nov 26, 2016

पेइचिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले को 'बहुत साहसिक' कदम बताते हुए चीन की सरकारी मीडिया ने कहा कि भ्रष्टाचार पर इसके असर से चीन सबक लेगा। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार नोटबंदी चाहे सफल हो या असफल लेकिन इससे एक उदाहरण पेश किया गया है और चीन भ्रष्टाचार पर इसके प्रभावों से जरूर सबक लेगा।

सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' में छपे संपादकीय में लिखा है, ' नोटबंदी का मोदी का कदम बहुत ही साहसिक है। अगर चीन में 50 या 100 युआन के नोट बंद कर दिए जाएं तो, चीन में क्या होगा हम इसके बारे में अभी कल्पना नहीं कर सकते हैं। मोदी ने करंसी रिफॉर्म पर फैसला लेकर एक जुआ खेला है।' गौरतलब है कि 100 युआन चीन की सबसे बड़ी करंसी है।

पत्र आगे लिखता है, 'नोटबंदी की खबर को पूरी तरह गुप्त रखा गया था ताकि इसे लागू करने में कोई दिक्कत नहीं हो। नोटबंदी का यह फैसला ब्लैक मनी को खिलाफ है। हालांकि मोदी इसे लागू करने से पहले दुविधा में थे।'

संपादकीय मे लिखा है, ' भारत में लगभग 90 फीसदी लेन-देन कैश में होता है। देश में कुल कैश का 85 फीसदी नोट 500 और 1000 रुपये के रूप में थे। सरकार के इस फैसले से आम जनता को रोजाना जिंदगी में काफी दिक्कतें भी हुई हैं। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे 'संगठित लूट' तक करार दे दिया।' अखबार लिखता है, 'नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है। लेकिन इसको बढ़ावा देने वाले सामाजिक और राजनीतिक मसले का समाधान मुश्किल है।'

संपादकीय के अनुसार, ' मोदी का नोटबंदी का फैसला एक जुआ है। इसे लागू करने से लेकर आम जनता की बर्दाश्त करने की क्षमता की परख होनी है। उम्मीद है कि इसके फायदे अन्य दूसरी चीजों के असर को कम करने में सफल होगी।' अखबार साथ ही लिखता है कि लोकतंत्र में इस तरह के साहसिक कदम की जगह बहुत कम होती है। नोटबंदी चाहे सफल हो या असफल लेकिन यह एक उदाहरण जरूर पेश करेगा।

अखबार लिखता है, 'सुधार हमेशा से मुश्किल रहा है। मोदी का नोटबंदी का फैसला सही सोच के साथ आया है। लेकिन, इसकी सफलता व्यवस्था और समाज के सहयोग पर निर्भर करती है।' अखबार लिखता है कि चीन में भी पिछले 40 सालों से सुधार का क्रम जारी है। इसमें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। अखबार के मुताबिक ' इसकी सफलता आम जनता के व्यापक समर्थन से ही संभव होती है।'

अनलिमिटेड धन जमा करने पर लगेगा 50 प्रतिशत टैक्स लग सकता है




अनलिमिटेड धन जमा करने पर लगेगा 50 प्रतिशत टैक्स, चार साल की होगी रोक

By haribhoomi.com | Nov 26, 2016

     नई दिल्ली. सरकार संसद के मौजूदा सत्र में कर कानून में संशोधन लाने की योजना बना रही है। इसके तहत नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर तक घोषित बेहिसाब जमा बैंक राशि पर न्यूनतम 50 प्रतिशत कर लग सकता है। इसके अलावा शेष राशि के आधे हिस्से के निकासी पर चार साल की पाबंदी (लाक इन) होगी।  हालांकि अगर करदाता स्वेच्छा से बेहिसाब राशि के बारे में घोषणा नहीं करता है तो उच्च दर से 90 प्रतिशत कर लगेगा।

        मंत्रिमंडल ने शुक्रवार रात आयकर कानून में संशोधन की जो मंजूरी दी है, उसके तहत पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट निर्धारित सीमा से अधिक जमा करने के बारे में अगर आयकर अधिकारियों के समक्ष घोषणा की जाती है तो उस पर 50 प्रतिशत कर लग सकता है।
       उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार शेष राशि का आधा हिस्सा या मूल जमा का 25 प्रतिशत को चार साल तक निकालने की अनुमति नहीं होगी। उसने बताया कि अगर इस प्रकार के जमा के बारे में घोषणा नहीं की जाती है और उसका पता कर अधिकारियों को चलता है तो कुल 90 प्रतिशत कर और जुर्माना लगाया जाएगा।
    सरकार ने नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से 30 दिसंबर यानी 50 दिन में पुराने नोट जमा करने या उसे नई मुद्रा में बदलने की अनुमति दी है। जहां तक रुपये बदलने की बात है, इसे पहले पहले 2,000 रुपये प्रति व्यक्ति सीमित किया गया और अब इसे वापस ले लिया गया है। वहीं पुराने नोट में कितनी भी राशि बैंक खातों में जमा की जा सकती है।
       सूत्रों ने कहा कि इससे केवल दो सप्ताह में खासकर शून्य खाते वाले जनधन खातों में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए हैं। इससे इन खातों को काले धन के सफेद करने में उपयोग को लेकर आशंका बढ़ी है।
        कर अधिकारियों ने 10 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच 2.5 लाख रुपये से अधिक बेहिसाब जमा पर कर और उस पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगाने की बात की थी। बाद में यह महसूस किया गया कि इस प्रकार की बातों के पीछे कोई कानूनी आधार नहीं है।
     इस खामी को दूर करने के लिये ऐसा समझा जाता है कि मंत्रिमंडल ने आयकर कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी। इसके तहत एक उपबंध जोड़ा जाएगा जो मोहलत अवधि के दौरान बेहिसाब आय पर कर लगाने का प्रस्ताव करता है।
          सरकार की संसद के मौजूदा सत्र में मंजूरी के लिये संशोधन लाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार नोटबंदी कालाधन और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है लेकिन अगर बेहिसाब आय बेनामी जमा के जरिये व्यवस्था में आती है तो मकसद पूरा नहीं होगा। ऐसे में इस पर कर बेईमान लोगों को दंडित करने का तरीका है।

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सावधान !  बेहिसाब राशि की घोषणा पर 50% टैक्स,रूकेगी निकासी

Published : शुक्रवार, 25 नवम्बर 2016

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर तक जमा की गई बेहिसाब राशि के बारे में अगर कर अधिकारियों के समक्ष घोषणा की जाती है तो उस पर 50 प्रतिशत टैक्स लगेगा, चार साल के लिए पैसे की निकासी पर रोक (लाक-इन अवधि) होगी।

अगर घोषणा नहीं की जाती है और कर अधिकारी इसे खोज निकालते हैं तो 60 प्रतिशत टैक्स लगेगा और निकासी पर लंबे समय के लिये रोक होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार रात जो कैबिनेट बैठक हुई,उसमें इस प्रस्ताव पर विचार किया गया। सरकार इसे प्रभाव में लाने के लिये संसद के मौजूदा सत्र में ही आयकर कानून में संशोधन करेगी।

सूत्रों ने कहा कि सरकार नोटबंदी की घोषणा इस बात को लेकर गंभीर है कि 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक 50 दिन की अवधि में सभी बेहिसाब धन बैंक खातों में जमा हो।

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

नोटबंदी पर विरोधी इसलिए दुखी क्योंकि उन्हें वक्त नहीं मिला : पीएम मोदी




नोटबंदी पर विरोधी इसलिए दुखी क्योंकि उन्हें वक्त नहीं मिला : पीएम मोदी
 November 25, 2016

नई दिल्‍ली : नोटबंदी के मुद्दे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फिर अपनी राय रखी और इस फैसले के आलोचकों को करारा जवाब दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो लोग सरकार पर नोटबंदी के लिए तैयारी नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं, वे खुद इस कदम के लिए तैयार नहीं थे। पीएम ने मनमोहन सिंह के आरोपों पर भी पलटवार किया।
संविधान दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नोटबंदी के फैसले की आलोचना करने वालों को जमकर आड़े हाथों लिया। बता दें कि गुरुवार को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि जनता के पैसे की संगठित लूट हो रही है। नोटबंदी का फैसला बिना पूरी तैयारी के लिया गया।
नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सरकार पर हमला तेज किये जाने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इन लोगों को 72 घंटे का वक्त मिल जाता तो वे प्रशंसा करते। यहां एक पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि 500 और 1000 रपये के पुराने नोटों को अमान्य करने के फैसले की बहुत कम आलोचना हुई है। उन्होंने कहा कि लेकिन कुछ लोग अब भी आलोचना कर रहे हैं कि सरकार ने पूरी तैयारी नहीं की। मेरा मानना है कि मुद्दा यह नहीं है कि सरकार ने पूरी तैयारी नहीं की थी। बल्कि मुझे लगता है कि ऐसे लोगों को इस बात की पीड़ा है कि सरकार ने उन्हें किसी तैयारी का मौका नहीं दिया। मोदी ने कहा कि अगर इन लोगों को तैयारी करने के लिए 72 घंटे मिल जाते तो वे तारीफ करते कि मोदी जैसा कोई नहीं है।

नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा कि इस फैसले की आलोचना करने वालों को इस बात की पीड़ा है कि उन्‍हें समय नहीं दिया गया। आलोचना करने वाले कह रहे हैं कि इस फैसले को लेने से पहले पूरी तैयारी नहीं की गई। अगर उन्‍हें 72 घंटे का वक्‍त देते तो वो मेरी वाहवाही करते। विरोधी इसलिए दुखी हैं क्‍योंकि उन्‍हें समय नहीं मिला। यदि नोटबंदी का फैसला अचानक नहीं लेता तो लोग अपना कालाधन बदल लेते। हमने भ्रष्‍टाचारियों को तैयारियों का मौका नहीं दिया। ऐसे में अब
विपक्ष नोटबंदी की आलोचना कर रहा है। इस समय कालेधन और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ देश लड़ाई लड़ रहा है। कालेधन के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि आपकी पाई-पाई पर आपका पूरा हक है। हर किसी को उसके पैसे का पूरा अधिकार है।
उन्‍होंने नोटबंदी के फैसले की उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे नगरपालिकाओं को रिकार्ड टैक्‍स मिला। नगरपालिकाओं को टैक्‍स के तौर पर करोड़ों रुपये मिले हैं। नोटबंदी का सबसे ज्‍यादा फायद नगरपालिकाओं को मिला है, नोटबैन से नगरपालिकाएं मालामाल हो गईं हैं।
पीएम ने कहा कि देश के विकास के लिए डिजिटल करेंसी जरूरी है। इस समय कुछ वक्‍त की दिक्‍कत है लेकिन हमें कैशलेश इकोनॉमी की तरफ बढ़ना होगा। डिजिटल करेंसी की ओर जाने की जरूरत है। साथ ही करेंसी में ट्रांसपेरेंसी होनी चाहिए। देश बहुत बड़ा है और दिक्‍कतों को मिल जुलकर खत्‍म करना है। हम सब मिलकर सामाजिक बुराइयों को दूर करें। आज देश का हर नागरिक सिपाही की तरह लड़ रहा है। आम आदमी भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ सैनिक बन चुका है। भ्रष्टाचार को लेकर भारत की स्थिति अक्सर खराब बताई जाती है, हमें इसमें सुधार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल में कानूनों और संविधान का दुरुपयोग करने वालों ने देश को भ्रष्टाचार में डुबो दिया है। वैश्विक भ्रष्टाचार सर्वेक्षणों में भारत का नाम प्रमुखता से आने को गर्व नहीं करने की बात बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का नाम उंचा करने के लिए कुछ फैसले लेने होंगे। प्रधानमंत्री के ये बयान कल राज्यसभा में नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के तीखे हमले की पृष्ठभूमि में आये हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कल उच्च सदन में कहा था कि सरकार का यह कदम ‘संगठित और कानूनी लूट-खसोट’ है।
डिजिटल लेनदेन पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सभी को अपने धन का इस्तेमाल करने का अधिकार है और कोई उन्हें नहीं रोकता। यह जरूरी नहीं है कि आपके पास नकदी हो क्योंकि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके भी लेनदेन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल से खरीदारी करना व्हाट्सएप संदेश भेजने की तरह ही आसान है। मोदी ने कहा कि हमें पारदर्शिता लाने के लिए ट्रांजेक्शन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि करीब 500 शहर छोटी सी अवधि में यह काम कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक नोटबंदी के बाद नगर निगमों ने 13000 करोड़ रुपये का कर एकत्रित किया है। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ शहरों के नगर निगमों के बारे में जानकारी मिली है। पहले वे 3000 से 3500 करोड़ रुपये कर वसूलते थे और आठ नवंबर के बाद उन्होंने 13000 करोड़ रुपये कर वसूली की है। इस पैसे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण और बिजली आपूर्ति जैसे विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। मोदी दो पुस्तकों के विमोचन के मौके पर संबोधित कर रहे थे। इनमें ‘अपडेटेड एडिशन ऑफ कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया’ और ‘मेकिंग ऑफ द कांस्टीट्यूशन’ हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान के अनेक अनुच्छेदों के बारे में केवल जानकारी रखने के बजाय ‘संविधान की भावना’ से जुड़े रहना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने युवा पीढ़ी के संविधान और उसके आदर्शों से जुड़ाव होने के महत्व पर भी जोर दिया।
इससे पहले, पीएम मोदी ने संविधान दिवस पर दो पुस्‍तकों का विमोचन किया। 'भारत का संविधान' के नए संस्‍करण का विमोचन किया। उन्‍होंने कहा कि अधिकारों के लिए संविधान का दुरुपयोग न करें। छात्रों को संविधान की प्रस्‍तावना पढ़ाई जाए। सामान्‍य जीवन में संविधान का स्‍थान बने। संविधान के निर्माण में बाबा साहब अंबेडकर ने हमारे लिए महान काम किया है।