शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

भाई साहब रघुवीरसिंह कौशल: विकास पुरूष

जयन्ति अवसर पर : 24 फरवरी 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल के चरण  स्पर्श किये थे 
बांरा को जिला बनाने वाले - अंता में एनटीपीसी खुलवाने वाले
मिनी सचिवालय और कालीसिंध पुल को लाने वाले
प्रखर राजनेता, मानव सेवा तथा रक्तदान के प्रेरक 

भाई साहब रघुवीरसिंह कौशल: विकास पुरूष 

- अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा , जिला कोटा 
55 वर्ष के लगभग राजनैतिक जीवन में बेदाग छवि के व्यक्ति, राजस्थान विधानसभा में कुशाग्र वक्ता एवं दबंग किसान नेता के रूप में ख्याती प्राप्त विधायक रहे। स्पष्टतावादिता के लिए विख्यात रघुवीरसिंह कौशल ने नैतिकता के मुद्दों पर अपनी पार्टी को भी अनेकों अवसरों पर नहीं बख्शा। निर्विवाद छवि हेतु सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं के लिए एक आदर्श आपने प्रस्तुत किया ।

कौशल राजस्थान में लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के जनक, सहकार राजनीती के संस्थापक, जी.एस.एसों का जाल बिछानें वाले तथा रक्तदान , वृक्षारोपण, मरीजों की सेवा और शिक्षा हेतु सहयोग के प्रेरक हैं।

उन्होने राजनीति को मानव सेवा का माध्यम बना कर अनूठी मिसाल पेश की , अनेकों बार उनके भाषणों में होता था  ” वास्तविक गरीवों के बीपीएल का कार्ड बनवाया कि नहीं, मरीजों को देखने अस्पताल जाते हो कि नहीं , जरूरतमंद के इलाज को दान देते हो या नहीं , होली दिवाली गरीबों के घर राम राम करने जाते हो कि नहीं। “ उनका कहना रहता था कि ‘‘हम अपने स्टेटस से, व्यक्तित्व से, क्षमता से जरूरतमंद की सेवा अवश्य करें, उनके काम अवश्य आयें।’’

उनके पास अक्सर इलाज और स्कूल की फीस के लिये लोग पहुंचते रहते थे और वे अक्सर सामने बैठे किसी भी कार्यकर्ता से पैसा मांग कर उसका काम करवा देते थे। प्रधानमंत्री सहायता कोष ओर मुख्यमंत्री सहायता कोष से लोगों के इलाज करवाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। वे राजस्थान के एक मात्र इस प्रकार के सांसद थे कि जो प्रधानमंत्री कार्यालय में इलाज के लिये स्पेशल केस स्विकृत करवाने जाते थे। उनके कार्यकाल में जयपुर और दिल्ली के निवासों पर अक्सर दो चार मरीज इलाज के लिये ठहरे हुये मिलते ही थे। वे उनकी चाय पानी भोजन से लेकर अस्पताल तक जाने आने की चिंता करते थे।

उन्होने अपना जन्मदिन हमेशा ही तीर्थ स्थलों पर मनाया और वे अपनी मित्र मण्डली के साथ तिर्थ यात्रायें करते थे। 75 वां जन्मदिन धूमधाम से मनायें जानें का तय हुआ तो उन्होंने आयोजन का स्पष्टता से मना करते हुए समाज को प्रेरणा देने के लिये , जन्मदिन पर, विवाह की सालगिरह पर , परिजनों की तेरहवीं पर, रक्तदान शिविरों के आयोजन की परम्परा डाली। वे कहता थे जोडे से रक्तदान करने पर ग्यारह गुणा पुण्य मिलता हे। इस प्रकार महिलाओं में भी रक्तदान की जागरूकता के वे प्रेरक रहे। रक्तदान जो कि आज कोटा में फैशन के रूप में प्रचलित है उनकी ही देन है।

किसानों के हित में कार्यों में वे हमेशा ही अग्रणी रहे, राजनैतिक जीवन में सामाजिक कार्यों के प्रति वे हमेशा ही सजग एवं प्रयत्नशील रहे बीमारों का इलाज करवाने में हमेशा ही अग्रणी भूमिका निभाई । उन्होंने अपने 75वें जन्म दिवस पर रक्तदान शिविरों की श्रृंखला आयोजित करवाई जिसमें 1500 यूनिट से अधिक रक्त एकत्र हुआ था। इसके बाद प्रत्येक जन्म दिवस पर रक्तदान शिविर करवाया जो कोटा में एक प्रेरणा के रूप में स्थापित हो कर सम्पूर्ण हाडौती में फैल गया । एम.बी.एस. स्थित ब्लड बैंक को एम्बुलैंस एवं उन्नयन हेतु राशीयां दी। आई.एम.ए. हॉल के उन्नयन के लिये राशियां दी। बर्न वार्ड और यूरोलोजी के लिये सांसद कोष से राशियां दी। कैंसर विभाग के उन्नयन के लिये केन्द्र सरकार से राशि दिलवाई और उसके उन्नयन के सतत प्रयत्न किये।
सांसद काल में सांसद कोष की राशी से बांयी मुख्य नहर की सफाई करवा कर टेल पर पानी पहुंचवाने का वर्षों से लंम्बित अत्यंत आवश्यक कार्य करवाया । गांव-गांव हेण्डपम्प और ट्यूब वेल लगवाकर पेयजल समस्याओं का निदान करवाया । पेयजल की टंकियों के निर्माण और कस्बों में एम्बूलेंसों के लिये सांसद कोष से राशीयां दीं।

ऊर्जा मंत्री रहते हुए जी.एस.एसों का जाल बिछाया तो वन मंत्री के रूप में सघन वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया । शिक्षा के क्षैत्र में भामाशाहों को आगे लाने की परम्परा भी आपने प्रांरम्भ की स्वयं के गांव में विद्यालय की स्थापना हेतु भूमि दान की । आज वहां उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित है।

आध्यात्म में गहरी रूची वाले कौशल हनुमानजी के परम भक्त हैं वे नित्य सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं। उन्हे सुन्दरकाण्ड पूरा याद है। धर्मिक कार्यों एवं विचारों की उनके समक्ष सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

1960 में ग्राम भोज्याखेडी के सरपंच से राजनैतिक यात्रा प्रारम्भ कर विधायक, मंत्री और सांसद तक की यात्रा निर्विघ्न जारी रही, राजनीति में व्यवहारिकता का उदाहरण बनें , यही कारण है कि बच्चे से लेकर बूढे़ तक उन्हें भाई साहब के नाम से पुकारते हैं । 82 वर्ष की आयु में भी वे सामाजिक एवं अन्य विविध कार्यक्रमों में भाग लेते रहे। 2009 से सक्रीय राजनैतिक जीवन से सन्यास के पश्चात भी वे लगातार पार्टी के मार्ग दर्शक बनें।
उनकी राजनैतिक सूझ-बूझ को पार्टी में बहुत ही महत्वपूर्ण रूप से लिया जाता था। आपने राजाखेडा तथा झुंन्झुनू के विधानसभा उपचुनावों में पार्टी को पहली बार विजयी दिलाई थी। आप लगातार संगठन एवं जनप्रतिनिधि चुनावों के प्रभारी रहे हैं।

1951 में भारतीय जन संघ की स्थापना हुई तथा 1952 में राजस्थान में जन संघ को स्थापित करने का कार्य प्रारंभ हुआ इस कार्य में अधिकांशतः राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवकों एवं पदाधिकारियों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कठिन परिश्रम किया। हाड़ौती में इस कार्य के नैतृत्वकर्ता कौशल रहे। अप्रत्यक्ष रूप् से जनसंघ के लिये प्रत्याशी तैयार करना पार्टी पदाधिकारी तैयार करना कार्य का विस्तार करना आदि में भी वो निरन्तर सन्निहित रहे। ज्ञातव्य रहे कि केाटा के जिला प्रचारक लालकृष्ण आडवाणी जब जन संघ के पदाधिकारी बने तो उनकी पहली आम सभा कौशल की अगुवाई में अन्ता में सम्पन्न हुई।जन संघ के तत्कालिन राष्ट्रीय महामंत्री पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी की हाड़ौती में प्रथम आमसभा कौशल की अगुवाई में अन्ता में सम्पन्न हुई।उन्हें प्रखर राजनेता के कारण ही आपात काल के दौरान मीसा लगाकर 18 महिने के लिये कांग्रेस सरकार ने जैल यात्रा करवाई। जनता पार्टी और बाद में भारतीय जनता पार्टी में वे उच्च स्तरिय राजनिती में सक्रिय रहे।
भारतीय जनता पार्टी के कोटा जिलाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष पदों पर पदासीन रहे । सांसद चुने जानें पर आप को राजस्थान सांसद सेल के अध्यक्ष के रूप में सुशोभित किया।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के स्वंयसेवक: दामोदर प्रसाद शांडिल्य के अनुसारः-
श्री कौशल विद्यार्थी काल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड गये थे। आप न्याय मंदिर शाखा , रामतलाई मैदान एवं शक्ति शाखा अफीम गोदाम के स्वंयसेवक रहे। जिला एवं विभाग कार्यवाह रहे। संघ की विभाग, प्रांत एवं क्षैत्र स्तरीय समन्वय शाखाओं के सदस्य भी रहे। आपने ओटीसी इन्दौर से की तथा तृतीय वर्ष शिक्षण किया। कोटा में जब लालकृष्ण आडवाणी जी संघ के प्रचारक थे तब कौशलजी ने उनके साथ भी कार्य किया।
आपका जुडाव बचपन से ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से रहा। आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं भारतीय किसान संघ के राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष रहे।

आपने पं. दीनदयाल जी उपाध्याय, श्री अटल बिहारी वाजपेयी , श्री लालकृष्ण आडवाणी, राजमाता श्रीमती विजया राजे सिंधीया, श्री मुरलीमनोहर जोशी, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, श्री हरीदत्त पाठक सहित विभिन्न विभूतियों से मार्गदर्शन लेकर पूर्ण निष्ठा से कर्त्तव्य परायणता का परिचय दिया।

जीवन परिचय
रघुवीर सिंह कौशल का जन्म 24 फरवरी 1933 में, अंता के पास स्थित किसान परिवार में, ग्राम भोज्याखेड़ी में हुआ। उनके पिताजी का नाम श्री कन्हैयालाल जी कौशल एवं माताजी का नाम श्रीमति सोमवती देवी था। आप दो भाई एवं सात बहिनें थीं। आपका विवाह 10 फरवरी 1954 में कोटा नयापुरा की श्रीमति शकुन्तला देवी से हुआ । आपके दो पुत्र अरविन्द कौशल एवं अतुल कौशल  तथा एक पुत्री अंजना कौशल  है।
आपकी प्रारंम्भिक शिक्षा अंता कस्बे में तथा उच्च शिक्षा कोटा में हुई, आपने बी.ए., एल.एल.बी. किया है। आप एक सफल कृषक रहे हैं,  आप ने निरंतर आधुनिक कृषि को अपनाने पर जोर दिया तथा इस हेतू व्यक्तिगत स्तर पर भी व्यापक प्रचार-प्रसार किये। गन्ना उत्पादन के लिये सरकार द्वारा आपको कृषि पंडित की उपाधी से नवाजा गया।
आप हाडौती के पहले सहकार नेता हैं जिन्होने सहकारी संस्थाओं को प्राथमिक स्तर तक ले जानें का महती कार्य किया, सेन्ट्रल बैंक के अध्यक्ष, जिला सहकार संघ के अध्यक्ष, मार्केटिंग समिती, अंता और कृषि उपज मण्डी, अंता के अनेकों बार अध्यक्ष रहे हैं।
आप आपातकाल के दौरान 18 महीनें तक मीसा बंदी रहे हें। श्रीराम मंदिर मुक्ती आंदोलन में आप राजस्थान के इन्चार्ज रहे हैं। कश्मीर आंदोलन, गौ रक्षा आंदोलन सहित संघ विचारधारा के लगभग सभी आंदोलनों एवं कार्यक्रमों की आपने अगुवाई की है।

जनप्रतिनिधि क्षैत्र में 16 वर्षाें तक निरंतर सरपंच रहते हुए राजनैतिक यात्रा प्रारम्भ कर चार बार विधायक, दो बार सांसद एवं राजस्थान सरकार में मंत्री रहे। सांसद रहते हुऐ राजस्थान सांसद दल (एमपी सैल बीकानेर हाऊस, नई दिल्ली) के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान अनेको कमेटियों के सदस्य के रूप में भी आपने कार्य किया। ईजराईल, ब्रिटेन , अमरीका एवं वेस्टइंडीज की विदेश यात्रायें की!

राजनैतिक रूप से आपने श्री अटलबिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवानी, राजमाता श्रीमती विजयराजे सिंधिया, श्री कुशाभाऊ ठाकरे, श्री जसवंत सिंह, श्री भैरोंसिंह शेखावत, श्री सुन्दरसिंह भण्डारी, श्री राजनाथ सिंह, श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री ललितकिशोर चतुर्वेदी, श्री हरीशंकर भाभडा, श्री भंवरलाल शर्मा एवं श्रीमति वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ कार्य किया है।


ऐतिहासिक क्षण 24 नवम्बर 2013 अंताः-
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल के साथ संगठन के महासचिव रहते हुए, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए अनेकों कार्यक्रम साझा किये। ऐतिहासिक क्षण 24 नवम्बर 2013 अंता में तब आया जब  भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी ने अंता में हुई जन सभा में मंच पर पूर्व सांसद रघुवीरसिंह कौशल के आदर सहित चरण  स्पर्श कर आशिर्वाद मांगा।

बांरा जिले में:-
1. बांरा को जिला बनाया
2. बांरा में मिनि सचिवालय भवन का निर्माण करवाया।
3. अंता में एनटीपीसी की स्थापना।
4. कालीसिंध नदी पर बडा पुल बनवाया।
5. बांरा में रेल्वे ओवर ब्रिज की प्रक्रिया कौशल ने ही प्रारम्भ करवाई थी।
6. बांरा में जिला बनने से पूर्व अतिरक्त जिला अधिकारी स्तर के अनेकानेक कार्यालयों की स्थापना करवाई।
7. बांरा के जिला बनने पर जिला स्तरीय कार्यालय स्थापित करवाये।
8. लिफ्ट योजनायें चालू करवाईं।
9. पूर्व - पश्चिम कोरीडोर कोे बांरा कोटा बूंदी के रास्ते निकलवाया , जिससे फोर लेन सड़क बन गई और कोटा में हैंगिग ब्रिज चम्बल पर बन रहा है।
10. कोटा बीना रेल लाईन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण कौशल की ही देन है।

कोटा जिले में:-
1. आई एल को बचाया।
2. पूर्व - पश्चिम कोरीडोर को बांरा कोटा बूंदी के रास्ते निकलवाया , जिससे फोर लेन सड़क बनी और आज कोटा में हैंगिग ब्रिज चम्बल पर बन रहा है यह उसी का परिणाम है।
3. कोटा बीना रेल लाईन का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण कौशल की ही देन है।
4. ग्वालियर-श्योपुर नेरोगेज रेल लाईन को ब्रॉडगेज में बदलने और कोटा से जोडने में कौशल ने निरंतर प्रयास किये जिसका ही परिणाम होगा कि निकट भविष्य में यह रेल लाईन इटावा दीगोद होते हुऐ कोटा आयेगी।
5. अजमेर के नसीराबाद से बूंदी तक नया रेल मार्ग बनाये जाने के प्रयासों से ही सर्वे संभव हुआ , आगे यह लाईन भी बनेगी।
6. कोटा स्टेशन एवं डकनिया पर रेल आरक्षण कार्यालय भी आपकी ही देन है।
7. कोटा में नया हवाई अड्डा हेतु आपने प्रयास किये और मण्डाना के पास इस हेतू जमीन का सर्वे भी करवाया लेकिन राजनैतिक कारणों के चलते प्रयास पूर्ण नहीं हो सका।
8. कोटा बूंदी बांरा में एनीकटों का जाल बिछाये।

बूंदी जिले में:-
1. बांयी मुख्य नहर की साफ सफाई करवा कर, टेल तक पानी पहुंचवाया ।
2. चाकन बांध इन्द्रगढ़ को स्विकृत करवाया एवं बनवाया
विशेष:- कोटा में कर्फयू लगने पर जनता एवं कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करना

आंदोलनः-
1. कश्मीर मुक्ति आंदोलन।
2. गौहत्या विरोधी आंदोलन
3. खुशहाली टैक्स को हटवानें का आंदोलन।
4. श्रीराम मंदिर आंदोलन ।
5. आपातकाल में 18 महीने जेल यात्रा।
6. कोटा में रेल रोको आंदोलन में गिरफ्तारों को मुक्त करवाने का आंदोलन।

अंता -संघर्ष का मुख्य केन्द्र:-
1. नहरों के साथ ही सिंचित भूमि पर खुशहाली टैक्स मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिया ने लगाया, जिसके विरूद्ध किसान संघर्ष समिति बना कर रघुवीर सिंह कौशल ने 10 हजार किसानों के साथ प्रदर्शन कर माफ करवाया ।
2. सरपंच काल में डाबरी नक्कीजी गांव में नदी पर छोटा सा पम्प हाउस बनाकर सिंचाई प्रारम्भ करवाई जो कि आगे जा कर लिफ्ट इरिगेशन की जनक बनीं । यही पम्प हाऊस बाद में परवन सिंचाई परियोजना के रूप में स्थापित है।
3. प्रथम विधायक काल ( 1977 - 80  ) में प्रथम बार दांयीं मुख्य नहर पर लिफ्ट योजनायें स्विकृत करवाईं जो कि ऊँचाई वाले असिंचित क्षैत्र के लिये वरदान साबित हुईं। अपने आप में तब अनूठी पहल थी।  इसमें देहल्याहेड़ी, चक शाहबाद, पचेल खुर्द  आदि में स्थापित हैं।
4. 1977 में अंता को नगर पालिका बनवाया ।
5. अंता में एनटीपीसी की स्थापना ।
6. अंता में दांयी मुख्य नहर के एक्सईएन द्वितीय का कार्यालय खुलवाया।
7. अंता में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खुलवाया ।
8. पलायथा ब्रांच पर सड़क बनवाई ।
9. अंता मार्केटिंग के अध्यक्ष रहते हुऐ मार्केटिंग भवन बनवाया ।
10. अंता को नायब तहसील और बाद में तहसील बनवाया ।
11. अंता  पुलिस का डीएसपी कार्यालय ।
12. अंता एसीएम कार्यालय खुलवाया ।
13. अंता न्यायालय खुलवाया ।
14. अंता में कृषि विज्ञान केन्द्र खुलवाया ।
15. अंता में औद्यौगिक प्रशिक्षण संस्थान खुलवाया ।
16. अंता में सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम का निर्माण ।
17. अंता सार्वजनिक निर्माण विभाग का सहायक अभियंता कार्यालय खुलवाया ।
18. अंता बिजली विभाग का सहायक अभियंता कार्यालय खुलवाया ।
19. प्राथमिक विद्यालय एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बडवा, पलायथा, पचेलकलां,मिर्जापुर आदि को बनवाया। आयुर्वेदिक औषधालय बनवाये।
20. पर्यटन स्थल नागदा एवं सोरसन का विकास करवाया।