रविवार, 30 अप्रैल 2017

गोरखनाथ : गोरक्षनाथ




गोरखनाथ अथवा गोरक्षनाथ एक 'नाथ योगी' थे। सिद्धों से सम्बद्ध सभी जनश्रुतियाँ इस बात पर एकमत हैं कि नाथ सम्प्रदाय के आदि प्रवर्तक चार महायोगी हुए हैं। आदिनाथ स्वयं शिव ही हैं। उनके दो शिष्य हुए, जालंधरनाथ और मत्स्येन्द्रनाथ या मच्छन्दरनाथ। जालंधरनाथ के शिष्य थे- 'कृष्णपाद' और मत्स्येंन्द्रनाथ के 'गोरख' अथवा 'गोरक्ष' नाथ। इस प्रकार ये चार सिद्ध योगीश्वर नाथ सम्प्रदाय के मूल प्रवर्तक हैं।

अनुश्रुतियाँ
परवर्ती नाथ सम्प्रदाय में मत्स्येन्द्रनाथ और गोरखनाथ का ही अधिक उल्लेख पाया जाता है। इन सिद्धों के बारे में सारे देश में जो अनुश्रुतियाँ और दन्त कथाएँ प्रचलित हैं, उनसे आसानी से इन निष्कर्षों पर पहुँचा जा सकता है-

मत्स्येन्द्र और जालंधर समसामयिक गुरुभाई थे और दोनों के प्रधान शिष्य क्रमश: गोरखनाथ और कृष्णपाद थे।
मत्स्येन्द्रनाथ किसी विशेष प्रकार के योग मार्ग के प्रवर्तक थे, परन्तु बाद में किसी ऐसी साधना में जा फँसे थे, जहाँ पर स्त्रियों का अबाध संसर्ग माना जाता था, 'कौलज्ञान निर्णय' से जान पड़ता है कि यह वामाचारी कौल साधना थी, जिसे सिद्ध कौशल मत कहते थे; गोरखनाथ ने अपने गुरु का वहाँ से उद्धार किया था। शुरू से ही मत्स्येन्द्र और गोरख की साधना पद्धति जालंधर और कृष्णपाद की साधना पद्धति से भिन्न थी।

समय काल
गोरखनाथ के समय के बारे में निम्न निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं-
मत्स्येन्द्रनाथ द्वारा लिखित कहे जाने वाले ग्रन्थ 'कौलज्ञान निर्णय' की प्रति का लिपिकाल डाक्टर प्रबोधचन्द्र बाग़ची के अनुसार 11 शती के पूर्व का है। यदि यह ठीक हो तो मत्स्येन्द्रनाथ का समय ईस्वी 11वीं शती से पहले होना चाहिए।
सुप्रसिद्ध कश्मीरी आचार्य अभिनव गुप्त के तन्त्रालोक में मच्छन्द विभु को बड़े आदर से स्मरण किया गया है। अभिनव गुप्त निश्चित् रूप से सन् ई. की दसवीं शती के अन्त और ग्यारवीं शती के प्रारम्भ में विद्यमान थे। इस प्रकार मत्स्येन्द्रनाथ इस समय से काफ़ी समय पहले हुए होंगे।

मत्स्येन्द्रनाथ का एक नाम 'मीननाथ' है। ब्रजयनी सिद्धों में एक मीनपा हैं, जो मत्स्येन्द्रनाथ के पिता बताये गये हैं। मीनपा राजा देवपाल के राजत्वकाल में हुए थे। देवपाल का राज्यकाल 809 से 849 ई. तक है। इससे सिद्ध होता है कि मत्स्येन्द्र ई. सन् की नवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में विद्यमान थे।

तिब्बती परम्परा के अनुसार कानपा राजा देवपाल के राज्यकाल में आविर्भाव हुए थे। इस प्रकार मत्स्येन्द्रनाथ आदि सिद्धों का समय ई. सन के नवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध और दसवीं शताब्दी का पूर्वार्द्ध समझना चाहिए।

कुछ ऐसी भी दन्तकथाएँ हैं जो गोरखनाथ का समय बहुत बाद में रखने का संकेत करती हैं, जैसे कबीर और नानक से उनका संवाद, परन्तु ये बहुत बाद की बातें हैं। जब मान लिया गया था कि गोरखनाथ चिरंजीवी हैं। गूँगा की कहानी, पश्चिमी नाथों की अनुश्रुतियाँ, बंगाल की दन्तकथाएँ और धर्मपूजा सम्प्रदाय की प्रसिद्धियाँ, महाराष्ट्र के सन्त ज्ञानेश्वर आदि की परम्पराएँ इस काल को 1200 ई. के पूर्व ले जाती हैं। इस बात का ऐतिहासिक प्रमाण है कि ईस्वी तेरहवीं शताब्दी में गोरखपुर का मठ ढहा दिया गया था, इसीलिए इसके बहुत से पूर्व गोरखनाथ का समय होना चाहिए। बहुत से पूर्ववर्ती मत गोरक्षनाथी सम्प्रदाय में अंतर्भुक्त हो गये थे। इनकी अनुश्रुतियों का सम्बन्ध भी गोरखनाथ से जोड़ दिया गया है। इसलिए कभी-कभी गोरक्षनाथ का समय और भी पहले निश्चित् किया जाता है।  'नाथ-सम्प्रदाय' नामक पुस्तक में उन सम्प्रदायों के अंतर्भुक्त होने की प्रक्रिया का सविस्तार विवेचन किया है। सब बातों पर विचार करने से गोरखनाथ का समय ईस्वी सन् की नवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ही माना जाना ठीक जान पड़ता है।

कृतियाँ
गोरक्षनाथ के नाम से बहुत-सी पुस्तकें संस्कृत में मिलती हैं और अनेक आधुनिक भारतीय भाषाओं में भी चलती हैं। निम्नलिखित पुस्तकें गोरखनाथ की लिखी बतायी गयी हैं-

(1)अमवस्क, (2) अवरोधशासनम्, (3) अवधूत गीता, (4) गोरक्षकाल, (5) गोरक्षकौमुदी, (6) गोरक्ष गीता, (7) गोरक्ष चिकित्सा, (8) गोरक्षपंचय, (9) गोरक्षपद्धति, (10) गोरक्षशतक, (11) गोरक्षशास्त्र, (12) गोरक्षसंहिता, (13) चतुरशीत्यासन, (14) ज्ञान प्रकाश शतक, (15) ज्ञान शतक, (16) ज्ञानामृत योग, (17) नाड़ीज्ञान प्रदीपिका, (18) महार्थमंजरी, (19) योगचिन्तामणि, (20) योगमार्तण्ड, (21) योगबीज, (22) योगशास्त्र, (23) योगसिद्धासन, पद्धति, (24) विवेक मार्तण्ड, (25) श्रीनाथसूत्र, (26) सिद्धसिद्धान्त पद्धति, (27) हठयोग, (28) हठ संहिता। इसमें महार्थ मंजरी के लेखक का नाम पर्याय रूप में महेश्वराचार्य भी लिखा है और यह प्राकृत में है। बाकी संस्कृत में हैं। कई एक दूसरे से मिलती हैं; कई पुस्तकों के गोरक्षलिखित होने में सन्देह है।

हिन्दी में सब मिलाकर 40 छोटी-बड़ी रचनाएँ गोरखनाथ की कही जाती हैं, जिनकी प्रामाणिकता असन्दिग्ध नहीं है-
(1) सबदी, (2) पद, (3) सिष्यादर्सन, (4) प्राणसंकली, (5) नरवे बोध, (6) आतम बोध (पहला), (7) अभैमात्रा योग, (8) पन्द्रह तिथि, (9) सप्नवाद, (10) मछींद्रगोरख बोध, (11) रोमावली, (12) ग्यानतिलक, (13) ग्यान चौंतीस, (14) पंचमात्रा, (15) गोरखगणेश गोष्ठी, (16) गोरादत्तगोष्ठी, (17) महादेवगोरख गुष्ट, (18) सिस्टपुराण, (19) दयाबोध, (20) जाती भौरावली (छन्द गोरख), (21) नवग्रह, (22) नवरात्र, (23) अष्ट परछाया, (24) रहरास, (25)ग्यानमाल, (26) आतमाबोध (दूसरा), (27) व्रत, (28) निरंजन पुराण, (29) गोरखवचन, (30) इन्द्री देवता, (31) मूल गर्मावती, (32) खाणवारूणी, (33) गोरखससत, (34) अष्टमुद्रा, (35) चौबी सिधि, (36) डक्षरी, (37) पंच अग्नि, (38) अष्टचक्र, (39) अवलि सिलूक, (40) क़ाफ़िर बोध।

इन ग्रन्थों से अधिकांश गोरखनाथी मत के संग्रहमात्र हैं। ग्रन्थ रूप में स्वयं गोरखनाथ ने इनकी रचना की होगी, यह बात संदिग्ध है। अन्य भारतीय भाषाओं में भी, जैसे-बंगाली, मराठी, गुजराती, पंजाबी आदि में इसी प्रकार की रचनाएँ प्राप्त होती हैं।

शाखाएँ
गोरखनाथ द्वारा प्रवर्तित 'योगिसम्प्रदाय' मुख्य रूप से बारह शाखाओं में विभक्त है। इसीलिए इसे 'बारहपन्थी' कहते हैं। इस मत के अनुयायी कान फड़वाकर मुद्रा धारण करते हैं। इसीलिए उन्हें 'कनफटा', 'भाकतफटाँ' योगी भी कहते हैं। बारह में से छ: तो शिव द्वारा प्रवर्तित माने जाते हैं और छ: गोरखनाथ द्वारा- (1) भुज के कंठरनाथ, (2) पागलनाथ, (3) रावल, (4) पंख या पंक, जिससे सतनाथ, धरमनाथ, ग़रीबनाथ और हाड़ीभरंग सम्बद्ध हैं, (5) वन और (6) गोपाल या राम के सम्प्रदाय कहे जाते हैं और (7) चाँदनाथ कपिलानी, जिससे गंगानाथ, मायनाथ, कपिलानी, नीमनाथ, पारसनाथ आदि के सम्बन्ध हैं, (8) हेठनाथ, जिससे लक्ष्मणनाथ या कालनाथ, दरियांथ, नाटसेरी, जाफ़र पीर आदि का सम्बन्ध बताया जाता है। (9) आई पन्थ के चोलीनाथ जिससे मस्तनाथ, आई पन्थ से छोटी दरग़ाह, बड़ी दरग़ाह आदि का सम्बन्ध है, (10) वेराग पन्थ, जिससे भाईनाथ, प्रेमनाथ, रतननाथ आदि का सम्बन्ध है और कायानाथ या कायमुद्दीन प्रवर्तित सम्प्रदाय भी सम्बन्धित है, (11) जैपुर के पावनाथ, जिससे पापन्थ, कानिया, बाराराग आदि का सम्बन्ध है और (12) घजनाथ, जो हनुमानजी के द्वारा प्रवर्तित कहा जाता है, गोरखनाथ के सम्प्रदाय कहे जाते हैं। इसका विश्लेषण करने से पता चलता है कि इनमें पुराने मत, जैसे कपिल का योगमार्ग लकुलीशमत, कापालिक मत, वाममार्ग आदि सम्मिलित हो गये हैं।

अंग
गोरक्षमत के योग को पंतजलि वर्णित 'अष्टांगयोग' से भिन्न बताने के लिए 'षडंग योग' कहते हैं। इसमें योग के केवल छ: अंगों का ही महत्व है। प्रथम दो अर्थात् यम और नियम इसमें गौण है। इसका साधनापक्ष या प्रक्रिया-अंग हठयोग कहा जाता है। शरीर में प्राण और अपान, सूर्य और चन्द्र नामक जो बहिर्मुखी और अंतर्मुखी शक्तियाँ हैं, उनको प्राणायाम, आसन, बन्ध आदि के द्वारा सामरस्य में लाने से सहज समाधि सिद्ध होती है। जो कुछ पिण्ड में है, वही ब्रह्माण्ड में भी है। इसीलिए हठयोग की साधना पिण्ड या शरीर को ही केन्द्र बनाकर विश्व ब्रह्माण्ड में क्रियाशील शक्ति को प्राप्त करने का प्रयास है।

गोरक्षनाथ के नाम पर चलने वाले ग्रन्थों में विशेष रूप से इस साधना प्रक्रिया का ही विस्तार है। कुछ अंग दर्शन या तत्त्ववाद के समझाने के उद्देश्य से लिख गये हैं। अवरोधशासन, सिद्ध-सिद्धान्त पद्धति, महार्थ मंजरी आदि ग्रन्थ इसी श्रेणी में आते हैं। अवरोध शासन में गोरखनाथ ने वेदान्तियों, मीमांसकों, कौलों, व्रजयानियों और शाक्त तान्त्रिकों के मोक्षसम्बन्धी विचारों को मूर्खता कहा है। असली मोक्ष वे सहज समाधि को मानते हैं। सहज समाधि उस अवस्था को बताया गया है, जिसमें मन स्वयं ही मन को देखने लगता है। दूसरे शब्दों में स्वसंवेदन ज्ञान की अवस्था ही सहज समाधि है। यही चरम लक्ष्य है।

प्रामाणिकता
आधुनिक देशी भाषाओं के पुराने रूपों में जो पुस्तकें मिलती हैं, उनकी प्रामाणिकता संदिग्ध है। इनमें अधिकतर योगांगों, उनकी प्रक्रियाओं, वैराग्य, ब्रह्मचर्य, सदाचार आदि के उपदेश हैं और माया की भर्त्सना है। तर्क-वितर्क को गर्हित कहा गया है, भवसागर में पच-पचकर मरने वाले जीवों पर तरस खाया गया है और पाखण्डियों को फ़टकार बतायी गयी है। सदाचार और ब्रह्मचर्य पर गोरखनाथ ने बहुत बल दिया है। शंकराचार्य के बाद भारतीय लोकमत को इतना प्रभावित करने वाला आचार्य भक्तिकाव्य के पूर्व दूसरा नहीं हुआ। निर्गुणमार्गी भक्ति शाखा पर भी गोरखनाथ का भारी प्रभाव है। निस्सन्देह गोरखनाथ बहुत तेजस्वी और प्रभावशाली व्यक्तित्व लेकर आये थे।
----------------

गोरखनाथ मंदिर

गोरखनाथ अथवा गोरक्षनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय का प्रमुख केन्द्र है। हिन्दू धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के अंतर्गत विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतरों में 'नाथ संप्रदाय' का प्रमुख स्थान है। संपूर्ण देश में फैले नाथ संप्रदाय के विभिन्न मंदिरों तथा मठों की देख रेख यहीं से होती है। नाथ सम्प्रदाय की मान्यता के अनुसार सच्चिदानंद शिव के साक्षात् स्वरूप 'श्री गोरक्षनाथ जी' सतयुग में पेशावर (पंजाब) में, त्रेतायुग में गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, द्वापर युग में हरमुज, द्वारिका के पास तथा कलियुग में गोरखमधी, सौराष्ट्र में आविर्भूत हुए थे। चारों युगों में विद्यमान एक अयोनिज अमर महायोगी, सिद्ध महापुरुष के रूप में एशिया के विशाल भूखंड तिब्बत, मंगोलिया, कंधार, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, सिंघल तथा सम्पूर्ण भारतवर्ष को अपने योग से कृतार्थ किया।

गोरखनाथ मंदिर का निर्माण
गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर में अनवरत योग साधना का क्रम प्राचीन काल से चलता रहा है। ज्वालादेवी के स्थान से परिभ्रमण करते हुए 'गोरक्षनाथ जी' ने आकर भगवती राप्ती के तटवर्ती क्षेत्र में तपस्या की थी और उसी स्थान पर अपनी दिव्य समाधि लगाई थी, जहाँ वर्तमान में 'श्री गोरखनाथ मंदिर (श्री गोरक्षनाथ मंदिर)' स्थित है। नाथ योगी सम्प्रदाय के महान प्रवर्तक ने अपनी अलौकिक आध्यात्मिक गरिमा से इस स्थान को पवित्र किया था, अतः योगेश्वर गोरखनाथ के पुण्य स्थल के कारण इस स्थान का नाम 'गोरखपुर' पड़ा। महायोगी गुरु गोरखनाथ की यह तपस्याभूमि प्रारंभ में एक तपोवन के रूप में रही होगी और जनशून्य शांत तपोवन में योगियों के निवास के लिए कुछ छोटे- छोटे मठ रहे, मंदिर का निर्माण बाद में हुआ। आज हम जिस विशाल और भव्य मंदिर का दर्शन कर हर्ष और शांति का अनुभव करते हैं, वह ब्रह्मलीन महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज जी की ही कृपा से है। वर्तमान पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी महाराज के संरक्षण में श्री गोरखनाथ मंदिर विशाल आकार-प्रकार, प्रांगण की भव्यता तथा पवित्र रमणीयता को प्राप्त हो रहा है। पुराना मंदिर नव निर्माण की विशालता और व्यापकता में समाहित हो गया है।

यौगिक साधना का स्थल
भारत में मुस्लिम शासन के प्रारंभिक चरण में ही इस मंदिर से प्रवाहित यौगिक साधना की लहर समग्र एशिया में फैल रही थी। नाथ संप्रदाय के योग महाज्ञान की रश्मि से लोगों को संतृप्त करने के पवित्र कार्य में गोरक्षनाथ मंदिर की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है। विक्रमीय उन्नीसवीं शताब्दी के द्वितीय चरण में गोरक्षनाथ मंदिर का अच्छे ढंग से जीर्णोद्धार किया गया। तभी से निरन्तर मंदिर के आकार- प्रकार के संवर्धन, समलंकरण व मंदिर से संबन्धित उसी के प्रांगण में स्थित अनेकानेक विशिष्ट देव स्थानों के जीर्णोद्धार, नवनिर्माण आदि में गोरक्षनाथ मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे महंतों का ख़ासा योगदान रहा है।

अखंड ज्योति
मुस्लिम शासन काल में हिन्दुओं और बौद्धों के अन्य सांस्कृतिक केन्द्रों की भांति इस पीठ को भी कई बार भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके व्यापक प्रसिद्धि के कारण शत्रुओं का ध्यान विशेष रूप से इधर आकर्षित हुआ। विक्रमी चौदहवीं सदी में भारत के मुस्लिम सम्राट अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल में यह मठ नष्ट किया गया और साधक योगी बलपूर्वक निष्कासित किये गये थे। मठ का पुनर्निर्माण किया गया और पुनः यौगिक संस्कृति का प्रधान केंद्र बना। विक्रमी सत्रहवीं और अठारहवीं सदी में अपनी धार्मिक कट्टरता के कारण मुग़ल शासक औरंगजेब ने इसे दो बार नष्ट किया परन्तु शिव गोरक्ष द्वारा त्रेता युग में जलाई गयी अखंड ज्योति आज तक अखंड रूप से जलती हुई आध्यात्मिक, धार्मिक आलोक से उर्जा प्रदान कर रही है। यह अखंड ज्योति श्री गोरखनाथ मंदिर के अंतरवर्ती भाग में स्थित है।

भव्यता और रमणीयता
क़रीब 52 एकड़ के सुविस्तृत क्षेत्र में स्थित इस मंदिर का रूप व आकार-प्रकार परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर बदलता रहा है। वर्तमान में गोरक्षनाथ मंदिर की भव्यता और पवित्र रमणीयता अत्यन्त कीमती आध्यात्मिक सम्पत्ति है। इसके भव्य व गौरवपूर्ण निर्माण का श्रेय महिमाशाली व भारतीय संस्कृति के कर्णधार योगिराज महंत दिग्विजयनाथ जी व उनके सुयोग्य शिष्य वर्तमान में गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज को है, जिनके श्रद्धास्पद प्रयास से भारतीय वास्तुकला के क्षेत्र में मौलिक इस मंदिर का निर्माण हुआ।

मंदिर परिसर के दर्शनीय स्थल
मान्यता है कि मंदिर में गोरखनाथ जी द्वारा जलायी अखण्ड ज्योति त्रेतायुग से आज तक अनेक झंझावातों के बावजूद अखण्ड रूप से जलती आ रही है। यह ज्योति आध्यात्मिक ज्ञान, अखण्डता और एकात्मता का प्रतीक है।

अखण्ड धूना

यह गोरखनाथ मंदिर परिसर में विशेष प्रेरणास्रोत का काम करती है। इसमें गोरखनाथ जी द्वारा प्रज्ज्वलित अग्नि आज भी विद्यमान है।

मंदिर के भीतर देवप्रतिमाएं

मंदिर के भीतरी कक्ष में मुख्य वेदी पर शिवावतार अमरकाय योगी गुरु गोरखनाथ जी महाराज की श्वेत संगमरमर की दिव्य मूर्ति, ध्यानावस्थित रूप में प्रतिष्ठित है, इस मूर्ति का दर्शन मनमोहक व चित्ताकर्षक है। यह सिद्धिमयी दिव्य योगमूर्ति है। श्री गुरु गोरखनाथ जी की चरण पादुकाएं भी यहाँ प्रतिष्ठित हैं, जिनकी प्रतिदिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। परिक्रमा भाग में भगवान शिव की भव्य मांगलिक मूर्ति, विघ्नविनाशक श्री गणेशजी, मंदिर के पश्चिमोत्तर कोने में काली माता, उत्तर दिशा में कालभैरव और उत्तर की ओर पाश्र्व में शीतला माता का मंदिर है। इस मंदिर के समीप ही भैरव जी, इसी से सटा हुआ भगवान शिव का दिव्य शिवलिंग मंदिर है। उत्तरवर्ती भाग में राधा कृष्ण मंदिर, हट्टी माता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, श्री राम दरबार, श्री नवग्रह देवता, श्री शनि देवता, भगवती बालदेवी, भगवान विष्णु का मंदिर तथा योगेश्वर गोरखनाथ जी द्वारा जलाई गयी अखंड धूना स्थित है। विशाल हनुमान जी मंदिर, महाबली भीमसेन मंदिर, योगिराज ब्राहृनाथ, गंभीरनाथ और महंत दिग्विजयनाथ जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। जो भक्तों के हृदय में आस्था एवं श्रद्धा का भाव संचारित करती हैं। पवित्र भीम सरोवर, जल-यंत्र, कथा-मण्डपम यज्ञशाला, संत निवास, अतिथिशाला, गोशाला आदि स्थित हैं।

खिचड़ी मेला
प्रतिदिन मंदिर में भारत के सुदूर प्रांतों से आये पर्यटकों, यात्रियों और स्थानीय व पास- पड़ोस के असंख्य लोगों की भीड़ दर्शन के लिए आती है। मंगलवार को यहां दर्शनार्थियों की संख्या ख़ासी होती है। मंदिर में गोरखबानी की अनेक सबदियां संगमरमर की भित्ति पर अर्थ सहित जगह-जगह अंकित हैं और नवनाथों के चित्रों का अंकन भी मंदिर में भव्य तरीके से किया गया है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर यहाँ विशाल मेला लगता है जो खिचड़ी मेला के नाम से प्रसिद्ध है।

शैक्षिक व सामाजिक महत्त्व
मंदिर प्रांगण में ही गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ है। इसमें विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क आवास, भोजन व अध्ययन की उत्तम व्यवस्था है। गोरखनाथ मंदिर की ओर से एक आयुर्वेद महाविद्यालय व धर्मार्थ चिकित्सालय की स्थापना की गयी है। गोरक्षनाथ मंदिर के ही तत्वावधान में 'महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद्' की स्थापना की गयी है। परिषद् की ओर से बालकों का छात्रावास प्रताप आश्रम, महाराणा प्रताप, मीराबाई महिला छात्रावास, महाराणा प्रताप इण्टर कालेज, महंत दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महाराणा प्रताप शिशु शिक्षा विहार आदि दो दर्जन से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण और प्राविधिक संस्थाएं गोरखपुर नगर, जनपद और महराजगंज जनपद में स्थापित हैं।

मंदिर के महंत
गुरु गोरखनाथ जी के प्रतिनिधि के रूप में सम्मानित संत को महंत की उपाधि से विभूषित किया जाता है। इस मंदिर के प्रथम महंत श्री वरद्नाथ जी महाराज कहे जाते हैं, जो गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य थे। तत्पश्चात परमेश्वर नाथ एवं गोरखनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करने वालों में प्रमुख बुद्ध नाथ जी (1708-1723 ई), बाबा रामचंद्र नाथ जी, महंत पियार नाथ जी, बाबा बालक नाथ जी, योगी मनसा नाथ जी, संतोष नाथ जी महाराज, मेहर नाथ जी महाराज, दिलावर नाथ जी, बाबा सुन्दर नाथ जी, सिद्ध पुरुष योगिराज गंभीर नाथ जी, बाबा ब्रह्म नाथ जी महाराज, ब्रह्मलीन महंत श्री दिग्विजय नाथ जी महाराज[4] क्रमानुसार वर्तमान समय में महंत श्री अवैद्यनाथ जी महाराज गोरक्ष पीठाधीश्वर के पद पर अधिष्ठित हैं। नाथ योग सिद्धपीठ गोरखनाथ मंदिर के योग तपोमय पावन परिसर में शिव गोरक्ष महायोगी गुरु गोरखनाथ जी के अनुग्रह स्वरुप 15 फरवरी 1994 को गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्य नाथ जी महाराज द्वारा मांगलिक वैदिक मंत्रोच्चारपूर्वक शिष्य योगी आदित्यनाथ जी का दीक्षाभिषेक संपन्न हुआ। योगी जी व्यवहारकुशलता, दृढ़ता, कर्मठता, वाक्पटुता के आदर्श मार्गों का अनुसरण करते हुए हिंदुत्व के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं। योगी जी के युवा नेतृत्व में थोड़े ही समय में पूरे भारत वर्ष में हिंदुत्व का तेजोमय पुनर्जागरण अवश्यम्भावी है। महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने 1998 में सबसे कम उम्र का सांसद बनने का गौरव प्राप्त किया। योगी आदित्यनाथ ने 'हिन्दू युवा वाहिनी' का गठन किया जो हिन्दू युवाओं को हिन्दुत्वनिष्ठ बनाने के लिए प्रेरणा देते है।

आदि शंकराचार्य : चारों धामों के संस्थापक





आदि शंकराचार्य का वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि
आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रणेता थे। उनके विचारोपदेश आत्मा और परमात्मा की एकरूपता पर आधारित हैं जिसके अनुसार परमात्मा एक ही समय में सगुण और निर्गुण दोनों ही स्वरूपों में रहता है। स्मार्त संप्रदाय में आदि शंकराचार्य को शिव का अवतार माना जाता है। इन्होंने ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक और छान्दोग्योपनिषद् पर भाष्य लिखा। वेदों में लिखे ज्ञान को एकमात्र ईश्वर को संबोधित समझा और उसका प्रचार तथा वार्ता पूरे भारत में की। उस समय वेदों की समझ के बारे में मतभेद होने पर उत्पन्न जैन और बौद्ध मतों को शास्त्रार्थों द्वारा खण्डित किया और भारत में चार कोनों पर चार मठों की स्थापना की।

भारतीय संस्कृति के विकास में आद्य शंकराचार्य का विशेष योगदान रहा है। आचार्य शंकर का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि ई. सन् ७८८ को तथा मोक्ष ई. सन् ८२० स्वीकार किया जाता है, परंतु सुधन्वा जो कि शंकर के समकालीन थे, उनके ताम्रपत्र अभिलेख में शंकर का जन्म युधिष्ठिराब्द २६३१ शक् (५०७ ई०पू०) तथा शिवलोक गमन युधिष्ठिराब्द २६६३ शक् (४७५ ई०पू०) सर्वमान्य है। शंकर दिग्विजय, शंकरविजयविलास, शंकरजय आदि ग्रन्थों में उनके जीवन से सम्बन्धित तथ्य उद्घाटित होते हैं। दक्षिण भारत के केरल राज्य (तत्कालीन मालाबारप्रांत) में आद्य शंकराचार्य जी का जन्म हुआ था। उनके पिता शिव गुरु तैत्तिरीय शाखा के यजुर्वेदी ब्राह्मण थे। भारतीय प्राच्य परम्परा में आद्यशंकराचार्य को शिव का अवतार स्वीकार किया जाता है। कुछ उनके जीवन के चमत्कारिक तथ्य सामने आते हैं, जिससे प्रतीत होता है कि वास्तव में आद्य शंकराचार्य शिव के अवतार थे। आठ वर्ष की अवस्था में गोविन्दपाद के शिष्यत्व को ग्रहण कर संन्यासी हो जाना, पुन: वाराणसी से होते हुए बद्रिकाश्रम तक की पैदल यात्रा करना, सोलह वर्ष की अवस्था में बद्रीकाश्रम पहुंच कर ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखना, सम्पूर्ण भारत वर्ष में भ्रमण कर अद्वैत वेदान्त का प्रचार करना, दरभंगा में जाकर मण्डन मिश्र से शास्त्रार्थ कर वेदान्त की दीक्षा देना तथा मण्डन मिश्र को संन्यास धारण कराना, भारतवर्ष में प्रचलित तत्कालीन कुरीतियों को दूर कर समभावदर्शी धर्म की स्थापना करना - इत्यादि कार्य इनके महत्व को और बढ़ा देता है। चार धार्मिक मठों में दक्षिण के शृंगेरी शंकराचार्यपीठ, पूर्व (ओडिशा) जगन्नाथपुरी में गोवर्धनपीठ, पश्चिम द्वारिका में शारदामठ तथा बद्रिकाश्रम में ज्योतिर्पीठ भारत की एकात्मकता को आज भी दिग्दर्शित कर रहा है। कुछ लोग शृंगेरी को शारदापीठ तथा गुजरात के द्वारिका में मठ को काली मठ कहते र्है। उक्त सभी कार्य को सम्पादित कर 32वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त की।
-----------------------

चारों  धामों के संस्थापक आदि शंकराचार्य

आदि शंकराचार्य (अंग्रेज़ी: Adi Shakaracharya, जन्म नाम: शंकर, जन्म: 788 ई. - मृत्यु: 820 ई.) अद्वैत वेदान्त के प्रणेता, संस्कृत के विद्वान, उपनिषद व्याख्याता और हिन्दू धर्म प्रचारक थे। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर भारत में बीता। चार पीठों (मठ) की स्थापना करना इनका मुख्य रूप से उल्लेखनीय कार्य रहा, जो आज भी मौजूद है। शंकराचार्य को भारत के ही नहीं अपितु सारे संसार के उच्चतम दार्शनिकों में महत्व का स्थान प्राप्त है। उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे हैं, किन्तु उनका दर्शन विशेष रूप से उनके तीन भाष्यों में, जो उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता पर हैं, मिलता है। गीता और ब्रह्मसूत्र पर अन्य आचार्यों के भी भाष्य हैं, परन्तु उपनिषदों पर समन्वयात्मक भाष्य जैसा शंकराचार्य का है, वैसा अन्य किसी का नहीं है।

जन्म
शंकराचार्य का जन्म दक्षिण भारत के केरल में अवस्थित निम्बूदरीपाद ब्राह्मणों के 'कालडी़ ग्राम' में 788 ई. में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय उत्तर भारत में व्यतीत किया। उनके द्वारा स्थापित 'अद्वैत वेदांत सम्प्रदाय' 9वीं शताब्दी में काफ़ी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने प्राचीन भारतीय उपनिषदों के सिद्धान्तों को पुनर्जीवन प्रदान करने का प्रयत्न किया। उन्होंने ईश्वर को पूर्ण वास्तविकता के रूप में स्वीकार किया और साथ ही इस संसार को भ्रम या माया बताया। उनके अनुसार अज्ञानी लोग ही ईश्वर को वास्तविक न मानकर संसार को वास्तविक मानते हैं। ज्ञानी लोगों का मुख्य उद्देश्य अपने आप को भम्र व माया से मुक्त करना एवं ईश्वर व ब्रह्म से तादाम्य स्थापित करना होना चाहिए। शंकराचार्य ने वर्ण पर आधारित ब्राह्मण प्रधान सामाजिक व्यवस्था का समर्थन किया। शंकराचार्य ने सन्न्यासी समुदाय में सुधार के लिए उपमहाद्वीप में चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की। 'अवतारवाद' के अनुसार, ईश्वर तब अवतार लेता है, जब धर्म की हानि होती है। धर्म और समाज को व्यवस्थित करने के लिए ही आशुतोष शिव का आगमन आदि शकराचार्य के रूप में हुआ।

शिक्षा
हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार आदि शंकराचार्य ने अपनी अनन्य निष्ठा के फलस्वरूप अपने सदगुरु से शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं प्राप्त किया, बल्कि ब्रह्मत्व का भी अनुभव किया। जीवन के व्यावहारिक और आध्यात्मिक पक्ष की सत्यता को इन्होंने जहाँ काशी में घटी दो विभिन्न घटनाओं के द्वारा जाना, वहीं मंडनमिश्र से हुए शास्त्रार्थ के बाद परकाया प्रवेश द्वारा उस यथार्थ का भी अनुभव किया, जिसे सन्न्यास की मर्यादा में भोगा नहीं जा सकता। यही कारण है कि कुछ बातों के बारे में पूर्वाग्रह दिखाते हुए भी लोक संग्रह के लिए, आचार्य शंकर आध्यात्म की चरम स्थिति में किसी तरह के बंधन को स्वीकार नहीं करते। अपनी माता के जीवन के अंतिम क्षणों में पहुँचकर पुत्र होने के कर्तव्य का पालन करना इस संदर्भ में अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटना है।

रचनाएँ व व्यक्तित्व
शंकराचार्य ने उपनिषदों, श्रीमद्भगवद गीता एवं ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखे हैं। उपनिषद, ब्रह्मसूत्र एवं गीता पर लिखे गये शंकराचार्य के भाष्य को 'प्रस्थानत्रयी' के अन्तर्गत रखते हैं। शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म के स्थायित्व, प्रचार-प्रसार एवं प्रगति में अपूर्व योगदान दिया। उनके व्यक्तितत्व में गुरु, दार्शनिक, समाज एवं धर्म सुधारक, विभिन्न मतों तथा सम्प्रदायों के समन्वयकर्ता का रूप दिखाई पड़ता है। शंकराचार्य अपने समय के उत्कृष्ट विद्वान एवं दार्शनिक थे। इतिहास में उनका स्थान इनके 'अद्वैत सिद्धान्त' के कारण अमर है। गौड़पाद के शिष्य 'गोविन्द योगी' को शंकराचार्य ने अपना प्रथम गुरु बनाया। गोविन्द योगी से उन्हें 'परमहंस' की उपाधि प्राप्त हुई। कुछ विद्वान शंकराचार्य पर बौद्ध शून्यवाद का प्रभाव देखते हैं तथा उन्हें 'प्रच्छन्न बौद्ध' की संज्ञा देते हैं।

हिन्दू धर्म की पुनः स्थापना

आदि शंकराचार्य को हिन्दू धर्म को पुनः स्थापित एवं प्रतिष्ठित करने का श्रेय दिया जाता है। एक तरफ़ उन्होंने अद्वैत चिन्तन को पुनर्जीवित करके सनातन हिन्दू धर्म के दार्शनिक आधार को सुदृढ़ किया, तो दूसरी तरफ़ उन्होंने जनसामान्य में प्रचलित मूर्तिपूजा का औचित्य सिद्ध करने का भी प्रयास किया। सनातन हिन्दू धर्म को दृढ़ आधार प्रदान करने के लिये उन्होंने विरोधी पन्थ के मत को भी आंशिक तौर पर अंगीकार किया। शंकर के मायावाद पर महायान बौद्ध चिन्तन का प्रभाव माना जाता है। इसी आधार पर उन्हें 'प्रछन्न बुद्ध' कहा गया है।

मोक्ष और ज्ञान

विद्याशंकर मंदिर, श्रृंगेरी पीठ, कर्नाटक
आचार्य शंकर जीवन में धर्म, अर्थ और काम को निरर्थक मानते हैं। वे ज्ञान को अद्वैत ज्ञान की परम साधना मानते हैं, क्योंकि ज्ञान समस्त कर्मों को जलाकर भस्म कर देता है। सृष्टि का विवेचन करते समय कि इसकी उत्पत्ति कैसे होती है?, वे इसका मूल कारण ब्रह्म को मानते हैं। वह ब्रह्म अपनी 'माया' शक्ति के सहयोग से इस सृष्टि का निर्माण करता है, ऐसी उनकी धारणा है। लेकिन यहाँ यह नहीं भूलना चाहिए कि शक्ति और शक्तिमान एक ही हैं। दोनों में कोई अंतर नहीं है। इस प्रकार सृष्टि के विवेचन से एक बात और भी स्पष्ट होती है कि परमात्मा को सर्वव्यापक कहना भी भूल है, क्योंकि वह सर्वरूप है। वह अनेकरूप हो गया, 'यह अनेकता है ही नहीं', 'मैं एक हूँ बहुत हो जाऊँ' अद्धैत मत का यह कथन संकेत करता है कि शैतान या बुरी आत्मा का कोई अस्तित्व नहीं है। ऐसा कहीं दिखाई भी देता है, तो वह वस्तुतः नहीं है भ्रम है बस। जीवों और ब्रह्मैव नापरः- जीव ही ब्रह्म है अन्य नहीं।

निष्काम उपासना
ऐसे में बंधन और मुक्ति जैसे शब्द भी खेलमात्र हैं। विचारों से ही व्यक्ति बंधता है। उसी के द्वारा मुक्त होता है। भवरोग से मुक्त होने का एकमात्र उपाय है विचार। उसी के लिए निष्काम कर्म और निष्काम उपासना को आचार्य शंकर ने साधना बताया। निष्काम होने का अर्थ है संसार की वस्तुओं की कामना न करना, क्योंकि शारीरिक माँग तो प्रारब्धता से पूरी होगी और मनोवैज्ञानिक चाह की कोई सीमा नहीं है। इस सत्य को जानकर अपने कर्तव्यों का पालन करना तथा ईश्वरीय सत्ता के प्रति समर्पण का भाव, आलस्य प्रसाद से उठाकर चित्त को निश्चल बना देगें, जिसमें ज्ञान टिकेगा।

बुद्धि, भाव और कर्म का संतुलन
आचार्य ने बुद्धि, भाव और कर्म इन तीनों के संतुलन पर ज़ोर दिया है। इस तरह वैदान्तिक साधना ही समग्र साधना है। कभी-कभी लगता है कि आचार्य शंकर परम्परावादी हैं। लेकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है। उनकी छोटी-छोटी, लेकिन महत्त्वपूर्ण रचनाओं से इस बात का स्पष्ट संकेत मिलता है। परम्परा का निर्वाह करते हुए भी उनका लक्ष्य 'सत्य' प्रतिपादन करना है। प्रश्नोत्तरी में कहे इस श्लोकांश से संकेत मिलता है, पशुओं में भी पशु वह है जो धर्म को जानने के बाद भी उसका आचरण नहीं करता और जिसने शास्त्रों का अध्ययन किया है, फिर भी उसे आत्मबोध नहीं हुआ है। इसी प्रकार 'भज गोविन्दम' में बाहरी रूप-स्वरूप को नकारते हुए वे कहते हैं कि "जो संसार को देखते हुए भी नहीं देखता है, उसने अपना पेट भरने के लिए तरह-तरह के वस्त्र धारण किए हुए हैं।"

व्यवाहरिक सत्य
जीवन के परम सत्य को व्यावहारिक सत्य के साथ जोड़ने के कारण ही अपरोक्षानुभूति के बाद आचार्य शंकर मौन बैठकर उसका आनन्द नहीं लेते, बल्कि समूचे भारतवर्ष में घूम-घूम कर उसके रूप-स्वरूप को निखारने में तत्पर होते हैं। मानो त्याग-वैराग्य और निवृत्ति के मूर्तरूप हों, लेकिन प्रवृत्ति की पराकाष्ठा है, उनमें श्रीराम, श्री कृष्ण की तरह।

जगदगुरु

चार मठों की स्थापना, दशनाम सन्न्यास को सुव्यवस्थित रूप देना, सगुण-निर्गण का भेद मिटाने का प्रयास, हरिहर निष्ठा की स्थापना ये कार्य ही उन्हें 'जगदगुरु' पद पर प्रतिष्ठित करते हैं। स्वामी विवेकानन्द, स्वामी रामतीर्थ जैसे युवा सन्न्यासियों ने विदेशों में जाकर जिस वेदांत का घोष किया, वह शंकर वेदांत ही तो था। जगदगुरु कहलाना, केवल उस परम्परा का निर्वाह करना और स्वयं को उस रूप में प्रतिष्ठित करना बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं। आज भारत को एक ऐसे ही महान व्यक्तित्व की आवश्यकता है, जिसमें योगी, कवि, भक्त, कर्मनिष्ठ और शास्त्रीय ज्ञान के साथ ही जनकल्याण की भावना हो, जो सत्य के लिए सर्वस्व का त्याग करने को उद्यत हो।


आदि शंकराचार्य अपने शिष्यों को ज्ञान देते हुए
शंकराचार्य का कथन
शंकराचार्य का कथन है कि अद्वैत दर्शन की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है और उपनिषदों की शिक्षा पर अवलम्बित है। अद्वैत दर्शन के तीन पहलू हैं-

तत्व मीमांसा
ज्ञान मीमांसा
आचार दर्शन
इनका अलग-अलग विकास शंकराचार्य के बाद के वैदान्तियों ने किया। तत्व मीमांसा की दृष्टि से अद्वैतवाद का अर्थ है कि सभी प्रकार के द्वैत या भेद का निषेध। अन्तिम तत्व ब्रह्म एक और अद्वय है। उसमें स्वगत, स्वजातीय तथा विजातीय किसी भी प्रकार का द्वैत नहीं है। ब्रह्म निरवयव, अविभाज्य और अनन्त है। उसे सच्चिदानंद या 'सत्यं, ज्ञानं, अनन्तम् ब्रह्मा' भी कहा गया है। असत् का निषेध करने से जो प्राप्त हो, वह सत्, अचित् का निषेध करने से जो प्राप्त हो, वह चित् और दु:ख का निषेध करने से जो प्राप्त हो, वह आनंद है। यह ब्रह्मा का स्वरूप लक्षण है, परन्तु यहाँ ध्यान रखने की बात यह है कि सत्, चित् और आनंद न तो ब्रह्म के तीन पहलू हैं, न ही ब्रह्म के तीन अंश और न ब्रह्म के तीन विशेषण हैं। जो सत् है वही चित है और वही आनंद भी है। दृष्टि भेद के कारण उसे सच्चिदानंद कहा गया है- असत् की दृष्टि से वह सत् अचित् की दृष्टि से चित् और दु:ख की दृष्टि से आनंद है।

जगत का कारण- ईश्वर
शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ
         मठ                   प्रदेश
ज्योतिषपीठ, बद्रीनाथ     उत्तराखण्ड (हिमालय में स्थित)
गोवर्धनपीठ, पुरी        उड़ीसा
शारदापीठ, द्वारिका        गुजरात
श्रृंगेरीपीठ, मैसूर       कर्नाटक
यह निर्गुण, निराकार, अविकारी, चित् ब्रह्म ही जगत का कारण है। जगत के कारण के रूप में उसे ईश्वर कहा जाता है। मायोपहित ब्रह्म ही ईश्वर है। अत: ब्रह्म और ईश्वर दो तत्व नहीं हैं- दोनों एक ही हैं। जगत का कारण होना- यह ब्रह्म का तटस्थ लक्षण है। तटस्थ लक्षण का अर्थ है, वह लक्षण जो ब्रह्म का अंग न होते हुए भी ब्रह्म की ओर संकेत करे। जगत ब्रह्म पर आश्रित है, परन्तु ब्रह्म जगत पर किसी भी प्रकार आश्रित नहीं है, वह स्वतंत्र है। जगत का कारण प्रकृति, अणु या स्वभाव में से कोई नहीं हो सकता। इसी से उपनिषदों ने स्पष्ट कहा है कि ब्रह्म वह है जो जगत की सृष्टि, स्थिति और लय का कारण है। जगत की सृष्टि आदि के लिए ब्रह्म को किसी अन्य तत्व की आवश्यकता नहीं होती। इसी से ब्रह्म को अभिन्न निमित्तोपादान कारण कहा है। जगत की रचना ब्रह्मश्रित माया से होती है, परन्तु माया कोई स्वतंत्र तत्व नहीं है। यह मिथ्या है, इसलिए ब्रह्म को ही कारण कहा गया है। सृष्टि वास्तविक नहीं है, अत: उसे मायाजनित कहा गया है। माया या अविद्या के कारण ही जहाँ कोई नाम-रूप नहीं है, जहाँ भेद नहीं है, वहाँ नाम-रूप और भेद का आभास होता है। इसी से सृष्टि को ब्रह्म का विवर्त भी कहा गया है। विवर्त का अर्थ है कारण या किसी वस्तु का अपने स्वरूप में स्थित रहते हुए अन्य रूपों में अवभासित होना, अर्थात् परिवर्तन वास्तविक नहीं बल्कि आभास मात्र है।

विद्या के प्रकार
ब्रह्म की सृष्टि का कारण कहने से यह मालूम पड़ सकता है कि ब्रह्म की सत्ता कार्य-करण अनुमान के आधार पर सिद्ध की गई है। परन्तु यह बात नहीं है। ब्रह्म जगत का कारण है, यह ज्ञान हमको श्रुति से होता है। अत: ब्रह्म के विषय में श्रुति ही प्रमाण है।[1] किन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि तर्क के लिए कोई स्थान नहीं है। श्रुत्यनुकूल तर्क वेदांत को मान्य है। स्वतंत्र रूप से ब्रह्मज्ञान कराने का सामर्थ्य तर्क में नहीं है, क्योंकि ब्रह्म निर्गुण है। इसी से तर्क और श्रुति में विरोध भी नहीं हो सकता है। दोनों के क्षेत्र पृथक-पृथक हैं। श्रुति और प्रत्यक्ष का भी क्षेत्र अलग-अलग होने के कारण उनमें विरोध नहीं हो सकता। श्रुति पर-तत्व विषयक है और प्रत्यक्ष अपरतत्व-विषयक। इसी से विद्या भी परा और अपरा दो प्रकार की मानी गई है।

सत्ताएँ
ऐसा कहा गया है कि जगत ब्रह्म का विवर्त है, अर्थात् अविद्या के कारण आभास मात्र है। अविद्या को ज्ञान का अभाव मात्र नहीं समझना चाहिए। वह भाव तो नहीं है, परन्तु भाव रूप है-भाव और अभाव दोनों से भिन्न अनिर्वचनीय है। भाव से भिन्न इसलिए है कि उसका बोध होता है, तथा अभाव से भिन्न इसलिए कि इसके कारण मिथ्या वस्तु दिखाई पड़ती है, जैसे रज्जु के स्थान पर सर्पाभास। इसलिए कहा गया है कि अविद्या की दो शक्तियां हैं- आवरण और विक्षेप। विक्षेप शक्ति मिथ्या सर्प का सृजन करती है और आवरण शक्ति सर्प के द्वारा रज्जु का आवरण करती है। इसी से रज्जु अज्ञान की अवस्था में सर्वपत् दिखाई पड़ती है। इसी प्रकार ब्रह्म भी अज्ञान के कारण जगतवत् दिखाई पड़ता है। अत: वेदान्त में तीन सत्ताएं स्वीकृत की गई हैं-

प्रातिभासिक (सर्प) - जो हमारे साधारण भ्रम की स्थिति में आभासित होता है और रस्सी के ज्ञान के बाधित होता है।
व्यावहारिक (जगत) - जो मिथ्या तो है परन्तु, जब तक ब्रह्म का ज्ञान नहीं हो जाता, तब तक सत्य प्रतीत होता है, और ज्ञान हो जाने पर बाधित हो जाता है।
ब्रह्म - जिसे पारमार्थिक कहा जाता है। इसका कभी भी ज्ञान नहीं होता है। यह नित्य है। ब्रह्मज्ञान होने से जगत का बोध हो जाता है और मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
जीव वास्तव में ब्रह्म ही है, दूसरा कुछ नहीं, शरीर धारण के कारण वह भिन्न प्रतीत होता है। शरीर तीन प्रकार का होता है- स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। अनादि प्रवाह के अधीन होकर कर्मफल को भोगने के लिए शरीर धारण करना पड़ता है। कर्म अविद्या के कारण होते हैं। अत: शरीर धारण अविद्या के ही कारण है। इसे ही बंधन कहते हैं। अविद्या के कारण कर्तृत्वाभिमान और भोक्तृत्वाभिमान पैदा होता है, जो आत्मा में स्वभावत: नहीं होता। जब कर्तृत्वाभिमान और भोक्तृत्वाभिमान से युक्त होता है, तब आत्मा जीव कहलाता है। मुक्त होने पर जीव ब्रह्म से एककारता प्राप्त करता है या उसका अनुभव करता है।

उपनिषद कथन
आत्मा और ब्रह्म की एकता अथवा अभिन्नत्व दिखाने के लिए उपनिषदों ने कहा है- 'तत्वमसी' (तुम वही हो)। इसी कारण से ज्ञान होने पर 'सोऽहमस्मि' (मैं वही हूँ) का अनुभव होता है। जाग्रत अवस्था में स्थूल शरीर, स्वप्न में सूक्ष्म शरीर और सुषुप्ति में कारण शरीर रहता है। सुषुप्ति में चेतना भी रहती है, परन्तु विषयों का ज्ञान न होने के कारण जान पड़ता है कि सुषुप्ति में चेतना नहीं रहती। यदि सुषुप्ति में चेतना न होती तो जागने पर कैसे हम कहते कि सुखपूर्वक सोया? वहाँ चेतना साक्षीरूप या शुद्ध चैतन्य रूप है। परन्तु सुषुप्ति में अज्ञान रहता है। इसी से शुद्ध चेतना के रहते हुए भी सुषुप्ति मुक्ति से भिन्न है- मुक्ति की अवस्था में अज्ञान का नाश हो जाता है। शुद्ध चैतन्य रूप होने के कारण ही कहा गया है कि आत्मा एक है और ब्रह्मस्वरूप है। चेतना का विभाजन नहीं हो सकता है। जीवात्मा अनेक हैं, परन्तु आत्मा एक है, यह दिखाने के लिए उपमाओं का प्रयोग होता है। जैसे आकाश एक है परन्तु सीमित होने के कारण घट या घटाकाश अनेक दिखाई पड़ता है, अथवा सूर्य एक है, किन्तु उसकी परछाई अनेक स्थलों में दिखाई पड़ने से वह अनेक दिखाई पड़ता है, इसी प्रकार यद्यपि आत्मा एक है फिर भी माया या अविद्या के कारण अनेक दिखाई पड़ता है।

जीव और ईश्वर में भेद
जीव और ईश्वर में व्यावहारिक दृष्टि से भेद है। जीवन बद्ध है, ईश्वर नित्यमुक्त है। मुक्त होने पर भी जीव को नित्यमुक्त नहीं कहा जा सकता। नित्यमुक्त होने के कारण ही ईश्वर श्रुति का जनक या आदिगुरु कहा जाता है। ईश्वर को मायोपहित कहा गया है, क्योंकि माया विक्षेप प्रधान होने के कारण और ईश्वर के अधीन होने के कारण ईश्वर के ज्ञान का आवरण नहीं करती। परन्तु जीव को अज्ञानोपहित कहा गया है, क्योंकि अज्ञान द्वारा जीव का स्वरूप ढक जाता है। इसी से कभी-कभी माया और अविद्या में भेद किया जाता है। माया ईश्वर की उपाधि है- सत्व प्रधान है, विक्षेप प्रधान है और अविद्या जीव की उपाधि है, तमस्-प्रधान है और उसमें आवरण विक्षेप होता है।

अज्ञानता तथा मुक्ति
अज्ञान के कारण जीव अपने स्वरूप को भूल कर अपने को कर्ता-भोक्ता समझता है। इसी से उसको शरीर धारण करना पड़ता है और बार-बार संसार में आना पड़ता है। यही बंधन है। इस बंधन से छुटकारा तभी मिलता है, जब अज्ञान का नाश होता है और जीव अपने को शुद्ध चैतन्य ब्रह्म के रूप में जान जाता है। शरीर रहते हुए भी ज्ञान के हो जाने पर जीव मुक्त हो सकता है, क्योंकि शरीर तभी तक बंधन है, जब तक जीव अपने को आत्मा रूप में न जानकर अपने को शरीर, इन्द्रिय, मन आदि के रूप में समझता है। इसी से वेदान्त में जीवनमुक्ति और विदेहमुक्ति नाम की दो प्रकार की मुक्ति मानी गयी हैं। ज्ञान हो जाने के बाद भी प्रारब्ध भोग के लिए शरीर कुम्हार के चक्र के समान पूर्वप्रेरित गति के कारण चलता रहता है। शरीर छूटने पर ज्ञानी विदेह मुक्ति प्राप्त करता है।

ज्ञान प्राप्ति के गुण
ज्ञान प्राप्ति के लिए सर्वप्रथम ज्ञान का अधिकारी होना आवश्यक है। अधिकारी वही होता है, जिसमें निम्नलिखित चार गुण हों-

नित्यानित्य-वस्तु-विवेक
इहामुत्र-फलभोग-विराग
शमदमादि
मुमुक्षत्व
इन गुणों से युक्त होकर जब जिज्ञासु गुरु का उपदेश सुनता है, तब उसे ज्ञान हो जाता है। कभी-कभी श्रवण मात्र से भी ज्ञान हो जाता है, परन्तु वह असाधारण जीवों को ही होता है। साधारण जीव श्रवण के उपरान्त मनन करते हैं। मनन से ब्रह्म के विषय में या आत्मा के विषय में या ब्रह्मात्मैक्य के विषय में जो बौद्धिक शंकाएं होती हैं, उनको दूर किया जाता है और जब बुद्धि शंकामुक्त होकर स्थिर हो जाती है तभी ध्यान या निदिव्यसन सम्भव होता है। कर्म से अविद्या का नाश नहीं होता, क्योंकि कर्म स्वयं अविद्याजन्य है। कर्म और उपासना से बुद्धि शुद्ध होकर ज्ञान के योग्य होती है। इसी से इन दोनों की उपयोगिता तो मानी गई है, परन्तु मुक्ति ज्ञान या अविद्या नाश से ही होती है। मुक्ति के उपरान्त कर्म और उपासना की आवश्यकता नहीं रहती। फिर भी मुक्त पुरुष जन-कल्याण के लिए या ईश्वरादेश की पूर्ति के लिए कर्म कर सकता है। जैसे आचार्य शंकर ने किया।

बुधवार, 26 अप्रैल 2017

MCD में BJP की लगातार तीसरी जीत



MCD में BJP की लगातार तीसरी जीत; 
2 साल में AAP का वोट शेयर आधा हुआ
DainikBhaskar.com | Apr 26, 2017

नई दिल्ली.बीजेपी ने लगातार तीसरी बार दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में जीत हासिल की। बीजेपी को नॉर्थ, साउथ और ईस्ट एमसीडी के कुल 270 वार्ड में दो-तिहाई बहुमत के साथ 181 सीटें मिलीं। बीजेपी ने पहली बार सभी नए कैंडिडेट्स को चुनाव मैदान में उतारा था। उसने पुराने जीते हुए चेहरों को टिकट नहीं दिया था। वहीं, 2015 के असेंबली इलेक्शन में रिकॉर्ड जीत के साथ सरकार में आई AAP दूसरे नंबर पर रही। दो साल में उसका वोट शेयर 54.3% से घटकर 26.23% पर आ गया। इन नतीजों पर नरेंद्र मोदी ने कहा, "बीजेपी पर भरोसा जताने के लिए दिल्ली की जनता का आभारी हूं। बीजेपी वर्कर्स की कड़ी मेहनत की तारीफ करता हूं, जिन्होंने एमसीडी में जीत को संभव बनाया।" उधर, अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर बीजेपी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार एमसीडी में मिलकर काम करेगी। तीनों एमसीडी का कैसा रहा टोटल रिजल्ट...
पार्टी 2017 में सीटें 2012 में सीटें कितना नफा-नुकसान?
BJP 181 138 +46
Cong 30 78 -48
AAP 48 --
Others 11 56 -45
*तीनों एमसीडी की 272 सीटें हैं। लेकिन 270 पर वोटिंग हुई थी।
दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों पर आज चुनाव हो जाएं तो 270 वार्ड के नतीजों के हिसाब से किसे-कितनी सीटें मिलेंगी?
पार्टी आज विधानसभा चुनाव हों तो सीटें 2015 के असेंबली इलेक्शन में सीटें
BJP 48 03
Cong 08 00
AAP 11 67
Others 03 --
आम आदमी पार्टी को नुकसान कैसे?
- आज विधानसभा चुनाव हो जाएंगे ताे आम आदमी पार्टी को 11 ही सीटें मिलेंगी, जबकि 2015 के चुनाव में उसे 67 सीटें मिली थीं।
- 2015 के विधानसभा चुनाव में आप का वोट शेयर 54.3% था। 2017 के एमसीडी इलेक्शन में यह घटकर 26.23% रह गया। यानी अाधा।
तीनों एमसीडी के ये हैं नतीजे
1) नॉर्थ MCD
103 वार्ड, 53 पर बहुमत
पार्टी 2017 में सीटें 2012 के नतीजे
BJP 64 59
Cong 15 29
AAP 21 00
Others 03 16
2) साउथ MCD
104 वार्ड, 53 पर बहुमत
पार्टी 2017 में सीटें 2012 के नतीजे
BJP 70 44
Cong 12 29
AAP 16 चुनाव नहीं लड़ा
Others 06 31
3) ईस्ट MCD
63 वार्ड, 33 पर बहुमत
पार्टी 2017 में सीटें 2012 के नतीजे
BJP 47 35
Cong 03 19
AAP 11 चुनाव नहीं लड़ा
Others 02 09
नतीजों के बाद ऐसे चला राजनीतिक घटनाक्रम
1) माकन का इस्तीफा
दिल्ली कांग्रेस के प्रेसिडेंट अजय माकन ने एमसीडी इलेक्शन में कांग्रेस की हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि एक साल तक वे कांग्रेस के आम वर्कर की तरह काम करेंगे। माकन ने कहा- इलेक्शन कमीशन को ईवीएम की जांच करनी चाहिए। हमें इलेक्शन कमीशन पर भरोसा है, ईवीएम पर नहीं।
2) आम आदमी पार्टी में फूट?
- दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने कहा- ''बीजेपी को मोदी लहर नहीं, ईवीएम लहर से जीत मिली है। ये यूपी, उत्तराखंड वाली ही लहर है। अगर लोकतंत्र ईवीएम से तय होने लगेगा तो ये आजादी के लिए बड़ा खतरा है। हर नागरिक को सोचना होगा कि देश को ईवीएम लहर से कैसे बचाया जाए। बीजेपी लोकतंत्र को खत्म कर ईवीएम के रूप में तानाशाही लाना चाहती है।''
-हालांकि, आप सांसद भगवंत मान ने हार का ठीकरा पार्टी लीडरशिप पर फोड़ा। एक इंटरव्यू में मान ने कहा, ''हार के लिए ईवीएम नहीं, पार्टी की स्ट्रैटजी जिम्मेदार है। हम सबको अपने अंदर झांकना चाहिए।''
- आप विधायक अलका लांबा ने अपने विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले तीनों वार्ड में पार्टी की हार के बाद कहा, ''मैं हार की जिम्मेदारी लेते हुए विधायकी और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश करती हूं।''
3) बीजेपी ने मोदी को दिया क्रेडिट
- कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने कहा, "देश में नरेंद्र मोदी की स्वीकृति बढ़ी है। दिल्ली में जीत इसकी पुष्टि करती है। दिल्ली की जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नकारात्मक और बहानेबाजी की राजनीति नहीं चलेगी।
इन 5 मुद्दों पर लड़े गए थे MCD इलेक्शन
- सफाई पर जोर, पॉल्यूशन पर कंट्रोल, गरीबी दूर करने, हेल्थ-एजुकेशन की फैसिलिटीज बढ़ाने और नया टैक्स नहीं लाने के मुद्दे पर बीजेपी, आप और कांग्रेस ने एमसीडी का चुनाव लड़ा था।
54 फीसदी वोटिंग हुई थी
- एमसीडी चुनाव के लिए रविवार (23 अप्रैल) को 54% वोटिंग हुई थी। दो वार्डो में चुनाव नहीं कराया जा सका। इसमें पूर्वी दिल्ली का मौजपुर और उत्तरी दिल्ली का सराय पीपल थाला शामिल है।
क्या कह रहे थे एक्जिट पोल?
- एबीपी न्यूज और आजतक के एक्जिट पोल में तीनों नगर निगमों (ईस्ट, नॉर्थ, साउथ) में बीजेपी के तीसरी बार सत्ता में आने का दावा किया गया था।
- एक्जिट पोल में आप को दूसरे और कांग्रेस को तीसरे नंबर पर रखा गया था। ABP न्यूज-सी वोटर के पोल में बीजेपी को 218 सीट दी गई थीं।
- वहीं, इंडिया टुडे- एक्सिस के पोल में बीजेपी को 200 से 220 सीटें दी गई थीं। आम आदमी पार्टी को 23-35 और कांग्रेस को 19-31 के बीच सीट मिलने का अनुमान जताया गया था।

सोमवार, 24 अप्रैल 2017

केरल में वामपंथी आतंक:पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द




मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे .... फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ....केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द
हमारे कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द


मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे ....................................
विस्मया, ये नाम अधिकांश ने सुना होगा. उसकी कविता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. वह पुलिस अधिकारी बनकर अपने गांव की सेवा करना चाहती है, लेकिन वामपंथी गुंडों ने उसके पिता की हत्या कर दी. वह कहती है कि ---- “मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे, वह रात मेरे सारे सपनों को तबाह कर गई. उनकी (विस्मया के पिता संतोष कुमार, 52 वर्ष) बस एक ही गलती थी कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी का समर्थन (पार्टी गांव में भाजपा के समर्थन से पंचायत का चुनाव लड़ा था) किया था. अब मुझे अपने भविष्य में सिर्फ अंधकार दिख रहा है. उन्होंने सिर्फ मेरे पिता को नहीं मारा बल्कि मेरे सपनों और भविष्य़ की भी हत्य़ा कर दी. मुझे सिर्फ अंधकार दिख रहा है, पूर्ण अंधकार. मुझे अब तक यह जवाब नहीं मिला कि उन्होंने मेरे पिता को क्यों मारा?”



अब किसके सहारे जियेंगी ..................... आंखों के सामने पुत्र की हत्या देख नारायणी अम्मा टूट गईं. अब वे इन वामपंथी गुंडों से दोनों हाथ जोड़कर एक ही प्रार्थना कर रही हैं कि “जिस चाकू से उन्होंने उनके पति और बेटे को मारा, उसी से उन्हें भी मार दें. उन्हें किस लिये छोड़ दिया, अब किसके सहारे जियेंगी?”


चलते फिरते शहीद ..................
विभाग प्रचार प्रमुख प्रजिल चलते फिरते शहीद हैं, उनके शरीर पर करीब ढाई दर्जन घावों के निशान हैं. खुशकिस्मत हैं कि वामपंथी गुंडों के हमले में उनका जीवन बच गया.

दोनों पैर चले गए ..................
 श्रीधरन अपने घर के पास चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनीं तो लोगों को बचाने के लिये दौड़े, लेकिन वामपंथी गुंडों ने उन पर बम फैंक दिया, जिसमें उनके दोनों पैर चले गए.

फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ................
 केरल के एक कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. टीएन सरसू, उनकी सेवानिवृत्ति पर कॉलेज की एसएफआई इकाई ने अनोखा गिफ्ट दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति पर फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट किया गया.

ये केवल कुछ घटनाएं मात्र हैं, कहानी केवल यहीं तक सीमित नहीं है. शिवदा, रजनी पीड़ितों की सूची काफी लंबी है. पिछले साठ साल के दौरान 400 से अधिक कार्यकर्ता वामपंथी गुंडों के हिंसक हमलों का शिकार हुए हैं. केरल में वामपंथी सरकार के गठन के पश्चात हिंसक घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी हुई है. नई सरकार के छोटे से कार्यकाल में अकेले कन्नूर जिले में 436 हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं. इसी कालखंड में 19 कार्यकर्ता मारे गए हैं, जिसमें 11 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के, 4 कांग्रेस के थे. 4 सीपीआई एम के कार्यकर्ता, लेकिन ये वामपंथी विचार को छोड़कर कहीं न कहीं संघ की शाखा, भारतीय मजदूर संघ या भाजपा की ओर आकर्षित थे. इस कारण उनकी भी हत्या कर दी गई.

लेकिन ये समस्त घटनाएं, परिवारों की पीड़ी कभी नेशनल मीडिया की सुर्खियां नहीं बनीं, न ही मानवाधिकार आयोग का कभी इन पीड़ितों की ओर ध्यान गया. न ही तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग का ध्यान इनकी ओर गया.

भगवान की धरती कहलाने वाला केरल आज मार्क्सवादी हिंसा का प्रतीक बन चुका है. केरल मार्क्सवादी हिंसा के चेहरे को सबके समक्ष लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभियान शुरू किया है. जिसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, इन कार्यक्रमों में केरल में मार्क्सवादी हिंसा के शिकार पीड़ित कुछ स्वयंसेवक परिवारों के सदस्य भी भाग ले रहे हैं. इसी निमित्त शनिवार 15 अप्रैल को दिल्ली में तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, पहला कार्यक्रम जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में था, इसके पश्चात मीडिया जगत में कार्यरत पत्रकार बंधुओं के साथ गोष्ठी का आयोजन किया गया, तीसरे कार्यक्रम में दिल्ली के बुद्धिजीवी वर्ग (प्राध्यापक, अध्यापक, अधिवक्ता, व अन्य) के लिये नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट एवं योगक्षेम न्यास ने संगोष्ठी का आयोजन किया. इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार जी (मूलतः केरल निवासी) तथा पीड़ित परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे. कार्यक्रम में शहीद स्वयंसेवकों की जानकारी पर आधारित पुस्तक आहुति का लोकार्पण किया गया.

हमारे कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी
बम बनाना केरल में कुटीर उद्योग


नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि बम बनाना केरल में कुटीर उद्योग जैसा बन गया है. पुलिस राज्य सरकार के आदेश पर सबूत इकट्ठे करती और बाद में उन्हें नष्ट कर  देती है. इसलिए वहां मार्क्सवादी विचारधारा से अलग विचार रखने वालों के लिए बहुत संकट पैदा हो गया है. केरल हमारे देश का ही एक अंग है, इसलिए यह सारे देश की समस्या है. वैचारिक भिन्नता से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस देश का महान दर्शन, महान परम्पराओं को नष्ट नहीं करने दिया जा सकता. राज्य के मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग भी है, उन्हें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए. एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में नहीं बल्कि एक मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार करना चाहिए. उन्हें राज्य में कानून, न्याय और शांति सुनिश्चित करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि आरएसएस का विरोध किसी कम्युनिस्ट से नहीं है, अपितु भारत के लिए प्रतिकूल कम्युनिज्म विचारधारा से है. क्योंकि हमारे देश में शास्त्रार्थ कर अपने विचारों से दूसरों को जीतने की परम्परा रही है. किसी की हत्या से आतंक उत्पन्न कर अपने विचार मनवाना यह भारतीय परंपरा कभी नहीं रही. वामपंथ की विचारधारा भारतीय परंपरा, आध्यात्मिक दर्शन के अनुकूल नहीं है. ये देश प्रेम, करुणा, दया का देश है. संघ के कार्यकर्ताओं का स्वभाव सभी जानते हैं. आपातकाल में हजारों कार्यकर्ताओं ने यातनाएं झेलीं. लेकिन सरसंघचालक बाला साहब देवरस जैसे ही जेल से बाहर आए, उन्होंने एक ही बात कही, जिन्होंने हमको बंद किया, कष्ट दिया वे अपने ही थे, अपने मन के अन्दर से यह बैर-भाव निकाल दो, सबसे मित्रता रखो. हमारा दर्शन ही ऐसा है कि हम लम्बे समय तक अपने ऊपर हुए अत्याचारों को याद ही नहीं रखना चाहते. संघ का कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है, हममें विचारधारा की भिन्नता से घृणा उत्पन्न नहीं होती. यही कारण है कि विरोध के बावजूद देश में सबसे अधिक शाखाएं (लगभग 4500) केरल में हैं.


प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में मार्क्सवादी आतंक से पीड़ित परिवारों को यहां लाना तथा उनके परिवार के सदस्यों की निर्मम हत्याओं का प्रस्तुतिकरण उनके तथा हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी है, लेकिन केरल के बाहर वहां का सच तथाकथित बुद्धिजीवियों के सामने लाने का अन्य मार्ग न होने के कारण इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने पड़ रहे हैं. एक अखलाक की हत्या मीडिया में कई दिनों तक चर्चा व बहस का विषय बनी रहती है, लेकिन केरल में सत्ताधारी वामपंथियों की वैचारिक असहिष्णुता के कारण हुई नृशंस हत्याओं पर मीडिया में चर्चा नहीं होती. उन्होंने केरल से आये पीड़ित परिवारों का परिचय संगोष्ठी में आये बुद्धिजीवियों से करवाते हुए उनके परिजनों की मार्क्सवादियों द्वारा की गयी हत्याओं का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों की ओर से मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जाति आयोग में भी मामले को ले जाया गया है.

डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन वास्तव में हिंसा को रोकना चाहते हैं या सच को सबके समक्ष लाना चाहते हैं तो सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों से या पूर्व न्यायाधीशों से हिंसक घटनाओं की जांच करवाएं. पुलिस पर पार्टी का नियंत्रण है, पुलिस ट्रेड यूनियन में वामपंथी पदाधिकारी पुलिस विभाग में प्रमुख पदों पर विराजमान हैं. ऐसे में कैसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने बताया कि 1948 तक केरल में संघ की नाम मात्र की शाखाएं थीं, जनवरी 1948 में श्रीगुरूजी का प्रवास था. कार्यक्रम में 150-200 कार्यकर्ता उपस्थित थे, इस दौरान वामपंथी गुंडों ने हमला कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि केरल में वामपंथी हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ ही अन्य सामाजिक संगठनों ने धरना प्रदर्शन का आयोजन किया था . देशभर में लगभग 800 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. जिसमें साढ़े चार लाख बंधु भगिनियों की भागीदारी रही. (केरल, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, गोवा, मणिपुर शामिल नहीं)


निकुंज सूद

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

युवा भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में अनवरत मेहनत करें : अमित शाह





भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा भाजयुमो की पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति को संबोधित करते हुए दिए गए भाषण के मुख्य अंश
युवा कार्यकर्ताओं को न्यू इंडिया के आह्वान को राष्ट्र उन्नति अभियान मानते हुए इस निर्माण यज्ञ में आगे आना चाहिए: अमित शाह
**********
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जन-जन की आकांक्षाओं के जनक बने, उन्होंने यह दिखाया है कि एक गरीब-कल्याण सरकार कैसे बनायी जाती है और वह गरीबों की भलाई के लिए किस तरह कार्य करती है: अमित शाह
**********
युवा स्वच्छता अभियान की ओर उन्मुख हों, वे निरंतर अपने क्षेत्र की स्वच्छता की ओर ध्यान दें: अमित शाह
**********
हम यह सुनिश्चित करें कि हर गरीब को विकास के रास्ते पर जीवन जीने का समान अधिकार मिले, देश में कोई भूखा न हो तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कुछ और नहीं हो सकती: अमित शाह
**********
युवाओं को संस्कार, संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करना चाहिए, युवा भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में अनवरत मेहनत करें: अमित शाह
**********
आज भाजपा के लगभग 300 से अधिक सांसद हैं, 1385 विधायक हैं, लगभग 13 राज्यों में भाजपा एवं भाजपा के सहयोगियों की सरकारें हैं: अमित शाह
**********
जनसंघ के रूप में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी आज 11 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है: अमित शाह
**********
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज, भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की दो दिवसीय और नवमनोनित राष्ट्रीय कार्यसमिति को संबोधित किया। श्री शाह ने अपने संबोधन में देशभर से आये भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को न्यू इंडिया के आह्वान को राष्ट्र उन्नति अभियान बताते हुए इस निर्माण यज्ञ में आगे आने की अपील कीA उन्होंने कहा कि युवाओं को संस्कार, संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करना चाहिएA युवा भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में अनवरत मेहनत करेंA प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा हैA युवा स्वच्छता अभियान की ओर उन्मुख हों वे निरंतर अपने क्षेत्र की स्वच्छता की ओर ध्यान दें. इसे अभियान रूप में लेकर युवा भारत नए भारत के स्वप्न को साकार करें | श्री शाह ने भीम एप एवं मोदी एप के उपयोग पर भी बल दिया |
    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस समय पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशती गरीब-कल्याण वर्ष के रूप में चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जन-जन की आकांक्षाओं के जनक बने, उन्होंने यह दिखाया है कि एक गरीब-कल्याण सरकार कैसे बनायी जाती है और वह गरीबों की भलाई के लिए किस तरह कार्य करती है। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करें कि हर गरीब को विकास के रास्ते पर जीवन जीने का समान अधिकार मिले, देश में कोई भूखा न हो तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कुछ और नहीं हो सकती।
    उन्होंने कहा कि केवल 11 सदस्यों से जनसंघ के रूप में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी आज 11 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से सत्ता के केंद्र तक की यात्रा, जनसंघ से भाजपा की यात्रा अपने जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण पार्टी के लिए पूर्ण रूप से समर्पित कर देने वाले हजारों तपस्वियों और बलिदानियों के त्याग की साक्षी है और उन मनीषियों के त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप ही भारतीय जनता पार्टी आज परम वैभव के शिखर पर विद्यमान है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के लगभग 300 से अधिक सांसद हैं, 1385 विधायक हैं, लगभग 13 राज्यों में भाजपा एवं भाजपा के सहयोगियों की सरकारें हैं और केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में भारतीय जनता पार्टी की गरीब-कल्याण सरकार है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ताकत हमारा संगठन और हमारे कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम के कारण ही आज कच्छ से लेकर कामरूप तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भाजपा का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि गरीबों का कल्याण, राष्ट्र का उत्थान हमारा संकल्प है


रविवार, 16 अप्रैल 2017

समतामूलक समाज निर्माण का लक्ष्य : भाजपा




रविवार, 16 अप्रैल 2017

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा जनता मैदान, भुबनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन अवसर पर दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
 पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत देश की जनता के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति आशाओं एवं आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति है: अमित शाह
**********
लगातार मिल रही जीत से कार्यकर्ता दृढ़ संकल्प के साथ संगठन के विस्तार और देश के विकास के लिए आगे बढ़ने का प्रण लें और परिश्रम की ऐसी पराकाष्ठा करें कि देश भर में एक भी ऐसा बूथ न बचे जहां कमल न खिला हो, संगठन मजबूत न हो: अमित शाह
**********
आज हमारे पास सर्वाधिक लोकप्रिय नेतृत्त्व की पूंजी है। आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर एक नई आशा के रूप में देखा जाता है: अमित शाह
**********
आज हमारी जिम्मेवारी सिर्फ चुनाव जीतना या संगठन को ताकतवर बनाना नहीं है बल्कि पूरे देश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव भी लाना है: अमित शाह
**********
आज समय आ गया है जब हम यह देश व दुनिया को बताएं कि विचारधारा पर चलने वाली पार्टी किस तरह से काम करती है, गरीब कल्याण के साथ–साथ देश के विकास व देश के गौरव के लिए काम करने वाली सरकार किस तरह से काम करती है और राजनीतिक जीवन में शुचिता कैसे लाया जा सकता है: अमित शाह
**********
हम संगठन व सरकार में एक ऐसी व्यवस्था लायें कि बाकी सभी पार्टियां भी इसी रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाएँ और देश के राजनीतिक मानचित्र में बदलाव आ सके: अमित शाह
**********
प्रधानमंत्री जी ने इन तीन सालों में देश के विकास के लिए और जनता की सेवा के लिए अहर्निश काम किया है। तीन सालों में ही श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने देश भर के 300 जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी की है और देश के विकास की एक नई नींव रखी है: अमित शाह
**********
      भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी ने आज भुबनेश्वर के जनता मैदान में भगवान् जगन्नाथ की पावन धरा पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन सत्र को संबोधित किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावों में विजय और हर बूथ तक संगठन के विस्तार के साथ-साथ देश की राजनीति में भी सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कृतसंकल्पित होने का आह्वान किया।
       श्री शाह ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक जन संघ से भारतीय जनता पार्टी की अब तक की हमारी यात्रा के एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है। उन्होंने कहा कि यह एक महत्त्वपूर्ण मोड़ इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की हमारी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं, साथ ही हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा के चुनावों में भाजपा को अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत देश की जनता के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति आशाओं एवं आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि इस विजय के बाद राजनीतिक आलोचक भी पार्टी की शक्ति को स्वीकार करने पर विवश हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस विजय से कार्यकर्ताओं में उत्साह, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ-साथ उनके चेहरे पर संतोष की एक झलक भी लाता है। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही जीत कार्यकर्ताओं के मन में आलस्य का निर्माण न करे बल्कि कार्यकर्ता दृढ़ संकल्प के साथ संगठन के विस्तार और देश के विकास के लिए आगे बढ़ने का प्रण लें और परिश्रम की ऐसी पराकाष्ठा करें कि देश भर में एक भी ऐसा बूथ न बचे जहां कमल न खिला हो, संगठन मजबूत न हो।
      राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज हमारे पास देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेतृत्त्व की पूंजी है। उन्होंने कहा कि आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर एक नई आशा के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इस परिदृश्य में हमारा यह दायित्व बनता है कि हम इस निधि को, इस शक्ति को, इस लोकप्रियता को एक स्थायित्व दें और भारत को विश्वगुरु के पद पर एक बार फिर से प्रतिष्ठित करने का काम करें। उन्होंने कहा कि देश की जनता का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति एक गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि यदि हम इसे स्थायित्व देते हैं तो इसके आशातीत परिणाम हमें प्राप्त होंगे।
    श्री शाह ने कहा कि आज हमारी जिम्मेवारी सिर्फ चुनाव जीतना या संगठन को ताकतवर बनाना नहीं है बल्कि पूरे देश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव भी लाना है। उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है जब हम यह देश व दुनिया को बताएं कि विचारधारा पर चलने वाली पार्टी किस तरह से काम करती है, गरीब कल्याण के साथ – साथ देश के विकास के लिए व देश के गौरव के लिए काम करने वाली सरकार किस तरह से काम करती है और राजनीतिक जीवन में शुचिता कैसे लाया जा सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं व पार्टी पदाधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि हम संगठन व सरकार में एक ऐसी व्यवस्था लायें कि बाकी सभी पार्टियां भी इसी रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाएँ और देश के राजनीतिक मानचित्र में बदलाव आ सके। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता देश की राजनीति को बदलने का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में देश को नई उंचाई पर ले जाने के लिए कृतसंकल्पित हों।
     भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की हर जगह स्वीकृति के साथ-साथ हमारे सहयोगियों की संख्या भी बढ़ रही है, एनडीए की ताकत भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अभी 10 अप्रैल को ही संपन्न हुए एनडीए की बैठक में सभी सहयोगी दलों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है और 2019 में दो-तिहाई बहुमत से एक बार फिर से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने इन तीन सालों में देश के विकास के लिए और जनता की सेवा के लिए अहर्निश काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद तीन सालों में ही श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने देश भर के 300 जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी की है और देश के विकास की एक नई नींव रखी है। उन्होंने कहा कि हमें उनके पुरुषार्थ से प्रेरणा लेकर देश को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित होना चाहिए।
-------------------------------

भारतीय जनता पार्टी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक
भुवनेश्वर, ओडिशा
दिनांक: 15-16 अप्रैल, 2017
प्रस्ताव क्रमांक-1

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तीन वर्षों के कार्यकाल में लोक कल्याण हेतु लिए गए निर्णयों ने आर्थिक विकास, राजनीतिक विश्वास, उन्नतिशील भारत के निर्माण एवं वैश्विक पटल पर भारत की साख में मजबूती के लक्ष्यों को हासिल किया है. शासन की नीतियों से समाज के अंतिम छोर पर खड़े आम व्यक्ति की आशाओं, आकांक्षाओं की पूर्ति करने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सफलता पूर्वक काम कर रही है. गरीब कल्याण को समर्पित उनकी नीतियों के कारण देश की गरीब जनता के मानस में उनके प्रति श्रद्धा, आदर और विश्वास का भाव न सिर्फ मजबूत हुआ है बल्कि जनादेश की कसौटी पर प्रमाणित भी हुआ है. देश के बहुमुखी विकास के लिए अनिवार्य हर जरूरत को वरीयता देते हुए सरकार ने अभूतपूर्व ढंग से काम किया है.

आर्थिक विकास के मोर्चे पर सरकार के प्रयासों से जीएसटी पारित कराने की सफलता मिली तो वहीँ बजट कोअनुशासन के दायरे में लाते हुए इसके कार्यान्वयन के माध्यम से अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को त्वरित रूप से गति प्रदान करने का कार्य हुआ है. तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने ऐतिहासिक सफलताएँ हासिल की हैं, जो भारत को संचार एवं रक्षा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करने की दिशा में उपलब्धि है. निर्माण क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी और विविध क्षेत्रों में मेक इन इण्डिया स्कीम के तहत हासिल हुई आत्मनिर्भरता से भारत विश्व के अग्रणी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में मजबूती के साथ खड़ा नजर आ रहा है.

जनादेश की कसौटी पर खरी सरकार

पांच राज्यों में संपन्न विधानसभा चुनावों के परिणामों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आजादी के बाद के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के रूप में प्रस्थापित किया है. ऐसे समय में जब भाजपा अपने विचारों के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्म शताब्दी को गरीब कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है, इन चुनावों में मिले जनादेश का महत्व बढ़ जाता है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर में पार्टी को विधानसभा चुनावों में और महाराष्ट्र, गुजरात एवं ओड़िसा के निकाय चुनावों में मिली सफलता भाजपा सरकार की गरीब कल्याण को समर्पित नीतियों के प्रति आम जनमानस के अगाध विश्वास की जीत है.

पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी की कुशल संगठनात्मक रणनीति एवं संगठन के सभी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का भी अभिनन्दन करती है जिसके कारण पार्टी को उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड में तीन चौथाई से भी ज्यादा सीटें प्राप्त हुयी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में पार्टी को 2012 विधानसभा चुनाव की तुलना में भारी बढ़ोतरी मिली है. पार्टी को 41(राजग)फीसद वोट और 325 सीटों पर जीत मिली है. यह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इतिहास की सबसे बड़ी जीत है. उत्तर प्रदेश की यह जीत इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के विधायकों में सभी वर्गों एवं सभी क्षेत्रों का व्यापक प्रतिनिधित्व समाहित है. अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण, अगड़ा-पिछड़ा, युवा, महिला, किसान सभी का प्रतिनिधित्व भाजपा की व्यापक पहुँच को प्रदर्शित करता है. उत्तराखंड में भी भाजपा को ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई है. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को 46.5 फीसद वोट मिले हैं एवं कुल 70 में से 57सीटों पर जीत प्राप्त हुई है. यहाँ भी भारतीय जनतापार्टी को तीन चौथाई से अधिक के बहुमत का जनादेश मिला है. मणिपुर में भाजपा को मिली सफलता यह प्रमाणित करने के लिए प्रयाप्त है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उनके शासन की नीतियों की पहुँच देश के उन हिस्सों में भी व्यापक तौर पर हुई है, जहाँ भाजपा की स्थिति न के बराबर होती थी. मणिपुर विधानसभा चुनाव परिणाम इसका ताजा प्रमाण है. मणिपुर में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा 2.1 फीसद वोट मिले थे और वहां की विधानसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व शून्य था. लेकिन विधानसभा चुनाव 2017 में अभूतपूर्व ढंग से भाजपा को 36.3 फीसद वोट मिले और 21 सीटों पर जीत हासिल हुई. वर्तमान में मणिपुर में भाजपा गठबंधन की सरकार है. गोवा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की सरकार बनी है. गोवा में भारतीय जनता पार्टी की वोट प्रतिशत सबसे ज्यादा है. महाराष्ट्र निगम चुनावों में नौ महानगरपालिकाओं में से आठ में भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली एवं मुंबई महानगर पालिका में भी भाजपा ने अबतक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 82 सीटों पर जीत दर्ज की. ओडिसा में हुए पंचायत चुनावों भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए प्रमुख विपक्षी दल के रूप में अपनी मजबूत स्थिति को कायम किया. यहाँ पर भाजपा ने कालाहांडी की सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की है. राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल, असाम में हुए विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी मिली जीत से हमारी विश्वास को और मजबूती मिली है. इन उपचुनाव में भी बंगाल में पार्टी की मत प्रतिशत में बढ़ोतरी पार्टी के विस्तार के लिए सुखद है.

भाजपा के प्रति देश के कोने-कोने में जागृत हो रहा यह विश्वास केंद्र सरकार की नीतियों, योजनाओं और कार्यपद्धति के प्रति विश्वास का प्रतिफल है. नोटबंदी के बाद हुए इन सभी चुनावों में मिले जनादेश को भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बंद किए जाने के फैसले को मिले जनता के समर्थन के तौर पर भी देखती है. 17 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन घटक दलों के मुख्यमंत्री हैं. सांसदों के साथ-साथ अब विधायक भी सर्वाधिक भारतीय जनता पार्टी के हैं.

राजग के 33 दलों के साथ भाजपा का विकास संकल्प

भारतीय जनता पार्टी की विकास परक नीतियों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 33 दलों का साथ मिल रहा है. 33 दलों का यह गठबंधन भाजपा के विकास संकल्प की यात्रा में सहभागी है. देश के हर राज्य, हर क्षेत्र एवं हर समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों की भागीदारी वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूरी एकजुटता के साथ काम कर रहा है. भारतीय जनता पार्टी केंद्र में और राज्यों में जहाँ जिस दल के साथ गठबंधन में है, उन्हें शासन में सहभागी बनाकर चलने की नीति का अनुपालन कर रही है. जहाँ भाजपा की अकेले की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, उन राज्यों में भी राज्यों के राजग के सहभागी दलों को सरकार का हिस्सा बनाकर भाजपा आगे बढ़ रही है. तमिलनाडु, केरल एवं उत्तरपूर्वी राज्यों में एनडीए के सहयोगी दलों की संख्या व ताकत में लगातार वृद्धि हो रही है. भारत के राजनीतिक इतिहास में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में यह पहली बार हुआ है कि देश में पूरी निष्ठा से यह गठबंधन काम कर रहा है.

तीन वर्षों में गरीब कल्याण योजनाओं का सफल क्रियान्वयन

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सबका साथ सबका विकास का संकल्प लेकर आम जन जीवन के हितों में जो तमाम योजनाएं शुरू की गयीं और उन योजनाओं के माध्यम से बदलाव को जमीन पर उतारा गया, यह विजययात्रा उन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का प्रमाण है. भाजपानीत केंद्र सरकार ने जनधन योजना के अंतर्गत 27.97 करोंड़ खाते खोलने का काम करके देश के उन लोगों को मुख्यधारा के अर्थतंत्र से जोड़ने का काम किया है, जो आजादी के पिछले सात दशकों में नहीं हो पाया था. इस योजना के तहत 63,885 करोंड़ रूपये इन खातों में जमा हुए. सरकार ने रोजगार और स्टार्टअप एवं स्टैंडअप योजना के तहत रोजगार क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के माध्यम से 6.6 करोड़ ऋण दिए. समाज के अंतिम छोर पर जीवन यापन करने वाले परिवारों की महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना एक तहत लगभग 2 करोंड़ मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिए हैं. विद्युतीकरण के क्षेत्र भाजपानीत केंद्र सरकार ने अभूतपूर्व ढंग से काम किया है. आजादी के सात दशकों बीतने के बावजूद देश के 18 हजार से ज्यादा गाँव ऐसे थे, जहाँ बिजली का कनेक्शन नहीं था. सरकार ने 2018 तक सभी गांवों में बिजली कनेक्शन पहुंचाने के लक्ष्य क्र तहत काम करते हुए अभी तक 12586 गांवों को बिजली से जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है. सरकार की उजाला LED योजना के तहत 11.8 करोंड़ lEDबल्ब वितरित किए गए जिससे 11330 करोंड़ की बचत हुई. सरकार ने विशेष कर तटवर्ती क्षेत्र के मछुआरों के लिए विशेष ध्यान दिया है. किसानों को फसल बीमा, मृदा स्वास्थ व प्रधानमंत्री सिंचाई योजना से सीधा लाभ पहुँचाया है. सरकार ने शत्रु संपति विधेयक पारित कराने का काम किया है. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लोक कल्याण को समर्पित योजनाओं के प्रतिफल में पार्टी जनादेश की कसौटी पर खरी उतरी है.

अर्थतंत्र में सुदृढ़ता से विकास को रफ्तार

जीएसटी पर सफलता: भारतीय जनता पार्टी जीएसटी पर मिली सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को बधाई देती है. सामान और सेवा पर समान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को लागू कराने में मिली सफलता ऐतिहासिक है. इससे भारतीय अर्थतंत्र में आने वाली बाधाएं कम होंगी एवं अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार होगा. व्यापारिक सुगमता की दृष्टि से जीएसटी का लागू होना एक महत्वपूर्ण सफलता है. इसका सकारात्मक प्रभाव आम व्यक्ति पर पड़ेगा और व्यापार क्षेत्र में तेजी आएगी जिससे रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे. जीएसटी के कारण महंगाई में भी कमी आएगी. आर्थिक सुधारों की दृष्टि से जीएसटी को पारित कराना भाजपानीत केंद्र सरकार की उपलब्धि है.
बजट 2017-18 : भारतीय जनता पार्टी केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट 2017-18की सराहना करती है. यह बजट लोक कल्याण की मूल भावना का प्रतिबिंब होने के साथ-साथ आर्थिक ढाँचे को सुदृढ़ करने में भी सक्षम है. एक राष्ट्र एक बजट की तर्ज पर इसबार केंद्र सरकार ने रेल बजट को अलग से पेश करने की बजाय आम बजट के साथ ही पेश किया.सरकार द्वारा पहली बार अनुशासन के दायरे में1 फरवरी को बजट पेश होने से बजट वितरण एवं योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आई है. रोजगार गारंटी के तहत खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इस बजट के माध्यम से मनरेगा के लिए 11000 करोड़ की बढ़ोतरी करके 48000 करोड़ कर दिया गया है. निम्न मध्यम वर्ग को आयकर स्लैब्स में छूट देने का सरकार का निर्णय सराहनीय है. कुल 21.47 लाख करोंड़ के बजट में गरीब, मजदूर, दिव्यांग, महिला, बाल विकास, निर्माण क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, बीमा सुरक्षा सहित प्रत्येक मुद्दे को बारीकी से वरीयता दी गयी है. रक्षा क्षेत्र के लिए बजट से 2.74 लाख करोंड़, बुनियादी ढांचों के विकास के लिए 3.96 लाख करोंड़, हाइवे विकास के लिए 64000 करोंड़, महिला कल्याण फंड के तहत 1.86 लाख करोंड़, रेल सुरक्षा के लिए 1 लाख करोंड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. इसके अतिरिक्त इस बजट के तहत जन सरोकार से जुड़े अन्य तमाम लक्ष्यों जैसे- 1 मई 2018 तक देश के सभी गांवों में बिजली की उपलब्धता, किसानों को 10 लाख करोंड़ कर्ज, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2019 तक 1 करोंड़ परिवारों को आवास, महात्मा गांधी की 150वी जयंती तक 1 करोड़ गरीब परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने जैसे तमाम लोक कल्याण को समर्पित लक्ष्य चिन्हित किए गए हैं. यह बजट केंद्र सरकार के लोक कल्याण के प्रति समर्पण को दिखाता है तो वहीँ दूसरी तरफ विकास एवं आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के प्रति संकल्पित नजर आता है. आजादी के बाद पहली बार बजट को 31 मार्च से पहले पारित करके कियान्वित भी कर दिया है. जो देश के वित्तीय अनुशासन एवं आर्थिक विकास में बहुत बड़ा कदम है.
चुनाव सुधार और चंदे में पारदर्शिता: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल करते हुए राजनीतिक दलों के चंदे की नकदी सीमा को 20000 रुपए से कम करते हुए 2000 तक कर दिया. केंद्र सरकार का यह कदम चुनाव सुधार एवं चंदे में पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है.
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

भारतीय जनता पार्टी वैचारिक रूप से ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की पुरजोर पक्षधर रही है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने इस लक्ष्य को मजबूती से हासिल करते हुए, 1 मार्च 2017 को स्वदेश निर्मित सुपर सोनिक इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया गया.

अन्तरिक्ष में भारत की धमक:

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में इसरो ने विश्व में पहली बारएक साथ 104 उपग्रहों का अन्तरिक्ष में सफल प्रक्षेपण करने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया. इसके पहले रूस ने 37 उपग्रह छोड़े थे. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में विश्व पटल पर भारत का गौरव बढाने की दिशा में लगातार किया जा रहा उनका प्रयास गौरवान्वित करने वाला है. एक दौर था जब इस कार्य के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर थे लेकिन आत्मनिर्भरता का संकल्प लेकर काम कर रही भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम रख दिया है और इसके लिए श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व बधाई के योग्य है.

भीम एप:प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद से ही डिजिटल इण्डिया को लेकर व्यापक स्तर पर काम हुए हैं. नोटबंदी के बाद डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भीम एप लांच किया जो कि काफी लोकप्रिय हो चुका है. शुरू के दौर में ही इस एप को इस्तेमाल करने वालों की संख्या सवा करोंड़ से ज्यादा हो गयी थी.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति:

भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 प्रस्तावित करने एवं इसे मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रिपरिषद को बधाई देती है. केंद्र सरकार ने इस स्वास्थ नीति के अंतर्गत दुर्गम बिमारियों को मुफ्त सरकारी सुविधा, दवा एवं जाँच को सस्ता एवं सुलभ करना, आयुष को मुख्यधारा में जोड़ना, बुजुर्गों को स्वास्थ सुविधा, स्वास्थ के सम्बंधित सभी सुविधाओं को सस्ता करके गरीबों तक उपलब्ध कराना जैसे लक्ष्यों के साथ एक व्यापक, समावेशी एवं समय के जरूरतों के हिसाब से इस नीति को तैयार किया है. अत्याधुनिक तकनीक के साथ-साथ परंपरागत प्रणालियों से सज्ज राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 स्वस्थ भारत बनाने की दिशा में अचूक कार्यक्रम साबित होगी.

वैश्विक पटल पर चमकी भारत की साख

वर्ष में 2014 में भाजपा की सरकार आने और श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही विश्व जगत में भारत की साख ऊँची हुई है. दुनिया की निगाहें अब भारत की ओर हैं. तमाम आंकड़े भारत को एक संभावनाओं का देश मानने लगे हैं. दुनिया के तमाम देशों से भारत के रिश्ते मजबूत हुए हैं. व्यापारिक, सामरिक एवं कुटनीतिक स्तर पर भारत की ताकत और साख में इजाफा हुआ है. इसकी एकमात्र वजह यह है कि वर्तमान में देश में एक मजबूत सरकार है जिसका नेतृत्व एक मजबूत नेता के हाथों में है. विश्व पटल पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रशासकीय कार्यशैली, लोक कल्याण को समर्पित नीतियों, मजबूत इच्छाशक्ति, सशक्त नेतृत्व की असीम क्षमता को पुरजोर स्वीकृति मिली है.

भारतीय जनता पार्टी सांसदों को 2014 में संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित पहली संसदीय बैठक को संबोधित करते हुए एवं दायित्व बोध का एहसास कराते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में कहा था कि “हम पद के लिए नहीं अपितु 125 करोड़ लोगों की आशा और आंकझाओं को पूरा करने के लिए समेट कर बैठे है, इसलिए पदभार जीवन में बहुत बड़ी बात होती है यह मैंने कभी नहीं माना, लेकिन कार्यभार, जिम्मेवारी ये सबसे बड़ी बात होती है. हमें उसे परिपूर्ण करने के लिए अपने आप को समर्पित करना होगा.” माननीय प्रधानमंत्री जी के इन तीन वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने अपनी कर्मठता से अपने इस शब्दों को जनता के विश्वास में बदल दिया है. यह कार्यकारिणी अपने कार्यकर्ताओं से आवाहन करती है कि सभी मिलकर पंडित दीनदयाल जन्मशताब्दी वर्ष में यह संकल्प लें की जनसेवा के द्वारा जन विश्वास हासिल करने में कार्यकर्त्ता परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे. भारतीय जनता पार्टी देश के जनता से भी आह्वान करती है कि देश में विकास एवं गरीब कल्याण कार्यक्रमों की निरंतरता हेतु 2019 के चुनावों में भी श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने हेतु संकल्पवान हो.

****

प्रस्ताव क्रमांक-2
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए लोकसभा में अपने पहले भाषण में कहा था, “ हम तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के आदर्शो से पले हुए लोग है. जिन्होंने हमें अन्त्योदय की शिक्षा दी थी. गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ताकत दें. शासन की सारी व्यवस्थायें गरीब को सशक्त बनाने के लिए काम आनी चाहिए और सारी व्यवस्थाओं का अंतिम नतीजा उस आखिरी छोर पर बैठे हुए इन्सान के लिए काम आए, उस दिशा में प्रयास होगा, तब जाकर उसका कल्याण हम कर पाएंगे.” माननीय प्रधानमंत्री जी के अपने पहले संबोधन पर प्रतिबद्धता के साथ तीन साल के शासनकाल में मजबूती से इस दिशा में कदम बढ़ाये है.

भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्रमोदीजी द्वारा राष्ट्रीय सामजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के फैसले का स्वागत और अभिन्दन करती है. आजादी के 70 साल बाद किसी सरकार द्वारा समाज के गरीब दूर-दराज के क्षेत्रों में जीवन यापन कर रहे पिछड़ा समाज के हितों में लिया गया एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और अभूतपूर्व निर्णय है. समाज के कमजोर वर्गों की न्याय देने के लिए लम्बे समय से अपेक्षित मांग को पूरा किया गया है.

इस ऐतिहासिक कदम के लाभ:

इस ऐतिहासिक फैसले से समाज के सभी पिछड़े वर्ग के लोगों को न्याय मिलेगा. मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग एक साधारण क़ानूनी निकाय है, जिसका कार्य सरकार को जातियों/समुदायों की सूचियों में शामिल करने अथवा निकालने के संबंध में सलाह देना है. अब इस आयोग को सांविधिक निकाय के रूप में एनसीएससी और एनसीएसटी के बराबर का दर्जा मिल जायेगा. यह आयोग पिछड़ा वर्ग के संरक्षण, कल्याण, और विकास तथा उन्नति से संबंधित अन्य कार्यों का भी निर्वहन करेगा.यह आयोग संविधान के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद 16-4 एवं 15-4 के निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए सामजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए वर्ग को सशक्त करते हुए उनको न्याय देगा.

समतामूलक समाज निर्माण का लक्ष्य भाजपा की प्रतिबद्धता रही है और भाजपा सरकार ने इस फैसले से उस दिशा में एक कदम बढ़ाया गया है. एक न्यायपूर्ण भारत और समतामूलक समाज की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की क्षमता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लिए गए इस अहम निर्णय में अंतर्निहित है.

कांग्रेस और क्षेत्रीय विपक्षी दलों का पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण:

आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा-नीत सरकार ने समाज के पिछड़े वर्ग के हितों को समर्पित वर्षों से लंबित इस कार्य को किया है तो ऐसे में कांग्रेसएवंअन्यविपक्षी दलों का रुख बेहद निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने जिस तरह से राज्यसभा में इसका विरोध किया है, पिछड़े वर्ग को लेकर उसकी मूल मनोस्थिति को दिखाता है. यह सच है कि देश में लंवे समय तक शासन में रहने के बावजूद कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के हितों का यह काम नहीं कर पाई. अब जब भाजपा को शासन का जनादेश मिला है तो भाजपा की सरकार ने वरीयता में रखकर इस कार्य को किया है. आजादी के बाद काका कालेकर कमीशन (1950) और मंडल आयोग (1979) की रिपोर्ट के बावजूद भी तत्कालीन कांग्रेस की सरकारों द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया. विदित है कि इस अहम निर्णय को लागू करने के संबंध में ओबीसी संसदीय समिति की सिफारिश भी आई और सभी दलों के सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाक़ात करके इस संबंध में संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया था. इस दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए इसे लोकसभा में सर्वसम्मति पारित भी करा लिया. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के पिछड़े तबके के लोगों को सशक्त बनाने और उन्हें न्यायिक रूप से और मजबूत करने की दिशा में उठाए गए इस कदम को राज्यसभा में विरोध करके रोक दिया गया है. राजनीति में राजनीतिक विरोध चलते हैं, आरोप-प्रत्यारोप भी होते हैं, लेकिन गरीब और हाशिये के समाज के लिए हो रहे किसी फैसले को अपनी राजनीति के लिए रोकना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा राजनीति में सिर्फ इस बात के लिए इस निर्णय का विरोध करना उचित नहीं कहा जा सकता है कि अमुक काम लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद वे इस काम को नहीं कर पाए और भाजपा की सरकार ने कर दिया. एकओर कांग्रेस व विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया वही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमितशाहजी के नेतृत्व में सभी एनडीए दलों एवं मुख्यमंत्रीयोंने इसको समर्थन देकर माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त किया.

भारतीय जनता पार्टी सभी कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक संस्थाओंसे आह्वान करती है कि समतामूलक समाज के निर्माण के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस ऐतिहासिक फैसले के महत्त्व को दूरस्थ क्षेत्रों के गरीब एवं पिछड़े वर्गों तक पहुंचाए. पार्टी के सभी नेताओंकोगरीब वर्गों के संवैधानिक एवं क़ानूनी अधिकारों के जागरण का प्रयास करना चाहिए और इसके साथ-साथ विपक्षी दलों के पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण का पर्दाफाश भी करना चाहिए.भारतीय जनता पार्टी गरीबों को दिए गयेइस ऐतिहासिक संवैधानिक अधिकार पर माननीय प्रधानमंत्री जी हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत करती है.

*****

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

भाजपा : राष्ट्रीय कार्यकारिणी भुबनेश्वर







शनिवार, 15 अप्रैल 2017

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा जनता मैदान, भुबनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के उदघाटन अवसर पर दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
पांच राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व विजय का मुख्य कारण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता, मोदी सरकार की गरीब कल्याण की नीति को नीचे तक पहुंचाने की कार्य-योजना और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम है: अमित शाह
*******
पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा की शानदार जीत से देश में जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति का अंत हुआ है और ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस’ के एक नए युग की शुरुआत हुई है: अमित शाह
*******
2014 के बाद जितने भी चुनाव, उप-चुनाव अथवा स्थानीय निकायों के चुनाव हुए, उसमें हर जगह भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व जीत दर्ज की जो भाजपा के दिनोंदिन बढ़ते हुए जनाधार और भाजपा में देश की जनता की गहरी आस्था का द्योतक है: अमित शाह
*******
भाजपा की लगातार जीत से विपक्ष बौखलाया हुआ है, उनके पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वे रह-रह कर इवीएम को लेकर आरोप लगाते रहते हैं: अमित शाह
*******
क्या यूपीए-1 और यूपीए-2 की जीत क्या इवीएम से नहीं हुआ था, क्या दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बैलेट पेपर से चुनकर आई थी और क्या अभी पंजाब में कांग्रेस की जीत इवीएम के कारण हुई है: अमित शाह
*******
आगामी मई में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के तीन साल पूरे हो जायेंगे। इन तीन वर्षों में मोदी सरकार ने इतने सारे काम किये हैं कि इनमें से एक भी काम अपने पूरे कार्यकाल तक में कई सरकारें पूरा नहीं कर पातीं: अमित शाह
*******
भारतीय जनता पार्टी का स्वर्णिम युग आना अभी बाकी है। यह स्वर्णिम युग तभी आयेगा जब केरल, बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी हमारी सरकार बनेगी और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एवं कच्छ से लेकर कामरूप तक संगठन का विस्तार होगा: अमित शाह
*******
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की हमारी भारतीय जनता पार्टी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन तीन सालों में हम पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है, हमारे विरोधी भी हम पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सके हैं: अमित शाह
*******
जब देश आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा होगा, तब देश कैसा हो, इसके विकास का मॉडल कैसा हो, इस सोच के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने न्यू इंडिया की परिकल्पना को देश के सामने रखा है: अमित शाह
*******
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को पॉलिसी पैरालिसिस से मुक्ति मिली है। लोगों को अच्छे लगने वाले फैसले नहीं, बल्कि लोगों के लिए अच्छे फैसले लिए जाने की जरूरत है और मोदी सरकार ऐसे ही निर्णायक फैसले ले रही है: अमित शाह
*******
भाजपा केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में संगठन के कार्यकर्ताओं पर हिंसात्मक हमले की कड़ी निंदा करती है: अमित शाह
*******
यदि इन राज्यों में सत्ताधारी पार्टियां यह सोचती हैं कि वे हिंसा के जरिये पार्टी के विचारों को विस्तारित करने से रोकने में सफल हो जायेंगे तो यह उनकी भूल है, भाजपा और अधिक मजबूती के साथ इन राज्यों में उभर कर आयेगी: अमित शाह
*******
दिल्ली में शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट में जो सच्चाई सामने आई है, उससे यह स्पष्ट है कि राजनीतिक शुचिता का इससे बड़ा उल्लंघन और नहीं हो सकता: अमित शाह
*******
हम जनता को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी केवल और केवल देश के विकास के लिए काम करेगी और भारत को एक बार फिर से ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित करने का काम करेगी: अमित शाह
*******

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज भुबनेश्वर के जनता मैदान में श्री भीम भोई परिसर में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक को संबोधित किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने पांच राज्य के विधानसभा चुनावों में भाजपा की अप्रत्याशित विजय, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी के काम काज और संगठन विस्तार के कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की।

श्री शाह ने कहा कि आज हम महाप्रभु जगन्नाथ की पावन भूमि पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में संपन्न हुए पिछले राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक से अब तक के तीन महीने में देश में बहुत बड़े स्तर पर राजनीतिक बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि इस दौरान संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई है, यहाँ हमें तीन चौथाई से जयादा बहुमत प्राप्त हुआ है, साथ ही गोवा और मणिपुर में भी पार्टी को सबसे अधिक वोट मिला है। उन्होंने कहा कि भाजपा की इस अभूतपूर्व विजय का मुख्य कारण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता, मोदी सरकार की गरीब कल्याण की नीति को नीचे तक पहुंचाने की कार्य-योजना और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम है। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक विश्लेषक भी यह मानने पर विवश हो गए हैं कि श्री नरेन्द्र मोदी जी आजादी के बाद से देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने पांच राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व विजय पर कार्यकारिणी के सदस्यों से अपने स्थान पर खड़े होकर माननीय प्रधानमंत्री जी का करतल ध्वनि से स्वागत करने की अपील की। (सभी सदस्यों ने अपने स्थान पर खड़े होकर प्रधानमंत्री जी का जोरदार स्वागत किया।) उन्होंने पाँचों राज्यों की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके विश्वास व आकांक्षाओं पर शत-प्रतिशत खरे उतरने का काम राज्य की भारतीय जनता पार्टी की सरकारें करेंगी और राज्य विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पिछले कार्यकारिणी से लेकर अब तक के तीन महीने में महत्त्वपूर्ण जीएसटी विधायक को दोनों सदनों में पारित किया गया जो एक राष्ट्र, एक टैक्स की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस दौरान पद्म पुरस्कारों की भी घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार समाज के ऐसे गुमनाम मनीषियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों को यह पुरस्कार दिए गए हैं जिन्होंने देश व समाज के लिए कई अकल्पनीय कार्य किये हैं, सही मायनों में पद्म पुरस्कारों का जनतांत्रिककरण किया गया है जो कि एक अनूठी पहल है। उन्होंने कहा कि अब पद्म पुरस्कारों के लिए कोई भी व्यक्ति स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच होती है और फिर पुरस्कारों के लिए उपयुक्त लोगों का नाम फाइनल किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि इस बार की पद्म पुरस्कारों की सूची का एनालिसिस किया जाय तो पता चलेगा कि देश में कितना बड़ा बदलाव आया है।

श्री शाह ने कहा कि 2014 में 30 वर्ष के पश्चात पहली बार किसी एक दल को बहुमत मिला और आजादी के बाद तो पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को अपने दम पर पूर्ण बहुमत मिला और केंद्र में श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। उन्होंने कहा कि इसके बाद हुए हर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को शानदार जीत हासिल हुई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें बनीं, बिहार और दिल्ली में भी हमारे वोट प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद जितने भी चुनाव, उप-चुनाव अथवा स्थानीय निकायों के चुनाव हुए, उसमें हर जगह भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व जीत दर्ज की जो भाजपा के दिनोंदिन बढ़ते हुए जनाधार और भाजपा में देश की जनता की गहरी आस्था का द्योतक है।

उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम पर बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में पहली बार सपा-बसपा के क्रम टूटने के साथ ही जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति का अंत हुआ है और ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस’ के एक नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इतना बड़ा जनादेश आजादी के बाद किसी भी पार्टी को नसीब नहीं हुआ जितना बड़ा जनादेश इस बार भारतीय जनता पार्टी को प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को तीन चौथाई बहुमत से जीत नसीब हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए जो हमने कहा था कि इस प्रदेश को श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया और मोदी जी इसे संवारेंगे – इसे राज्य की जनता ने ह्रदय से स्वीकार किया है।

विपक्ष पर करारा प्रहार करते हुए श्री शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की लगातार जीत से विपक्ष बौखलाया हुआ है, उसके पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वे रह - रह कर इवीएम को लेकर आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि क्या यूपीए-1 और यूपीए-2 की जीत क्या इवीएम से नहीं हुआ था, क्या दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बैलेट पेपर से चुनकर आई थी और क्या अभी पंजाब में कांग्रेस की जीत इवीएम के कारण हुई है?

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कई राजनीतिक पंडित 2014 को भाजपा का स्वर्णिम युग बताते थे, आज वे 2017 को भी भाजपा का स्वर्णिम युग बता रहे हैं लेकिन पार्टी का स्वर्णिम युग आना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि यह स्वर्णिम युग तभी आयेगा जब केरल, बंगाल, तमिलनाडु के साथ-साथ उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी भाजपा की सरकार बनेगी और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एवं कच्छ से लेकर कामरूप तक संगठन का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि विजय की यह भूख और बढ़नी चाहिए, हम अथक पुरुषार्थ से प्रेरणा लेकर और अधिक तत्परता के साथ काम करने के लिए कृतसंकल्पित हों।

श्री शाह ने कहा कि आगामी मई में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के तीन साल पूरे हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन तीन वर्षों में मोदी सरकार ने इतने सारे काम किये हैं कि इनमें से एक भी काम अपने पूरे कार्यकाल तक में कई सरकारें पूरा नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार की तीन साल की कुछ प्रमुख उपलब्धियों की चर्चा करना यहाँ आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी है, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के कनेक्शन में वृद्धि हुई है, डिमोनेटाईजेशन के द्वारा काले-धन के संग्रह पर अंकुश लगाया गया है, काले-धन को अर्थव्यवस्था से ख़त्म करने के लिए एक-के-बाद-एक कई कदम उठाये गए हैं, टैक्सेशन को पारदर्शी बनाया गया और राजनीतिक चंदों को 2000 कैश तक सीमित करके चंदे की प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाने की पहल की गई है। उन्होंने कहा कि चाहे बेनामी संपत्ति पर क़ानून की बात हो, शत्रु संपत्ति पर कार्रवाई की बात हो या फिर शेल कंपनियों के खिलाफ मुहिम की बात - एनडीए सरकार ने हर मोर्चे पर सुधार कार्यक्रम की नींव रखी है।

श्री शाह ने कहा कि नीति आयोग का गठन करके और राज्यों को मिलनेवाले शेयर को बढ़ा कर फेडरल स्ट्रक्चर को मजबूत बनाने का काम किया गया है, बजट की प्रक्रिया को 31 मार्च से पहले ही पूरा कर के एक अप्रैल से बजट के प्रावधानों को लागू करने की शुरुआत करके एनडीए सरकार ने एक नया मानदंड स्थापित किया है, साथ ही, रेल बजट को आम बजट में समायोजित करके विकास की गति को तेज करने के प्रयास किये गए हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस पहल करते हुए डेढ़ साल में ही लगभग 2 करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराये गए हैं, जन-धन योजना के अंतर्गत लगभग 29 करोड़ लोगों के बैंक अकाउंट खोल कर उन्हें देश के अर्थतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ा गया है, मुद्रा बैंक के माध्यम से देश के लगभग 7.32 करोड़ लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराये गए हैं, भीम ऐप की शुरुआत कर देश भर में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दिया गया है और आजादी के 70 साल बाद भी बिजली से वंचित 18000 गाँवों में से 13000 गाँवों में बिजली पहुंचाने का काम पूरा किया गया है।

श्री शाह ने कहा कि किसानों की भलाई के लिए केंद्र की एनडीए सरकार ने कई काम किये हैं चाहे वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो, स्वायल हेल्थ कार्ड की योजना हो, यूरिया उत्पादन में वृद्धि और खाद के दाम कम करने की बात हो।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 40 वर्षों से लंबित ‘OROP’ को एक साल में लागू कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा-नीत एनडीए सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान और अपनी संवेदना को प्रकट करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि एनडीए की विदेश नीति ने एक नया आयाम स्थापित किया गया है, साथ ही, पेरिस समझौते में पर्यावरण को बचाने की हमारी प्रतिबद्धता को भी दुनिया भर में सराहा गया है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की हमारी भारतीय जनता पार्टी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन तीन सालों में हम पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है, यहाँ तक कि हमारे विरोधी भी हम पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सके हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में एक साथ 104 उपग्रह को स्थापित करके हमने अंतरिक्ष विकास में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। उन्होंने कहा कि ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देकर विकास में पीछे छूट गए समाज के वंचितों के प्रति विकास की प्रतिबद्धता हमने दर्शाई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ - बेटी पढाओ और नमामि गंगे के माध्यम से हमने जन-समस्याओं को जन-आंदोलन बनाने का काम किया है।

श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने न्यू इंडिया की परिकल्पना को देश के सामने रखा है जो हमारे नौजवानों की मेधा शक्ति को एक नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि 2022 में जब देश आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा होगा तब देश कैसा हो, इसके विकास का मॉडल कैसा होना चाहिए, यह प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शिता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि 2022 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभी से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी जुट गई है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को पॉलिसी पैरालिसिस से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि लोगों को अच्छे लगने वाले फैसले नहीं, बल्कि लोगों के लिए अच्छे फैसले लिए जाने की जरूरत है और मोदी सरकार ऐसे ही निर्णायक फैसले ले रही है जो देश और जनता के लिए अच्छे हों, यह हमारी सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचायक है। साथ ही, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2019 में एक बार फिर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी और हम जनता की भलाई के लिए अहर्निश काम करेंगे।

श्री शाह ने कहा कि भाजपा केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में संगठन के कार्यकर्ताओं पर हिंसात्मक हमले की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने कहा कि यदि विचारों को दबाने के लिए इस तरह से पार्टियां भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हिंसात्मक हमले करती है तो ऐसे में लोकतंत्र की रक्षा कैसे की जा सकती है? उन्होंने कहा कि यदि इन राज्यों में सत्ताधारी पार्टियां यह सोचती हैं कि वे हिंसा के जरिये भारतीय जनता पार्टी के विचारों को विस्तारित करने से रोकने में सफल हो जायेंगे तो यह उनकी भूल है, वे ऐसा करने में कभी सफल नहीं हो पायेंगे, भारतीय जनता पार्टी और अधिक मजबूती के साथ इन राज्यों में उभर कर आयेगी।

आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अभी दिल्ली में शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट में जो सच्चाई सामने आई है, उससे यह स्पष्ट है कि राजनीतिक शुचिता का इससे बड़ा उल्लंघन और नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उपचुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी को विशाल जीत हासिल हुई है और पार्टी दिल्ली के नगर निगम के चुनाव में भी अच्छी सफलता हासिल करेगी।

श्री शाह ने कहा कि यह वर्ष पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी का जन्म शताब्दी वर्ष है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने इस वर्ष को बड़े पैमाने पर मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी अधिकृत रूप से इस वर्ष को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निश्चय किया है, हमारी राज्य सरकारों को भी इसके लिए कार्ययोजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष में संगठन के विस्तार व विकास के लिए लाखों कार्यकर्ताओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है जो काफी उत्साहवर्द्धक है। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं इसमें अपनी भागीदारी दूंगा एवं विभिन्न राज्यों में बूथ स्तर पर प्रवास करूंगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल, गुजरात और कर्नाटक में भी अबकी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार का गठन होगा।

ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में 20 सालों से बीजद की सरकार है। उन्होंने कहा कि जहां भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य लगातार विकास की नई कहानियां लिख रहे हैं, वहीं ओडिशा विकास के हर मापदंडों में काफी पीछे है। उन्होंने कहा कि यहाँ न तो लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है, न लोगों को बिजली मिल रही है और न ही शिक्षा व स्वास्थ्य की ही मूलभूत सुविधा मौजूद है। उन्होंने कहा कि ओडिशा में बूथ से लेकर प्रदेश तक 2015-17 तक यहाँ के कार्यकर्ताओं ने कठिन संघर्ष किया है, इसके बेहतर परिणाम भी मिलने लगे हैं, मैं ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष एवं संगठन की पूरी टीम को ह्रदय से बधाई देता हूँ।

श्री शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, आज देश के 17 प्रदेशों में भाजपा एवं भाजपा गठबंधन की सरकारें हैं, 300 से अधिक सांसद हैं, 1700 से अधिक विधायक हैं, देश की लगभग 60% आबादी और 70% भू-भाग पर हम सरकार में रहकर जनता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें संगठन के विस्तार और विकास के लिए अहर्निश काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केरल, बंगाल, तमिलनाडु, त्रिपुरा, तेलंगाना और नार्थ-ईस्ट के राज्यों में भी हमें पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व के राज्यों के लिए हमने कई इनिशिएटिव लिए हैं और वहां की एक-एक जनता ने इसे ह्रदय से स्वीकारा है। उन्होंने कहा कि हमारा पुरुषार्थ जब जनादेश में परिवर्तित होती है, तभी इसे सफलता की संज्ञा दी जाती है। उन्होंने कहा कि जहां हम चूक गए हैं, वहां हम और मजबूती के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पहुंचें, चारों तरफ कमल ही कमल दिखाई दे। उन्होंने कहा कि हम जनता को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी केवल और केवल देश के विकास के लिए काम करेगी और भारत को एक बार फिर से ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित करने का काम करेगी।