रविवार, 27 नवंबर 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे





100 फीसदी कैशलेस संभव नहीं, 
लेकिन लेस-कैश तो संभव है : 
मन की बात में बोले पीएम नरेंद्र मोदी

राजीव मिश्र द्वारा संपादित, अंतिम अपडेट: रविवार नवम्बर 27, 2016

खास बातें :-
1-नोटबंदी : निर्णय सामान्य नहीं है कठिनाइयों से भरा हुआ है.
2-ये निर्णय-पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है.
3-भारत को विश्वास है कि देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे.


नई दिल्ली: देश के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए कई बातें कहीं. उन्होंने देश की सुरक्षा से लेकर नोटबंदी के मुद्दे पर बात की. पेश है उनके भाषण के मुख्य अंश -

देश के सुरक्षा बलों के प्रति आपका जो भाव है, वह प्रशंसनीय है.

देशवासियों ने जो शुभकामनायें-सन्देश भेजे,अपनी ख़ुशियों में देश के सुरक्षा बलों को शामिल किया,उसका एक अद्भुत रिसपॉन्स था.

देशवासियों ने जिस अनूठे अंदाज़ में यह दिवाली जवानों को समर्पित की इसका असर वहां हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था

हर वर्ष की तरह इस बार दिवाली पर मैं जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिये, चीन की सीमा पर, सरहद पर गया था .

कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर के प्रधान मिलने आये थे . इतने प्यार से, इतने खुलेपन से, गांव के इन प्रधानों ने बातें की.

जब सारा राष्ट्र सेना के साथ खड़ा होता है, तो सेना की ताक़त 125 करोड़ गुना बढ़ जाती है.

मेरी आपसे अपील है कि हम अपना स्वभाव बनाएं, कोई भी उत्सव हो, देश के जवानों को हम किसी-न-किसी रूप में ज़रूर याद करें.

मैं छात्रों का अभिनन्दन करता हूँ, उनके माता-पिता को उनके परिजनों, शिक्षकों को और ग्राम प्रधानों को भी ह्रदय से बधाई देता हूं.

परीक्षाओं में बड़ी तादाद में छात्रों का सम्मिलित होना इशारा करता है कि जम्मू कश्मीर के बच्चे विकास की ऊंचाइयों को पाने के लिये कृतसंकल्पित हैं.

कुछ दिन पहले जब बोर्ड की परीक्षा हुई, तो क़रीब 95% कश्मीर के छात्र-छात्राओं ने बोर्ड की परीक्षा में हिस्सा लिया.

आज मुझे ख़ुशी हो रही है कि कश्मीर घाटी से आए हुए इन सभी प्रधानों ने गांव में जाकर के दूरदराज के लोगों को जागृत किया.

कश्मीर में जो स्कूल जलाए गए थे, उसकी चर्चा भी हुई और जितना दुःख हम देशवासियों को होता है, इन प्रधानों को भी इतनी ही पीड़ा थी

मैंने ‘मन की बात’ के लिये लोगों के सुझाव मांगे, एकतरफ़ा ही सबके सुझाव आए, सब कहते थे कि 500,1000रुपये पर विस्तार से बातें करें.

जिस समय मैंने ये निर्णय किया था तब भी मैंने सबके सामने कहा था कि निर्णय सामान्य नहीं है कठिनाइयों से भरा हुआ है.

मुझे ये भी अंदाज़ था कि हमारे सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की नई–नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

निर्णय इतना बड़ा है इसके प्रभाव से बाहर निकलने में 50 दिन तो लग जाएंगे, तब जाकर के नॉर्मल अवस्था की ओर हम बढ़ पाएंगे.

आपकी कठिनाइयों को मैं समझता हूं, भ्रमित करने के प्रयास चल रहे हैं फिर भी देशहित की इस बात को आपने स्वीकार किया है.

कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनायें सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है.

500,1000 रुपये और इतना बड़ा देश इतनी करेंसियों की भरमार और ये निर्णय-पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है.

पूरा विश्व देख रहा है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी कठिनाइयां झेल करके भी सफलता प्राप्त करेंगे क्या!

विश्व के मन में प्रश्न-चिह्न हो सकता है लेकिन भारत को विश्वास है कि देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे.

हमारा देश सोने की तरह तप कर, निखर कर निकलेगा और उसका कारण इस देश का नागरिक है, उसका कारण आप हैं.

केंद्र, राज्य, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की इकाइयां, बैंक कर्मचारी, पोस्ट ऑफिस-दिन-रात इस काम में जुटे हुए हैं.

तनाव के बीच, ये सभी लोग बहुत ही शांत-चित्त रूप से, इसे देश-सेवा का एक यज्ञ मान करके कार्यरत हैं.

सुबह शुरू करते हैं, रात कब पूरा होगा, पता तक नहीं रहता है और उसी का कारण है कि भारत इसमें सफल होगा.

कठिनाइयों के बीच बैंक,पोस्ट ऑफिस के लोग काम कर रहे हैं और जब मानवता के मुद्दे की बात आ जाए तो वो दो क़दम आगे हैं.

इस महायज्ञ के अन्दर परिश्रम करने वाले, पुरुषार्थ करने वाले इन सभी साथियों का भी मैं ह्रदय से धन्यवाद करता हूं.

जन-धन योजना को बैंक कर्मचारियों ने जिस प्रकार से अपने कंधे पर उठाया था उनके सामर्थ्य का परिचय हुआ.

फिर से एक चुनौती को उन्होंने लिया है मुझे विश्वास है देशवासियों का संकल्प,सबका सामूहिक पुरुषार्थ, इस राष्ट्र को नई ताक़त बनाएगा.

लेकिन बुराइयां इतनी फैली हुई हैं कि आज भी कुछ लोगों की बुराइयों की आदत जाती नहीं है.

वैसा ही मुझे एक फ़ोन कर्नाटक के श्रीमान येलप्पा वेलान्कर जी की तरफ़ से आया है.
यह जानकार आनंद होता है, इतना गर्व होता है कि मेरे देश में सामान्य मानव का क्या अद्भुत सामर्थ्य है.

मैं चुनाव में चाय पर चर्चा करता था लेकिन मुझे पता नहीं कि चाय पर चर्चा में, शादी भी होती है.

असम के धेकियाजुली गांव में चाय बागान मजदूर को 2000 रुपये का नोट मिला, तो चार अड़ोस-पड़ोस की महिलायें ने साथ जाकर के ख़रीदी की.

नगर निगम को टैक्स का मुश्किल से 50% आता है लेकिन इस बार 8 तारीख़ के निर्णय से उनके पास 13 हज़ार करोड़ रुपये जमा हो गए

भाइयो-बहनो ! हमारा गांव, हमारा किसान. ये हमारे देश की अर्थव्यवस्था की एक मज़बूत धुरी हैं.

अर्थव्यवस्था के बदलाव के कारण,कठिनाइयों के बीच,हर नागरिक अपने को एडजेस्ट कर रहा है लेकिन मैं किसानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं.

कठिनाइयों के बीच भी किसान ने रास्ते खोजे हैं. सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं, जिसमें किसानों को और गांवों को प्राथमिकता दी है.

कठिनाइयां तो हैं,लेकिन मुझे विश्वास है जो किसान हर कठिनाइयां झेलते हुए डटकर खड़ा रहता है,इस समय भी वो डट कर के खड़ा है.

हमारे देश के छोटे व्यापारी, वे रोजगार भी देते हैं, आर्थिक गतिविधि भी बढ़ाते हैं.

पिछले बजट में महत्वपूर्ण निर्णय किया था कि गांव के छोटे दुकानदार भी अब 24 घंटा अपना व्यापार कर सकते हैं, कोई क़ानून उनको रोकेगा नहीं.

मुद्रा-योजना से उनको लोन देने की दिशा में काफी इनिशिएटिव लिए. लाखों-करोड़ों रुपये मुद्रा-योजना से ऐसे छोटे-छोटे लोगों को दिए.

अर्थव्यवस्था के बदलाव के निर्णय के कारण छोटे-छोटे व्यापारी को भी कठिनाई होना स्वाभाविक था.

लेकिन मैंने देखा कि छोटे व्यापारी भी टेक्नोलॉजी, मोबाइल ऐप, मोबाइल बैंक, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं.

मैं अपने छोटे व्यापारी भाइयो-बहनों से कहना चाहता हूं कि मौका है, आप भी डिजीटल दुनिया में प्रवेश कर लीजिए.

मॉल टेक्नोलॉजी के माध्यम से व्यापार को जिस प्रकार से बढ़ाते हैं, छोटा व्यापारी भी  यूजर फ्रेंडली टेक्नोलॉजी से व्यापार बढ़ा सकता है.

आप कैशलेश सोसाइटी बनाने में बड़ा योगदान दे सकते हैं, व्यापार बढ़ाने में मोबाइल फोन पर पूरी बैंकिंग व्यवस्था खड़ी कर सकते हैं.

आज नोटों के सिवाय अनेक रास्ते हैं, जिससे हम कारोबार चला सकते हैं. टेक्नोलोजिकल रास्ते हैं, सेफ है, सिक्योर है और त्वरित है.

मैं चाहूँगा कि आप सिर्फ़ इस अभियान को सफल करने के लिए मदद करें, इतना नहीं, आप बदलाव का भी नेतृत्व करें.

मज़दूर भाइयों-बहनों को कहना चाहता हूं, आपका बहुत शोषण हुआ है. कागज़ पर पगार होता है और जब हाथ में दिया जाता है तब दूसरा होता है.

कभी पगार पूरा मिलता है, तो बाहर कोई खड़ा होता है, उसको कट देना पड़ता है और मज़दूर मजबूरन इस शोषण को जीवन का हिस्सा बना देता है.

नई व्यवस्था से हम चाहते हैं कि आपका बैंक में खाता हो, आपकी पगार के पैसे आपके बैंक में जमा हों, ताकि मिनिमम वेजेस का पालन हो.

एक बार आपके बैंक खाते में पैसे आ गए तो आप भी छोटे से मोबाइल फ़ोन को ई-बटुवे की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.

आप उसी मोबाइल फोन से अड़ोस-पड़ोस की छोटी-मोटी दुकान से जो भी खरीदना है, खरीद सकते हैं, उसी से पैसे भी दे सकते हैं.

इतना बड़ा निर्णय मैंने ग़रीब, किसान, मज़दूर, वंचित, पीड़ित के लिये लिया है, उसका बेनेफिट उसको मिलना चाहिए.

मेरे देश के युवा और युवतियां, मैं जानता हूं, मेरा निर्णय आपको पसन्द आया है, आप इस निर्णय का समर्थन करते हैं.

मेरे नौजवानो, आप मेरी मदद कर सकते हो क्या. जितना आज की दुनिया का अनुभव आपको है, पुरानी पीढ़ी को नहीं है.

हो सकता है, आपके परिवार में बड़े भाई साहब को भी मालूम नहीं होगा और माता-पिता, चाचा-चाची, मामा-मामी को भी शायद मालूम नहीं होगा.

ऐप क्या होती है, आप वो जानते हो, ऑनलाइन बैंकिंग क्या होता है, ऑनलाइन टिकट बुकिंग कैसे होता है, आप जानते हो.

हमारा सपना है कैशलैस सोसाइटी का, ये ठीक है शत-प्रतिशत कैशलेस सोसाइटी संभव नहीं, लेकिन क्यों न लैस-कैश सोसाइटी की तो शुरुआत करें.

मुझे इसमें आपकी मदद चाहिए, ख़ुद का समय चाहिए, ख़ुद का संकल्प चाहिए और आप मुझे कभी निराश नहीं करोगे.

हर बैंक ऑनलाइन सुविधा देता है. हर बैंक की अपनी मोबाइल ऐप है,कई तरह के कार्ड हैं, अपना वालेट है, वालेट का सीधा मतलब है ई-बटुवा.

8 तारीख़ के बाद तो जो रुपये कार्ड का बहुत कम उपयोग होता था, गरीबों ने रुपये कार्ड का उपयोग करना शुरू किया और करीब 300% वृद्धि हुई.

एक बढ़िया प्लैटफॉर्म है, कारोबार करने की यूपीआई, जिससे आप ख़रीदी भी कर सकते हैं, पैसे भी भेज सकते हैं, पैसे ले भी सकते हैं.

साधारण फीचर वाला जो फोन होता है, उससे भी कैश ट्रांसफर हो सकता है. हर कोई इसका आराम से उपयोग कर सकता है.

व्यवस्था को अधिक सरल बनाने के लिए ज़ोर दिया है. सभी बैंक इस पर लगे हुए हैं. अब तो ऑनलाइन सरचार्ज का ख़र्चा भी कैंसिल कर दिया है.

मुझे विश्वास है नौजवान हर दिन कुछ समय निकाल कर 10 परिवारों को ये तकनीक क्या है, तकनीक का कैसे उपयोग करते हैं बताएंगे.

एक बार लोगों को रुपये कार्ड का उपयोग कैसे हो, ये आप सिखा देंगे, तो ग़रीब आपको आशीर्वाद देगा.

सामान्य नागरिक को ये व्यवस्थायें सिखा दोगे,तो उसको सारी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी. सारे नौजवान लग जाएं तो ज्यादा समय नहीं लगेगा.

मैं आपको निमंत्रण देता हूं – आइए, सिर्फ समर्थन नहीं, हम इस परिवर्तन के सेनानी बनें और परिवर्तन लेकर ही रहेंगे.

देश को भ्रष्टाचार और काले-धन से मुक्त करने की ये लड़ाई को हम आगे बढ़ाएंगे. ये बात माननी पड़ेगी, जो बदलाव लाता है, वो नौजवान लाता है, क्रांति करता है, वो युवा करता है.

केन्या ने एम-पेसा मोबाइल व्यवस्था खड़ी की, तकनीक का उपयोग किया, आज केन्या में पूरा कारोबार इस पर शिफ्ट होने की तैयारी में है.

मेरे नौजवानो, मैं फिर एक बार आग्रह से आपको कहता हूँ कि आप इस अभियान को आगे बढ़ाइए.

आज हरिवंशराय बच्चन जी के जन्मदिन पर अमिताभ बच्चन जी ने “स्वच्छता अभियान” के लिये एक नारा दिया है.

आपने देखा होगा,अमिताभ जी स्वच्छता के अभियान को बहुत जी-जान से आगे बढ़ा रहे हैं. जैसे स्वच्छता का विषय उनके रग-रग में फैल गया है.

तभी तो अपने पिताजी की जन्म-जयंती पर उनको स्वच्छता का ही काम याद आया. उन्होंने हरिवंशराय जी की कविता की पंक्ति लिखी है. हरिवंशराय जी इसके माध्यम से अपना परिचय दिया करते थे.

मैं हरिवंशराय जी को आदर-पूर्वक नमन करता हूं. अमिताभ जी को भी स्वच्छता के काम को आगे बढ़ाने के लिये भी धन्यवाद करता हूं.

मन की बात के माध्यम से आपके विचार, आपकी भावनायें आपके पत्रों के माध्यम से, माइ गव (MyGov),नरेंद्र मोदी ऐप (NarendraModiApp) पर मुझे आपको जोड़ कर रखती हैं.

अब तो 11 बजे ये ‘मन की बात’ होती है, लेकिन प्रादेशिक भाषाओं में इसे पूरा करने के तुरंत बाद शुरू करने वाले हैं.

मैं आकाशवाणी का आभारी हूं, ये उन्होंने इनिशिएटिव लिया है, ताकि जहां हिंदी भाषा प्रचलित नहीं है, वहां भी इससे जुड़ने का अवसर मिलेगा.


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