शुक्रवार, 23 जून 2017

नीतीश कुमार : दो बार मौका था तब क्यों नहीं याद आई बिहार की बेटी मीरा कुमार ?



बिहार के सीएम नीतीश का विपक्ष पर हमला, 
पूछा-मीरा कुमार को हराने के लिए राष्ट्रपति उम्मीदवार क्यों बनाया

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Jun 23, 2017

पटना
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव इफ्तार पार्टी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 'टेस्ट' बदलने में कामयाब नहीं रहे। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के साथ मजबूती से खड़े नीतीश ने इफ्तार पार्टी से बाहर निकलते ही विपक्ष पर जोरदार निशाना साधा और पूछा कि क्या बिहार की बेटी का चयन हारने के लिए किया गया है? लालू ने नीतीश से फैसले पर पुनर्विचार करने और विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार के समर्थन की अपील की थी।

शुक्रवार को सभी की नजरें लालू की इफ्तार पार्टी पर ही टिकी हुईं थीं। इसमें नीतीश-लालू गले तो जरूर मिले, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव पर दोनों की पसंद अलग ही रही। नीतीश ने मीडिया कर्मियों से कहा, 'मैं मीरा कुमार का बहुत सम्मान करता हूं, लेकिन क्या बिहार की बेटी का चयन हराने के लिए किया गया? जिताने के लिए क्यों नहीं किया गया? दो बार मौका था तब क्यों नहीं याद आई बिहार की बेटी? यदि सच में सम्मान करना है तो 2019 में जीत के लिए रणनीति बनाइए और 2022 में बिहार की बेटी को राष्ट्रपति बनाइए। अभी भी मौका है उन्हें दोबारा सोचना चाहिए। हम लोगों ने हर पहलू पर गौर करके निर्णय लिया है। यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है। जहां तक जेडीयू की बात है पार्टी स्वतंत्र निर्णय लेती है। पिछली बार जब प्रणव मुखर्जी और हामिद अंसारी उम्मीदवार थे तो बीजेपी के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ बयानबाजी की थी तो मैंने उसकी मुखालफत की थी। एनडीए में रहते हुए हमने उनका समर्थन किया था।'

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की ओर से साझा उम्मीदवार के तौर पर मीरा कुमार के नाम के ऐलान के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने मीरा को 'बिहार की बेटी' बताते हुए कहा था कि कोविंद को समर्थन देकर नीतीश 'ऐतिहासिक भूल' कर रहे हैं। पत्रकारों ने जब नीतीश से इस पर प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा, 'लालू जी आपको क्या कहते हैं मुझे उस पर कुछ नहीं कहना है? जब 17 पार्टियां एक साथ बैठीं और एक उम्मीदवार तय किया तो उनका फर्ज था अपील करना। कहा जा रहा है कि ऐतिहासिक भूल है....तो करने दीजिए... छोड़ दीजिए।

विपक्ष को झटका
जेडीयू का एनडीए उम्मीदवार को समर्थन विपक्ष की एकता के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। नीतीश के इस कदम से बिहार में महागठबंधन के भविष्य को लेकर भी कयासों के नए दौर की शुरुआत हो सकती है। सियासी गलियारों में काफी लंबे समय से जेडीयू और आरजेडी के रिश्तों में तल्खी के कयास लग रहे हैं। 

बुधवार, 21 जून 2017

रामनाथ कोविंद : राष्ट्रपति पद पर चुनना तय





राष्ट्रपति चुनाव: कोविंद को मिला जदयू का साथ, नीतीश के मंथन के बाद हुआ ऐलान

जदयू ने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को आधिकारिक तौर पर समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. पार्टी प्रवक्ता के सी त्यागी ने बुधवार को इसकी घोषणा की.

केसी त्यागी ने कहा कि पार्टी के इस फैसले से महागठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही त्यागी ने साफ कर दिया है विपक्ष की गुरुवार को होने वाली बैठक में जदयू के नेता शामिल नहीं होंगे.

जदयू नेता ने कहा कि अब समर्थन देने के फैसले के बाद बैठक में भाग लेने का अब कोई औचित्य नहीं है. इस संबंध में कांग्रेस पार्टी को सूचित कर दिया गया है.

त्यागी ने कहा कि माननीय कोविंद का बेहतरीन कार्यकाल के तौर पर रहा है. उन्होंने (कोविंद) ने किसी भी तरह का टकराव राजभवन से नहीं होने दिया. राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर सर्वसम्मति से ये फैसला किया गया है. गुरुवार की अन्य दलों की होने वाली मीटिंग में जदयू शिरकत नहीं करेगी. इसके बावजूद जदयू विपक्षी एकता के लिए हमेशा प्रयासरत रहेगा. नीतीश जी ने पहले ही अपने फैसले से सोनियाजी और लालूजी को अवगत करा चुके हैं.

राष्ट्रपति पद के लिए तय किया गया रामनाथ कोविंद का नाम
रामनाथ कोविंद : कानपुर के एक छोटे से गाँव से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने तक का सफर 
by Vineet Bajpai on Jun 19th 2017

लखनऊ। BJP संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा की है। आइये हम आपको बताते हैं कि कौन हैं रामनाथ कोविंद और कैसा है उनका राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने तक का सफर...

रामनाथ कोविंद का अब तक का सफर
राम नाथ कोविन्द का जन्म एक अक्टूबर 1945 में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला ), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गाँव परौंख में हुआ था।
कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है।
वकालत की उपाधि लेने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की।
वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे।
8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुए।
वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के निर्वाचित हुए।
वर्ष 2000 में पुनः उत्तरप्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए।
कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे।
वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे।
वह भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे।
वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे।

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इन 10 कारणों से श्री रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति उम्मीदवारी की रेस जीती
द्वारा Himanshu Poswal - 20 जून , 2017

एक अप्रत्याशित दांव खेलते हुये नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जुगलबंदी मीडिया हाउस और सम्पूर्ण विपक्ष की बोलती बंद करने में एक बार फिर सफल रही है। जब मीडिया अपने ही विचारों और सिद्धांतों की पोटली बना राष्ट्रपति चुनाव में बाँच रही थी, और कई प्रसिद्ध नामों पर विचार विर्मश करने में व्यस्त थी, तभी एनडीए ने अपने राष्ट्रपति उम्मीदवार की घोषणा की, जो इनके आशाओं के एकदम विपरीत निकले।

हाल ही में एक नितिक्ष श्रीवास्तव के नाम से चलने वाले ट्विट्टर हैंडल का ट्वीट सामने आया है, जिसने बड़े सटीक रूप से 2016 में ही एनडीए के इस उम्मीदवार की घोषणा की भविष्यवाणी की थी, और बड़े करीने से इस हैंडल ने बड़े बड़े मीडिया घरानों और विपक्ष के प्रपंची नेताओं को धूल चटा दी।

वकालत की शिक्षा ग्रहण की।
बीएनएसडी इंटर कॉलेज के विद्यार्थी, और प्रसिद्ध दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज, कानपुर के स्नातक, श्री रामनाथ कोविन्द ने वकालत की शिक्षा भी ग्रहण की। कुशाग्र बुद्धि के विद्यार्थी, श्री कोविन्द ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली की तरफ चल पड़े।

लोक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की
दिल्ली आने का इनका प्रमुख कारण था, लोक सेवा परीक्षा [यूपीएससी एग्ज़ाम्स] के लिए पढ़ाई करना और उसे उत्तीर्ण करना। हालांकि वे दो बार असफल भी हुये, पर तीसरी बारी में उन्होने ये परीक्षा उत्तीर्ण की। हालांकि इनकी रैंक आईएएस सेवा के लिए काफी नहीं थी, सो इन्हे सम्बद्ध सेवा में नौकरी से संतोष करना पड़ा।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया में वकील के तौर पर 1971 में दाखिला
आईएएस बनने का सपना त्यागने के बाद इनहोने वही किया जिसके लिए इनहोने कॉलेज में पढ़ाई की। 1971 में इनहोने बार काउंसिल ऑफ इंडिया, दिल्ली में बतौर वकील अपना दाखिला करवाया।

दिल्ली हाइ कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील (1977–1979)
इनकी सबसे पहली उपलब्धि आई 1977 में, जब इन्हे मोरारजी देसाई के नेतृत्व में केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली हाइ कोर्ट में वकील नियुक्त किया गया। वहाँ इनहोने दो साल अपनी सेवाएँ दी।

सूप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी वकील (1980 – 1993)
1980 में इनके जीवन में एक और मोड़ आया। अब इन्हे सरकार की तरफ से सूप्रीम कोर्ट में बतौर स्थायी वकील प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। 13 सालों तक माननीय कोविन्द जी ने निस्संकोच अपनी सेवाएँ दी।

मोरारजी देसाई के निजी सचिव के तौर पर कार्य किया
ये कुछ लोगों के लिए चौंकाने वाला तथ्य हो सकता है, पर इस राष्ट्रपति उम्मीदवार ने कभी भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई की बतौर निजी सचिव सेवा भी की थी। इससे इन्हे पीएमओ की कार्यशैली को करीब से जानने का मौका भी मिला।

दो बार उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सांसद (1994-2000 और 2000-2006)
इनके नाम अनगिनत उपलब्धि में सबसे उत्कृष्ट उपलब्धि है इनका बतौर राज्य सभा सांसद दो बार उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होना। बतौर सांसद इनहोने सांसद की कार्यप्रणाली का भी गहन अध्ययन किया है। कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की इनहोने अपनी सेवाएँ भी दी है, जैसे एससी/एसटी कल्याण समिति, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण समिति इत्यादि। इसे कहने में कोई हर्ज़ नहीं की इन सेवाओं से इनहोने उच्च पद पर आसीन होने के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुभव भी ग्रहण किया है।

न्यू यॉर्क में यूएन में भारत का प्रतिनिधित्व और यूएन आम सभा में अक्टूबर 2002 में भाषण का सौभाग्य

जब अटल बिहारी वाजपयी जी भारत के प्रधानमंत्री थे, तब उन्होने रामनाथ कोविन्द जी को संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधित्व का सुनहरा अवसर प्रदान किया। न सिर्फ इनहोने यह उत्तरदायित्व बखूबी संभाला, बल्कि अक्टूबर 2002 में आम सभा में इनहोने अपने भाषण से अपनी धाक भी जमाई। इससे ये साफ है की भारत के भावी राष्ट्रपति में देश का अंतराष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करने की उचित योग्यता भी है।

वर्तमान में बिहार के राज्यपाल
71 वर्षीय रामनाथ कोविन्द बिहार के वर्तमान राज्यपाल के तौर पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। एक राज्य का कुशल निरीक्षण करने की इनकी क्षमता ने इन्हे एनडीए के लिए एक उचित उम्मीदवार के तौर पर उपर्युक्त समझा गया है।

दलित – जिसमें मीडिया को ख़ासी दिलचस्पी हैं।
ये एक विडम्बना है की इस देश की राजनीति में योग्यता नहीं, जाति मायने रखती है। अब इससे एनडीए पूरी तरह अनभिज्ञ रहे, ऐसा सोचना भी असह्य है। एक दलित को उच्च पद के लिए नामित करना पार्टी के आगामी अभियानों के लिए वरदान समान ही साबित होगा। पर जिस तरह इसे मीडिया एक आडंबर बनाने पर तुली है, ऐसे योग्य मनुष्य के लिए अपमानजनक प्रतीत होता है, जिनहोने अपनी जाति के दंश से ऊपर उठ कर अपने देश की उच्च से उच्चतम सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

इसके अलावा डॉ॰ बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में बतौर प्रबंधन बोर्ड के सदस्य श्री कोविन्द कभी प्रसिद्ध भारतीय प्रबंधन संस्थान, कलकत्ता [आईआईएम कलकत्ता] के बोर्ड ऑफ गोवेर्नर्स के मनोनीत सदस्य भी रह चुके है। आरएसएस बैक्ग्राउण्ड से आने वाले कोविन्द जी बीजेपी दलित मोर्चा की 1998-2002 में अगुवाई भी कर चुके हैं। वे अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

भारत का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतितनिधित्व करने का सौभाग्य इनके फायदे में ही रहा। चूंकि मोरारजी देसाई के साथ इनहोने काम किया है, इसीलिए इन्हे नीति निर्माण में भी अनुभव प्राप्त है। इनहोने एससी और एसटी समुदाय की महिलाओं के उन्मूलन और कानूनी सहायता में भी अपना योगदान दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार से संबन्धित होने के नाते इन्हे देश के लाखों लोगों की कई समस्याओं का भी गहरा अनुभव है।

बहरहाल, चाहे आप खुश हो या नाखुश, पर इस बार एनडीए ने अपना दांव सही खेला है। राष्ट्रीय राजनीति में इनका दांव आने वाले कई वर्षों तक अपनी छाप छोडते जाएगा। रामनाथ कोविन्द के लिए प्रणब दा की जगह भरना काफी मुश्किल होगा, पर उनका अनुभव और उनका ज्ञान इस देश के लिए काफी मूल्यवान सिद्ध हो सकता है।

शनिवार, 17 जून 2017

आरती : ॐ जय जगदीश हरे




आरती : ॐ   जय   जगदीश   हरे

ॐ जय जगदीश हरे,स्वामी जय जगदीश हरे |
भक्त जनों के संकट,दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे | ॐ जय जगदीश हरे ||

जो ध्यावे फल पावे,दुःखबिन से मन का,
स्वामी दुःखबिन से मन का |
सुख सम्पति घर आवे,सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का |ॐ जय जगदीश हरे ||

मात पिता तुम मेरे,शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी |
तुम बिन और न दूजा,तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी |ॐ जय जगदीश हरे ||

तुम पूरण परमात्मा,तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी |
पारब्रह्म परमेश्वर,पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी |ॐ जय जगदीश हरे ||

तुम करुणा के सागर,तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता |
मैं मूरख फलकामी मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता | ॐ जय जगदीश हरे ||

तुम हो एक अगोचर,सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति |
किस विधि मिलूं दयामय,किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति |ॐ जय जगदीश हरे ||

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे |
अपने हाथ उठाओ,अपने शरण लगाओ
द्वार पड़ा तेरे |ॐ जय जगदीश हरे ||

विषय-विकार मिटाओ,पाप हरो देवा,
स्वमी पाप हरो देवा |
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा |ॐ जय जगदीश हरे ||

रविवार, 11 जून 2017

किसानों के लिये स्वामीनाथन आयोग की अनुसंशाओं से बढ़कर काम किया है मप्र ने - मुख्यमंत्री श्री चौहान


हजारों किसानों के आग्रह पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उपवास तोड़ा

किसानों ने कहा शिवराज हमारा भाई
किसानों के लिये स्वामीनाथन आयोग की अनुसंशाओं से बढ़कर काम किया है मप्र ने - मुख्यमंत्री श्री चौहान
शांति भंग करने वालों को नहीं छोड़ा जाएगा

भोपाल : रविवार, जून 11, 2017, 17:48 IST

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को नारियल पानी पिलाकर उपवास समाप्त करवाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी। इस दौरान केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत भी मौजूद थे।


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हजारों किसानों के आग्रह पर आज यहाँ शांति बहाली के लिए चल रहे उपवास के दूसरे दिन अपना उपवास समाप्त किया। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी एवं बुजुर्ग किसान श्री मोतीलाल ने नारियल पानी पिलाकर उपवास तुड़वाया।

स्थानीय दशहरा मैदान में अनिश्चितकालीन उपवास का दूसरा दिन सुबह 11 बजे से महात्मा गांधी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन' से शुरू हुआ। प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आये किसान मुख्यमंत्री के साथ उपवास में शामिल हुए। मुख्यमंत्री के समर्थन में केन्द्रीय नेता, प्रदेश मंत्रीमंडल के सदस्य, विधायक, विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी भी उपवास पर बैठे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के नाम पर शांति भंग करने वालों ने राज्य को बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि किसानों के विरूद्ध किसी भी प्रकार का प्रकरण नहीं बनाया जाएगा, लेकिन ऐसे लोगों को नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश के नागरिकों की सेवा आखिरी साँस तक करते रहेंगे। कुछ लोग प्रदेश को आग में झोंकने का काम कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ऐसे तत्वों की पहचान करें और भविष्य में सतर्क रहें। असामाजिक तत्वों को शांति भंग न करने दें। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की निजी सम्पत्तियों को नुकसान हुआ है उन्हें भी राहत दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2006 में बने स्वामीनाथन आयोग ने किसानों के लिये जो अनुशंसाएँ की थी उससे आगे बढ़कर मध्यप्रदेश ने काम किया है। स्वामीनाथन आयोग ने किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन देने की सिफारिश की थी, जबकि राज्य सरकार माइनस 10 प्रतिशत पर खाद-बीज के लिये उन्हें ऋण दे रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर खेती के लिये लोन दे रही है। किसानों के कल्याण के लिये स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों से भी आगे निकल गई है। स्वामीनाथन आयोग ने राज्यों से सिंचाई की व्यवस्था करने को कहा था। आज प्रदेश में 40 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। हर क्षेत्र के लिये सिंचाई योजनाएँ बनाई गई हैं। हर खेत में पानी है। नर्मदा के जल से मालवा और अन्य क्षेत्रों में पानी पहुँच रहा है। आयोग की अनुशंसा के अनुरूप विलेज नॉलेज सेंटर बनाये जायेंगे ताकि किसानों को समय पर सलाह मिल सके। उन्होंने कहा कि बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के लिए प्रदेश के सभी नगरों में किसान बाजार बनाए जाएंगे ताकि किसान अपनी उपज सीधे खरीदारों को बेच सकें। श्री चौहान ने कहा कि राज्य भूमि उपयोग परामर्श सेवा लागू की जाएगी ताकि किसानों को सही समय पर परामर्श मिले कि कौन सी फसल कितनी मात्रा में बोना चाहिए। किसी भी प्रकार से शहरी परियोजना के लिए कृषि भूमि जबरदस्ती अधिग्रहीत नहीं की जाएगी। किसानों की राय जरूरी है। किसानों को खसरा/खतौनी की नकल वर्ष में एक बार उनके घर नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी।

श्री चौहान ने कहा कि दो लाख आदिवासी भाइयों को जमीन पर अधिकार दिया गया है। प्रदेश में किसी भी गरीब को बिना जमीन के नहीं रहने दिया जायेगा। इसके लिये कानून बनाया जायेगा। आज मध्यप्रदेश की कृषि वृद्धि दर दुनिया में सबसे ज्यादा है। पहले फसलें खेत में सूख जाती थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। किसानों के लिये सड़क नेटवर्क बढ़ाया गया है। सोयाबीन खराब होने पर बिना सर्वे के भी किसानों को राहत दी गई थी। विपक्षी दल के लोग कभी किसान के खेत में नहीं गए।

श्री चौहान ने कहा कि किसानों के बेटों के लिये कई योजनाएँ बनाई गई हैं चाहे वे अपना रोजगार लगाये या पढ़ाई करें। पहले राहत देने के लिये तहसील इकाई थी अब किसान स्वयं इकाई है। उन्होंने कहा कि 1000 करोड़ की लागत से मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाया जा रहा है। प्याज की खरीदी 8 रूपये प्रति किलो शुरू हो गई है। कृषि उत्पाद लागत एवं विपणन आयोग बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उड़द, तुअर और मूंग की खरीदी समर्थन मूल्य पर होगी। जिन किसानों का सोयाबीन बचा रह गया है उसकी भी खरीदी की जाएगी।

श्री चौहान ने कहा कि कोई भी उपज समर्थन मूल्य के नीचे नहीं खरीदी जाएगी। समर्थन मूल्य से नीचे खरीदी करने को अपराध माना जाएगा। श्री चौहान ने किसानों द्वारा उठाये गये मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दूध खरीदी का सबसे अच्छा मॉडल अमूल डेयरी का है। इसी मॉडल के आधार पर दूध खरीदी की व्यवस्था की जाएगी। डिफाल्टर किसानों के लिये समाधान योजना बनाई जायेगी ताकि उन्हें दोबारा लोन मिल सके।

श्री चौहान ने किसानों द्वारा आंदोलन वापस लेने और शांति बहाली में राज्य सरकार को सहयोग करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सभी समस्याएँ सुलझाई जायेंगी। उन्होंने किसानों से दो जुलाई को नर्मदा के किनारे होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की।

आंदोलन करने वाले मध्यप्रदेश किसान यूनियन के उपाध्यक्ष श्री अनिल यादव ने यह कहते हुए आंदोलन वापस लेने की घोषणा की कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी माँगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि लागत मूल्य देने की माँग बरसो पुरानी थी जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। आजादी के बाद पहली बार यह मांग स्वीकार की गई है।

इस अवसर पर केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री प्रभात झा, राष्ट्रीय महामंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद एवं राज्य भाजपा अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, मंत्रीमंडल के सदस्य और बड़ी संख्या में किसान एवं उनके प्रतिनिधि संगठन के सदस्य उपस्थित थे।

ए.एस.