शुक्रवार, 17 मार्च 2017

प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की खुलकर तारीफ की



   प्रणव मुखर्जी : - ' मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।'



मोदी ने तेजी से काफी कुछ सीखा है: प्रणब; 
वाजपेयी के बारे में भी की तारीफ
Dainikbhaskar.com | Mar 17, 2017

नई दिल्ली. प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की शुक्रवार को खुलकर तारीफ की। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रणब ने कहा कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आए मोदी ने केंद्र में तेजी से चीजों को सीखा और नए रोल में खुद को बखूबी ढाला। प्रणब ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की तारीफ में भी कहा कि उनका काम करने का तरीका एकदम अलग था। वे अपने साथियों की फिक्र किया करते थे। और क्या बोले प्रणब...

मोदी राज्य से आए और केंद्र में महारत हासिल कर ली
- इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रणब ने कहा, ''मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक प्रधानमंत्रियों को काफी कम वक्त काम करने का मौका मिला। इन लोगों के पास पार्लियामेंट का अच्छा-खासा एक्सपीरियंस था। लेकिन एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है।'' 
- ''2008 की आर्थिक मंदी के बाद एक ताकतवर ऑर्गनाइजेशन जी-20 के रूप में उभरा। हर साल और कभी-कभी साल में दो बार जी-20 की समिट होती है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।''
- ''मोदी चीजों को बहुत अच्छी तरह ऑब्जर्व करते हैं। मुझे उनकी वह बात अच्छी लगी, जब उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आपको बहुमत चाहिए होता है, लेकिन सरकार चलाने के सभी का मत चाहिए होता है।''
अपने साथियों की बेहद फिक्र करते थे अटलजी
- प्रणब ने कहा, ''अटलजी काफी असरदार पीएम थे। लेकिन वे पूरी तरह अलग अप्रोच रखते थे। मैं सिर्फ एक उदाहरण आपको दूंगा। मैं राज्यसभा में था। मैंने अचानक देखा कि प्रधानमंत्री मेरी सीट की तरफ आ रहे हैं। मैंने शर्मिंदगी महसूस की। मैंने कहा- अटलजी आपने मेरे पास आने की क्यों तकलीफ की। अाप किसी को मुझे बुलाने के लिए भेज देते।''
- ''अटलजी ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोस्त हैं। इसके बाद अटलजी ने मुझसे एक बात की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीज काफी मेहनती और काबिल मंत्री हैं। उनके लिए ज्यादा तल्ख न हों। उस वक्त जॉर्ज डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे।''
- ''मैंने अटलजी से कहा कि मैं इस बात की तारीफ करता हूं। मैं इस बात को सलाम करता हूं कि आप अपने कलीग की कितनी फिक्र करते हैं। ये बस एक घटना है जो बताती है कि वे किस तरह काम करते थे।'' 
- ''कुछ दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहा कि कश्मीर का मसला सुलझना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं अथॉरिटी नहीं हूं। आप इस मसले को क्यों नहीं सुलझाते। जब आप अथॉरिटी से मिलें तो उन्हें बताएं कि अटलजी की सोच के पन्नों से आपको सबक लेना चाहिए।''
2008 में मजबूत थी भारत की इकोनॉमी
- प्रणब ने कहा कि यूपीए-1 के पहले पांच में से चार साल के दौरान ग्रोथ रेट 8% से ज्यादा थी। इंडियन इकोनॉमी का बेस इतना मजबूत था कि उसने 2008 के इकोनॉमिक क्राइसिस को भी झेल लिया। मनमोहन सिंह ने मंत्रियों को काम करने की पूरी छूट दी थी।

मोदी राज्य से आए और केंद्र में महारत हासिल कर ली
- इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रणब ने कहा, ''मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक प्रधानमंत्रियों को काफी कम वक्त काम करने का मौका मिला। इन लोगों के पास पार्लियामेंट का अच्छा-खासा एक्सपीरियंस था। लेकिन एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है।'' 
- ''2008 की आर्थिक मंदी के बाद एक ताकतवर ऑर्गनाइजेशन जी-20 के रूप में उभरा। हर साल और कभी-कभी साल में दो बार जी-20 की समिट होती है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।''
- ''मोदी चीजों को बहुत अच्छी तरह ऑब्जर्व करते हैं। मुझे उनकी वह बात अच्छी लगी, जब उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आपको बहुमत चाहिए होता है, लेकिन सरकार चलाने के सभी का मत चाहिए होता है।''
अपने साथियों की बेहद फिक्र करते थे अटलजी
- प्रणब ने कहा, ''अटलजी काफी असरदार पीएम थे। लेकिन वे पूरी तरह अलग अप्रोच रखते थे। मैं सिर्फ एक उदाहरण आपको दूंगा। मैं राज्यसभा में था। मैंने अचानक देखा कि प्रधानमंत्री मेरी सीट की तरफ आ रहे हैं। मैंने शर्मिंदगी महसूस की। मैंने कहा- अटलजी आपने मेरे पास आने की क्यों तकलीफ की। अाप किसी को मुझे बुलाने के लिए भेज देते।''
- ''अटलजी ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोस्त हैं। इसके बाद अटलजी ने मुझसे एक बात की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीज काफी मेहनती और काबिल मंत्री हैं। उनके लिए ज्यादा तल्ख न हों। उस वक्त जॉर्ज डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे।''
- ''मैंने अटलजी से कहा कि मैं इस बात की तारीफ करता हूं। मैं इस बात को सलाम करता हूं कि आप अपने कलीग की कितनी फिक्र करते हैं। ये बस एक घटना है जो बताती है कि वे किस तरह काम करते थे।'' 
- ''कुछ दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहा कि कश्मीर का मसला सुलझना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं अथॉरिटी नहीं हूं। आप इस मसले को क्यों नहीं सुलझाते। जब आप अथॉरिटी से मिलें तो उन्हें बताएं कि अटलजी की सोच के पन्नों से आपको सबक लेना चाहिए।''
2008 में मजबूत थी भारत की इकोनॉमी
- प्रणब ने कहा कि यूपीए-1 के पहले पांच में से चार साल के दौरान ग्रोथ रेट 8% से ज्यादा थी। इंडियन इकोनॉमी का बेस इतना मजबूत था कि उसने 2008 के इकोनॉमिक क्राइसिस को भी झेल लिया। मनमोहन सिंह ने मंत्रियों को काम करने की पूरी छूट दी थी।