सोमवार, 13 मार्च 2017

पीएम मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच'



विधानसभा चुनाव 2017: नतीजों के राष्ट्रीय राजनीति पर होंगे ये 10 असर
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated: Mar 11, 2017

नई दिल्ली
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की बंपर जीत के मायने निकाले जाने लगे हैं। हर कोई 4  राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन को मोदी की जीत करार दे रहा है। इसमें कुछ अतिशयोक्ति भी नहीं लगता। वहीं, पंजाब में अपनी झाड़ू से अकाली-बीजेपी की सफाया करने गई आम आदमी पार्टी पंजाब में फ्लॉप होने के साथ ही गोवा में खाता तक नहीं खोल पाई। हालांकि यूपी में महज 7 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस ने पंजाब में जरूर अपनी लाज बचा ली। जानें, इस जीत से देश की राजनीति पर होंगे कौन से 10 बड़े असर...

1. पीएम मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच'
राजनीतिक पंडितों के कयासों को गलत साबित करते हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों ने साबित किया है कि पीएम मोदी की लहर कम नहीं हुई है, बल्कि और तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। यदि 2014 में पीएम मोदी की जीत की वजह उनका करिश्मा था तो आज यह और बढ़ चुका है। बीजेपी ने यूपी और उत्तराखंड में बड़ी जीत हासिल की है। इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट्स का ऐलान नही किया था, ऐसे में इन दोनों राज्यों में बंपर जीत को मोदी का कमाल ही कहा जाएगा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत ऐतिहासिक है। बीजेपी ने कांग्रेस और एसपी के उस गठबंधन के खिलाफ बंपर जीत दर्ज की है, जो कागजों पर खासा मजबूत बताया जा रहा था। सीएम अखिलेश यादव की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता दिखाया जा रहा था। ऐसे में बीजेपी की इस जोरदार विजय के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को श्रेय देना ही होगा।

2. भारतीय राजनीति का मुख्य ध्रुव बनी बीजेपी
यूपी और उत्तराखंड में जीत के साथ बीजेपी देश में सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उभरी है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की देश के 12 राज्यों में सरकार है। देश का तकरीबन 54 पर्सेंट हिस्सा भगवा शासन के अंतर्गत है, जबकि 63.6% क्षेत्र पर बीजेपी और उसके सहयोगियों का शासन है। बीजेपी को गोवा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। दूसरी तरफ मणिपुर में एक बार फिर से कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी उससे बेहद करीब खड़ी है।

3. 'कांग्रेस मुक्त' भारत की बात अभी दूर
भले ही कांग्रेस को यूपी में एसपी का जूनियर पार्टनर रहते हुए करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है, लेकिन पंजाब में उसने अपने दम पर सत्ता हासिल की है। वहीं गोवा और मणिपुर में वह बीजेपी से करीबी मुकाबले में आगे रही है। हालांकि उत्तराखंड में वह बुरी तरह हारी है, लेकिन पंजाब में आप के मुकाबले शानदार जीत पर कांग्रेस नेतृत्व खुश होगा। हालांकि बीजेपी के पास यूपी की जीत का जश्न मनाने का बड़ा कारण है, लेकिन कांग्रेस मुक्त भारत की बात अब भी सपना ही है।

4. केजरीवाल को लगा बड़ा झटका
विधानसभा चुनाव के नतीजों ने अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को करारा झटका दिया है। आप का मानना था कि दिल्ली के बाद वह पंजाब की सत्ता पर काबिज होगी। हालांकि आप ने बीजेपी-अकाली को तीसरे स्थान पर धकेला है, लेकिन सत्ता से दूर रहने के चलते वह नैशनल पॉलिटिक्स में अपनी धमक नहीं जमा पाएगी। इसके अलावा गोवा में भी आप को क्लीन स्वीप की स्थिति झेलनी पड़ी है।

5. आर्थिक सुधारों में आएगी तेजी
इन विधानसभा चुनावों के नतीजों से मोदी सरकार को आर्थिक सुधारों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे वह जीएसटी को लागू करने की ओर भी बढ़ सकेगी। बीजेपी की भारी जीत से मार्केट पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। आने वाले वक्त में बाजार में भी तेजी देखने को मिल सकती है।

6. बदलेगा राज्यसभा का गणित
इन विधानसभा चुनावों के चलते अगले साल तक राज्यसभा का गणित पूरी तरह से बदल जाएगा। 2018 के मध्य तक बीजेपी राज्यसभा में बहुमत में आ जाएगी। राज्यसभा में बहुमत सरकार को आत्मविश्वास प्रदान करेगा और वह लेबर रिफॉर्म्स जैसे बिलों पर आगे बढ़ सकेगी।

7. राष्ट्रपति चुनावों पर रहेगा असर
नई चुनी गई 5 विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मजबूत प्रतिनिधित्व के चलते वह राष्ट्रपति चुनाव में मजबूत स्थिति में होगी। यूपी में बीजेपी की जीत उसके लिए जुलाई में अपने पसंद के राष्ट्रपति को चुनने की राह मजबूत करेगी।

8. नोटबंदी का मिला राजनीतिक लाभ
नोटबंदी के आर्थिक लाभ हुए या नहीं, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि राजनीति में पीएम मोदी का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है। नोटबंदी के बाद से बीजेपी जितने भी चुनावों में उतरी है, उसे अप्रत्याशित सफलता मिली है। गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है।

9.क्षेत्रीय दलों के लिए अस्तित्व का संकट
मोदी की सुनामी में मायावती और अजित सिंह जैसी क्षेत्रीय क्षत्रप बहते दिखे हैं। अखिलेश आने वाले चुनावों में उबर सकते हैं, लेकिन मायावती और अजित सिंह जैसों के लिए अस्तित्व का संकट है। मोदी की लोकप्रियता के दौर में खुद को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आरएलडी और बीएसपी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।

10. हिमाचल और गुजरात में बीजेपी की राह होगी आसान
यूपी, उत्तराखंड में इस शानदार जीत के बाद बीजेपी इस साल के आखिर में गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश के चुनावों के लिए भी पूरी तरह से तैयार हो गई होगी। बीजेपी को जहां पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में जीत की उम्मीद होगी वहीं वह हिमाचल को कांग्रेस से छीनने की योजना पर काम करेगी।

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