शनिवार, 31 दिसंबर 2016

J&K में 141 आतंकी मार गिराए - आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग



आर्मी चीफ बोले -

 फ्री हैंड देने के लिए मोदी का शुक्रिया,

J&K में 141 आतंकी मार गिराए

dainikbhaskar.com | Dec 31, 2016


आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग अपने टेन्योर के आखिरी दिन शनिवार को मीडिया से रूबरू हुए ।

नई दिल्ली. आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग अपने टेन्योर के आखिरी दिन शनिवार को मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा, "मैं बोलने से ज्यादा एक्शन में यकीन करता हूं, इस साल हमने सिर्फ जम्मू-कश्मीर में 141 आतंकी मार गिराए, पीएम ने सेना को ऑपरेशन के लिए फ्री हैंड दिया, उनका शुक्रिया।" बता दें कि देश के नए आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत होंगे। वे नए साल में चार्ज संभालेंगे। सुहाग ने और क्या कहा...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने कहा, "जब मैंने चार्ज संभाला था, उसी वक्त कहा था कि हमारा हर एक्शन तुरंत, तेज और ज्यादा असरदार होगा।"
- "आर्मी ने ढाई साल में बहुत कुछ किया है। 2013 में हमने 65 आतंकी जबकि 2012 में 67 मारे थे, लेकिन इस साल सिर्फ जम्मू-कश्मीर में ही 141 आतंकी मार गिराए।"
- "इंडियन आर्मी बाहरी और आंतरिक चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और अच्छी तरह ट्रेंड है।"
- बता दें कि जनरल सुहाग के ढाई साल के टेन्योर में सेना ने म्यांमार और पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक की।
वन रैंक-वन पेंशन के लिए बोला थैंक्स
- जनरल सुहाग ने कहा, "आर्म्ड फोर्सेज के लिए वन रैंक-वन पेंशन को मंजूरी देने के लिए सरकार को धन्यवाद।"

- "फुल सपोर्ट और सेना के ऑपरेशन के दौरान फ्री हैंड देने के लिए भी पीएम और सरकार को शुक्रिया।"
- "देश के सम्मान को बरकरार रखने के लिए शहीद होने वाले जवानों और अफसरों को भी मेरा सैल्यूट।"
अमर जवान ज्योति भी गए सुहाग
- जनरल सुहाग टेन्योर के आखिरी दिन अमर जवान ज्योति भी गए और शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
- उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।
कश्मीर पर तजुर्बा रखने वाले रावत नए साल में संभालेंगे चार्ज
- लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को देश का नया आर्मी चीफ बनाया गया है। वे नए साल में चार्ज संभालेंगे। रावत अभी आर्मी के वाइस चीफ हैं।
- उनको कश्मीर का काफी तजुर्बा है। उन्हें ऊंचाई वाले स्थानों पर जंग और काउंटर-इनसर्जेंसी ऑपरेशन का भी अच्छा अनुभव है।
- रावत इंडियन मिलेट्री एकेडमी (आईएमए), देहरादून से ग्रेजुएट हैं। 1978 में यहां से उन्हें 11वीं गोरखा रायफल्स (5/33GR) की पांचवीं बटालियनल में कमीशंड मिला था। आईएमए में उन्हें "सोर्ड ऑफ ऑनर' दिया गया था।

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को देश का नया आर्मी चीफ बनाया गया है। वे नए साल में चार्ज संभालेंगे।
- चित्र फाइल से 

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

मुलायम ने,अखिलेश को पार्टी से निष्कासित कर दिया


न जानें क्यों लगता है कि मुलायम - अखिलेश का कथित झगड़ा ( हाई क्लास एक्टिंग ) सोची समझी वोट ठगी की नौटंकी मात्र है। सत्ता से बाहर खड़ी सपा अखिलेश को सहानुभूती दिला कर जनता से वोट ठगना चाहती है।

- अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान 94141 80151 



अखिलेश-रामगोपाल पार्टी से बाहर, 

सीएम के घर के बाहर समर्थकों की नारेबाजी

बालकृष्ण/कुमार अभिषेक [Edited by: अमित दुबे]
लखनऊ, 30 दिसंबर 2016,

समाजवादी पार्टी के भीतर मचा घमासान और तेज हो गया है. तेजी से बदलते सियासी घटनाक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सीएम अखिलेश यादव और भाई रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है.

रामगोपाल द्वारा पार्टी का सम्मेलन बुलाने पर मुलायम सिंह ने यह कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जो भी सम्मेलन में हिस्सा लेगा, उसे पार्टी से निकाला जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारों की लिस्ट बनाने का अधिकार केवल पार्टी अध्यक्ष को है, दूसरा कोई नहीं बना सकता है.

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सपा मुखि‍या ने कहा कि रामगोपाल अखिलेश यादव को गुमराह कर उनका भविष्य खत्म कर रहे हैं. मुलायम सिंह ने बताया कि पार्टी का अनुशासन तोड़ने पर ये बड़ा फैसला लिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि रामगोपाल का पार्टी में कोई योगदान नहीं है.

साथ ही मुलायम ने कहा कि रामगोपाल के बुलाए अधिवेशन में पार्टी नेताओं और मंत्रियों के शामिल होने को भी अनुशासनहीनता माना जाएगा. मुलायम की मानें तो रामगोपाल का पार्टी में कोई योगदान नहीं है.

अखिलेश को पार्टी से निकालने के बाद मुलायम ने कहा कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा उसका वो जल्द ऐलान करने वाले हैं, क्योंकि ये उनका अधिकार है.

दो बड़े फैसले लेने के बाद मुलायम ने कहा कि पार्टी को उन्होंने खड़ा किया है और वो उसे टूटने नहीं देंगे. साथ ही सपा प्रमुख ने दोहराया कि रिश्ते से बड़ी उनके लिए पार्टी है.

रामगोपाल ने निष्कासन को बताया असंवैधानिक
इसके कुछ देर बार रामगोपाल यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि ये निष्कासन पूरी तरह से असंवैधानिक है. नोटिस देने के आधे घंटे के अंदर ही दोनों को पार्टी से बाहर निकाल दिया गया, दोनों को जवाब देने वक्त तक नहीं दिया गया. रामगोपाल ने आरोप लगाया कि पार्टी में लगातर असंवैधानिक काम हो रहा है.

रामगोपाल ने कहा कि नेताजी को पार्टी का संविधान अच्छी तरह से पता है. रामगोपाल ने कहा कि जहां तक पार्टी सम्मेलन बुलाने की बात है तो कार्यकर्ताओं की मांग पर ये सम्मेलन बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि जब गैर यादवों के बीच वोट मांगने की बात आती है तो फिर मुलायम को रामगोपाल याद आते हैं और उन्हें लोगों के बीच काम करने के लिए किसी सरकार की जरुरत नहीं है.

रामगोपाल का कहना है कि शिवपाल के अगुवाई में ऐसे तमाम नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया है, जिनकी कोई जमीनी पकड़ नहीं है और चुनाव में उनकी जमानत तक नहीं बचेगी. इसी के खिलाफ आवाज उठाने से निष्कासन का ये गलत कदम उठाया गया है. साथ ही रामगोपाल ने कहा कि जनता को पता है कि उनका सीएम कौन हैं और आने वाले दिनों में इसका सही परिणाम दिखेंगे.

गौरतलब है कि अलग लिस्ट जारी करने से सपा मुखिया मुलायम सिंह अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव से बेहद नाराज हैं. उन्होंने दोनों को कारण बताओ नोटिस भेजते हुए इनपर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है. सपा मुखि‍या बयानबाजी को लेकर रामगोपाल पर नाराज बताए जा रहे हैं. गुरुवार को अखिलेश यादव ने 235 उम्मीदवारों की अपनी अलग लिस्ट जारी की. जिसके बाद शिवपाल यादव ने 68 और नाम घोषित कर 403 में से 393 उम्मीदवारों के नाम के नाम का ऐलान कर दिया.
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रामगोपाल पर मुलायम के ये 10 वार, अभी निकाला है आगे और भी कुछ करूंगा

पीयूष शर्मा नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2016, अपडेटेड 19:38 IST
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय मुखिया मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है. सपा अध्यक्ष ने संवाददाता सम्मेलन बुलाते हुए इस आशय की घोषणा की और इस दौरान रामगोपाल पर किए 10 वार.

1. लिस्ट बनाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही है.

2. राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन है वो आप जानों.

3. रामगोपाल को पार्टी विरोधी काम करने पर उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है.

4. क्यों रामगोपाल को विशेष अधिवेशन बुलाने का अधिकार है.

5. रामगोपाल ने पार्टी को कमजोर किया है. इन्होंने जानबूझकर चुनाव के समय ऐसा काम किया है.

6. एक दिन में कोई अधिवेशन नहीं बुलाया जाता है.

7. रामगोपाल ने हमसे पूछा भी नहीं. हमें तो प्रेस के माध्यम से पता चला.

8. कोई कैसे एक दिन में आ सकता है. इसके लिए कम से कम 15 दिन चाहिए.

9. सभी सपा कार्यकर्ता, विधायकों से अपील है कि कोई इसमें शामिल न हों.

10. इसमें शामिल होना अनुशासनहीनता है. मैं नहीं चाहता कि किसी के खिलाफ कोई मैं कार्रवाई करूं. इसे तो अभी मैंने 6 साल के लिए निकाला है. अभी तो इन पर और कार्रवाई की जाएगी.
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मुलायम के सवालों का रामगोपाल ने इस तरह दिया दो टूक जवाब

पीयूष शर्मा   लखनऊ, 30 दिसंबर 2016
सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव को छह सालों के लिए निष्कासित कर समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है. मुलायम सिंह के निष्कासन के फैसले को खारिज करते हुए रामगोपाल यादव ने नियमों का हवाला दिया और पद पर बने रहने की दृढ़ता दिखाई. इसके साथ ही पार्टी के टूट के आसार बनने लगे हैं. रामगोपाल यादव ने पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के सवालों का एक-एक कर जवाब दिया.


1. मुलायम सिंह: रामगोपाल को पार्टी विरोधी काम करने पर उन्‍हें 6 साल के लिए निष्‍कासित किया जाता है.
    रामगोपाल: ये निष्‍कासन पूरी तरह से असंवैधानिक है. हमारा जवाब सुने बिना ही उन्‍होंने मुझे और सीएम को निकाल दिया.

2. मुलायम सिंह: क्‍या रामगोपाल को विशेष अधिवेशन बुलाने का अधिकार है.
   रामगोपाल: पार्टी का अध्‍यक्ष ही यदि असंवैधानिक काम करें तो अधिवेशन कौन बुलाएगा. एक भी मीटिंग नहीं हुई. अब आप बताइए कि कैसे कैंडिडेट तय हो गए.

 3. मुलायम सिंह: एक दिन में कोई अधिवेशन नहीं बुलाया जाता है.
     रामगोपाल: आपातकालीन मीटिंग कभी भी बुलाई जा सकती है. आपातकालीन अधिवेशन के लिए कोई भी टाइम लिमिट नहीं होती. मैंने जनरल सेक्रेटी की हैसियत से ये मीटिंग बुलाई है और मैं इस पद पर बना रहूंगा.

4. मुलायम सिंह: रामगोपाल ने पार्टी को कमजोर किया है. इन्‍होंने जानबूझकर चुनाव के समय ऐसा काम किया है.
    रामगोपाल: जो पार्टी के मेंबर नहीं है उन्‍हें टिकट दिया जा रहा है. तेजप्रताप जी को भी नहीं पूछा गया. जिनको टिकट दिया गया उनकी जमानतें नहीं बचेंगी.

5. मुलायम सिंह: रामगोपाल ने हमसे पूछा भी नहीं. हमें तो प्रेस के माध्‍यम से पता चला.
    रामगोपाल: विधानसभा चुनावों में ये मालूम पड़ जाएगा कि कौन कितना एसेप्‍टेबल है.

6. मुलायम:  कोई कैसे एक दिन में आ सकता है. इसके लिए कम से कम 15 दिन चाहिए.
   अखिलेश : मैं सभी से गुजारिश करता हूं कि वो एक तारीख को लखनऊ आएं अधिवेशन में.

7. मुलायम सिंह: रामगोपाल सीएम का भविष्‍य खराब कर रहा है.
    रामगोपाल: मैं लखनऊ बहुत कम आता हूं. मैंने आज तक किसी भी प्रशासनिक काम में अखिलेश को राय नहीं दी. मैं उनका भविष्‍य नहीं बिगाड़ रहा. मुझे अपना काम कराने के लिए सरकार की दरकार नहीं है.
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UP में संवैधानिक संकट, फिर सीएम बनेंगे मुलायम

Updated:2016-12-30


नई दिल्ली। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। अखिलेश यादव पर गुटबाजी करने का आरोप लगाया गया है। अखिलेश की बर्खास्तगी के बाद उत्तर प्रदेश में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। अब अखिलेश की सरकार अल्पमत में है। इस घटनाक्रम के साथ समाजवादी पार्टी पिछले दो महीने से जारी कलह की वजह से दो फाड़ हो गई है। पिता-पुत्र आमने सामने हैं। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव सरकार बनाने के लिए समाजवादी पार्टी की ओर से दावा प्रस्तुत करेंगे। patrika.com अपने रीडर्स को हर बड़े अपडेट की जानकारी दे रहा है। अखिलेश की बर्खास्तगी की खबर के बाद उनके घर के सामने कार्यकर्ताओं का हुजूम जुट गया। उनके पक्ष में जमकर नारेबाजी की गई।
अखिलेश कर रहे हैं मुलायम की मीटिंग का इंतज़ार
अखिलेश यादव भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। कहा जा रहा है कि इसमें वे आगे की योजना का खुलासा करें। वे अभी मुलायम के घर हो रही मीटिंग की घोषणा का इंतज़ार कर रहे हैं।
मुलायम के घर के अंदर मीटिंग
मुलायम के घर के अंदर मीटिंग हो रही है। इसमें शिवपाल समेत अखिलेश विरोधी खेमा के नेता शामिल हैं। कहा जा रहा है कि मीटिंग के बाद पार्टी की ओर से अखिलेश को सीएम पद से हटाने की घोषणा की जा सकती है। उनकी जगह नेताजी मुलायम खुद दावेदारी कर सकते हैं।
गवर्नर ने कहा- संवेधानिक संकट नहीं
उधर, घटनाक्रम को लेकर राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि यूपी में किसी तरह का संवेधानिक संकट नहीं है। एक टीवी रिपोर्ट के मुताबिक़ वे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
अखिलेश के समर्थक सड़क पर, फाड़े शिवपाल के पोस्टर
भारी संख्या में अखिलेश के समर्थक सड़क पर उतर गए हैं। कार्यकर्ता उनके पक्ष में नारेबाजी कर रहे हैं। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं ने शिवपाल के खिलाफ नारेबाजी कर उनके पोस्टर फाड़े।
कांग्रेस ने आतंरिक मामला बताया, बीजेपी ने परिवार केन्द्रित पार्टी
कांग्रेस और जेडीयू ने इसे आतंरिक मामला बताते हुए कमेंट करने से इनकार कर दिया। बीजेपी ने कहा कि यह परिवार केंद्रित पार्टी है और अब परिवार टूट गया है। बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव से इस्तीफा मांगा है।

अब तक क्या हुआ ....
#1) सपा ने जारी की लिस्ट, अखिलेश के समर्थकों के टिकट काटे
बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुलायम सिंह ने शिवपाल की मौजूदगी में 178 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था। नेताजी ने यह भी साफ़ कर दिया था कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का नाम अनाउंस नहीं होगा। टिकट पाने वाले ज्यादातर शिवपाल के समर्थक थे। उनके साथ शिवपाल यादव भी मौजूद थे। मुलायम ने यह भी साफ़ किया कि किसी दल के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा।
#2) अखिलेश नाराज
बुधवार को सपा चीफ के टिकट बंटवारे से अखिलेश नाराज हुए। उन्होंने कहा कि वे नेताजी से मिलकर बात करेंगे। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि वे अपने उम्मीदवारों को चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर उतारेंगे। अखिलेश ने जवाबी कार्रवाई करते हुए शिवपाल के करीबी आवास विकास परिषद् की उपाध्यक्ष सुरभि शुक्ला और उनके पति डॉक्‍टर संदीप शुक्ला को बर्खास्‍त कर दिया। संदीप शुक्‍ला यूपी राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) में सलाहकार थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार सुलतानपुर से उन्हें टिकट भी दिया जा रहा है।

अखिलेश पार्टी से निकाले जा चुके हैं। सपा राज्यपाल से मिलकर अखिलेश को हटाने की मांग कर सकती है। हालांकि अखिलेश सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से वक्त मांग सकते हैं। इस वक्त सपा के 229 विधायक हैं। अखिलेश को बहुमत के लिए 203 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। उन्हें कांग्रेस और रालोद की मदद मिल सकती है।
#3) समर्थक विधायक मंत्रियों के साथ की मीटिंग
गुरुवार को अखिलेश ने समर्थक विधायक मंत्रियों के साथ मीटिंग की। इस दौरान उन विधायकों मंत्रियों ने जमकर भड़ास निकाली जिनके टिकट कटे थे। सभी ने एक स्वर में अखिलेश से कड़ा कदम उठाने को कहा। अखिलेश मुलायम से भी मिले। इस दौरान शिवापाल भी मौजूद थे। करीब एक घंटे तक तीनों में बात हुई, लेकिन कुछ तय नहीं हो पाया।
#4) अखिलेश ने जारी की लिस्ट
गुरुवार को ही अखिलेश ने देरशाम अपने 203 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी। इसमें अतीक अहमद, मुलायम की छोटी बहू और मुख्तार अंसारी के भाई का नाम नहीं था। लिस्ट में उन नामों को शामिल नहीं किया गया जिस पर अखिलेश आपत्ति दर्ज करवा चुके थे। अखिलेश द्वारा कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी करने के कुछ देर बाद शिवपाल ने मुलायम से मीटिंग की और देर रात 68 और उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी।
#5) और बर्खास्त हुए अखिलेश-राम गोपाल
शुक्रवार को मुलायम सिंह ने शिवपाल की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश और रामगोपाल को पार्टी से बर्खास्त कर दिया। इस बर्खास्तगी पर सवाल उठाते हुए रामगोपाल ने असंवेधानिक करार दिया। मुलायम ने अखिलेश को लेकर यह भी कहा कि अब उनका भविष्य ख़त्म हो गया है।



गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

जयललिता की मौत पर मद्रास हाईकोर्ट ने जताया संदेह





जयललिता की मौत पर मद्रास हाईकोर्ट ने जताया संदेह, 
कहा- सच सामने आना चाहिए
Last Updated: Thursday, December 29, 2016

चेन्नई : तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की मौत पर अब सवाल और संदेह जताए जाने लगे हैं। एआईएडीएमके की पूर्व प्रमुख जयललिता की मौत पर मद्रास हाईकोर्ट ने संदेह जताया है। मद्रास हाईकोर्ट के जज वैद्यलिंगम ने इस मामले में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान कहा कि जयललिता की मौत से संबंधित सच सामने आना चाहिए। जज ने कहा कि इस मृत्यु को लेकर मीडिया के साथ मेरी अपनी कुछ आशंकाएं है। मुझे भी इस मौत को लेकर संदेह है।

जयललिता के निधन की जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सच सामने आना चाहिए। पूर्व सीएम जयललिता की मौत के रहस्य से जुड़ी यह याचिका एआईएडीएमके के सदस्य पीए जोसफ ने दाखिल की है।

याचिका की सुनवाई कर रहे जस्टिस वैद्यलिंगम ने ने एक टिप्पणी में कहा कि मीडिया ने जयललिता के निधन को लेकर कई संशय खड़े किए हैं और यहां तक की मुझे भी इसमें कई संदेह हैं। उन्होंने सवाल किया कि जयललिता की बीमारी को इस तरह गोपनीय बनाकर क्यों रखा गया। जब उन्हें भर्ती किया गया था तब कहा गया था कि वो सही डायट ले रही हैं। अब उनके निधन के बाद सच सामने आना चाहिए। अदालत में दायर याचिका में मांग की गई है कि जांच के लिए आयोग का गठन किया जाए जिसमें कम से कम तीन रिटायर्ड जज हों। इस संबंध में कोर्ट ने पीएम नरेंद्र मोदी और राज्य सरकारों को भी नोटिस देकर यही सवाल पूछा है। उन्होंने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि जय​ललिता की मौत पर सवाल उठाया जाना लाजिमी है।

बता दें कि जयललिता के निधन को लेकर कई लोग अपनी आशंकाएं जताते रहे हैं। एआईएडीएमके से निष्कासित शशिकला पुष्पा ने भी मांग की थी कि जयललिता की मौत की सीबीआई जांच कराई जाए क्योंकि बीमार होने से निधन तक लोगों को इस बात की कोई खबर नहीं थी कि उन्हें क्या हुआ और किस तरह का इलाज दिया इसे गोपनीय रखा गया है। शशिकला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
बता दें कि 75 दिनों तक चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती रहीं तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता (68) का पांच दिसंबर को निधन हो गया था।

ज़ी मीडिया ब्यूरो

सपा में फिर फूट : मुलायम - अखिलेश ने जारी की अलग-अलग कैंडीडेट्स की लिस्ट



सपा में फिर फूट: 
अब अखिलेश ने जारी की 235 कैंडिडेट्स की लिस्ट, 
एक दिन पहले मुलायम ने दिए थे 325 नेताओं को टिकट
dainikbhaskar.com | Dec 29, 2016

http://www.bhaskar.com/news

लखनऊ. अखिलेश यादव ने यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 235 सीटों के कैंडीडेट्स की लिस्ट जारी कर दी है। सूत्रों के मुताबिक बची हुई सीटों के लिए भी कैंडीडेट्स का एलान जल्द ही होगा। अखिलेश ने मौजूदा एमएलए में से 171 सीटों पर और सपा के जिन सीटों पर विधायक नहीं हैं, उन क्षेत्रों में 64 कैंडिडेट घोषित किए हैं। बता दें कि मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को यूपी वि‍धानसभा चुनाव के लि‍ए 325 कैंडिडेट्स का एलान किया था। सूत्रों के मुताबिक, इसमें से 108 अखिलेश को पसंद नहीं हैं। अलग सिंबल पर चुनाव लड़ सकते हैं अखिलेश के कैंडिडेट्स...
- सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव के कैंडिडेट्स अलग-अलग सिंबल पर चुनाव लड़ सकते हैं।
- अखिलेश अपने कैंडिडेट्स के लिए कैंपेन भी कर सकते हैं।
- इससे पहले मुलायम की कैंडिडेट्स लिस्ट से असंतुष्ट अखिलेश ने गुरुवार को समर्थकों के साथ मीटिंग की।
- इसके बाद अखिलेश ने अपनी लिस्ट जारी करने का प्लान बनाया। अखिलेश की मीटिंग में करीब 40 विधायक मौजूद थे।
बुधवार को किया था मुलायम ने 325 कैंडिडेट्स का ऐलान, मौजूद नहीं थे अखिलेश
- बता दें कि मुलायम ने बुधवार को जिस 325 कैंडिडेट्स का एलान किया था, प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाई शिवपाल यादव तो मौजूद थे, लेकिन बेटे अखिलेश नहीं थे।
- जब मुलायम ने कैंडिडेट्स के नामों का एलान किया, उस वक्त अखिलेश झांसी में थे।
टिकट बंटवारे में शिवपाल की ज्यादा चली
- टिकट बंटवारे में भी अखिलेश से ज्यादा शिवपाल की चली। 325 उम्मीदवारों में 108 ऐसे हैं, जो अखिलेश को पसंद नहीं हैं। शिवपाल की पसंद के 164 नेताओं को टिकट मिला।
- गुरुवार को अखिलेश समर्थक मंत्रियों में एक अरविंद सिंह गोप ने कहा कि उनका टिकट अमर सिंह और बेनी प्रसाद वर्मा ने कटवाया है।
मुलायम की लिस्ट में 85 शिवपाल के और केवल 24 अखिलेश के करीबी
- 325 कैंडिडेट्स में से 149 नए चेहरे हैं। इनमें मुलायम के करीबी 40, शिवपाल के 85 और अखिलेश के 24 हैं।
- वहीं, 176 मौजूदा एमएलए हैं। इनमें से मुलायम के करीबी 48, शिवपाल के 79 और अखिलेश के 32 करीबी शामिल हैं।
- आजम खान के 5, धर्मेंद्र यादव के 6, रामगोपाल के 2 और बेनी प्रसाद वर्मा के 4 करीबी शामिल हैं।
सर्वे के बाद अखिलेश ने सौंपी थी मुलायम को 403 कैंडिडेट्स की लिस्ट
- पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश ने मुलायम सिंह को 403 कैंडिडेट्स की लिस्ट सौंपी थी।
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुलायम और अखिलेश की लिस्ट में करीब 108 नाम कॉमन नहीं थे।
- जबकि, शिवपाल पहले ही 175 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर चुके थे।
- बताया गया कि सीएम ने एक सर्वे के आधार पर लिस्ट तैयार की। सर्वे में ज्यादातर मंत्री और विधायक जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। सीएम ने इनके टिकट काट दिए।
- इसके बाद शिवपाल यादव ने ट्वीट कर कहा कि टिकट का बंटवारा जीत के आधार पर होगा। इसका फैसला नेताजी ही करेंगे। सीएम चुनाव के बाद तय किया जाएगा।
अखिलेश ने शिवपाल के करीबियों को हटाया
- अखिलेश ने बुधवार देर रात हाउसिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की वाइस प्रेसिडेंट सुरभि शुक्ला को बर्खास्त कर दिया। उन्‍हें शिवपाल का करीबी माना जाता है।
- सुरभि के पति संदीप को सुल्तानपुर की सदर विधानसभा सीट से टिकट मिला है। संदीप मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन में एडवाइजर थे। उन्हें भी सीएम ने बर्खास्त कर दिया।
- बता दें कि अखिलेश के खास एमएलए अरुण वर्मा का टिकट काटकर संदीप को दिया गया।

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टिकट बंटवारा घमासान: 
मुलायम के खिलाफ अखिलेश की खुली बगावत, 
जारी की 235 उम्मीदवारों की अपनी सूची!
Last Updated: Thursday, December 29, 2016 

लखनऊ: समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर मची कलह के बीच लखनऊ में गुरुवार को नया मोड़ उस वक्त आ गया जब नाराज नेताओं और मंत्रियों के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बैठक के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की उसके बाद बगावत करते हुए अपनी ओर से 235 उम्मीदवारों की नई लिस्ट जारी कर दी।

लखनऊ में सुबह से चल रही मैराथन बैठकों के बाद देर शाम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने 235 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। सपा की टिकट सूची से गायब पवन पांडे, राम गोविंद और अरविंद सिंह गोप को अखिलेश ने मैदान में उतारा है।

पहले अखिलेश की सूची में 167 उम्मीदवारों के होने की बात थी, जो बाद में बढ़कर 200 हो गई। देर रात अखिलेश ने 235 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी। इससे पहले अपने समर्थकों का टिकट काटे जाने से नाराज अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह से टिकट काटे जाने का आधार पूछा है। अखिलेश ने साथ ही अपने समर्थकों को चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा। 

बुधवार, 28 दिसंबर 2016

500 और 1000 रुपये के पुराने नोट पर लग सकता है जुर्माना



पुराने नोट रखने पर लग सकता है जुर्माना
By: शिशिर सिन्हा, एबीपी न्यूज | 
Wednesday, 28 December 2016 

        नई दिल्ली: सरकार ने नोटबंदी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक अध्यादेश लाने का फैसला किया है. अध्यादेश के जरिए जहां पुराने नोटों को लेकर रिजर्व बैंक की जवाबदेही खत्म होगी, वहीं तय सीमा से ज्यादा पुराने नोट रखने पर जुर्माना देना पड़ सकता है.

       1 रुपये को छोड़ बाकी सभी नोट पर रिजर्व बैंक की गवर्नर की ओर से धारक को छपे रकम के बराबर कीमत अदा करने का वचन दिया जाता है. 8 दिसम्बर के बाद गैर-कानूनी घोषित किए गए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट के लिए भी ये बात लागू होती है. रिजर्व बैंक की इस जवाबदेही को रिजर्व बैंक कानून 1934 में फेरबदल कर ही खत्म किया जा सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए:-

– कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में राष्ट्रपति से एक अध्यादेश जारी करने की सिफारिश की गयी, ताकि पुराने नोट पर रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी को खत्म किया जा सके.

– अध्यादेश में उल्लेखित तारीख के बाद पुराने नोट की बदौलत किसी भी तरह की समानांतर व्यवस्था खड़ी नहीं हो सकेगी

जिसके बाद पुराने नोट की कानूनी मान्यता और जवाबदेही पूरी तरह से खत्म हो जाएगी.

अध्यादेश लाने का सबसे बड़ा मकसद रिजर्व बैंक की स्थिति को तो स्पष्ट करना है ही, साथ ही पुराने नोटों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए भी उपाय बताने हैं. ये इसलिए भी जरुरी हैं, क्योंकि अभी भी कुछ जगहों पर मजदूरी देने या काले धन को सफेद करने की कोशिश में पुराने नोट का इस्तेमाल हो रहा है.

सूत्रों की मानें तो अध्यादेश के जरिए

– 500 या 1000 रुपये के ज्यादा से ज्यादा 10 नोट रखने की इजाजत होगी

– तय सीमा से ज्यादा नोट पाए जाने की सूरत में कम से कम 5000 रुपये या फिर मिली रकम के 5 गुना बराबर तक के जुर्माने का प्रावधान होगा

– तय सीमा से ज्यादा नोट रखना आपराधिक मामलों की श्रेणी में आएगा और स्थानीय मजिस्ट्रेट के पास इस पर कार्रवाई का अधिकार होगा.

सूत्रों ने ये भी साफ किया कि तय सीमा के भीतर नोट शोध जैसे काम के लिए ही रखे जा सकते हैं.

अध्यादेश में 30 दिसम्बर की तारीख का जिक्र होने से नया विवाद खड़ा हो सकता है. क्योंकि प्रधानमंत्री ने 8 नवम्बर को राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा था कि ऐसे लोग जो 30 दिसम्बर 2016 तक पुराने नोट किसी कारणवस जमा नहीं कर पाए, उनको 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट बदलने का एक आखिरी अवसर दिया जाएगा. ऐसे लोग रिज़र्व बैंक के निर्धारित ऑफिस में अपनी राशि एक घोषणा पत्र यानी declaration फॉर्म के साथ 31 मार्च 2017 तक जमा करवा सकते हैं. ऐसे में जाहिर है कि 30 दिसम्बर के बाद की स्थिति को लेकर सरकार को एक नोटिफिकेशन जारी करना पड़ सकता है.

उम्मीद है कि अगले 72 घंटे में सरकार एक नोटिफिकेशन जारी कर ये स्थिति साफ करने की कोशिश करेगी कि 30 दिसम्बर के बाद भी जिनके पास पुराने नोट बचे हैं, उनके लिए रास्ता क्या है. 31 मार्च 2017 तक रिजर्व बैंक के देश भर में फैले 27 दफ्तरों में विशेष शर्तें पूरी करने के बाद ही पुराने नोट जमा कराने की सुविधा दी गयी है. अब नोटिफिकेशन के जरिए इन शर्तों को बारे में जानकारी दी जा सकती है.

देश का करीब 10 लाख करोड़ का नुकसान : 40 से अधिक घोटाले

आजादी के बाद 40 बड़े घोटाले

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भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की एक अपील ने मानों पूरे देश को नींद से जगा दिया है। घोटालों और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। इसकी बड़ी वजह हाल के वर्षों में कुछ बड़े घोटालों का पर्दाफाश होना भी माना जा रहा है। वैसे, 1947 से 2011 तक 40 से अधिक घोटाले हो चुके हैं और देश को करीब 10 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है। देखा जाए तो देश में घोटाले की बीज आजादी के बाद ही बो दी गई थी। इसकी शुरुआत जीप घोटाले से हुई थी।

1. जीप खरीद घोटाला (1948)
जीप घोटाला देश की आजादी के तुंरत बाद 1948 में सामने आया था। पाकिस्तानी हमले के बाद भारतीय सेना को जीपों की जरूरत थी। घोटाले में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उगााचुक्त वी.के मेनन इस सौदे में कूद पड़े। उस वक्त 300 पाउंड प्रति जीप के हिसाब से 1500 जीपों का आदेश दिए गए थे, लेकिन 9 महीने तक जीपें नहीं आईं। 1949 में जाकर महज 155 जीपें मद्रास बंदरगाह पर पहुंचीं।  इनमें से ज्यादातर जीपें तय मानक पर खरी नहीं उतरीं। जांच हुई तो मेनन दोषी पाए गए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। जल्द ही मेनन नेहरु केबिनेट में शामिल हो गए।

2. साइकिल आयात घोटाल (1951)
1951 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सचिव एस.ए.वेंकटरमण थे। गलत तरीके से एक कंपनी को साइकिल आयात करने का कोटा जारी करने का आरोप लगा। इसके बदले उन्होंने रिश्वत भी ली। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

3.बीएचयू फंड घोटाला (1956)
यह देश में शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़ा पहला घोटाला है। इसके अंतर्गत बीएचयू के कुछ अधिकारियों ने फंड में हेराफेरी कर डाली गई। यह घोटाला 50 लाख रुपये का था।

4.हरिदास मुंध्रा स्कैंडल (1958)
हरिदास मुंध्रा कोलकाता बेस्ड इंडस्ट्रियलिस्ट थे। यह देश का पहला फाइनेंशियल बड़ा स्कैंडल था।  इस मामले का खुलासा फिरोज गांधी ने संसद में किया था। हरिदास मुंध्रा द्वारा स्थापित छह कंपनियों में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के 1.2 करोड़ रुपये से संबंधित मामला उजागर हुआ। इसमें तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णामचारी, वित्त सचिव एच.एम.पटेल, एलआईसी चेयरमैन भी इस मामले में दोषी पाए गए। दबाव बढ़ने पर वित्त मंत्री को पद से हटा दिया गया। मूंध्रा को 22 साल की सजा मिली।

5. तेजा लोन स्कैम (1960)
बिजनेस मैन जयंत धर्मा तेजा ने जयंती शिपिंग कंपनी शुरू करने के लिए 1960 में 22 करोड़ रुपये का लोन लिया था, लेकिन बाद में धनराशि को देश से बाहर भेज दिया। उन्हें यूरोप में गिरफ्तार किया गया और छह साल की कैद हुई।

6. प्रताप सिंह कैरों स्कैम (1963)
पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों देश के पहले एेसे मुख्यमंत्री थे, जिनके खिलाफ अनाप-शनाप धन-संपत्ति जमा करने का आरोप था। इसके अलावा, परिवार के लोगों को फायदा पहुंचाने का मामला था।

7. पटनायक 'कलिंग ट्यूब्सÓ मामला (1965)
उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अपनी निजी कंपनी 'कलिंग ट्यूब्सÓ को एक सरकारी कॉन्ट्रेक्ट दिलाने में मदद करने का आरोप लगा था। इस मामले में बीजू पटनायक को इस्तीफा देना पड़ा था।

8. मारुति घोटाला (1974)
मारु ति घोटाला 1974 में हुआ था। इस घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम खूब उछाला गया। मामल में पेसेंजर कार बनाने का लाइसेंस देने के लिए संजय गांधी की मदद की गई थी।

9. कुओ ऑयल डील (1976)
वर्ष 1976 में हुए कुआे आइल डील घोटाले में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन द्वारा 2.2 करोड़ हांगकांग की फर्जी कंपनी से डील की गई। इसमें बड़े स्तर पर घूस लेने का आरोप लगा।

10. अंतुले ट्रस्ट
अंतुले ट्रस्ट प्रकरण की गूंज 1981 में हुई। यह महाराष्ट में हुए सीमेंट घोटाले से संबद्ध था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ए आर अंतुले का नाम एक घोटाले में सामने आया। उन पर आरोप यह था कि उन्होंने इंदिरा गांधी प्रतिभा प्रतिष्ठान, संजय गांधी निराधार योजना, स्वावलंबन योजना आदि ट्रस्ट के लिए पैसा इकट्ठा किया था। जो लोग, खासकर बडे़ व्यापारी या मिल मालिक ट्रस्ट को पैसा देते थे, उन्हें सीमेंट का कोटा दिया जाता था। इस मामले में मुख्यमंत्री पद से ए आर अंतुले को हटना पड़ा।

11. एचडीडब्ल्यू दलाली मामला (1987)
जमर्नी की पनडुब्बी निर्मित करने वाली कंपनी एचडीडब्ल्यू को काली सूची में डाल दिया गया। मामला था कि उसने 20 करोड़ रुपये बैतोर कमिशन दिए हैं। आखिरकार वर्ष 2005 में इस केस को बंद करने का फैसला लिया गया। यह फैसला एचडीडब्ल्यू के पक्ष में रहा।

12. बोफोर्स घोटाला (1987)
1986 में स्वीडन की ए बी बोफोर्स कंपनी से 155 तोपें खरीदने का सौदा तय किया गया। कहा गया कि इस सौदे को पाने के लिए 64 करोड़ रु पये की दलाली दी गई थी। आेटावियो क्वात्रोची और राजीव गांधी का नाम इसमें सामने आया।

 13. सेंट किट्स मामला (1989)
इस मामले में वी पी सिंह की साफ छवि को धूमिल करने की कोशिश किया गया था। उस वक्त नरसिम्हाराव विदेश मंत्री थे। वी पी सिंह पर अवैध पैसा लेने का आरोप लगाया गया था। बाद में पता चला कि जिन दस्तावेजों के सहारे वी पी सिंह को फंसाने की कोशिश की गई थी, उन पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर थे, जबकि सच्चाई यह थी कि वी पी सिंह किसी भी सरकारी दस्तावेज पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर नहीं करते थे।

 14. हर्षद मेहता स्कैम (1992)
वर्ष 1992 में हर्षद मेहता ने धोखाधाड़ी से बैंकों का पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश कर दिया, जिससे स्टॉक मार्केट को करीब 5000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

15. इंडियन बैंक (1992)
वर्ष 1992 में ही बैंक से छोटे कॉरपोरेट और एक्सपोटर्स ने बैंक से करीब 13000 करोड़ रुपये उधार लिए। ये धनराशि उन्होंने कभी नहीं लौटाई। उस वक्त बैंक के चेयरमैन एम. गोपालाकृष्णन थे।

16. चारा घोटाला (1996)
वर्ष 1996 में बिहार में हुआ यह उस समय का सबसे बड़ा घोटाला था। चारा घाटाले ने देश में सनसनी फैला दी थी, क्योंकि यह एेसा घोटाला था, जो एक-दो करोड़ रुपये से शुरू होकर अब 360 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा था। जानकारों की मानें तो अभी भी यह पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घपला कितनी रकम का था। इस घपले के सूत्रधार बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे।

17. लक्खू भाई पाठक स्कैल
अचार व्यापारी लक्खू भाई पाठक ने नरसिम्हाराव और चंद्रा स्वामी पर 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया। लक्खू भाई पाठक इंग्लैंड में रहने वाले भारतीय व्यापारी थे। उन्होंने यह आरोप लगाया कि 100 हजार पाउंड उन्हें बेवकूफ बनाकर इन दोनों ने ठग लिए थे।

18. टेलीकॉम स्कैम
सुखराम जो कि दूरसंचार मंत्री थे, पर आरोप लगा कि उन्होंने हैदराबाद की एक निजी कंपनी को टेंडर दिलाने में मदद की, जिसकी वजह से सरकार को 1.6 करोड़ रु पये का घाटा हुआ। 2002 में उन्हें इस मामले में जेल भी जाना पड़ा।

19. यूरिया घोटाला
नेशनल फर्टिलाइजर के एमडी सी एस रामकृष्णन ने कई अन्य व्यापारियों, जो कि नरसिम्हाराव के नजदीकी थे, के साथ मिलकर दो लाख टन यूरिया आयात करने के मामले में सरकार को 133 करोड़ रु पये का चूना लगा दिया। यह यूरिया कभी भारत तक पहुंच ही नहीं पाई। इस मामले में अब तक कुछ भी नहीं हुआ।

20. हवाला घोटाला
देश से बाहर धन भेजने की इस कला से आम हिंदुस्तानियों का परिचय इसी घोटाले की वजह से हुआ। 1991 में सीबीआई ने कई हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों पर छापे मारे। इस छापे में एस के जैन की डायरी बरामद हुई। इस तरह यह घोटाला 1996 में सामने आया। इस घोटाले में 18 मिलियन डॉलर घूस के रूप में देने का मामला सामने आया, जो कि बड़े-बड़े राजनेताआें को दी गई थी।

21. झारखंड मुक्ति मोर्चा मामला
नरसिम्हाराव के समय झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शैलेंद्र महतो ने यह खुलासा किया कि उन्हें और उनके तीन सांसद साथियों को 30-30 लाख रुपये दिए गए, ताकि नरसिम्हाराव की सरकार को समर्थन देकर बचाया जा सके। यह घटना 1993 की है। इस मामले में शिबू सोरेन को जेल भी जाना पड़ा।

22. चीनी घोटाला
वर्ष 1994 में खाद्य आपूर्ति मंज्ञी कल्पनाथ राय ने बाजार भाव से भी महंगी दर पर चीनी आयात का फैसला लिया यानी चीनी घोटाला। इस कारण सरकार को 650 करोड़ रु पये का चूना लगा। अंतत: उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। उन्हें इस मामले में जेल भी जाना पडा।

23. जूता घोटाला
सोहिन दया नामक एक व्यापारी ने मेट्रो शूज के रफीक तेजानी और मिलानो शूज के किशोर सिगनापुरकर के साथ मिलकर कई सारी फर्जी चमड़ा कोऑपरेटिव सोसाइिटयां बनाईं और सरकारी धन लूटा। 1995 में इसका खुलासा हुआ और बहुत सारे सरकारी अफसर, महाराष्ट्र स्टेट फाइनेंस कार्पोरेशन के अफसर, सिटी बैंक, बैंक ऑफ आेमान, देना बैंक आदि भी इस मामले में लिप्त पाए गए।


25. मैच फिक्सिंग
साल 2000 का मैच फिक्सिंग याद कीजिए। जेंटलमैन स्पोर्ट्स यानी क्रि केट में मैच फिक्सिंग का धब्बा पहली बार भारतीय खिलाड़ियों पर लगा। इसमें प्रमुख रूप से अजहरु द्दीन और अजय जडेजा का नाम सामने आया। अजय शर्मा और अजहर पर आजीवन प्रतिबंध लगा तो जडेजा और मनोज प्रभाकर पर पांच साल का प्रतिबंध।

26.बराक मिसाइल रक्षा सौदे
बराक मिसाइल रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार का एक और नमूना बराक मिसाइल की खरीदारी में देखने को मिला। इसे इजरायल से खरीदा जाना था, जिसकी कीमत लगभग 270 मिलियन डॉलर थी। इस सौदे पर डीआरडीपी के तत्कालीन अध्यक्ष ए पी जे अब्दुल कलाम ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी। फिर भी यह सौदा हुआ। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई। एफआईआर में समता पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष आर के जैन की गिरफ्तारी भी हुई।

27. यूटीआई घोटाला
48 हजार करोड़ रु पये का यह घोटाला पूर्व यूटीआई चेयरमैन पी एस सुब्रमण्यम और दो निदेशकों एम एम कपूर और एस के बासु ने मिलकर किया। ये सभी गिरफ्तार हुए, लेकिन सशाा किसी को नहीं मिली।

28. तेल के बदले अनाज
वोल्कर रिपोर्ट के आधार पर यह बात सामने आई कि तत्कालीन विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपने बेटे को तेल का ठेका दिलाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

29. ताज कॉरिडोर
175 करोड़ रु पये के इस घोटाले में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती पर लगातार तलवार लटकी रही और अब भी लटकी हुई है। सीबीआई के पास यह मामला है।

30. मनी लांडरिंग
मुख्यमंत्री रहते हुए कोई अरबों की कमाई कर सकता है, यह साबित किया झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोडा ने। 4 हजार करोड़ से भी ज्यादा की काली कमाई की कोड़ा ने। बाद में इन पैसों को विदेश भेजकर जमा किया और विदेशों में निवेश किया। इस मामले में केस दर्ज हुआ। कोड़ा फिलहाल जेल में है।

31. आदर्श घोटाला
आदर्श कोऑपरेटिव सोसाइटी (लि.) ने गैर कानूनी तरीके से कोलाबा के आवासीय क्षेत्र नेवी नगर और रक्षा प्रतिष्ठान के आसपास इमारत का निर्माण किया। यह योजना कारगिल युद्ध में शहीद हुए लोगों के परिवार वालों के लिए बनाई गई थी, जबकि इसके फ्लैट्स 80 फीसदी असैनिक नागरिकों को आवंटित किए गए। इस कारनामे में सेना के शीर्ष अधिकारी तक शामिल थे। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से इस्तीफा ले लिया गया।



33. केतन पारेख स्टॉक मार्केट घोटाला
स्टॉक मार्केट के नाम पर अपने शेयर होल्डरों को करारा झटका देते हुए केतन पारेख ने 1 हजार करोड़ रु पये का घोटाला किया।

34. आईपीएल घोटाला
वित्तीय अनियमतिताआें के चलते आईपीएल-3 के समापन के तत्काल बाद आईपीएल प्रमुख ललित मोदी के पद से निलंबित कर दिया गया। मामले की जांच अभी भी चल रही है। मोदी के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस भी किया गया। किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स की मालिकी के हक पर सवाल भी उठा। एेसा माना जाता है कि इस प्रतियोगिता में भारी मात्रा में काले धन लगा है। कोच्चि की टीम से जुड़े केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को अपने पद से हाथ धोना पड़ा और उनकी मित्र सुनंदा ने भी इससे खुद को अलग कर लिया। इस संघ का नेतृत्व करने वाली कंपनी रांदेवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड को इस सौदे में 25 प्रतिशत फ्री इक्विटी मिली थी। कहा गया कि इस फ्री इक्विटी में से 17 प्रतिशत कश्मीरी ब्यूटीशियन सुनंदा पुष्कर को मिली। आईपीएल में 1200 से 1500 करोड़ रु पए का घोटाला होने की बात कही जा रही है।

35. सत्यम घोटाला
सत्यम घोटाला कॉरपोरेट जगत में अबतक का सबसे बड़ा घोटाला था। उस समय भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी सत्यम कम्प्यूटर सर्विस ने रियल स्टे्टस और शेयर मार्केट के जरिए देश को 14 हजार करोड़ रु पये चूना लगाया। कंपनी के चेयरमैन रामालिंगा राजू ने लोगों को काफी समय तक अंधेरे में रखा और शेयर के सारे पैसे अपने नाम कर लिए।

36. स्टांप घोटाले
भारत में हुए हर घोटालों में कुछ न कुछ नया जरूर था। चाहे वह घोटाले की राशि हो या फिर घोटाले का तरीका। एेसे में एक नए और अदभुत घोटाले के रूप में सामने आया स्टांप घोटाला। स्टांप की हेरा फेरी कर अब्दुल करीम तेलगी ने देश को 20 हजार करोड़ रु पये का लंबा चूना लगाया। इस घोटाले की खास बात यह थी कि तेलगी को सरकार का पूरा सहयोग मिला, जिसके चलते उसने स्टांप की हेरा फेरी को अंजाम दिया।

37. हसन अली टैस्क चोरी मामला
देश के सबसे बड़े कथित टैक्स चोर हसन अली पर 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का आरोप है। हसन अली और उनके सहायकों पर विदेशों में काला धन रखने के आरोप हैं। हसन अली पर आरोप है कि उसने स्विस बैंकों में 8 अरब डॉलर रखे हैं। उस पर यह भी आरोप है कि उसने अपनी आमदनी छिपाई और 1999 के बाद से आय कर रिटर्न दाखिल नहीं किया है।

मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान





**** हिन्द भूमि की हम संतान ----

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान
नील गगन मे लहराएंगे भगवा अमर निशान ॥धृ॥

स्वार्थ छोड कर सब अपना माया ममता का सपना
नींद हमारी छोडे हम आगे कदम बढाए हम
कदम कदम पर हिल मिल गाए यह स्फूर्ती का गान ॥१॥


झगडे छोडे ऐक्य करे हम धर्म संस्कृती नही भूले हम
इतिहासो की साक्षी ले हम नर वीरो का स्मरण करे हम
विपद स्थिति से मातृभूमी का करना है उत्थान ॥२॥


संघ कार्य आसान नही है लेकिन डरना काम नही है
निशी दिन कष्ट उठाना है कार्य पूर्ती अब करनी है
मातृभूमी का मान बढाने होना है बलिदान ॥३॥


रामचन्द्र की भूमी यही है नन्दलाल की भूमी यही है
क्षात्र धर्म का तेज यही है मानवता का मोल यही है
देश भक्त और नर वीरो का प्यारा हिन्दुस्थान ॥४॥

राहुल जहां - जहां जाते हैं वहां - वहां से कांग्रेस साफ हो जाती है - अरविन्द सिसोदिया


( भारतीय जनता पार्टी, शहर जिला कोटा के महामंत्री अरविन्द सिसोदिया )

राजस्थान में कांग्रेस को  “ नो ” चांस - सिसोदिया

राहुल जहां - जहां जाते हैं वहां - वहां से कांग्रेस साफ हो जाती है - अरविन्द सिसोदिया

   राजस्थान में कांग्रेस को  “ नो ” चांस - सिसोदिया
राहुल जहां - जहां जाते हैं वहां - वहां से कांग्रेस साफ हो जाती है - अरविन्द सिसोदिया
    कोटा । भारतीय जनता पार्टी, शहर जिला कोटा के महामंत्री अरविन्द सिसोदिया ने कहा “ कांग्रेस को राहुल गांधी की बांरा सभा से अनावश्यक उत्साहित होनें की जरूरत नहीं हे। पहले भी वे बांरा आये थे तब बांरा जिले में कांग्रेस के चार एमएलए थे और राहुल गांधी के आनें के बाद बांरा में कांग्रेस का सूपडा साफ हो गया था। ” उन्होने कहा ”बांरा में कांग्रेस राजकुमार की सभा के आयोजक स्वंय प्रमोद भाया उनकी यात्रा से पहले राजस्थान सरकार में मंत्री थे जो बाद में पराजित विधायक हो चुके है।“ सिसोदिया ने कहा “कांग्रेस राजकुमार जहां - जहां जाते हैं वहां - वहां कांग्रेस साफ हो जाती हे।”
     भाजपा महामंत्री अरविन्द सिसोदिया ने व्यंग कसते हुए कहा  “ दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत अब कांग्रेस के पोेस्टर - फलेक्सों से गायब हो जुके हैं लगता है उन्हे कांग्रेस ने आमसभाओं के वीडियो बनानें का काम दे दिया गया है। ” उन्होनें कहा “राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को तो अजमेर की ही जनता ने रिजेक्ट किया हुआ, उन्हे राजस्थान में कोई सीरियस ही नहीं लेता । ”

सिसोदिया ने कहा “ राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के कुशल नेतृत्व में राजस्थान खुशहाल और प्रगति के पथ पर है। राजस्थान में कांग्रेस को नो चांस । ”

    जिला महामंत्री ने कहा “ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, आप पार्टी के केजरीवाल के झूठे आरोंपों को रट - रट कर दोहराते रहते है। उनका केजरीवाल की नकल करना कांग्रेस के राजनैतिक पतन की पराकाष्ठा है। ” उन्होने कहा “ कांग्रेस राजकुमार सबसे ज्यादा दिल्ली में रहे जो 15 साल की सरकार चलाने वाली कांग्रेस 0 पर पहुंच गई ।”

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया,
भाजपा जिला महामंत्री
9414180151 

बसपा के खाते में 104 करोड़ रुपये नकद जमा हुए



मायावती की सफाई, बसपा ने नियमों के मुताबिक बैंक में जमा कराया पैसा
By Ashish Mishra Publish Date:Tue, 27 Dec 2016
लखनऊ (जेएनएन)। बहुजन समाज पार्टी के एक खाते में नोटबंदी के बाद 104.36 करोड़ रुपये नकद जमा किये जाने की बात सामने आने के बाद मायावती ने सफाई देते हुये कहा है कि बसपा ने नियमों के आधार पर ही बैंक में पैसा जमा कराया है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि हमारे पास एक-एक पैसे का हिसाब है कि रूपया कहां से आया है।

मैने चंदा के पैसे को जमा कराया
मायावती ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर बीएसपी की छवि खराब की जा रही,अन्य पार्टियों ने भी इसी दौरान चंदे का पैसा जमा कराया। ईमानदारी के साथ मैने चंदा के पैसे को जमा कराया,रुटीन प्रकिया के तहत चंदा की राशि बैंक में जमा कराई। कार्यकर्ता छोटे नोट लेकर नहीं आते हैं,बड़े नोट लेकर आने में आसानी होती है,चंदा से एकत्रित पैसे को हमने जमा कराया। 21 अगस्त से लेकर नवंबर तक मैं यूपी में रही हूँ,नोटबंदी जब हुई तो मैं लखनऊ में थी। रुटीन प्रक्रिया के तहत BSP ने धनराशि जमा कराई,कार्यकर्ता पूरे देश से बड़े नोट लेकर आते हैं,पार्टी के लिए चंदा एकत्रित करते हैं। नेताओं ने कुछ चैनलों को मैनेज किया,कुछ अख़बारों को भी बीजेपी ने मैनेज किया।
मायावती ने आरोप लगाया, भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। मायावती ने कहा, हमारे पास बैंक में जमा एक-एक रूपये का हिसाब है लेकिन भाजपा ने जो रूपये जमा किए हैं उसका क्या। सभी जमा नियमों के तहत है, धन नोटबंदी से पहले जमा किया गया था।

बीजेपी दलित विरोधी मानसिकता वाली पार्टी
BSP के प्रभावशाली लोगों को शिथिल करने की साजिश,बीएसपी के अन्य नेताओं को भी परेशान किया जा सकता है। मेरे भाई ने नियमों के तहत अपनी धनराशि जमा कराई,BJP,कुछ चैनल और अख़बार गलत प्रदर्शित कर रहे हैं। BJP की राजनीतिक द्वेष की भावना प्रदर्शित हो रही,मेरे भाई आनंद पिछले कई वर्षों से अपना कारोबार कर रहे। BJP खुद अपनी पार्टी के चंदे का हिसाब सार्वजनिक करे,बड़े-बड़े कार्यों में इस्तेमाल धनराशि को उजागर करे BJP, नोटबंदी का फैसला बिना तैयारी लिया गया, नोटबंदी से देश की 90% जनता परेशान,धन्ना सेठ,पूंजीपतियों को कोई परेशानी नहीं बीजेपी दलित विरोधी मानसिकता वाली पार्टी है,BJP नहीं चाहती दलित की बेटी के हाथ मास्टर चाबी आये। बीजेपी समेत अन्य पार्टियों के पैसे की चर्चा नहीं हो रही,दलित विरोधी मानसिकता के तहत साजिश हो रही।


बीजेपी के लोग मीडिया में गलत ख़बरें प्रदर्शित करा रहे
यूपी में बीएसपी की सरकार बनने जा रही है,बीजेपी एंड कंपनी के लोग साजिश रच रहे हैं,BJP ने आय से अधिक संपत्ति का जबरन मुद्दा बनाया। ताज प्रकरण का BSP से दूर-दूर तक वास्ता नही रहा, किसी फाइल पर मेरे हस्ताक्षर नही हुए है, BJP की जातिवादी मानसिकता साफ झलक रही है। अमित शाह चिल्ला-चिल्लाकर ताज पर प्रकरण पर बोलते हैं,सतीश मिश्रा जी ने ताज प्रकरण पर कई बार मीडिया को बताया। BSP को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की साजिश हो रही,बीजेपी के लोग मीडिया में गलत ख़बरें प्रदर्शित करा रहे। जनता 2007 की तरह फिर बीएसपी को पूर्ण बहुमत देगी,बीजेपी के गलत प्रचार से BSP को फायदा ही होगा। पूर्ण बहुमत की BSP सरकार बनेगी,बीजेपी के लोग घर बैठे हमारी सरकार बनाने वाले हैं,मेरे खिलाफ गलत प्रचार कर रही बीजेपी। 2007 में जनता ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी,BJP के विरोध के बाद भी पूर्ण बहुमत मिला था,जनता पर पूरा भरोसा।

बीजेपी के लोग मंदिरों में जाकर मंतर मारते हैं, नोटबंदी से लोग परेशान,क्या ये पुण्य का काम है नोटबंदी पर कोई भी पार्टी मुंह खोलने को तैयार नहीं थी,सबसे पहले बीएसपी ने नोटबंदी पर विरोध दर्ज कराया। नियमो को पालन करती हूँ,पार्टी चला रही हूँ,मै खुद वकील हूं,नियम-कानून मालूम है,BJP सरकार मे ताजप्रकरण मामला दर्ज हुआ। नोटबंदी से मरने वाले लोगों के परिवारों की मदद करे केंद्र सरकार,BSP के नेताओं को परेशान किया जा रहा है।

बसपा के खाते में जमा हुये 104 करोड़
बताते चलें कि दिल्ली के करोलबाग स्थित यूनियन बैंक आफ इंडिया में बसपा के इस खाते में 10 नवंबर से नौ दिसंबर के बीच में 104 करोड़ की रकम जमा कराई गई थी। गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती नोटबंदी का जबरदस्त विरोध कर रही हैं और इसे आर्थिक आपातकाल बता चुकी हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बसपा के खाते में जमा इस रकम के बारे में प्रवर्तन निदेशालय के आडिट के दौरान पता चला। नोटबंदी के बाद ईडी पूरे देश में 50 बैंक शाखाओं का आडिट करा रहा है, जिनमें सबसे अधिक पुराने नोट जमा किए गए थे। इनमें यूनियन बैंक आफ इंडिया की करोलबाग ब्रांच भी शामिल थी। सूत्रों के अनुसार बसपा के इस खाते में इस साल जनवरी से जुलाई के बीच कोई रकम नहीं जमा कराई गई थी। जबकि अगस्त में 21 करोड़ रुपये और सितंबर में केवल 12 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे।
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नोटबंदी के बाद बसपा के एक खाते में जमा हुए 104 करोड़ रुपये नकद
By Kamal Verma Publish Date:Mon, 26 Dec 2016

बहुजन समाज पार्टी के एक खाते में 10 नवंबर से नौ दिसंबर के बीच में 104.36 करोड़ रुपये नकद जमा हुए हैं। इसके साथ ही अब राजनीतिक भी आयकर विभाग के रडार पर आ गए हैं।
नई दिल्ली (नीलू रंजन)। कालेधन को सफेद करने वाले बैंक अधिकारियों, बिचौलियों और हवाला कारोबारियों के खिलाफ देशव्यापी अभियान के बीच राजनीतिक दलों की भी पोल खुलनी शुरू हो गई है। ऐसे पहले खुलासे में बहुजन समाज पार्टी के एक खाते में नोटबंदी के बाद 104.36 करोड़ रुपये नकद जमा किये जाने की बात सामने आई है।
दिल्ली के करोलबाग स्थित यूनियन बैंक आफ इंडिया में बसपा के इस खाते में 10 नवंबर से नौ दिसंबर के बीच में यह रकम जमा कराई गई थी। गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती नोटबंदी का जबरदस्त विरोध कर रही हैं और इसे आर्थिक आपातकाल बता चुकी हैं।
बसपा के बैंक खातों को लेकर वित्त राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा, "जिसने भी व्यवस्थाओं का दुरूपयोग किया है, चाहे कोई पार्टी हो या कितना बड़ा आदमी हो, उसको निश्चित रूप से सजा मिलेगी। 30 दिसंबर के बाद भी पैसै जमा हो सकते हैं आरबीआई में और आरबीआई में कैसे होंगे उसके लिए ऑर्डिनेंस तो आएगा ही।"
UP चुनाव से पहले मायावती को झटका, भाई के खाते में जमा हुए 1.50 करोड़
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बसपा के खाते में जमा इस रकम के बारे में प्रवर्तन निदेशालय के आडिट के दौरान पता चला। नोटबंदी के बाद ईडी पूरे देश में 50 बैंक शाखाओं का आडिट करा रहा है, जिनमें सबसे अधिक पुराने नोट जमा किए गए थे। इनमें यूनियन बैंक आफ इंडिया की करोलबाग ब्रांच भी शामिल थी। सूत्रों के अनुसार बसपा के इस खाते में इस साल जनवरी से जुलाई के बीच कोई रकम नहीं जमा कराई गई थी। जबकि अगस्त में 21 करोड़ रुपये और सितंबर में केवल 12 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे।
अक्टूबर में भी इस खाते में कुछ नहीं जमा किया गया था। नोटबंदी के बाद अचानक 104.36 करोड़ रुपये नकदी जमा होने से जांच एजेंसियों के कान खडे़ हो गए हैं। बसपा के खाते में इस रकम के बारे में ईडी ने तत्काल आयकर विभाग से संपर्क किया। इसके बाद आयकर विभाग ने एक महीने के भीतर इतनी बड़ी रकम जमा किये जाने की जांच शुरू कर दी है।
मायावती पर IT विभाग की नजर, भाई आनंद कुमार की बेनामी संपत्ति की जांच शुरू
नियम के मुताबिक राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये से अधिक का चंदा मिलने पर इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होती है। एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक बैंक खाते में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी जमा कराए जाने के खुलासे के बाद बसपा के दूसरे बैंक खाते भी जांच के दायरे में आ गए हैं। आयकर विभाग को इन सभी खातों की पड़ताल करने को कह दिया गया है।
बसपा के खाते का खुलासा होने के बाद अन्य राजनीतिक दल भी आयकर विभाग के निशाने पर आ गए हैं। माना जा रहा है कि इससे राजनीतिक दलों की फंडिंग को पारदर्शी बनाने की जोर पकड़ती मांग को बल मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद राजनीतिक दलों की फंडिंग को पारदर्शी बनाने के मुद्दे पर व्यापक बहस का समर्थन कर रहे हैं।
यूनियन बैंक आफ इंडिया की इसी शाखा में बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद कुमार का भी खाता है। आनंद कुमार के खाते में भी नोटबंदी के बाद 1.43 करोड़ रुपये जमा कराये गए थे। जिनमें 18.98 लाख रुपये नकद जमा कराये गए थे। शेष रकम आरटीजीएस के माध्यम से दूसरी कंपनियों से इस खाते में आए थे। अब आयकर विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आनंद कुमार के खाते में आरटीजीएस करने वाली कंपनियों के पास धन कहां से आया था और किस काम के लिए दिया गया था।
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आशंका है कि इन कंपनियों के मार्फत कहीं पुराने नोट के रूप में जमा कालेधन को सफेद तो नहीं बनाया गया था। आनंद कुमार की कई कंपनियां पहले से ही एजेंसियों के रडार पर हैं। इन कंपनियों में हजारों करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। सूत्र बताते हैं कि इस लेन-देन की तह तक जाने के लिए नोएडा के कई बिल्डरों को नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके पहले आनंद कुमार 400 करोड़ रुपये की एफडी को लेकर आयकर विभाग की जांच के घेरे में थे।


रविवार, 25 दिसंबर 2016

लोककल्याण का पर्याय : अटलबिहारी वाजेपयी - प्रेमनारायण गालव





गालव का कोटा भाजपा ने अभिनंदन किया 
लोककल्याण का पर्याय : अटलबिहारी वाजेपयी - प्रेमनारायण गालव


      कोटा 25 दिसम्बर । भारतीय जनता पार्टी, शहर जिला कोटा की ओर से आयोजित "तुम जियो हजारों साल" कार्यक्रम के मुख्यवक्ता एवं मुख्यअतिथि के रूप में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त "वरिष्ठजन कल्याण बोर्ड" के अध्यक्ष प्रेमनारायण गालव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा " भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी लोककल्याण के पर्याय हैं । उन्होने देश की सुरक्षा को मजबूती के लिए भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाया, कारगिल यु़द्ध में पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, देश में गुणवत्तायुक्त अच्छी सडकें बनाने का काम भी अटल सरकार में हुआ, कांगेस ं 25 साल में भी जितनी सडकें नहीं बना सकीं, उतनी सड़कें वाजपेयी सरकार में 5 साल में बनाईं। स्वर्ण चतुर्भुज सड़क योजना, ईस्टवेस्ट कारीडोर, नोर्थ साउथ कारीडोर बना कर देश को लम्बी सड़कें भी उन्होने ही दीं। लाखों गांवों को पक्की सड़कों को जोड़ने का काम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वारा वाजपेयी सरकार में ही हुआ।"
 उन्होने कहा " मोबाईल क्रांती अटलजी की देन थी, मेट्रो रेल अटलजी की देन थी। अटलजी के राज में जीडीपी का औसत 6 से 7 प्रतिशत रहा । किसानों को साहूकारी कर्ज से मुक्त करवानें में अटलजी ने किसान क्रेडिट कार्ड की योजना दी, फसलों के नष्ट होने पर किसानों को राहते देनें के लिये फसल बीमा योजना लागू की। कुल मिला कर अटलजी का शासन, भारत के लोक कल्याण की ऐतिहासिक इबारत लिखता है। "

     कार्यक्रम के अध्यक्ष भाजपा जिला अध्यक्ष हेमन्त विजयवर्गीय ने कि " अटलजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में देश बसता है। उनके सम्बोधनों में देश बोलता है। पूर्णतः देशहित को समर्पित अटलजी पहले भारतीय थे जिन्होनें हिन्दी को संयुक्त राष्ट्रसंघ में गुंजाया था। "  विजयवर्गीय ने कहा " अटलजी का नदियों को जोडनें का सपना साकार हो जाता तो देश के हर हाथ को रोजगार और अधिकतम जमीन पर सिंचाई का पानी होता। जिससे देश की समृद्धि में बहुत अधिक वृद्धि होती।" उन्होने कहा " अटलजी के नेतृत्व में देश का सर्वाधिक उत्पादन बड़ा था, मंहगाई और मुद्रास्तिफी पर नियंत्रण था। आज उनके मार्ग को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे बड़ा रहे हैं।"
     उन्होने कहा " अटलजी का सम्मान उनका घोर विरोधी भी करते हैं, वे राजनीति में हमेशा राजनीति से ऊपर उठ कर काम करते रहे हैं। बांगलादेश के निर्माण पर अभिभूत बधाई जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीजी को अटलजी ने दी तो बहुत से लोग स्तब्ध थे। उनके शेष कामों को वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार पूर्ण करेगी। "
     पूर्व महापौर श्रीमती सुमन श्रृंगी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी एक महान राजनेता है। ईश्वर उनको दीर्घायु प्रदान करें।ं वरिष्ठ भाजपानेता  जटाशंकर शर्मा ने कहा अटलजी ने कम समय में भी जितने काम करे उनका स्मरण देश हजारों वर्षों तक करेगा। चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ0 गोपालसिंह भाटी ने कहा एक महान नेता के रूप में अटलजी ने इस देश को बहुत कुछ दिया है। देश में आम व्यक्ति के जीवनस्तर को बढ़ानें के लिए अधिकतम प्रयास वाजपेयी सरकार में ही हुआ ।
      जिला महामंत्री अरविन्द सिसौदिया ने वाजपेयी सरकार के प्रमुख कार्यों को वर्णन करते हुये बताया कि " बांरा-कोटा - चित्तौड़ से गुजरने वाला ईस्ट वेस्ट कारीडोर जिससे कोटा को बाईपास और हैंगिग ब्रिज, कोटा को मिला, अटलजी की कोटा को बहुत बडी सौगात है। अटल सरकार की हजारों सडकें गांवों को जोड़ रहीं हैं। तो सैंकडों एनीकट जल संरक्षण कर रहे हैं।"
      कार्यक्रम संचालन जिला महामंत्री अरविन्द सिसोदिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन जिला महामंत्री अमित शर्मा ने किया। कार्यक्रम के पूर्व में वरिष्ठजन कल्याण बोर्ड के चेयरमेन प्रेमनारायण गालव का भाजपा शहर जिला कोटा की ओर से जिला अध्यक्ष हेमन्त विजयवर्गीय ने शाल उड़ा कर, साफा बंधा कर, श्रीफल भेंट कर अभिनंदन किया गया।
      एससी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामअवतार मराठा, जिला उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनी, सतीश गोपालानी, विशाल जोशी, अशोक चौधरी, त्रिलोक सिंह, जिला मंत्री मुकेश विजय, राजेन्द्र अग्रवाल, राकेश मिश्रा, अशोक जैन,अर्थपाल सिंह, कार्यालय मंत्री गोपालकृष्ण सोनी ।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष बृजमोहन सेन, महिला मोर्चा प्रभारी डॉ0 प्राची दीक्षित, जिला महामंत्री रेखा खेलवाल, श्रीमती तनुजा खन्ना, श्रीमती कृष्णा खण्डेलवाल, श्रीमती कुलदीप कौर, श्रीमती लक्ष्मी शर्मा, पार्षद श्रीमती रेखा लखेरा, पार्शद कृष्णमुरारी सांवरिया, एस सी मोर्चा अध्यक्ष अशोक बादल, किसान मोर्चा अध्यक्ष गिरिराज गौतम, एसटी मोर्चा के प्रदेश कार्यकारणी सदस्य महेश मीना सहित भाजपा मण्डल अध्यक्ष किसन प्रजापति, सत्यप्रकाश लोधा, पंकज साहू,  शिवनारायण शर्मा, शेलेन्द्र ऋषि, उमेश मेवाडा, बालचन्द फौजी, कृष्णकांत गोयल, विवेक मित्तल, मनीष गालव, रामलाल टटवाडिया, खेमचन्द्र शाक्यवाल मण्डल महामंत्रियों में पवन भटनागर, रमेश शर्मा, पवन पारीक, किशोर सिंह, प्रमोद मित्तल, मनोज निराला, देवेन्द्र तिवारी, गिरिश बोहरा, जगदीश विजय, सियाराम वैष्णव, मुकेशसिंह राजावत, शिवनारायण शर्मा, प्रखर कौशल, लोकेश चतुर्वेदी, आईटी सेल के प्रदेश सह संयोजक मयंक सेठी एवं प्रणय विजय, जिला संयोजक सुनील पोकरा, रोहित गर्ग, सचिन मिश्रा मोनू, घनश्याम ओझा, बृजेश विजय, निहाल प्रजापति राधेश्याम प्रजापति सहित वरिष्ठ भाजपा नेता रामसहाय शर्मा, रिछपाल पारीक,रविन्द्रसिंह सोलंकी, सुरेश लखेरा, पुरूशोत्तम अजमेरा, नंदलाल प्रजापति, बाबूलाल माली, राजेन्द्र चित्तौड़ा, आदि ने प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।        
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया,
जिला महामंत्री भाजपा शहर जिला कोटा
9414180151


शनिवार, 24 दिसंबर 2016

देश मोदी जी के साथ : सब ठीक कर देंगे : ऑनलाइल पोल





59 फीसदी लोगों ने माना, मोदी 50 दिनों में सब ठीक कर देंगे: ऑनलाइल पोल
इकनॉमिक टाइम्स | Updated: Dec 23, 2016
नई दिल्ली
नोटबंदी के फैसले के बाद अधिकतर लोगों को लगता है कि पीएम मोदी 50 दिन के भीतर सब ठीक कर देंगे। इकनॉमिकटाइम्स डॉट कॉम के ट्विटर हैंडल पर हुए एक पोल में आधे से अधिक लोगों ने पीएम के पक्ष में वोटिंग की है। दरअसल पीएम ने नोटबंदी के फैसले के बाद लोगों से कहा था कि उन्हें केवल 50 दिन चाहिए, सारी समस्याएं ठीक कर दी जाएंगी।

अब पीएम के इस 50 दिन के वादे को पूरा होने में कुछ ही दिन बाकी हैं। नोटबंदी के फैसले के मुताबिक 30 दिसंबर तक 500, 1000 रुपये के पुराने नोटों को बदलने की समय सीमा रखी गई है। इस बीच इकनॉमिकटाइम्स डॉट कॉम ने लोगों का मूड भांपने के लिए ट्विटर पर एक पोल किया। इस पोल के परिणाम मोदी सरकार के राहत देने के साथ-साथ चिंतित करने वाले भी हैं।


पोल में लोगों से पूछा गया था कि क्या नरेंद्र मोदी 50 दिनों में कैश की समस्या खत्म करने के अपने वादे को पूरा कर पाएंगे? इस सवाल के जवाब में 59 फीसदी लोगों ने माना कि पीएम अपना वादा पूरा करेंगे। 30 फीसदी लोगों का कहना है कि पीएम वादा पूरा नहीं कर पाएंगे, जबकि 11 फीसदी लोग किसी निर्णय पर पहुंचते नहीं दिखाई दिए।

पोल के रिजल्ट से साफ है कि फिलहाल लोगों को भरोसा है कि पीएम समस्या का समाधान ढूंढ निकालेंगे। आने वाले दिनों में अगर दिक्कतें खत्म नहीं हुईं तो नकारात्मक वोटिंग करने वालों का प्रतिशत बढ़ भी सकता है। नोटबंदी के फैसले के 45 दिन बीत जाने के बावजूद कैश संबंधित समस्या खत्म नहीं हुई है।
इस बीच विपक्षी दल भी लगातार सरकार पर हमलावर हैं। नोटबंदी के बाद कैश के लिए लाइन में लगे लोगों की मौत को लेकर संसद से सड़क तक सरकार को घेरने की कवायद लगातार चल रही है। नोटबंदी ने सर्कुलेशन में मौजूद 87 फीसदी करंसी को अचानक से बैंकों में वापस डाल दिया। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि ऐसी स्थिति में पैदा हुए संकट से निपटने में कुछेक महीने और भी लग सकते हैं।

'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी




'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में 10 बड़ी बातें
ABP News > India News > Wednesday, 24 December 2014

नई दिल्ली: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित

वाजपेयी के नेतृत्व की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि वे एनडीए सरकार के पहले ऐसे प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर-कॉग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए. उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे. कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की.

यहां आपको बताते हैं  अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में दस बड़ी बातें-
1. वाजपेयी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक है और 1968 से 1973 तक वह उसके अध्यक्ष भी रहे थे. राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वाजपेयी एक अच्छे कवि और संपादक भी थे. वाजपेयी ने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया.

2. अटल बिहारी वाजपेयी का 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालिया में हुआ था. अटल बिहारी वाजपेयी की पढ़ाई-लिखाई कानपुर में हुई. वे अपने कॉलेज के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गए थे. वाजपेयी ने राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कानपुर के एक कॉलेज से किया. एलएलबी बीच में ही छोड़कर वाजपेयी राजनीति में पूरी तरह सक्रीय हो गए. राजनीति में उनका पहला कदम अगस्त 1942 में रखा गया, जब उन्हें और बड़े भाई प्रेम को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार किया गया.

3. 1951 में वाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य थे. उन्होंने 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे.

4. 1957 से 1977 तक (जनता पार्टी की स्थापना तक) जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे. 1968 से 1973 तक वे भारतीय जनसंघ के राष्टीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे.

5. 1977 में पहली बार वाजपेयी गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री बने. मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया. अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था.

6. 1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की. 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे. दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए. 16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने. लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.

7. अटल बिहारी वाजपेयी अब तक नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं. वे सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी.

8. परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की संभावित नाराजगी से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिये साहसी कदम भी उठाये. 1998 में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया.

9. अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं. ‘मेरी इक्यावन कविताएँ’ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है. वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं. उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे.

10. अटल बिहारी वाजपेयी 1992 में पद्म विभूषण सम्मान, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार और 1994 में ही गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं.





गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

राहुल गांधी फिर से फैल


कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आरोप में नयापन नहीं

फिर से पप्पू फैल हो गया  

        अपनी राजनीती चमकानें  की जी तोड़ कोशिस कर रहे राहुल ने इस बार मोदीजी पर आरोप लगाने में नकलमारी की !! एक डायरी , किसने लिखी , पता नहीं !  नाम दे दिया की सहारा ने लिखी , कभी पुष्ठि हुई नही !! इस डायरी को सर्वोच्च न्यायालय ने सबूत मानाने से इंनकार कर दिया !!  इन आरोपों को पहले भी प्रशांत भूषण ] अरविन्द केजरीवाल लगा चुके हैं ! कहीं इनको मान्यता नहीं मिली ! कुल मिला कर एक बार फिर से पप्पू फैल हो गया !    - अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा , कोटा राजस्थान । 


       नई दिल्ली।  बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाए करप्शन के सनसनीखेज आरोप में नयापन नहीं है। जानकारी के मुताबिक़ उन्होंने जिन डाक्यूमेंट्स के आधार पर आरोप लगाए हैं सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भरोसेमंद मानने से इनकार किया है। बता दें कि ये आंकड़े सुप्रीम कोर्ट में दायर उस पीआईएल का हिस्सा हैं, जिसे सहारा और बिड़ला केस में वकील प्रशांत भूषण ने दाखिल किया है। इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़ कोई भी करप्ट आदमी मोदी के नाम पर इस तरह एंट्री दर्ज कर सकता है। उसे भरोसेमंद नहीं माना जा सकता।

सहारा-बिड़ला मामले में प्रशांत से कोर्ट ने मांगे हैं पुख्ता सबूत
बता दें कि सहारा-बिड़ला मामले में प्रशांत भूषण ने जो साक्ष्य सुप्रीम कोर्ट में रखे हैं, कोर्ट ने उसे मानने से इनकार किया है और उनसे पुख्ता सबूत लाने को कहा है। बगैर पुख्ता सबूत वह इस मामले पर सुनवाई के लिए राजी नहीं है। 11 जनवरी को इस मामले की अगली सुनवाई तय है।

इन्हीं आंकड़ों पर केजरीवाल भी लगा चुके हैं आरोप
इसी याचिका के एक हिस्से के आधार पर अरविंद केजरीवाल भी सवाल उठा चुके हैं और जिस दूसरे हिस्से को लेकर राहुल ने आरोप लगाया है, वह भी पहले सामने आ चुका है। वकील प्रशांत भूषण भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में इस पर विस्तार से चर्चा कर चुके हैं।

सी-वोटर सर्वे: राहुल के आरोप पर जनता मोदी के साथ

उधर, एक सर्वे में लोगों ने राहुल गांधी द्वारा मोदी पर लगाए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बता दें कि पिछले दिनों संसद की कार्यवाही से पहले राहुल ने मोदी पर करप्शन के आरोप लगाते हुए कहा था कि मैं संसद में बोलूंगा तो भूकंप आ जाएगा। नोटबंदी और करप्शन के इन्हीं सवालों को लेकर सी-वोटर ने एक सर्वे करवाया। सर्वे में लोग अब भी मोदी के साथ नजर आए। बता दें कि 82 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने माना है कि राहुल द्वारा मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप आधारहीन हैं।

मेहसाणा में क्या आरोप लगाए थे राहुल गांधी ने?
मेहसाणा में राहुल ने मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और कहा था कि उन्होंने सहारा से 6 महीने के अंदर 9 बार में 41 करोड़ से ज्यादा रुपए लिए। राहुल ने कहा कि ये आंकड़े ढाई साल पहले आयकर विभाग को मिली एक डायरी में दर्ज हैं, जिसमें मोदी के नाम से एंट्री है।आयकर विभाग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि 30 अक्टूबर 2013 को 2.5 करोड़ रुपया मोदी को दिया गया। उसी साल 12 नवंबर को 5 करोड़, 27 नवंबर को 2.5 करोड़ और 29 नवंबर को 5 करोड़ रुपया दिया गया था। राहुल ने बताया कि 22 नवंबर 2014 को आयकर विभाग ने सहारा कंपनी पर छापा मारा था। सहारा मामले में कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट ने स्वतंत्र जांच की मांग भी की।

राहुल के आरोपों को भाजपा ने बताया शर्मनाक, कहा गंगा जैसे पवित्र हैं हमारे पीएम
राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने बुधवार शाम कड़ा जवाब दिया और इसे शर्मनाक बताया था। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, हमारे गंगा जैसे (पवित्र) पीएम के ऊपर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। ये (राहुल गांधी) सारे आरोप खीज में लगा रहे हैं। प्रसाद ने कहा, कांग्रेस का करप्शन का इतिहास रहा है। सभी कांग्रेसी सरकारों ने पब्लिक मनी लूटने के लिए लुटेरों को प्रमोट किया और उन्हें प्रश्रय दिया। प्रसाद ने राहुल के आरोपों को खीज करार दिया था।

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

आप भी मुझे सीधे फीडबैक दें : मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे





हमने आपको रिपोर्ट कार्ड सौंपा आप भी मुझे सीधे फीडबैक दें

21 Dec, 2016

राज्य सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर उदयपुर को 193 करोड़ की सौगात
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे जी ने कहा कि आज जब हम जनता के बीच जाकर पिछले तीन साल में किए गए विकास कार्यां और अच्छे कामों का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे हैं, आप लोगों का भी फर्ज है कि विकास कार्यां का जो फायदा आमजन को हुआ है लोग हमें चिट्ठी लिखकर बताएं, ताकि हमें सीधा फीडबैक मिले और जो अच्छे फैसले हुए हैं उन्हें और आगे बढ़ाया जा सके।

श्रीमती राजे राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को उदयपुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के बाद गांधी ग्राउण्ड में नसभा को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने करीब 193 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में लोग बडे़-बडे़ वादे करते हैं, लेकिन अपना रिपोर्ट कार्ड नहीं देते। हमने अच्छे काम और उसके ठोस परिणाम की बदौलत तीन साल के कार्यकाल में ही सुराज संकल्प पत्र में जनता से किए 75 प्रतिशत वादे पूरे कर दिखाये हैं। इसीलिए हम जनता के बीच जाकर अपना रिपोर्ट कार्ड उनके सामने रख रहे हैं।

श्रीमती राजे ने कहा कि अब जबकि वर्तमान कार्यकाल में दो वर्ष का समय ही बचा है, विरोधी जाति, मजहब सहित अलग-अलग मुद्दों पर प्रदेशवासियों को भटकाने की कोशिश करेंगे। लेकिन हमें अपने प्रदेश को नम्बर वन बनाने के लिए प्यार एवं विश्वास के साथ मिलजुल कर काम करना होगा।

सुन्दर और स्वच्छ उदयपुर अब बनेगा स्मार्ट
मुख्यमंत्री ने उदयपुर शहर की खूबसूरती की तारीफ करते हुए कहा कि जब भी मुझे उदयपुर आने का मौका मिलता है, तो मन खिल उठता है। इस शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाए रखने का बहुत कुछ श्रेय यहां के निवासियों को भी जाता है। उन्होंने कहा कि सुंदरता के लिए मशहूर उदयपुर अब स्मार्ट सिटी में बदल रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के पहले चुनिंदा 20 शहरों में उदयपुर को स्थान मिला। यह उदयपुर वासियों के लिए फख्र की बात है। उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए हम कही पीछे नहीं रहेंगे। इस पर प्रतिवर्ष 200 करोड़ खर्च किये जाएंगे।

गांवों में सफल हुई योजनाएं अब शहरों में भी
श्रीमती राजे ने कहा कि गांवों के साथ-साथ शहरों में भी आधारभूत सुविधाओं का पूरा विकास करना हमारी प्राथमिकता है। ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर आगामी वर्ष में मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण शिविर आयोजित किए जायेंगे। इन शिविरों में शहरी क्षेत्र की आवासीय एवं वाणिज्यिक समस्याओं का समाधान होगा। शिविरों में आवासीय भूखण्ड एवं मकानों का नियमन करने के साथ ही पट्टे जारी किए जायेंगे। परिधि क्षेत्र में खातेदारी भूमि में बने हुए मकानों का 500 वर्ग मीटर तक निःशुल्क नियमन किया जायेगा और स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत लम्बित प्रकरणों का निस्तारण किया जायेगा। साथ ही सिवायचक भूमि का आवंटन विकास कार्यों के लिए हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में 110 करोड़ रुपये के 1746 कार्य करवाए जाएंगे। शहरों में भी गौरव पथ निर्माण करने के लिए 179 नगरीय निकायों में 446 करोड़ रुपए से अधिक की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

हमने तीन साल में जो किया वे पांच साल में भी नहीं कर सके
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने तीन वर्षां में 21 हजार 258 किलोमीटर सड़कें बनाई हैं और 9 हजार 300 किलोमीटर सड़कें बनायेंगे। जबकि हमारा लक्ष्य 20 हजार किलोमीटर का था। हमने लक्ष्य से कहीं ज्यादा सड़कें बनाकर प्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाया है। हमने किसानों को तीन साल में 45 हजार 691 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए हैं जबकि गत सरकार ने तीन वर्ष में 15 हजार 548 करोड़ तथा पूरे 5 वर्षो में केवल 43 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए थे। इसी प्रकार हमने किसानों को बिजली पर तीन साल में 18 हजार 600 करोड़ का अनुदान दिया जबकि पिछली सरकार ने करीब 8 हजार करोड़ रूपये का ही अनुदान दिया था। बिजली कम्पनियों को हमने तीन वर्ष में 97 हजार 471 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जबकि पिछली सरकार ने पूरे पांच वर्ष में 25 हजार 770 करोड़ रुपये की ही सहायता बिजली कम्पनियों को दी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने शिक्षा के क्षेत्र में जो व्यापक सुधार किए उनका नतीजा है कि आज सरकारी स्कूलों में 13 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन बढ़ गया है। बच्चों का पास प्रतिशत बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच गया है।

उदयपुर के विकास पर 10 हजार 885 करोड़ व्यय
श्रीमती राजे ने कहा कि हमने अपने कार्यकाल के तीन वर्षां में उदयपुर जिले में 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक का विकास कार्य किया है। हमने उदयपुर में 722 करोड़ रुपये से 1732 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करवाया है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गां में गोमती चौराहे से उदयपुर का 1200 करोड़ का काम पूरा हो चुका है। उदयपुर-चित्तौड़ राजमार्ग का 1100 करोड़, उदयपुर-देबारी 780 करोड़, उदयपुर-रतनपुर-श्यामलाजी का 1250 करोड़ रुपये और उदयपुर बाईपास के 140 करोड़ रुपये के काम करवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उदयपुर में एलिवेटेड रोड की डीपीआर तैयार हो गई है और स्वीकृति जल्द ही जारी हो जायेगी।

श्रीमती राजे ने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के प्रथम चरण में उदयपुर जिले में 246 गाँवों में करीब 80 करोड़ रूपये खर्च कर 10 हजार 620 कार्य करवाए गये।दूसरे चरण में उदयपुर जिले के 240 गांवों में 179 करोड़ रुपये खर्च कर 14 हजार 793 कार्य किए जायेंगे। न्याय आपके द्वार अभियान के अंतर्गत दो वर्षों में 2 लाख 32 हजार से ज्यादा प्रकरणों का निस्तारण किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उदयपुर जिले भामाशाह योजना में अब तक 5 लाख 78 हजार नामांकन तथा करीब 20 लाख 35 हजार व्यक्तिगत नामांकन हुए हैं। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 50 हजार से ज्यादा मरीजों को 35 करोड़ 63 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि उदयपुर सहित चार संभागीय मुख्यालयों पर ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट का आयोजन किया जायेगा।

सुराज प्रदर्शनी एवं खादी प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
श्रीमती राजे ने राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गांधी ग्राउण्ड में जिला प्रशासन तथा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया। श्रीमती राजे ने बच्चों द्वारा प्रदर्शित किए गए सजीव मॉडल भी देखें। श्रीमती राजे संभाग स्तरीय खादी प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉल्स पर जाकर शॉल, साड़ी एवं खादी के अन्य उत्पाद देखे।

मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने समारोह के दौरान प्रतिभाशाली जनजाति छात्राओं को स्कूटी की चाबियां एवं दिव्यांगों को ट्राइ साइकिल एवं अन्य जरूरतमदों को रेनशील्ड वितरित की। साथ ही, सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता राशि वितरित की।

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193 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास
श्रीमती राजे ने इस अवसर पर उदयपुर में 193 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण तथा शिलान्यास किया।

  लोकार्पण लागत
कुल 192.84 Cr
1. नवनिर्मित साहित्यिक सभागार, राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर 2.30 Cr
2. नवनिर्मित नर्सिंग कॉलेज आर.एन.टी मेडकिल कॉलेज उदयपुर 5.20 Cr
3. नवनिर्मित एॅनाटोमी डिस्कशन हॉल आर.एन.टी मेडकिल कॉलेज उदयपुर 4.40 Cr
4. लाईब्रेरी ब्लॉक आर.एन.टी मेडकिल कॉलेज उदयपुर 6 Cr
5. नियोजन प्रकोष्ठ, प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय, उदयपुर 1 Cr
6. शैक्षणिक संग्रहालय, प्रसार शिक्षा निदेशालय, उदयपुर 1 Cr
7. लघु वन ऊपज विशिष्ट मण्डी यार्ड 4.45 Cr
8. जनजाति बालिका आश्रम छात्रावास सरू 3 Cr
9. जनजातिबालिका आश्रम छात्रावास गामडापाल 2.70 Cr
10. जनजातिबालिका आश्रम छात्रावास रठौड़ा 2.80 Cr
11. जनजातिबालिका आश्रम छात्रावास गोहावाडा (बरोठी भीलान) 2.75 Cr
12. जनजातिपुनः निर्माण आश्रम छात्रावास मामेर 4.20 Cr
13. जनजातिबालिका आश्रम छात्रावास मीरा कन्या महाविद्यालय 6.45 Cr
14. शहरी क्षेत्र के राजकीय विद्यालयों के कक्षा-कक्षों को स्मार्ट कक्षा-कक्षों में उन्नयन करने का कार्य (प्रथम चरण) 38 Lac


शिलान्यास
15. उदयपुर में उप क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र की स्थापना 10 Cr
16. मुख्यमंत्री जन आवास योजना में 1152 आवासों का निर्माण कार्य 40 Cr
17. अमृत योजना प्रथम चरण के तहत् उदयपुर शहर में सीवरेज कार्य 84 Cr
18. उदयपोल बस स्टैण्ड से आयड़ नदी तक नाला निर्माण कार्य 11.75 Cr
19. सार्वजनिक निर्माण विभाग स्टोर, गुलाब बाग के पास पार्किंग स्थल का निर्माण कार्य 46 Lac
इस अवसर पर गृहमंत्री श्री गुलाबचंद कटारिया, नगरीय विकास मंत्री श्री श्रीचन्द कृपलानी, उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री धनसिंह रावत, पीएचईडी राज्यमंत्री श्री सुशील कटारा, संसदीय सचिव श्री भीमा भाई, सांसद श्री सीपी जोशी, श्री हरिओम सिंह राठौड़ सहित विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
जयपुर/उदयपुर, 21 दिसम्बर 2016


देश में पीएम मोदी, प्रदेश में सीएम राजे ने जो विकास किया कांग्रेस कभी नहीं कर पाई – कटारिया
गृह मंत्री श्री गुलाबचंद कटारिया ने गांधी मैदान में आयोजित जनसभा में कहा कि देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रदेश में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने जो विकास किया है वह कांग्रेस अपने अब तक के सारे कार्यकालों को मिलाकर नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला लेकर देश को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने भामाशाह, न्याय आपके द्वार, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान, अन्नपूर्णा रसोई योजना, अन्नपूर्णा भण्डार व अन्य जन कल्याणकारी योजनाएं लाकर प्रदेश का परिदृश्य बदल दिया है।

सिर्फ 1 पर्सेंट भारतीय टैक्स पेय करते हैं: नीति आयोग





सिर्फ 1 पर्सेंट भारतीय टैक्स पेय करते हैं: नीति आयोग


नई दिल्ली। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि देश की 1.25 अरब की आबादी में से मात्र एक फीसदी ही टैक्स देते हैं। उन्होंने कहा कि देश की 95 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कैश में लेनदेन करती है, जिसे देश वहन नहीं कर सकता। एनडीआरएफ द्वारा कैशलेस ट्रांजेक्शन पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांत ने कहा कि देश की इकनॉमी को वर्ष 2030 तक यदि मौजूदा 2,000 अरब डालर से 10,000 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य यदि हासिल करना है तो भारत की 95 प्रतिशत इकनॉमी में ट्रांजेक्शन कैश में स्वीकार्य नहीं है। 26 करोड़ लोग जुड़े हैं पीएमजेडीवाई से अमिताभ  कांत ने कहा कि देश में मोबाइल फोन धारकों की संख्या एक अरब आधार बायोमेट्रिक्स बनाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचाने के लिए सरकार ने पहले ही 26 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें कैशलेस ट्रांजेक्शन की ओर बढऩा चाहिए।

बिना पूछताछ के 5000 से ज्यादा के पुराने नोट बैंक में जमा हो सकेंगे




अारबीअाई का यू-टर्न : पुराने नोटों के जमा करने पर लगी रोक हटी
By Kishor Joshi Publish Date:Wed, 21 Dec 2016

भारतीय रिजर्व बैंक ने पुराने नोट जमा कराने के नियम में हुए बदलाव को वापस ले लिया है। अब बिना पूछताछ के 5000 से ज्यादा के पुराने नोट बैंक में जमा हो सकेंगे।


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक नए नियम बनाने के साथ ही लागू नियमों को वापस लेने या उनमें संशोधन करने का भी रिकार्ड बना रहा है। इस दिशा में पांच हजार रुपये से ज्यादा नगदी जमा करने पर ग्राहकों से पूछताछ करने और 30 दिसंबर, 2016 तक 5,000 रुपये से ज्यादा सिर्फ एक बार पुराने नोट जमा करने संबंधी दिशानिर्देश को लागू करने के 48 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया गया है।

सोमवार शाम को यह नियम लागू किया गया और बुधवार दोपहर को वापस ले लिया गया। आम जनता अब 30 दिसंबर तक अपने खाते में मर्जी के मुताबिक पुराने नोट जमा करा सकती है। हां, यह नियम उन बैंक खातों के लिए लागू नहीं होंगे जिनका केवाईसी सत्यापन नहीं किया गया है। वहां 50 हजार रुपये की सीमा लागू रहेगी।वैसे तो यह नियम सिर्फ डेढ़ दिनों तक लागू रहा लेकिन इससे सरकार की न सिर्फ किरकिरी हुई बल्कि बैंकों पर काम काज का बोझ भी जबरदस्त तौर से बढ़ा।

सबसे ज्यादा दिक्कत आम जनता को दिक्कतों को झेलनी पड़ी। इस नियम के लागू होने पर कांग्रेस ने तो सिर्फ सरकार को कटघरे में खड़ा किया ही, नोटबंदी पर सरकार का अभी तक समर्थन कर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी आलोचना करने से नहीं चूके। माना जा रहा है कि इस नियम को वापस कराने में वित्त मंत्रालय की अहम भूमिका रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नियम लागू होने के दिन ही अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि जनता से कोई पूछताछ नहीं होगी।


हालांकि बैंकों ने मंगलवार को ग्राहकों से पूछताछ करने के बाद ही पांच हजार से ज्यादा के पुराने नोटों को जमा करने की इजाजत दी।आरबीआइ की तरफ से बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सोमवार को उनकी तरफ से जारी अधिसूचना के पहले दो बिंदु वापस लिये जा रहे हैं। इसमें एक बिंदु यह था कि 30 दिसंबर, 2016 तक हर बैंक ग्राहक को अपने खाते में 5,000 रुपये से ज्यादा की राशि के 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट सिर्फ एक बार जमा कराने की अनुमति होगी। लेकिन यह राशि तभी जमा की जाएगी जब ग्राहक से बैंक के दो अधिकारी पूछताछ करेंगे। इसमें यह भी था कि ग्राहक से पूछताछ ऑन रिकार्ड होगी।

दूसरा बिंदु यह था कि अगर पांच हजार से कम राशि कई बार में जमा करायी जाती है तो कुल योग पांच हजार रुपये से अधिक होने पर भी ग्राहक से पूछताछ की जाएगी। इस दिशानिर्देश के तहत ग्राहकों से पूछा गया कि वह अभी तक पुराने नोट क्यों नहीं जमा करा पाये? इस निर्देश का यह असर हुआ था कि कई बैंकों ने तो आम जनता से राशि जमा करनी ही बंद कर दी थी क्योंकि उनके पास पूछताछ करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी नहीं थे।

धरती की शान तू भारत की सन्तान


राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की शाखाओं में गाया जानें वाला यह गीत हमें अपने पुरूषार्थ की पराक्रम की याद दिलाता है।  - अरविन्द सिसोदिया, जिला महामंत्री भाजपा , कोटा 9414180151 



धरती की शान तू भारत की सन्तान
तेरी मुठ्ठियों में बन्द तूफ़ान है रे
मनुष्य तू बडा महान है भूल मत
मनुष्य तू बडा महान् है ॥धृ॥

तू जो चाहे पर्वत पहाडों को फोड दे
तू जो चाहे नदीयों के मुख को भी मोड दे
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड दे
तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड दे
अमर तेरे प्राण ---२ मिला तुझको वरदान
तेरी आत्मा में स्वयम् भगवान है रे॥१॥

---मनुष्य तू बडा महान है
नयनो से ज्वाल तेरी गती में भूचाल
तेरी छाती में छुपा महाकाल है
पृथ्वी के लाल तेरा हिमगिरी सा भाल
तेरी भृकुटी में तान्डव का ताल है
निज को तू जान ---२ जरा शक्ती पहचान
तेरी वाणी में युग का आव्हान है रे ॥२॥

----मनुष्य तू बडा महान् है
धरती सा धीर तू है अग्नी सा वीर
तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले
पापोंका प्रलय रुके पशुता का शीश झुके
तू जो अगर हिम्मत से काम ले
गुरु सा मतिमान् ---२ पवन सा तू गतिमान
तेरी नभ से भी उंची उडान है रे ॥३॥
---मनुष्य तू बडा महान है