शुक्रवार, 31 मार्च 2017

चैत्र नवरात्रि : 40 साल से व्रत रख रहे हैं पीएम नरेंद्र मोदी





चैत्र नवरात्रि 2017: 40 साल से व्रत रख रहे हैं पीएम नरेंद्र मोदी, योगी आदित्य नाथ पहली बार गोरखपुर से बाहर कर रहे नवरात्र पूजा


प्रधानमंत्री मोदी की तरह की यूपी के नए सीएम योगी आदित्य नाथ भी है। योगी साल में दोनों बार नवरात्रि का व्रत रखते हैं और देवी मां की साधना करते हैं।

जनसत्ता ऑनलाइन नई दिल्ली | March 28, 2017

            हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि पर्व मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। 28 मार्च मंगलवार को कलश स्थापना (घट स्थापना) के साथ 9 दिन तक आराधन का पर्व चलेगा। नवरात्र 28 मार्च से 5 अप्रैल तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्य नाथ ने हर बार की तरह इस बार भी नवरात्रि का व्रत रखा। पीएम मोदी 40 सालों से नवरात्रि का व्रत रखते आ रहे हैं। साल 2012 में पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग के जरिए बताया था कि वह पिछले 35 सालों से यह व्रत रखते हैं। इस दौरान वह अन्न और किसी भी तरह के मसालों का सेवन नहीं करते हैं। पूरे दिन काम करने के बाद वह शाम को नीबू पानी और कुछ फल खाते हैं। पूरे नवरात्र भर उनका यही शेड्यूल रहता है। देवी मां की भक्ति के साथ पीएम मोदी इस दौरान अपना काम भी करते हैं। पीएम मोदी ने उस समय भी उपवास रखा था, जब वह 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिका की यात्रा पर गए थे। इसके चलते उनके लिए वहां पर मीनू में बदलाव किया गया था। खाने की जगह उन्हें नींबू पानी प्रदान किया गया था।

मोदी की तरह ही योगी भी
प्रधानमंत्री मोदी की तरह की यूपी के नए सीएम योगी आदित्य नाथ भी है। योगी साल में दोनों बार नवरात्रि का व्रत रखते हैं और देवी मां की साधना करते हैं। शारदीय नवरात्र में तो योगी 9 दिनों तक किसी से मुलाकात तक नहीं करते बस एक कमरे में रहते हैं और आराधना करते हैं। नवरात्रि पर योगी रोजाना सुबह तीन बजे उठते और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। इस दौरान वो अन्न नहीं खाएंगे, सिर्फ दूध-दही और फलाहार का ही सेवन करते हैं। इस दौरान योगी कन्या पूजन भी करते हैं। जिसमें कन्याओं के पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं फिर उन्हें भोजन कराते हैं।
पहली बार गोरखपुर से रहेंगे दूर
इस बार की नवरात्र में योगी पहली बार योगी आदित्य नाथ पूरे 9 दिन गोरखपुर में नहीं रहेंगे। दरअसल, सीएम बनने के बाद योगी लखनऊ स्थित सीएम हाउस, पांच कालिदास मार्ग पर नवरात्रि के दौरान रहेंगे और यहीं देवी मां की पूजा करेंगे। कहा जा रहा है कि योगी नवरात्र पर गोरखपुर जा सकते हैं। बताया जाता है कि अब तक सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब योगी को गोरखपुर से बाहर जाना पड़ा था। कुछ साल पहले ट्रेन हादसे के कारण उन्हें घटनास्थल पर जाना पड़ा था।

-------------

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सीएम योगी ने भी रखा नौ दिन का व्रत

2012 में पीएम मोदी ने एक ब्लॉग के जरिए बताया था कि वह पिछले 35 सालों से यह व्रत रखते आ रहे हैं

जनसत्ता ऑनलाइन March 28, 2017


मंगलवार से नवरात्री शुरू होने जा रहे हैं और हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी नौ दिन व्रत रखेंगे। वह पिछले चार से भी ज्यादा दशकों से नवरात्री व्रत रखते आ रहे हैं। उपवास के दिनों में पीएम केवल एक फल खाते हैं और नींबू पानी पीते हैं। इस दौरान वे अन्‍न और मसालें नहीं खाते हैं। हिन्दू संस्कृति से जुड़े देश भर के अन्य लोगों के साथ पीएम मोदी भी पूरा दिन सिर्फ गर्म पानी पीकर ही काम चलाएंगे। 2012 में पीएम मोदी ने एक ब्लॉग के जरिए बताया था कि वह पिछले 35 सालों से यह व्रत रखते हैं।
इतना ही नहीं, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद जब वह अमेरिकी यात्रा पर गए थे तब भी उन्होंने अपनी इस आस्था को नहीं तोड़ा था। इसके चलते उनके लिए वहां पर मीनू में बदलाव किया गया था। खाने की जगह नींबू पानी प्रदान किया गया था। वहीं,  2015 में नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के पहले दिन असम के मशहूर कामाख्या देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने व्रत की शुरुआत की थी। भारतीय परंपरा के अनुसार चैत्र महीने की शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा यानि पहली तारीख से नया साल शुरू होता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र भी शुरू हो जाता है जो कि रामनवमी तक चलता है। इन नौ दिनों तक हिंदू व्रत रखते हैं। उपवास के दौरान अन्‍न नहीं खाया जाता है।

पीएम मोदी साल के दोनों नवरात्र (चैत्र और शारदीय) में व्रत रखते हैं। सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं, उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नवरात्री का व्रत पूरी निष्ठा के साथ रखते हैं। शारदीय नवरात्र में तो योगी 9 दिनों तक किसी से मुलाकात तक नहीं करते बस एक कमरे में रहते हैं और आराधना करते हैं। कहा जाता है कि पीएम मोदी सुबह 4 बजे उठ जाते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी उनसे भी पहले सुबह 3 बजे उठ जाते हैं।

गुरुवार, 30 मार्च 2017

संघ : पश्चिम बंगाल में बढ़ती जिहादी गतिविधियाँ पर प्रस्ताव





कोयंबटूर (तामिलनाडु) 19 मार्च 17.   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई “अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा” का विधिवत शुभारंभ मा.सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत तथा सरकार्यवाह श्री भय्या जी जोशी ने किया. श्री अमृता विश्व विध्याश्रम, कोयंबटूर (तामिलनाडु) के परिसर मे आयोजित तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा बैठक के दौरान देश व समाज से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा हुई , साथ ही प्रांत अनुसार संघ कार्य का अवलोकन भी किया गया  और आगामी कार्य योजना पर चर्चा हुई .

अनुसांगिक संगठनों से प्रमुख रूप में विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्र सेविका समिति, स्वदेशी जागरण मंच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व विभाग, संस्कार भारती, भारत विकास परिषद, भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी सहित अन्य संगठन  इस बैठक मे भाग लिया। 
 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा-2017- में  

पश्चिम बंगाल में बढ़ती जिहादी गतिविधियाँ  पर प्रस्ताव


अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, पश्चिम बंगाल में जिहादी तत्वों के निरन्तर बढ़ रहे हिंसाचार, राज्य सरकार द्वारा मुस्लिम वोट-बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्र-विरोधी तत्वों को दिये जा रहे बढ़ावे तथा राज्य में घटती हिन्दू जनसंख्या के प्रति, गहरी चिन्ता व्यक्त करती है। भारत-बांग्लादेश सीमा से मात्र 8 कि.मी. अन्दर स्थित कालियाचक (जिला - मालदा) पुलिस स्टेशन पर राष्ट्रविरोधी जिहादी तत्वों द्वारा आक्रमण कर लूट-पाट करने, आपराधिक रिकार्ड जला देने तथा राज्य में अनेक स्थानों पर सुरक्षा बलों पर हमलों की बढ़ती घटनाएँ , राष्ट्रीय सुरक्षा व कानून व्यवस्था के लिये गंभीर चुनौती बन गई हैं। कट्टरपंथी मौलवियों द्वारा हिंसा को बढ़ावा देने वाले फतवे खुलेआम जारी किए जा रहे हैं। कटवा, कलिग्राम, ईलामबाजार, मेटियाबुरुज (कोलकाता) सहित अनेक स्थानों पर कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू समाज पर आक्रमण किये जा रहे हैं। कट्टरपंथियों के दबाव में सीमावर्ती क्षेत्रों से हिन्दू समाज बड़ी संख्या में पलायन को विवश हो रहा है। इन्हीं तत्वों द्वारा जाली मुद्रा तथा गोवंश की तस्करी व घुसपैठ को निरन्तर बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्धमान बम विस्फोट की जाँच करते समय एन.आई.ए. द्वारा यह पाया गया कि पूरे राज्य में कई आतंकी समूह (माड्यूल) सक्रिय हैं तथा जिहादी आतंकियों का यह जाल सीमा के दोनों ओर फैला हुआ है।

सुनियोजित तरीके से उपद्रव मचा रहे उन्मादी कट्टरपंथियों को मंत्री पद व अन्य महत्त्वपूर्ण राजनैतिक व शासकीय पद देकर जहाँ प्रोत्साहन दिया जा रहा है, वहीं राज्य सरकार हिन्दू समाज के धार्मिक आयोजनों में बाधाएँ खड़ी कर रही है। पिछले दिनों मोहर्रम के कारण माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का समय असामान्य रूप से कम कर दिया गया, जिस पर कोलकाता उच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।
विगत कुछ वर्षों में बमबारी, हिंसा, आगजनी व महिलाओं से दुराचार आदि की अनेक घटनाएँ हुई हैं। हिन्दू समाज पर हो रहे इन अत्याचारों के सर्वाधिक शिकार अनुसूचित जाति के लोग हैं। जुरानपुर, वैष्णवनगर, खड़गपुर व मल्लारपुर में इन वर्गों के 6 लोगों की हत्या हुई तथा गत दुर्गापूजा के दिनों इसी वर्ग की 17 वर्षीय एक छात्रा पर एसिड बल्ब से हमला किया जो उसकी मृत्यु का कारण बना। धूलागढ़ में 13-14 दिसम्बर 2016 को हिन्दू समाज पर सुनियोजित आक्रमण में आगजनी, लूटपाट व महिलाओं से दुर्व्यवहार की वीभत्स घटनाएँ हुईं। राज्य सरकार द्वारा इन कट्टरपंथी तत्वों को नियन्त्रित करने के स्थान पर इन घटनाओं को पूर्णतया छिपाने का प्रयास किया गया। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि जब कुछ निष्पक्ष पत्रकारों ने यह सारा अनाचार प्रकाश में लाने का साहस किया तो उन्हीं के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कर दिये गए।

राज्य सरकार एक ओर राष्ट्रभक्ति का संस्कार देने वाले विद्यालयों को बन्द करने की धमकी दे रही है, वहीं दूसरी ओर कुख्यात सिमुलिया मदरसा जैसी हजारों संस्थाओं की ओर से आँख मूँदे हुए है, जिनमें कट्टरपंथी व जिहादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कट्टरपंथियों के दबाव में पाठ्यपुस्तकों में मूल बांग्ला शब्दों का विकृतीकरण किया जा रहा है। अनेक स्थानों पर शिक्षण संस्थाओं में परंपरा से चली आ रही सरस्वती पूजा को भी बन्द करने का प्रयास किया जा रहा है। मिलाद-उन-नबी मनाने के नाम पर विद्यालयों का इस्लामीकरण करने आदि के प्रयासों को राज्य सरकार अनदेखा कर रही है। पिछले वर्ष कोलकाता से मात्र 40 कि.मी. दूर 1750 विद्यार्थियों वाले तेहट्ट स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यालय-प्रशासन द्वारा मिलाद-उन-नबी मनाने की अनुमति न दिये जाने पर कट्टरपंथियों ने कब्जा करके वहाँ अपना झण्डा फहराया तथा अध्यापिकाओं को कमरे में बन्द कर दिया। परिणामस्वरूप वह विद्यालय एक माह तक बन्द रहा।

भारत विभाजन के समय बंगाल का हिन्दू बहुल क्षेत्र ही पश्चिम बंगाल के रूप में अस्तित्व में आया था। तदुपरान्त पूर्वी पाकिस्तान या वर्तमान बांग्लादेश में निरन्तर अत्याचार व प्रताड़ना के कारण वहाँ के हिन्दू नागरिक भारी संख्या में पश्चिम बंगाल में शरण लेने को बाध्य हुए। यह आश्चर्यजनक है कि बांग्लादेश से विस्थापित होकर बड़ी संख्या में हिन्दुओं के प.बंगाल में आने के उपरान्त भी राज्य की हिन्दू जनसंख्या जो 1951 में 78.45 प्रतिशत थी, वह 2011 की जनगणना के अनुसार घटकर 70.54 प्रतिशत तक आ गई। यह राष्ट्र की एकता व अखण्डता के लिए गंभीर चेतावनी का विषय है।  

    अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा कट्टरपंथी हिंसा तथा राज्य सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति की कड़े शब्दों में निंदा करती है तथा समस्त देशवासियों से यह आवाहन करती है कि जिहादी हिंसा व राज्य सरकार की सांप्रदायिक राजनीति के विरुद्ध जन जागरण करें। देश के जन संचार माध्यमों से भी यह आग्रह है कि इस भीषण परिस्थिति को देश के सामने प्रस्तुत करें। प्रतिनिधि सभा राज्य सरकार का आवाहन करती है कि वोटों की क्षुद्र राजनीति से ऊपर उठकर वह अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करे। अ.भा.प्र.सभा केन्द्र सरकार से भी यह आग्रह करती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए राज्य के राष्ट्र-विरोधी जिहादी तत्वों के विरुद्ध दृढ़ता से कार्यवाही सुनिश्चित करे।

संघ की अ.भा.प्रतिनिधि सभा 2017 : वार्षिक प्रतिवेदन

कोयंबटूर (तामिलनाडु) 19 मार्च 17.   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई “अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा” का विधिवत शुभारंभ मा.सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत तथा सरकार्यवाह श्री भय्या जी जोशी ने किया. श्री अमृता विश्व विध्याश्रम, कोयंबटूर (तामिलनाडु) के परिसर मे आयोजित तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा बैठक के दौरान देश व समाज से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा हुई , साथ ही प्रांत अनुसार संघ कार्य का अवलोकन भी किया गया  और आगामी कार्य योजना पर चर्चा हुई .

अनुसांगिक संगठनों से प्रमुख रूप में विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्र सेविका समिति, स्वदेशी जागरण मंच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व विभाग, संस्कार भारती, भारत विकास परिषद, भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी सहित अन्य संगठन  इस बैठक मे भाग लिया। 



राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की  अ.भा. प्रतिनिधि सभा 2017
 – सरकार्यवाह जी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन, कार्य स्थिति व विशेष कार्यक्रम


पू. सरसंघचालक जी, आदरणीय अखिल भारतीय पदाधिकारी गण, अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य, निमंत्रित एवं विशेष निमंत्रित बंधु, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के समस्त प्रतिनिधि बंधु तथा सामाजिक जीवन में विभिन्न संगठनों के माध्यम से कार्यरत ऐसे निमंत्रित सन्माननीय बहनों तथा भाईयों आप सबका इस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में स्वागत है.

पूज्य माता अमृतानंदमयी के पावन सान्निध्य से आनंदप्रदायी परिसर में अपनी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा प्रारंभ हो रही है. हम सबके सौभाग्य से पूज्य माताजी का आशिर्वाद भी हमें प्राप्त होने वाला है. ऐसे अत्यंत पवित्र वातावरण में निश्चित ही हम सभी आनंद की अनुभूति करने वाले हैं.

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा सुचारु रुप से संपन्न हो, इस दृष्टि से सभी पूज्य स्वामी जी, व्यवस्था में सहयोग कर रहे सभी बंधुओं के प्रति हम कृतज्ञता व्यक्त करते है.

कार्यस्थिति –
2016-17 में संपन्न संघ शिक्षा वर्ग तथा प्राथमिक शिक्षा वर्ग

कुल संघ शिक्षा वर्ग – 93

वर्ष       स्थान   संख्या
प्रथम    10204  17500
द्वितीय  3050    4130
तृतीय   867      973

वर्ष                   स्थान   संख्या
प्रथम (विशेष)    1309    1891
द्वितीय (विशेष) 1127    1527
प्राथमिक शिक्षा वर्ग – 2015-16  2016-17
कुल वर्ग                       961                  1059
शाखा प्रतिनिधित्व        32233              29127
संख्या                          112520             104256

शाखावृत्त – अभी तक प्राप्त वृत्त के अनुसार वर्तमान में देशभर में 36729 स्थानों पर 57185 शाखायें चल रही है. स्थान, साप्ताहिक मिलन तथा संघ मंडली मिलाकर कुल 59216 स्थानों पर कार्य चल रहा है.
वर्ष                   स्थान               शाखा               मिलन              मंडली
2017                36729              57185              14896              7594
2016                36867              56859              13784              8226

हिन्दू जागरण के विशेष कार्यक्रम –
गुजरात, मालवा, मध्यभारत इन प्रांतों में अत्यंत प्रभावी सम्मेलनों का आयोजन हुआ. जिसमें पू. सरसंघचालक जी,  देवगिरी प्रांत में संपन्न महिला ग्राम विकास संगम में ग्राम विकास के अखिल भारतीय प्रमुख डॉ. दिनेश जी उपस्थित रहे.
(1). महिला ग्राम विकास संगम, देवगिरी – ग्राम विकास कार्य में महिलाओं की सहभागिता बढ़े इस दृष्टि से ‘‘महिला ग्राम विकास संगम’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में 95 ग्रामों से 641 महिलायें और 170 पुरुष उपस्थित रहे. कार्यक्रम में वनवासी कल्याण आश्रम की ठमाताई पवार, नागपुर से ‘निरामय’ संस्था की डॉ. उर्मिलाताई क्षीरसागर, प्राकृतिक कृषि तज्ञ शुभदाताई चांदगुडे, पर्यावरण विशेषज्ञ पेठे आदि बहनों का समयोचित मार्गदर्शन मिला. व्यसनमुक्ति, स्वयं सहायता समूह आदि विषयों पर भी चर्चा सत्र हुए. अखिल भारतीय ग्राम विकास प्रमुख डॉ. दिनेश जी का भी मार्गदर्शन सभी को प्राप्त हुआ.

(2). विराट हिन्दू सम्मेलन, वासदा, गुजरात – प्रांत में जनजाति क्षेत्र में कार्य को गति देने की दृष्टि से 4 स्थानों पर सम्मेलनों का आयोजन किया गया. नवसारी विभाग में ‘‘भारत सेवाश्रम संघ’’ की शतवार्षिकी समापन के निमित्त वलसाड जिले के वासदा गाँव में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया.
विभाग के सभी तहसीलों के कुल 1145 ग्रामों से 70946 महिला-पुरुष इस सम्मेलन में उपस्थित रहे. पूर्व तैयारी के नाते 23 स्थानों पर अभ्यास वर्ग, 4 स्थानों पर सामाजिक सद्भाव बैठकें और प्रांत के अन्य स्थानों से 432 बहनों द्वारा 237 ग्रामों के 23835 परिवारों से संपर्क किया गया. परिणामतः सम्मेलन सफल रहा.

(3). ग्राम संगम – पू. सरसंघचालक जी की उपस्थिति में मालवा प्रांत के उज्जैन शहर में ‘‘ग्राम संगम’’ कार्यक्रम का आयोजन किया था. कार्यक्रम की पूर्व तैयारी हेतु जिन ग्रामों में जैविक कृषि, गौपालन, समरसता, स्वच्छता एवम् व्यसनमुक्ति इन पाँच विषयों में कार्य प्रारंभ हुआ है, ऐसे ग्रामों का चयन करना निश्चित किया. प्रांत में 609 ग्रामों का चयन किया. इन ग्रामों में कार्यशालायें एवम् जनजागरण के कार्यक्रम भी किये गये. प्रत्येक ग्राम से 3 कार्यकर्ता अपेक्षित थे. कार्यक्रम में 427 ग्रामों से 1413 कार्यकर्ता उपस्थित रहे. चयनित सभी पाँच बिन्दुओं पर चर्चा एवम् अनुभव कथन के कार्यक्रम प्रभावी रहे. शिविर के पश्चात् ग्राम विकास के कार्य में अच्छी गति आयी है.

(4). हिन्दू सम्मेलन, बैतूल, मध्यभारत – मध्यभारत का बैतूल जिला जनजाति बहुल है. वहाँ कई प्रकार की चुनौतियाँ हैं. समाज में आत्मविश्वास का वातावरण बने तथा सज्जनशक्ति का दर्शन हो इस दृष्टि से चरणबद्ध योजना बनाकर हिन्दू सम्मेलन का आयोजन बैतूल शहर में किया गया. सम्मेलन के पूर्व जलसंधारण, ग्राम स्वच्छता, समरसता बैठकें, स्वास्थ्य शिविर, गौ पूजन, युवा सम्मेलन इत्यादि कार्यक्रम संपन्न हुए. संपर्क हेतु 70 कार्यकर्ता ग्राम-ग्राम में गये. 1468 ग्रामों तक पहुँचकर 4 लाख बंधुओं से संपर्क किया गया और ग्राम स्तर पर समितियों का गठन किया गया. दिनांक 08 फरवरी को संपन्न यह विराट हिन्दू सम्मेलन में लगभग एक लाख लोग सहभागी हुए. आयोजन अत्यंत प्रभावी रहा. व्यवस्था में नगर की विविध 31 जाति, संस्थाओं का सहयोग उल्लेखनीय है.

राष्ट्रीय परिदृश्य –
राष्ट्रीय तथा सामाजिक जीवन में तात्कालिक एवम् दूरगामी परिणाम करने वाली घटनायें घटती रहती है. ऐसी घटनायें कभी मनोबल बढ़ाने वाली तो कभी राष्ट्रजीवन का सामर्थ्य प्रकट करने वाली होती हैं. लेकिन कुछ घटनायें ऐसी भी होती हैं, जिसका चिंतन व समीक्षा समय पर करने की आवश्यकता रहती है. हिंसा का मार्ग अपनाते हुए हिन्दू समाज को भयग्रस्त करने का प्रयास होता है. राजनीतिक असहिष्णुता व बलप्रयोग करते हुए अन्य विचारधारा के समर्थकों के सम्मुख चुनौती खड़ी की जाति है. कुछ घटनायें निश्चित ही चिंता का कारण बनती हैं.
दशकों से वामपंथी हिंसा का शिकार बना पश्चिम बंगाल सत्ता परिवर्तन के पश्चात् शांति और सुव्यवस्था की अपेक्षा कर रहा था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के पश्चात् तो हिन्दू समाज पर होने वाले अत्याचारों की घटनायें बढ़ी हैं जो चिंताजनक है. मालदा की घटना हो या अभी-अभी घटित धूलागढ़ की, ये सारी घटनायें हिन्दू समाज के लिये बहुत ही चिंता का विषय बना है. सत्ताधिशों द्वारा मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा, प्रशासन का मूक साक्षी बनना पुरानी घटनाओं का स्मरण कराता है. सत्तादल के जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी चिन्हांकित है. इन घटनाओं को सभी स्तरों पर गंभीरता से लेने की आवश्यकता है. केरल की परिस्थिति भी विचारणीय है. विधानसभा में साम्यवादी दल को प्राप्त विजय के पश्चात् संघ प्रेरित कार्यों के कार्यकर्ताओं पर हमलों की संख्या बढ़ी है. अमानवीय चेहरा खुलकर प्रकट हुआ है. बालक, महिला, वयोवृद्ध, युवक इनके आक्रमणों के शिकार बने हैं. प्राणहानी के साथ खेती, उद्योग, घरों को नष्ट करने की घटनायें यह एक द्वेषमूलक, असहिष्णु मानस को दर्शाता है. लोकतंत्रात्मक मार्ग से सत्ता तक पहुँचने वालों का यह दायित्व बनता है कि जनसामान्यों को सुरक्षा एवं प्रशासन के प्रति विश्वास के लिये आश्वस्त करें.
दोनों राज्यों की सरकारें न्यायपूर्ण व्यवहार तथा शांति और सौहार्द का वातावरण निर्माण करने में पहल करें, यही अपेक्षा है.
सर्जिकल स्ट्राइक –
पाकिस्तान द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों को रोकने के स्थान पर उन्हें बल प्रदान करना, भारत की सीमा के निकट उनके शिविरों को प्रश्रय देना और सेना द्वारा बार-बार गोलाबारी की घटनायें यह एक छद्म आक्रमण ही है. सितंबर मास में पाकिस्तान के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करना पड़ा. भारत की सरकार ने अपनी सामरिक कुशलता का परिचय दिया है. भारत की सेना के जवान साहस और कुशलता के साथ हमला करके आतंकी शिविरों को नष्ट कर सकुशल अपनी सीमा में लौट आये. सेना के इस साहसिक कार्य के लिये हम सभी संबंधित सैनिक तथा अधिकारियों का अभिनंदन करते हैं.
केन्द्र  सरकार ने दृढ़ इच्छाषक्ति का परिचय दिया है. साथ ही पाकिस्तान के विरोध में अंतर्राष्ट्रीय जनमत बनाने में सफल भूमिका निभाई है. परिणामतः इस्लामाबाद में होने वाला सार्क सम्मेलन हो नहीं सका.
विमुद्रीकरण –
आर्थिक क्षेत्र में विमुद्रीकरण का निर्णय भी केन्द्र  सरकार का साहसिक निर्णय है. पश्चात् एक भिन्न भारत का दर्शन हम सबने किया है. जनसामान्यों को अवश्य ही कुछ कठिनाइयाँ झेलनी पड़ी जो स्वाभाविक ही थी. जनता ने अभूतपूर्व संयम एवम् देशभक्ति का परिचय दिया है. कालाधन, जाली नोट, आतंकवादियों द्वारा धनशक्ति के बल पर निर्माण की जाने वाली समस्याओं के निदान की दिशा में उठाया गया कदम अभिनंदनीय है. केन्द्र सरकार का यह निर्णय कितना समयोचित और परिणामकारक रहा, यह तो भविष्य में सिद्ध होगा.
इस्रो के वैज्ञानिकों का अभिनंदन –
15 फरवरी 2017, यह दिन हम सब भारतवासियों के लिये स्वाभिमान का रहा. इस्रो में कार्यरत महिला एवं पुरुष वैज्ञानिकों ने सामूहिकता से अंतरिक्ष विज्ञान के जगत में एक अभूतपूर्व कार्य संपादन किया है.
विश्व में रशिया के वैज्ञानिकों ने 2014 में एक साथ 37 उपग्रह छोड़कर अपना स्थान बनाया था. अपने वैज्ञानिकों की विशेषता रही कि मात्र 30 मिनट में 104 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है. यह अभियान सफल होते ही इस्रो के वैज्ञानिकों का विश्वभर से अभिनंदन हुआ है.
डॉ. होमी भाभा, श्री विक्रम साराभाई, श्री सतीश धवन ऐसे महानुभावों ने जो सपना देखा था, उसे साकार होते हुए हम देख रहे हैं. निश्चित ही सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, ऊर्जा इत्यादि विविध प्रकार के शोध क्षेत्र में अपने वैज्ञानिक भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में सफल होंगे.
इस आयोजन में जिन वैज्ञानिकों की भूमिका रही हम उनका अभिनंदन करते हैं.
समापन
सामाजिक जीवन में नित्य ही सकारात्मक एवम् नकारात्मक घटनाओं का क्रम चलता रहता है. अपने कार्य के द्वारा हम समाज में जागरण एवम् चेतना शक्ति को जागृत करते हुए संगठित होकर परिवर्तन की दिशा में बढ़ रहे हैं. सर्वत्र अत्यंत अनुकूलता का वातावरण और अपने कार्य की स्वीकार्यता बढ़ी है.

राजनीतिक क्षेत्र में दिखाई देने वाली द्वेष भावना राज्यों राज्यों में क्षेत्रभाव का पोषण करने वाली शक्तियाँ भी विद्यमान है. विश्व के अन्यान्य देश भी सामर्थ्य संपन्न भारत के निर्माण में बाधायें खड़ी करने का प्रयास कर रहे है.
इन सारी परिस्थितियों में दृढ़ता के साथ संकल्पबद्ध होकर, हमारी अंतर्गत सामाजिक समस्याओं का निराकरण करते हुए हम सबके समन्वित प्रयास से ही अपना मार्ग प्रशस्त होगा यह विश्वास है.

प.पू. श्री गुरुजी ने जो विश्वास व्यक्त किया है, उसका स्मरण रखें,  ‘‘विजय ही विजय है’’

सोमवार, 20 मार्च 2017

विश्व क्षितिज पर भारत का गौरव स्थापित करना है : साध्वी ऋतम्भरा



विश्व क्षितिज पर भारत का गौरव स्थापित करना है


-साध्वी ऋतम्भरा उपाख्य दीदी मां, संस्थापक, वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन
पूर्णाहुति समारोह में दीदी मां के वक्तव्य के प्रमुख अंश-
परम पूज्य श्री गुरुजी कहा करते थे कि निष्क्रियता सभी प्रकार के श्रेष्ठत्व को नष्ट कर देती है। इसलिए सज्जनों को सक्रिय, संगठित और समाज के लिए अपनी योग्यता का योगदान देना बहुत जरूरी है। आज आवश्यकता यह है कि भारत, भारत के रूप में स्थापित हो। भारत को भारत के रूप में देखने की दृष्टि हमारे ऋषि-पुरखों ने कुछ यूं बताई है-
कोई खुशी नहीं अपनी भर,
कोई पीड़ा नहीं पराई,
चाहे मरघट का मातम हो,
चाहे बजे कहीं शहनाई,
हर घटना मुझमें घटती है,
मैं सबका मानस विराट हूं,
सात स्वरों की बांसुरिया में,
कहीं हंसी है कहीं रुलाई,
जग मुझमें हंसता गाता है,
मैं सबका मानस मंथन हूं,
चाहे कोई जगे योग से,
समझो मैं समयुक्त हो गया,
कोई बुद्ध हुआ क्या जैसे,
मुझमें ही कुछ बुद्ध हो गया,
कोई मुक्त हुआ क्या जैसे,
मुझमें ही कुछ मुक्त हो गया,
हर पनघट मेरा पनघट है,
हर गागर मेरी गागर है,
चाहे कोई भी पानी पिए,
कंठ मेरा ही सिंचित होता है।
एकात्मता का यह भाव जब हमारे ह्मदय में प्रगाढ़ होता है तब हम सीमित होकर भी असीमित को अपने आलिंगन में बांध लेते हैं। तब दायरे टूट जाते हैं, एकत्व का दर्शन होता है और हम इस अणु के भीतर ही विराट का दर्शन करने की क्षमता अर्जित कर लेते हैं। यह भाव मन में जगता है तभी तो हमारी भारतभूमि पर जन्मे ऋषि उस कुत्ते के पीछे डंडा लेकर नहीं, घी का कटोरा लेकर भागते हैं जो उनकी रोटी उठाकर ले गया-
नामदेव ने बनाई रोटी, कुत्ते ने उठाई
पीछे नामदेव चल दिए कि
प्रभु रूखी तो न खाओ, थोड़ा घी भी लेते जाओ
कैसी शक्ल बनाई तूने श्वान की
मुझे ओढ़नी ओढ़ा दी इनसान की
...यह उदाहरण बताता है कि हम भिन्न-भिन्न रूपों और नामों में व्याप्त एक ही सत्ता का दर्शन करने वाले लोग हैं। हम हिन्दू हैं और सारी दुनिया को अपना परिवार मानते हैं और उस परिवार में मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी और जंगल सब समा जाते हैं। हमारी संस्कृति ऐसी है कि बचपन में बालक जब मां से पूछता है तो मां यह नहीं कहती कि जो रात में चमक रहा है वह चन्द्रमा है बल्कि वह कहती है कि वो तेरा चन्दा मामा है। धरित्री के भीतर हम देवता का दर्शन करते हैं। हम हिन्दू हैं इसलिए हमारे लिए कोई सीमा, कोई दायरा संभव ही नहीं है। हमारे प्रेम की धारा किसी दीवार में बांधकर नहीं रखी जा सकती, हम इस प्रेम के संदेश को सर्वत्र बांटना चाहते हैं। क्योंकि हमारे पुरखों ने यह सूत्र दिया है कि जो बटोरा जाता है वह विषाद होता है और जो बांटा जाता है वह प्रसाद होता है। जब यह करुणा और प्रेम का भाव समाज में बढ़ना और बंटना प्रारंभ होता है तब यह कैसे संभव है कि कोई वर्ग इससे वंचित रह जाए, हमारी उपेक्षा का पात्र बन जाए। तब यह कैसे संभव है कि किसी को लगे कि अपमान ही मेरा आहार है, किसी को लगे कि उपेक्षा ही मेरी सम्पत्ति है, किसी को लगे कि दारुण दु:ख झेलना ही मेरी नियति है। भारत में इस प्रकार का बहुत बड़ा समाज यदि हमारे प्रेम-स्नेह से वंचित है तो निश्चित रूप से यह हमारा स्खलन है। यह हमारे पुरखों द्वारा बताए गए मार्ग से च्युत हो जाना है। इसीलिए पूज्य श्रीगुरुजी की जन्मशताब्दी में पूरे वर्ष रा.स्व.संघ के कार्यकर्ताओं ने गली-गली-गांव-गांव जाकर प्रेम के दीपक को प्रज्ज्वलित किया है। इस बात को प्रगाढ़ता से प्रकट किया है कि-
एक ज्योति है सब दीपों में,
सारे जग में नूर एक है,
सच तो यह है इस दुनिया का,
हाकिम और हुजूर एक है,
हर मानव माटी का पुतला,
जीवन का आधार एक है,
गहराई तक जाकर देखो,
सब धर्मों का सार एक है,
एक वाहे गुरु एक परमेश्वर,
कृष्ण और श्रीराम एक हैं,
नाम भले ही अलग-अलग हों,
भक्तों के भगवान एक हैं,
नाम रूप की बात छोड़ दो,
इनसानों की जात एक है,
मन से मन के तार जोड़ लो,
सीधी सच्ची बात एक है।
इस एकात्मता के सूत्र में बंधे हम, कारुण्य और समरसता के प्रवाह में वर्ष भर प्रवाहित होते रहे। आवश्यकता इसी बात की है कि हिन्दू जाति का कारुण्य प्रबल हो, साथ ही हिन्दू जाति का तारुण्य भी प्रबल होना चाहिए। हम जानते हैं कि शक्ति ही शांति का आधार होती है और संगठन ही शक्ति का आधार है। सारा विश्व इस समय संघर्षों में निमग्न है, प्रतिस्पर्धाएं ह्मदय को जलाती हैं, छोटा-बड़ा हो जाने या श्रेष्ठता अथवा हीनता का भाव हमें एक दूसरे से अलग करता है। इसलिए हम सबके भीतर यह भाव प्रबल होना चाहिए कि यदि हम शांति स्थापित करना चाहते हैं तो हमें शक्तिशाली बनना होगा। अगर हमने तलवार गलाकर तकली गढ़ने का प्रयत्न किया, अगर अपने सिंहत्व को खोकर बकरे का धर्म अपनाया तो निश्चित रूप से हम शांति की स्थापना नहीं कर पाएंगे। अहिंसा, प्रेम, सत्य और शांति की स्थापना करने की हमारी प्रबल इच्छा तभी पूरी होगी जब हम जातियों, भेदभावों और सम्प्रदायों से ऊ‚पर उठकर अपने हिन्दू स्वरूप को स्वीकार करेंगे और इस स्वरूप की पहचान करेंगे। और हिन्दू स्वरूप है-
जिस हिन्दू ने नभ में जाकर नक्षत्रों को दी है संज्ञा
जिसने हिमगिर का वक्ष चीर भू को दी है पावन गंगा
जिसने सागर की छाती पर पाषाणों को तैराया है
हर वर्तमान की पीड़ा को हर जिसने इतिहास बनाया है
जिसके आर्यों ने घोष किया कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का
जिसका गौरव कम कर न सकी रावण की स्वर्णमयी लंका
जिसके यज्ञों का एक हव्य सौ-सौ पुत्रों का जनक रहा
जिसके आंगन में भयाक्रांत धनपति वर्षाता कनक रहा
जिसके पावन वलिष्ठ तन की रचना तन दे दधीचि ने की
राघव ने वन में भटक-भटक जिस तन में प्राण प्रतिष्ठा की
जौहर कुण्डों में कूद-कूद सतियों ने जिसे दिया सत्व
गुरुओं, गुरुपुत्रों ने जिसमें चिर बलिदानी भर दिया तत्व
वह शाश्वत हिन्दू जीवन क्या स्मरणीय मात्र रह जाएगा
इसकी पावन गंगा का जल क्या नालों में बह जाएगा
इसके गंगाधर शिवशंकर क्या ले समाधि सो जाएंगे
इसके पुष्कर इसके प्रयाग, क्या गर्त मात्र हो जाएंगे
यदि तुम ऐसा नहीं चाहते तो फिर तुमको जगना होगा
हिन्दू राष्ट्र का बिगुल बजाकर दानव दल को दलना होगा।
इसलिए हिन्दू समाज को समर्थ, स्वाभिमानी हिन्दू राष्ट्र के निर्माण करने तथा वन्दनियों के वन्दन करने का निश्चय करना है। हिन्दुओं को समझना होगा कि यदि राष्ट्रद्रोही सूली पर नहीं चढ़ाया गया तो यह पूरा देश ही सूली पर चढ़ जाएगा। समझना होगा कि कातिलों की भक्ति के विधान इस देश में नहीं होने चाहिए। देशद्रोहियों की आरती इस देश में नहीं होनी चाहिए। इस सत्य को स्वीकार करने, कहने का साहस साधना से प्राप्त होता है। हिन्दू समाज को निश्चय करना है कि वह इस सत्य को कहने का अपने भीतर साहस उत्पन्न करेगा और किसी भी प्रकार के भय-प्रलोभन के आगे झुकेगा नहीं। पूज्य श्रीगुरुजी की जन्मशताब्दी पर हिन्दू समाज को संकल्प लेना चाहिए कि समरसता की बयार भारत में बहे, भारत के किसी घर में कन्या भ्रूण हत्या न हो, मातृशक्ति अपनी गरिमा और गौरव का परिचय देगी। विश्व के मानस पटल पर प्रखर भारत की तस्वीर तभी प्रकट होगी जब हमारी माताएं-बहनें अपने गौरव को पहचानेंगी और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगी। भारत की मातृशक्ति का परिचय यह है-
मेरा परिचय इतना कि मैं भारत की तस्वीर हूं,
मातृभूमि पर मिटने वाले मतवालों की तीर हूं
उन वीरों की दुहिता हूं जो हंस-हंस झूला झूल गए
उन शेरों की माता हूं जो रण-प्रांगण में जूझ गए
मैं जीजा की अमर सहेली, पन्ना की प्रतिछाया हूं
हाड़ी की हूं अमर निशानी मैं जसवंत की माया हूं
कृष्ण के कुल की मर्यादा, लक्ष्मी की शमशीर हूं
मेरा परिचय इतना कि मैं भारत की तस्वीर हूं
हल्दी घाटी की रज का सिंदूर लगाया करती हूं
अरि शोणित की लाली से मैं पांव रचाया करती हूं
पद्मावती हूं रतन सिंह की, चूडावति की सेनानी
मैं जौहर की भीषण ज्वाला, रणचण्डी हूं पाषाणी
मां की ममता नेह बहन का और पत्नी का धीर हूं
मेरा परिचय इतना की मैं भारत की तस्वीर हूं।
कालिदास का अमर काव्य हूं मैं तुलसी का रामायण
अमृतवाणी हूं गीता की, घर-घर होता पारायण
मैं भूषण की शिवा बाबली आल्हा का हुंकारा हूं
सूरदार का मधुर गीत मैं मीरा का एक तारा हूं
वरदायी की अमर कथा हूं रण गर्जन गंभीर हूं
मेरा परिचय इतना की मैं भारत की तस्वीर हूं।
भारत की इस तस्वीर को विश्व पटल पर साक्षात प्रकट करने के लिए भारत की आत्मा को समझना होगा।

रविवार, 19 मार्च 2017

योगी आदित्यनाथ : जीवन परिचय




योगी आदित्यनाथ
1_ उत्तराखंड के पौड़ी जिले में आदित्यनाथ का जन्म हुआ था.
2 _ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आदित्यनाथ एबीवीपी से जुड़े.
3 _2014 में पांचवी बार दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर सांसद चुने गए.
4 _19 मार्च 2017: योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़ी विधानसभा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने !.


योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय , 
जन्म से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर

https://khabar.ndtv.com
अभिषेक कुमार द्वारा लिखित : रविवार मार्च 19, 2017

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अब तक लोग एक सांसद के रूप में जानते थे, लेकिन उन्हें इतना बड़ा पद मिलने के बाद लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं. हम आपके लिए योगी आदित्यनाथ के जीवन के अब तक के सफर की कहानी लेकर आए हैं. आप नीचे जान पाएंगे किस साल अजय सिंह नेगी ने संन्यास अपनाकर योगी आदित्यनाथ बन गए. आप जान पाएंगे कि गणित का तेज तर्रार छात्र के साथ ऐसा क्या हुआ जो वह पहले संन्यासी और फिर राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा. ऐसे ही सवालों के जवाब के लिए नीचे टाइमलाइन में पढ़ें योगी आदित्यनाथ का पूरा बायोडाटा.

5 जून 1972: उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश था) के पौड़ी जिला स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर गांव के राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था.
1977: टिहरी के गजा के स्थानीय स्कूल में पढ़ाई शुरू की. स्कूल और कॉलेज सर्टिफिकेट में इनका नाम अजय सिंह नेगी है.
1987: टिहरी के गजा स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की.
1989: ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की.
1990: ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए एबीवीपी से जुड़े.
1992: कोटद्वार के गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बीएससी की परीक्षा पास की.
1993: गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर रिसर्च करने गोरखपुर आए. यहां गोरक्षनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की नजर अजय सिंह/आदित्यनाथ पर पड़ी.
1994: सांसारिक मोहमाया त्यागकर पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद अजय सिंह नेगी का नाम योगी आदित्यानाथ हो गया.
1998: योगी आदित्यनाथ सबसे पहले गोरखपुर से चुनाव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और जीत गए. तब उनकी उम्र महज 26 साल थी.
1999: गोरखपुर से दोबारा सांसद चुने गए.
अप्रैल 2002: योगी ने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी.
2004: तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता.
2007: गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया. गिरफ्तारी हुई और इस पर कोहराम भी मचा. योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए.
7 सितंबर 2008: सांसद योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था. इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे.
2009: योगी आदित्यनाथ  2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे.
2014: पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर सांसद चुने गए.
2015: 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था. इसके बाद यूपी में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए. इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा.
2017: विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया. यहां तक कि इन्हें एक हेलीकॉप्टर तक दे दिया गया था.
19 मार्च 2017: उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री का ताज सौंप दिया गया.
20 मार्च 2017: योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

शनिवार, 18 मार्च 2017

जितना बड़ा अपराधी, उतनी ऊपर पहुंच:प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर

भारत के प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जे एस खेहर की तारीफ करनी होगी कि उन्होने अन्याय के सच को बडी बेवाकी से व्यक्त किया । अन्याय छेल रहे पीडितों के पक्ष में काम करने का आव्हान किया । उनकी साहसी पहल को सलाम करते हुये , आशा कर सकता हूं कि बडे अपराधियों ओर बडे पूजीपतियों एवं बडे लोगों की गिरफ्त से भारतीय न्याय व्यवस्था को मुक्त करानें में उनकी पहल अहम सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगी।
- अरविन्द सिसोदिया, कोटा 9414180151



सीजेआई खेहर ने भारत को बताया अनूठा देश, 
कहा- जितना बड़ा अपराधी, उतनी ऊपर पहुंच


Last Updated: Saturday, March 18, 2017
http://zeenews.india.com

नयी दिल्ली: देश के प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर ने शनिवार (18 मार्च) को विधि कार्यकर्ताओं का आह्वाहन किया कि वे 2017 को अपराध पीड़ितों के लिए काम करें. उन्होंने दुष्कर्म पीड़ितों या तेजाबी हमले के शिकार अथवा अपने घर के एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाले को गंवाने वालों की परिस्थितियों पर हैरानी व्यक्त करते हुये कहा कि अपराधियों की तो आखिरी उपाय तक न्याय के लिये पहुंच होती है.

प्रधान न्यायाधीश ने विधि कार्यकर्ताओं से ऐसे प्रभावित लोगों तक पहुंचने की अपील की ताकि उन्हें अपेक्षित मुआवजा मिल सके. उन्होंने कहा कि भारत में आतंकवाद के अपराध में अभियुक्त को उच्चतम न्यायालय तक सभी कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने के बाद भी न्याय के लिये कानून के तहत प्रदत्त सभी संभव कानूनी उपायों के इस्तेमाल की अनुमति है.

याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ रात 2 बजे हुई थी सुनवाई:
प्रधान न्यायाधीश परोक्ष रूप से 1993 के मुंबई विस्फोट के एकमात्र मृत्युदंड प्राप्त दोषी याकूब मेमन के मामले का हवाला दे रहे थे जिसकी फांसी की सजा उच्चतम न्यायालय ने 29 जुलाई 2015 को ठुकरा दी थी लेकिन कुछ एक्टिविस्ट वकील ने उसी रात फैसले पर फिर से गौर करने के लिए एक और याचिका दायर की क्योंकि दोषी को 30 जुलाई की सुबह फांसी दी जानी थी. उच्चतम न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिये सहमत भी हुआ और 30 जुलाई को रात दो बजे से दो घंटे से ज्यादा समय तक एक पीठ ने विशेष सुनवाई की.

जितना बड़ा अपराधी, उतना बड़ा हंगामा:
राज्य विधि सेवा प्राधिकारण के 15 वें अखिल भारतीय सम्मेलन के अपने उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘हमारा अनूठा देश है. बड़ा अपराधी, बड़ा हंगामा. जैसा कि हमने पहले देखा है कि आतंकवाद जैसे अपराध में दोषी उच्चतम न्यायालय में नाकाम हुआ और पुनर्विचार में भी असफल रहने के बावजूद एक तरीके से न्याय तक पहुंच हो सकती है जिसका हम विस्तार करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे वर्षों तक आश्चर्य होता रहा कि पीड़ितों का क्या होता है. वर्षों तक हैरान रहा कि उन परिवारों का क्या जिन्होंने अपने एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाले को खो दिया. मुझे वषरें तक तेजाब कि हमले के पीड़ितों के बारे में हैरानी हुयी जिनका चेहरा बिगड़ गया और समाज में जी नहीं सकते. मैंने दुष्कर्म पीड़िताओं के बारे में उनकी जिंदगी के बारे में सोचा और मुझे हैरानी कि हमारी उनतक क्यों पहुंच नहीं है.’

2017 को पीड़ितों के लिए काम का वर्ष बनाएं:
न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘इस संस्था के संरक्षक के तौर पर आज मेरी आपसे अपील करने की इच्छा है. पीड़ितों तक पहुंचा जाए। 2017 को पीड़ितों के लिए काम का वर्ष बनाया जाए.’ प्रधान न्यायाधीश ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नलसा), राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अपने सहायक विधिक (पारा-लीगल) कार्यकर्ताओं को हरेक निचली अदालतों में भेजकर पीड़ितों को सूचित करने को कहा कि उनके मुआवजे का हक बंद नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘अपने सहायक विधिक कार्यकर्ताओं को प्रत्येक निचली अदालत में भेजकर पीड़ितों को अवगत कराएं. प्रत्येक पीड़ितों को सीआरपीसी की धारा 357-ए के बारे में बताया जाए कि उन्हें मुआवजे का अधिकार है.’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें समझाएं कि आरोपी को बरी किये जाने या दोषसिद्धि के साथ मामला बंद नहीं हुआ है. दिल बड़ा करें और पीड़ितों तक पहुंचे.’

न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर कोष तैयार करने के लिए संसद ने सीआरपीसी की धारा 357-ए शुरू की. न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजे के साथ किसी भी मामले में आरोपी को खासकर आपराधिक मामले में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और जैसे ही उसे गिरफ्तार किया जाता है तो उसके मामले में उस तक मदद के लिए किसी की पहुंच होनी चाहिए.

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की खुलकर तारीफ की



   प्रणव मुखर्जी : - ' मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।'



मोदी ने तेजी से काफी कुछ सीखा है: प्रणब; 
वाजपेयी के बारे में भी की तारीफ
Dainikbhaskar.com | Mar 17, 2017

नई दिल्ली. प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की शुक्रवार को खुलकर तारीफ की। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रणब ने कहा कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आए मोदी ने केंद्र में तेजी से चीजों को सीखा और नए रोल में खुद को बखूबी ढाला। प्रणब ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की तारीफ में भी कहा कि उनका काम करने का तरीका एकदम अलग था। वे अपने साथियों की फिक्र किया करते थे। और क्या बोले प्रणब...

मोदी राज्य से आए और केंद्र में महारत हासिल कर ली
- इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रणब ने कहा, ''मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक प्रधानमंत्रियों को काफी कम वक्त काम करने का मौका मिला। इन लोगों के पास पार्लियामेंट का अच्छा-खासा एक्सपीरियंस था। लेकिन एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है।'' 
- ''2008 की आर्थिक मंदी के बाद एक ताकतवर ऑर्गनाइजेशन जी-20 के रूप में उभरा। हर साल और कभी-कभी साल में दो बार जी-20 की समिट होती है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।''
- ''मोदी चीजों को बहुत अच्छी तरह ऑब्जर्व करते हैं। मुझे उनकी वह बात अच्छी लगी, जब उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आपको बहुमत चाहिए होता है, लेकिन सरकार चलाने के सभी का मत चाहिए होता है।''
अपने साथियों की बेहद फिक्र करते थे अटलजी
- प्रणब ने कहा, ''अटलजी काफी असरदार पीएम थे। लेकिन वे पूरी तरह अलग अप्रोच रखते थे। मैं सिर्फ एक उदाहरण आपको दूंगा। मैं राज्यसभा में था। मैंने अचानक देखा कि प्रधानमंत्री मेरी सीट की तरफ आ रहे हैं। मैंने शर्मिंदगी महसूस की। मैंने कहा- अटलजी आपने मेरे पास आने की क्यों तकलीफ की। अाप किसी को मुझे बुलाने के लिए भेज देते।''
- ''अटलजी ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोस्त हैं। इसके बाद अटलजी ने मुझसे एक बात की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीज काफी मेहनती और काबिल मंत्री हैं। उनके लिए ज्यादा तल्ख न हों। उस वक्त जॉर्ज डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे।''
- ''मैंने अटलजी से कहा कि मैं इस बात की तारीफ करता हूं। मैं इस बात को सलाम करता हूं कि आप अपने कलीग की कितनी फिक्र करते हैं। ये बस एक घटना है जो बताती है कि वे किस तरह काम करते थे।'' 
- ''कुछ दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहा कि कश्मीर का मसला सुलझना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं अथॉरिटी नहीं हूं। आप इस मसले को क्यों नहीं सुलझाते। जब आप अथॉरिटी से मिलें तो उन्हें बताएं कि अटलजी की सोच के पन्नों से आपको सबक लेना चाहिए।''
2008 में मजबूत थी भारत की इकोनॉमी
- प्रणब ने कहा कि यूपीए-1 के पहले पांच में से चार साल के दौरान ग्रोथ रेट 8% से ज्यादा थी। इंडियन इकोनॉमी का बेस इतना मजबूत था कि उसने 2008 के इकोनॉमिक क्राइसिस को भी झेल लिया। मनमोहन सिंह ने मंत्रियों को काम करने की पूरी छूट दी थी।

मोदी राज्य से आए और केंद्र में महारत हासिल कर ली
- इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रणब ने कहा, ''मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक प्रधानमंत्रियों को काफी कम वक्त काम करने का मौका मिला। इन लोगों के पास पार्लियामेंट का अच्छा-खासा एक्सपीरियंस था। लेकिन एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है।'' 
- ''2008 की आर्थिक मंदी के बाद एक ताकतवर ऑर्गनाइजेशन जी-20 के रूप में उभरा। हर साल और कभी-कभी साल में दो बार जी-20 की समिट होती है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।''
- ''मोदी चीजों को बहुत अच्छी तरह ऑब्जर्व करते हैं। मुझे उनकी वह बात अच्छी लगी, जब उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आपको बहुमत चाहिए होता है, लेकिन सरकार चलाने के सभी का मत चाहिए होता है।''
अपने साथियों की बेहद फिक्र करते थे अटलजी
- प्रणब ने कहा, ''अटलजी काफी असरदार पीएम थे। लेकिन वे पूरी तरह अलग अप्रोच रखते थे। मैं सिर्फ एक उदाहरण आपको दूंगा। मैं राज्यसभा में था। मैंने अचानक देखा कि प्रधानमंत्री मेरी सीट की तरफ आ रहे हैं। मैंने शर्मिंदगी महसूस की। मैंने कहा- अटलजी आपने मेरे पास आने की क्यों तकलीफ की। अाप किसी को मुझे बुलाने के लिए भेज देते।''
- ''अटलजी ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोस्त हैं। इसके बाद अटलजी ने मुझसे एक बात की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीज काफी मेहनती और काबिल मंत्री हैं। उनके लिए ज्यादा तल्ख न हों। उस वक्त जॉर्ज डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे।''
- ''मैंने अटलजी से कहा कि मैं इस बात की तारीफ करता हूं। मैं इस बात को सलाम करता हूं कि आप अपने कलीग की कितनी फिक्र करते हैं। ये बस एक घटना है जो बताती है कि वे किस तरह काम करते थे।'' 
- ''कुछ दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहा कि कश्मीर का मसला सुलझना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं अथॉरिटी नहीं हूं। आप इस मसले को क्यों नहीं सुलझाते। जब आप अथॉरिटी से मिलें तो उन्हें बताएं कि अटलजी की सोच के पन्नों से आपको सबक लेना चाहिए।''
2008 में मजबूत थी भारत की इकोनॉमी
- प्रणब ने कहा कि यूपीए-1 के पहले पांच में से चार साल के दौरान ग्रोथ रेट 8% से ज्यादा थी। इंडियन इकोनॉमी का बेस इतना मजबूत था कि उसने 2008 के इकोनॉमिक क्राइसिस को भी झेल लिया। मनमोहन सिंह ने मंत्रियों को काम करने की पूरी छूट दी थी।

सोमवार, 13 मार्च 2017

पीएम मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच'



विधानसभा चुनाव 2017: नतीजों के राष्ट्रीय राजनीति पर होंगे ये 10 असर
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated: Mar 11, 2017

नई दिल्ली
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की बंपर जीत के मायने निकाले जाने लगे हैं। हर कोई 4  राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन को मोदी की जीत करार दे रहा है। इसमें कुछ अतिशयोक्ति भी नहीं लगता। वहीं, पंजाब में अपनी झाड़ू से अकाली-बीजेपी की सफाया करने गई आम आदमी पार्टी पंजाब में फ्लॉप होने के साथ ही गोवा में खाता तक नहीं खोल पाई। हालांकि यूपी में महज 7 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस ने पंजाब में जरूर अपनी लाज बचा ली। जानें, इस जीत से देश की राजनीति पर होंगे कौन से 10 बड़े असर...

1. पीएम मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच'
राजनीतिक पंडितों के कयासों को गलत साबित करते हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों ने साबित किया है कि पीएम मोदी की लहर कम नहीं हुई है, बल्कि और तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। यदि 2014 में पीएम मोदी की जीत की वजह उनका करिश्मा था तो आज यह और बढ़ चुका है। बीजेपी ने यूपी और उत्तराखंड में बड़ी जीत हासिल की है। इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट्स का ऐलान नही किया था, ऐसे में इन दोनों राज्यों में बंपर जीत को मोदी का कमाल ही कहा जाएगा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत ऐतिहासिक है। बीजेपी ने कांग्रेस और एसपी के उस गठबंधन के खिलाफ बंपर जीत दर्ज की है, जो कागजों पर खासा मजबूत बताया जा रहा था। सीएम अखिलेश यादव की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता दिखाया जा रहा था। ऐसे में बीजेपी की इस जोरदार विजय के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को श्रेय देना ही होगा।

2. भारतीय राजनीति का मुख्य ध्रुव बनी बीजेपी
यूपी और उत्तराखंड में जीत के साथ बीजेपी देश में सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उभरी है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की देश के 12 राज्यों में सरकार है। देश का तकरीबन 54 पर्सेंट हिस्सा भगवा शासन के अंतर्गत है, जबकि 63.6% क्षेत्र पर बीजेपी और उसके सहयोगियों का शासन है। बीजेपी को गोवा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। दूसरी तरफ मणिपुर में एक बार फिर से कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी उससे बेहद करीब खड़ी है।

3. 'कांग्रेस मुक्त' भारत की बात अभी दूर
भले ही कांग्रेस को यूपी में एसपी का जूनियर पार्टनर रहते हुए करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है, लेकिन पंजाब में उसने अपने दम पर सत्ता हासिल की है। वहीं गोवा और मणिपुर में वह बीजेपी से करीबी मुकाबले में आगे रही है। हालांकि उत्तराखंड में वह बुरी तरह हारी है, लेकिन पंजाब में आप के मुकाबले शानदार जीत पर कांग्रेस नेतृत्व खुश होगा। हालांकि बीजेपी के पास यूपी की जीत का जश्न मनाने का बड़ा कारण है, लेकिन कांग्रेस मुक्त भारत की बात अब भी सपना ही है।

4. केजरीवाल को लगा बड़ा झटका
विधानसभा चुनाव के नतीजों ने अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को करारा झटका दिया है। आप का मानना था कि दिल्ली के बाद वह पंजाब की सत्ता पर काबिज होगी। हालांकि आप ने बीजेपी-अकाली को तीसरे स्थान पर धकेला है, लेकिन सत्ता से दूर रहने के चलते वह नैशनल पॉलिटिक्स में अपनी धमक नहीं जमा पाएगी। इसके अलावा गोवा में भी आप को क्लीन स्वीप की स्थिति झेलनी पड़ी है।

5. आर्थिक सुधारों में आएगी तेजी
इन विधानसभा चुनावों के नतीजों से मोदी सरकार को आर्थिक सुधारों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे वह जीएसटी को लागू करने की ओर भी बढ़ सकेगी। बीजेपी की भारी जीत से मार्केट पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। आने वाले वक्त में बाजार में भी तेजी देखने को मिल सकती है।

6. बदलेगा राज्यसभा का गणित
इन विधानसभा चुनावों के चलते अगले साल तक राज्यसभा का गणित पूरी तरह से बदल जाएगा। 2018 के मध्य तक बीजेपी राज्यसभा में बहुमत में आ जाएगी। राज्यसभा में बहुमत सरकार को आत्मविश्वास प्रदान करेगा और वह लेबर रिफॉर्म्स जैसे बिलों पर आगे बढ़ सकेगी।

7. राष्ट्रपति चुनावों पर रहेगा असर
नई चुनी गई 5 विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मजबूत प्रतिनिधित्व के चलते वह राष्ट्रपति चुनाव में मजबूत स्थिति में होगी। यूपी में बीजेपी की जीत उसके लिए जुलाई में अपने पसंद के राष्ट्रपति को चुनने की राह मजबूत करेगी।

8. नोटबंदी का मिला राजनीतिक लाभ
नोटबंदी के आर्थिक लाभ हुए या नहीं, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि राजनीति में पीएम मोदी का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है। नोटबंदी के बाद से बीजेपी जितने भी चुनावों में उतरी है, उसे अप्रत्याशित सफलता मिली है। गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है।

9.क्षेत्रीय दलों के लिए अस्तित्व का संकट
मोदी की सुनामी में मायावती और अजित सिंह जैसी क्षेत्रीय क्षत्रप बहते दिखे हैं। अखिलेश आने वाले चुनावों में उबर सकते हैं, लेकिन मायावती और अजित सिंह जैसों के लिए अस्तित्व का संकट है। मोदी की लोकप्रियता के दौर में खुद को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आरएलडी और बीएसपी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।

10. हिमाचल और गुजरात में बीजेपी की राह होगी आसान
यूपी, उत्तराखंड में इस शानदार जीत के बाद बीजेपी इस साल के आखिर में गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश के चुनावों के लिए भी पूरी तरह से तैयार हो गई होगी। बीजेपी को जहां पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में जीत की उम्मीद होगी वहीं वह हिमाचल को कांग्रेस से छीनने की योजना पर काम करेगी।

रविवार, 12 मार्च 2017

देश के गरीबों की ताकत को समझता हूं : नरेंद्र मोदी



खास बातें

०१_'चुनाव में कौन जीता, कौन हारा, मैं इस दायरे में सोचने वालों में नहीं हूं'

०२-'जिन्होंने वोट दिया भाजपा सरकार उनकी भी, जिन्होंने नहीं दिया उनकी भी'

०३-'मैं ऐसा पीएम हूं जिससे पूछा जाता है, इतनी मेहनत क्यों करते हो'

देश के गरीबों की ताकत को समझता हूं, जीत के बाद और अधिक नम्र होना हमारी जिम्मेदारी : पीएम मोदी

सुनील कुमार सिरीज द्वारा लिखित, अंतिम अपडेट: रविवार मार्च 12, 2017

https://khabar.ndtv.com/news/assembly-polls-2017/pm-narendra-modis-assembly-elections-victory-speech-at-bjp-headqaurter-1668901



        नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी हेडक्वार्टर में आयोजित अभिनंदन समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं होते हैं, बल्कि यह लोकशिक्षण का माध्यम भी है. उन्होंने कहा कि अकल्पनीय भारी मतदान के बाद अकल्पनीय भारी विजय होता है, यह पोलिटिकल पंडितों के लिए विचार करने को मजबूर करता है. भावनात्मक मुद्दों के अलावा विकास एक कठिन चुनावी मुद्दा होता है. पिछले 50 सालों में विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे से कतराते रहे हैं.

        प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जीत के लिए बीजेपी की चार पीढ़ियां खप गईं. हर चुनाव के साथ हमारा समर्थन बढ़ता गया. यह बीजेपी का स्वर्णिम युग है. उन्होंने कहा, चुनाव में कौन जीता, कौन हारा, मैं इस दायरे में सोचने वालों में से नहीं हूं. चुनाव का नतीजा हमारे लिए जनता जनार्दन का पवित्र आदेश होता है. जीत के फल के बाद और अधिक नम्र होना हमारी जिम्मेदारी है. सत्ता जनता की सेवा करने का एक अवसर होती है. पीएम मोदी ने कहा, मैं देश की गरीबों की शक्ति को पहचान पाता हूं और राष्ट्र के निर्माण में गरीबों को जितना ज्यादा अवसर मिलेगा, देश उतना प्रगति करेगा. गरीब को अगर काम का अवसर मिला, तो वह देश के लिए ज्यादा काम करके दिखाएगा. मध्यम वर्ग का बोझ कम होना चाहिए. एक बार गरीब के अंदर खुद का बोझ उठाने की क्षमता आ जाएगी, तब मध्यम वर्ग का बोझ कम हो जाएगा.

       प्रधानमंत्री मोदी ने पांचों राज्यों की जनता का धन्यवाद देते हुए कहा कि जिन्होंने वोट दिया भाजपा की सरकार उनकी भी है, जिन्होंने नहीं दिया उनकी भी है. इसलिए वोट दिया कि नहीं दिया यह कोई मायने नहीं रखता. प्रधानमंत्री ने कहा सरकार सबकी होती है, सबके लिए होती है और सबको साथ लेकर चलने के लिए होती है. सरकार को कोई भेदभाव करने का हक नहीं है. प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने कहा था कि हमसे गलती हो सकती है, लेकिन गलत इरादे से कोई काम नहीं करेंगे. देश से दूसरा वादा मैंने ये किया था कि कि हम परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे. तीसरी बात मैंने कही थी कि हम जो कुछ करेंगे, प्रामाणिकता के साथ करेंगे. उन्होंने अपने बारे में कहा कि मैं ऐसा पीएम हूं, जिससे पूछा जाता है कि इतनी मेहनत क्यों करते हो. इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य क्या हो सकता है.

       पीएम नरेंद्र मोदी के भव्य अभिनंदन समारोह में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने लोगों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये होली देश और भाजपा दोनों के लिए अनोखा रंग लेकर आई है. उन्होंने कहा कि यूपी की जीत हर मामले में अप्रत्याशित रही. उत्तराखंड में भी प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी सरकार बनाने जा रही है. मणिपुर और गोवा में भी वहां की जनता ने भाजपा को भरपूर समर्थन दिया और हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा. पांचों राज्यों के चुनावों के नतीजे 2014 के लोकसभा चुनावों से भी दो कदम आगे है.

       बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि इस बार हमें 2014 से भी बड़ा समर्थन मिला है और देश का गरीब नोटबंदी के फैसले पर बीजेपी के साथ है. अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी आजादी के बाद सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं. बीजेपी की विजय यात्रा हिमाचल, गुजरात होते हुए पूर्व और दक्षिण में भी पहुंचेगी.

        इस समारोह में शामिल होने के लिए पीएम मोदी ली मेरीडियन होटल से बीजेपी दफ़्तर तक पैदल पहुंचे. इस दौरान उन पर फूलों की बारिश की गई. बीजेपी दफ्तर पहुंचने के बाद पीएम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए. बीजेपी के इस जश्न में बड़ी संख्या मेें पार्टी कार्यकर्ता और कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. पार्टी दफ्तर में ढोल-नगाड़े की थाप पर बीजेपी कार्यकर्ता नाचते-गाते दिखे.

       बीजेपी मुख्यालय में पीएम मोदी के स्वागत की भव्य तैयारी की गई. वहां होली के रंगीन होर्डिंग के जरिये विधानसभा चुनावों में बीजेपी का समर्थन करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया गया. ली मेरिडियन होटल से लेकर बीजेपी मुख्यालय तक के रास्ते के बीच लोगों की भीड़ के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए थे. पार्टी कार्यकर्ता पीएम मोदी के बड़े-बड़े कटआउट लेकर सड़कों के दोनों ओर खड़े दिखे. स्वागत समारोह में कई केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे.

      स्वागत समारोह के बाद बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक होनी है, जहां यूपी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के नाम तय किए जा सकते हैं. कहा जा रहा है कि यूपी में मुख्यमंत्री पद के लिए केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा का नाम सबसे आगे चल रहा है. वहीं अमित शाह के क़रीबी दिनेश शर्मा भी रेस में हैं.

      यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, महासचिव श्रीकांत शर्मा समेत कई और नामों की चर्चा चल रही है. वहीं उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क़रीबी त्रिवेंद्र सिंह रावत, सतपाल महाराज, प्रकाश पंत जैसे कई नाम रेस में हैं.

शुक्रवार, 3 मार्च 2017

प्रदेश के विकास के लिए हर चुनौती मंजूर : मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे





राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री का जवाब
जयपुर, 2 मार्च 2017

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि जहां चाह है, वहां राह है। इसीलिए हमें भी प्रदेश के विकास के लिए हर चुनौती मंजूर है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने आप पर, अपनी पार्टी पर, विपक्ष पर और प्रदेश की जनता पर पूरा भरोसा है कि वह विकास की ओर उठाए गए हर कदम में हमारा भरपूर साथ देंगे।

मुख्यमंत्री गुरूवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रही थीं। उन्होंने कहा कि यह अभिभाषण मात्र एक वर्ष की उपलब्धियां नही बल्कि पिछले तीन वर्ष में निष्ठा और लगन से किये गये टीम राजस्थान के प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने भेदभाव से ऊपर उठकर हर क्षेत्र में विकास को गति देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जो विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस पार्टी के गढ़ माने जाते हैं उन क्षेत्रों के विकास में हमने कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि झुंझुनूं विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस 11 बार जीती, जबकि हमारी पार्टी को दो बार ही मौका मिला। सुराज संकल्प यात्रा के दौरान हमने उनकी अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के कारण पीड़ा महसूस की और कुंभाराम लिफ्ट कैनाल से मीठा पानी पहुंचाने की बुनियाद रखी। पिछली सरकार ने इस क्षेत्र में सड़कों के निर्माण पर 23 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च किए, जबकि हमने केवल तीन साल में ही 24.27 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य करा दिए हैं।

अधिकारी-कर्मचारी डरें नहीं साथ खड़ी है सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को आश्चर्य हो रहा है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार जमीनी स्तर पर काम कैसे कर रही है। ऐसे लोग प्रदेश के विकास की गति को रोक नहीं पाए तो अधिकारियों को डराने, धमकाने लगे। सूची बनाने की धमकी दी। लगता है कुछ लोग सत्ता की खुमारी से अभी तक ऊबर नहीं पाए। उनको तो धन्यवाद देना चाहिए था कि सरकार ने विकास में बाधा बनने वाले लोगों को बेनकाब किया है। मैं राजस्थान के प्रत्येक सदस्य, सभी अधिकारी और कर्मचारियों को आश्वस्त करती हूं कि वे डरे नहीं, सरकार उनके साथ खड़ी है। अपना काम निर्भिक रूप से सच्ची लगन, ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करते रहें ताकि सशक्त और समृद्ध राजस्थान का निर्माण हो सके।
श्रीमती राजे ने कहा कि नवलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तो हमें एक बार भी मौका नहीं मिला, फिर भी हमने तीन साल में यहां 61 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य कराये। जबकि कांग्रेस के पांच साल में 23 करोड़ रुपये ही खर्च हुए थे। उन्होंने कहा कि ओसियां मे भी 10 बार जीतने के बावजूद कांग्रेस वहां की जरूरते पूरी नही कर सकी, मगर हमने यहां भी कॉलेज, केन्द्रीय विद्यालय और कृषि मंडी खोली। साथ ही चार सौ करोड़ रुपये की पांचला घेवडा चिराई पेयजल योजना शुरू की। सड़कों पर भी 47.12 करोड़ रुपये खर्च किये।

जेएनवीयू की आंच दूर तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल सदन में हंगामा हुआ। आप सबको लगा कि हम ये नही समझ रहे कि आप ये क्यूं कर रहे है। हमें मालूम था कि विधायक जोगाराम जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय में हुई अनियमितताओं का मुद्दा उठाने वाले थे, जिसकी आंच दूर तक जाती। इसलिए जानबूझ कर हंगामा खड़ा किया ताकि वो मुद्दा तो गायब हो जाए। यह मुद्दा इतनी आसानी से नही गायब होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजाति क्षेत्र को अपना वोट बैंक समझने वाली कांग्रेस पार्टी ने आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने की चिन्ता तक नहीं की। हमारी सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए अलग से सर्विस कैडर का गठन करने, मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने तथा महाराणा प्रताप पुलिस बटालियन की स्थापना करने जैसे काम किये। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा में भी पिछले तीन साल में सड़कों पर 69 करोड़ रुपये खर्च किये गये। उन्होंने कहा कि बिना भेदभाव ही राज्य भर में सभी पंचायत मुख्यालयों पर हायर सैकेण्डरी स्कूल खोले जा रहे है। ग्रामीण गौरव पथ बनाएं जा रहे हैं।

प्रदेश के इतिहास का सबसे छोटा विधायक दल
श्रीमती राजे ने कहा कि जनता ने हमें प्रदेश की सेवा के लिए 18 साल दिए वो भी टुकड़ों में, जबकि कांग्रेस को 50 साल मिले। फिर भी जिस पार्टी ने प्रदेश में 50 वर्ष तक शासन किया, वही पार्टी राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे छोटा विधायक दल बनकर सामने बैठी है। इसका कारण भी साफ है कि जनता ने कांग्रेस पार्टी को खूब समय दिया और परखा मगर प्रदेश का विकास नहीं हुआ।

जश्न नहीं मनाया, रिपोर्ट कार्ड दिया
श्रीमती राजे ने कहा कि हमारी सरकार के तीन साल पूरे होने पर हमारे ऊपर जश्न मनाने के आरोप लगाये गये, जबकि हम जनता के बीच गये और तीन साल में किए हुए कार्यों को लोगां के सामने रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम एसबीसी वर्ग को आरक्षण के लिए कानून लेकर आए और उस कानून के विलोपित होने के बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर एसबीसी वर्ग को इसका लाभ दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। हमने एसबीसी वर्ग को आरक्षण के बारे में अध्ययन के लिए जस्टिस एस के गर्ग की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि हमने आर्थिक पिछडे़ वर्ग के आरक्षण के अध्ययन के लिए जस्टिस अनूप गोयल की अध्यक्षता में आयोग गठित किया है एवं धौलपुर-भरतपुर के जाटों के आरक्षण की मांग का जस्टिस जितेन्द्र गोयल की अध्यक्षता में ओबीसी आयोग अध्ययन कर रहा है।

बिना प्रावधानों के कर डाली घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल के अन्तिम वर्ष में 19 वृहद पेयजल तथा 16 सिंचाई परियोजनाओं सहित 42 कॉलेजो की घोषणाएं कर दी जबकि इनके लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि हमने राजधर्म का पालन करते हुए 42 कॉलेजो की घोषणाओं में से 32 को पूरा किया।

किसान हित में नियम बदले
श्रीमती राजे ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नई फसल बीमा योजना के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने इस योजना के लिए 1066 करोड रुपये का प्रावधान रखा है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश इस योजना की क्रियान्विति में अग्रणी है जिसकी स्वयं प्रधानमंत्री जी ने सराहना की है। इतना ही नहीं पहली बार राष्ट्रीय आपदा राहत फंड के नियमों में बदलाव करते हुए 50 प्रतिशत के स्थान पर 33 प्रतिशत खराबे पर मुआवजे का निर्धारण किया गया जिसका फायदा प्रदेश के किसानों को मिला। उन्होंने कहा कि ग्राम के आयोजन में 55 हजार किसानों और पशुपालकों ने भाग लेकर इसे सफल बनाया।

राजस्थान में प्रति व्यक्ति आय दुगुनी हुई
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की खुशहाली का प्रतीक उसकी प्रति व्यक्ति आय को माना जाता है। इस आंकडे़ में भी राजस्थान ने नई ऊंचाई हासिल की है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय वर्ष 2013-14 में 27 हजार रुपये थी, जो अब वर्ष 2015-16 में दुगुने से भी अधिक 57 हजार रुपये हो गई है।

बिजली पर देश में सबसे अधिक सब्सिडी राजस्थान में
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के निर्णय के कारण हमें 80 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी कम्पनियां मिली जिसका सालाना ब्याज ही 8 हजार करोड़ रुपये है। बढ़ी हुई दरों के कारण किसानों पर पड़ने वाले भार को कम करने के लिए सरकार ने यह भार खुद वहन करने का निर्णय लिया। पिछली सरकार ने 5 वर्ष में बिजली पर जहां 9 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, वहीं हमारी सरकार ने तीन वर्ष में ही 24 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। आने वाले दिनों में सरकार इस मद में 8 हजार 500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष सब्सिडी का भार वहन करेगी। यह सब्सिडी देश के किसी भी राज्य सरकार द्वारा कृषि पर दी जा रही सर्वाधिक सब्सिडी है।

श्रीमती राजे ने प्रदेश के स्वाभिमान और खुशहाली के लिए सभी से साथ आने का आह्वान करते हुए हेनरी फोर्ड के इस कथन के साथ अपने भाषण का समापन कियाः-

‘‘साथ आना शुरुआत होती है, साथ रहने से तरक्की होती है और साथ काम करने से सफलता मिलती है।’’
मुख्यमंत्री के भाषण के बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हुआ।