मंगलवार, 24 मार्च 2020

नव संवत्सर 2077 : 25 मार्च 2020से



 नव संवत्सर 2077 : 25 मार्च २०२० से शुरू होगा







वर्ष का शुभारंभ चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से होता है क्योंकि इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना शुरू की थी. नव वर्ष विक्रम संवत सर 2077 का शुभारंभ 25 मार्च 2020 चैत्र नवरात्र के प्रथम से होगी. वर्ष के पहले दिन का सूर्योदय 6.27 बजे होगा।  इस दिन बुधवार होने से ज्योतिषियों का मत है कि नया वर्ष देश में सुख-समृद्धि और धन-धान्य से भरपूर रहेगा।

ज्योतिष के जानकार रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया कि किसी भी नए संवत्सर में राजा का चयन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के वार के अनुसार होता है,अर्थात इस दिन जो वार होता है उस वार के स्वामी को संवत का राजा माना जाता है। नए वर्ष का नाम प्रमादी है। रघुनाथ शास्त्री के अनुसार नए वर्ष के पहले दिन वेद में दिए गए संवत्सर सुक्त का पाठ करना चाहिए। ध्वज और कलश पूजन करना चाहिए।

रघुनाथ शास्त्री ने बताया नए वर्ष की शुरुआत बुधवार से हो रही है, जो शुभता का प्रतीक हैं। बुध  राजा ,चंद्र मंत्री रहेंगे। बुध के राज्य में जल, धन, धान्य, में समृद्धि आएगी। और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के सम्मान व प्रभाव में बढ़ोतरी होगी। यह भी माना जाता है ।बुध के राजा रहते धर्म व अध्यात्म  के क्षेत्र में विस्तार व लोगों का इसमें जुड़ाव बढ़ेगा, लेकिन राजनीति की हालात संतोषजनक नहीं रहेगी। युवाओं के लिए शुरू होंगे रोजगार के अवसर। बुध का संबंध पर्यावरण से भी है। इस कारण पर्यावरण के क्षेत्र में सुधार लाने के प्रयासों में तेजी आयेगी। पहले दिन कुंभ का चंद्रमा होने से कृषक परिवारों में धन-धान्य की आवक में बढ़ोतरी होगी।
सम्वत मंत्री चंद्रमा
चंद्रमा के मंत्री होने के कारण भौतिक सुख सुविधाओं का बोलबाला होगा। लोगों का ध्यान भी इस ओर अधिक रह सकता है। वर्षा अच्छी होने की उम्मिद भी की जा सकती है। दूध और सफेद वस्तुओं का उत्पादन भी अच्छा होगा। रस और अनाज में वृद्धि होगी। बाजार में मूल्यों में उतार-चढा़व जल्दी दिखाई देगा। कोई भी स्थिति लम्बे समय तक नहीं रह पाए। असंतोष और दुविधा आम व्यक्ति के मन में बहुत अधिक रहने वाली है।अपराधों में कमी आएगी। अनाज, दूध, घी, दाल, धातुओं में मन्दी बनी रह सकती हैं। इस सम्वत का मंत्री चन्द्रमा होने से कर्मचारी वर्ग,महिला वर्ग के साथ साथ बुद्दिजीवी वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा

सस्येश (फसलों) का स्वामी गुरु
इस समय सस्येश गुरु का प्रभाव होने से रस और दूध और फलों की वृद्धि अच्छी होगी। फसलों की पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। इस समय वेद और धर्म के मार्ग पर जीवन जीने से लोगों का कल्याण होता है। इस वर्ष का सस्येश देवगुरु वृहस्पति है इसके फलस्वरूप व्यर्थ के विवाद शान्त होंगें। षड्यंत्रकारी ताकते कमजोर होगीं। रोगों से मुक्ति मिलेगी, कमी आएगी। शासन द्वारा जनहित में कानून व्यवस्था में आपेक्षित सुधार सम्भव होंगें।

नीरसेश गुरु का प्रभाव
नीरसेश अर्थात ठोस धातुओं का स्वामी. इनका स्वामी गुरु है. गुरु के प्रभाव से तांबा, सोना या अन्य पीले रंग की वस्तुओं के प्रति लोगों का झुकाव और अधिक बढ़ सकता है. इनकी मांग बढ़ सकती है। कृषि के क्षेत्र में अच्छा रुख दिखाई दे सकता है. पशुओं से लाभ मिलने की उम्मीद भी दिखाई देती है. खेती से जुड़े व्यापारियों को भी लाभ मिलने की अच्छी उम्मिद दिखाई देती है।

धान्येश मंगल का प्रभाव
धान्येश अर्थात अनाज और धान्य जो हैं उनके स्वामी मंगल होंगे. मंगल के प्रभाव से गेहूं,ज्वर, बाजरा, गन्ना,तिल्ली, अलसी,मसूर, मूंगफली,चना, सरसों आदि के मूल्य में वृद्धि देखने को मिल सकती है. तेल जैसे पदार्थों में तेजी आएगी ये वस्तुएं महंगी हो सकती है।धार्मिक एवम शुभ उत्सव जैसे आयोजनों वृद्धि होगी।

मेघश सूर्य का प्रभाव
इस वर्ष का मेघेश सूर्य होने से वर्षा में कमी सम्भावित। मेघेश यानी के वर्षा का स्वामी. इस वर्ष सूर्य मेघेश होंगे. सूर्य के प्रभाव गेहूं, जौ, चने, बाजरा की पैदावार अच्छी होगी. दूध, गुड़ भी अच्छे होंगे, उत्पादन में वृद्धि होगी. सूर्य का प्रभाव कई स्थानों पर वर्षा में कमी ला सकता है. नदी और तालाब जल्द सूख भी सकते हैं। अकाल की सम्भवना बनती हैं। आम लोगों में क्रोध की अधिकता बढ़ेगी। वहीं दुर्घटनाओं में वृध्दि के साथ साथ प्राकृतिक आपदाओं की सम्भवना बनती हैं। श्री शास्त्री के अनुसार मसालों के बाजार भावों में वृद्धि सम्भावित। फलों, फूलों, सब्जियों और औषधियों  की उपज अच्छी होंगी।व्यापारी वर्ग तथा जनता सुख का अनुभव करेगी।

फलेश सूर्य का प्रभाव
फलेश अर्थात फलों का स्वामी. सूर्य के फलों का स्वामी होने के कारण इस समय वृक्षों पर फल बहुत अच्छी मात्रा में रहेंगे. फल और फूलों की अच्छी पैदावार भी होगी ओर उत्पादन भी बढ़ेगा. पर कुछ स्थान पर इसमें विरोधाभास भी दिखाई देगा जैसे की कही अच्छा होना और कहीं अचानक से कम हो जाना.

रसेश शनि का प्रभाव
रसेश अर्थात रसों का स्वामी, रस का स्वामी शनि होने के कारण भूमी का जलस्तर कम हो सकता है. वर्षा होने पर भी जल का संचय भूमि पर नहीं हो पाए।प्रशासन बलवान होगा। जनता जनार्दन जागरूक बनेगी।बेमौसमी और प्रतिकूल वर्षा के कारण अनेक रोग उत्पन्न हो सकते हैं. कुछ ऎसे रोग भी बढ़ सकते हैं जो लम्बे चलें और आसानी से ठीक न हो पाएं। इस वर्ष का रसेश शनि होने से भौतिक सुख सुविधाओं का विस्तार होगा।

धनेश बुध का प्रभाव
धनेश अर्थात धन का स्वामी राज्य के कोश का स्वामी. बुध के धनेश होने के कारण वस्तुओं का संग्रह अच्छे से हो सकता है. व्यापार से भी लाभ मिलेगा और सरकारी खजाने में धन आएगा. धार्मिक कार्य कलापों से भी धन की अच्छी प्राप्ति होगी.चीनी,चावल,गुड़,गेहूं ,चना, मूंग,उड़द,सरसों, बाजरा एवम तिल्ली की फसल अच्छी होगी।

दुर्गेश सूर्य का प्रभाव
दुर्गेश अर्थात सेना का स्वामी. सूर्य के दुर्गेश होने से सैन्य कार्य अच्छे से हो सकेंगे. न्याय पालन करने में लोगों का असहयोग रहेगा. पर कई मामलों में कुछ लोग निड़र होकर कई प्रकार के खतरनाक हथियारों का निर्माण करने में भी लगे रह सकते हैं. सरकारी तंत्र से जुड़े लोग नियमों को अधिक न मानें और अपनी मन मर्जी ज्यादा कर सकते हैं।

रोहिणी का निवास
इस "प्रमादी" नामक संवतसर में रोहिणी का निवास समुद्र तट पर होने से समय का वास, वैश्य के घर होने से मध्यम वर्षा के योग बनते हैं। बाजार भाव तेज। रहेंगें। अनाज की कमी सम्भावित। कृषक, जनता और पशु पक्षी वर्ग परेशान होंगें। राजनीतिक उथल पुथल रहेगी। इस वर्ष चतुरमेघों में "आवर्त" नामक मेघ हैं जिसके कारण वर्षा माध्यम होगी। खण्ड वृष्टि की सम्भवना। तेज हवा, ओलावर्ष्टि तथा कम वर्षा से फसलों को नुकसान सम्भव। जन धन की हानि के योग भी बनते हैं। समुद्र तटों पर तूफान एवम चक्रवात जैसी विभिशिकाएँ पैदा होने की सम्भवना बनती हैं।

नए वर्ष में बुध-चंद्रमा की स्थिति का इन राशियों पर रहेगा असर
मेष- स्वास्थ्य में गिरावट होगी, वृष- मानसिक कष्ट हो सकता है, मिथुन- कार्यों में विलंब होगा,
कर्क- संपत्ति लाभ होगा, सिंह- खर्च बढ़ेंगे,  कन्या- रोग कष्ट,
तुला-भूमि लाभ होगा,  वृश्चिक- वाहन संभलकर चलाएं  धनु- हानि,
मकर- कार्यों में बाधा,  कुंभ- वाहन, भूमि लाभ, मीन- सुख-संतोष।

चंद्र-बुध पिता-पुत्र ही हैं। दोनोें प्रमुख पद एक ही परिवार में हैं। सूर्य-शनि भी पिता-पुत्र हैं जो मंत्रिमंडल में हैं। इस वर्ष में 21 जून को सूर्यग्रहण हैं जो सुबह 10.11 बजे शुरू होगा और दोपहर 1.41 बजे समाप्त होगा। 15 अगस्त को देश का 74 वां स्वतंत्रता दिवस होगा।

इस वर्ष अधिक मास अश्विन है
जो  18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्तूबर तक चलेगा। इसके कारण व्रत-पर्वों में 15 दिन का अंतर आ रहा है। यानी जनवरी से अगस्त तक आने वाले त्योहार करीब 10 दिन पहले और सितंबर से दिसंबर तक होने वाले त्योहार 10 से 15 दिन की देरी से आएंगे।

इसलिए कहते है इसे पुरुषोत्तम मास
इस अधिमास का कोई स्वामी न होने से देवताओं ने इसे अशुद्ध माना और इसमें कोई भी मांगलिक कार्य कैसे करें, इस संशय में पड़ गए। तब वे भगवान विष्णु के पास गए तो उन्होंने कहा कि आज से मैं इस अधिमास को अपना नाम देता हूं। जब से पुरुषोत्तम मास के दौरान जप, तप, दान से पुण्य प्राप्ति होते हैं। श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन व विष्णु की उपासना की जाती है। कथा पढ़ने-सुनने से भी लाभ होता है। इस मास में जमीन पर शयन, एक ही समय भोजन करने से अनंत फल प्राप्त होते हैं। रघुनाथ शास्त्री के अनुसार 19 वर्ष बाद अश्विन का अधिक मास आया है।  इसके पहले विक्रम संवत 2058 में अश्विन का अधिकमास था। इसके बाद 2096 में अश्विन का अधिक मास आएगा

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

आजाद हूं और आजाद रहूंगा - चंद्रशेखर आज़ाद





चंद्रशेखर आज़ाद जी का आज बलिदान दिवस है !
एच०एस०आर०ए० द्वारा किये गये साण्डर्स-वध और दिल्ली एसेम्बली बम काण्ड में फाँसी की सजा पाये तीन अभियुक्तों- भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव ने अपील करने से साफ मना कर ही दिया था। अन्य सजायाफ्ता अभियुक्तों में से सिर्फ ३ ने ही प्रिवी कौन्सिल में अपील की। ११ फ़रवरी १९३१ को लन्दन की प्रिवी कौन्सिल में अपील की सुनवाई हुई। इन अभियुक्तों की ओर से एडवोकेट प्रिन्ट ने बहस की अनुमति माँगी थी किन्तु उन्हें अनुमति नहीं मिली और बहस सुने बिना ही अपील खारिज कर दी गयी। चन्द्रशेखर आज़ाद ने मृत्यु दण्ड पाये तीनों प्रमुख क्रान्तिकारियों की सजा कम कराने का काफी प्रयास किया। वे उत्तर प्रदेश की हरदोई जेल में जाकर गणेशशंकर विद्यार्थी से मिले। विद्यार्थी से परामर्श कर वे इलाहाबाद गये और २० फरवरी को जवाहरलाल नेहरू से उनके निवास आनन्द भवन में भेंट की। आजाद ने पण्डित नेहरू से यह आग्रह किया कि वे गांधी जी पर लॉर्ड इरविन से इन तीनों की फाँसी को उम्र- कैद में बदलवाने के लिये जोर डालें! अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव राज से मन्त्रणा कर ही रहे थे तभी सी०आई०डी० का एस०एस०पी० नॉट बाबर जीप से वहाँ आ पहुँचा। उसके पीछे-पीछे भारी संख्या में कर्नलगंज थाने से पुलिस भी आ गयी। दोनों ओर से हुई भयंकर गोलीबारी में आजाद को वीरगति प्राप्त हुई। यह दुखद घटना २७ फ़रवरी १९३१ के दिन घटित हुई और हमेशा के लिये इतिहास में दर्ज हो गयी।

पुलिस ने बिना किसी को इसकी सूचना दिये चन्द्रशेखर आज़ाद का अन्तिम संस्कार कर दिया था। जैसे ही आजाद की बलिदान की खबर जनता को लगी सारा इलाहाबाद अलफ्रेड पार्क में उमड पडा। जिस वृक्ष के नीचे आजाद शहीद हुए थे लोग उस वृक्ष की पूजा करने लगे। वृक्ष के तने के इर्द-गिर्द झण्डियाँ बाँध दी गयीं। लोग उस स्थान की माटी को कपडों में शीशियों में भरकर ले जाने लगे। समूचे शहर में आजाद की बलिदान की खबर से जब‍रदस्त तनाव हो गया। शाम होते-होते सरकारी प्रतिष्ठानों प‍र हमले होने लगे। लोग सडकों पर आ गये।

आज़ाद के बलिदान की खबर जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू को मिली तो उन्होंने तमाम काँग्रेसी नेताओं व अन्य देशभक्तों को इसकी सूचना दी।। बाद में शाम के वक्त लोगों का हुजूम पुरुषोत्तम दास टंडन के नेतृत्व में इलाहाबाद के रसूलाबाद शमशान घाट पर कमला नेहरू को साथ लेकर पहुँचा। अगले दिन आजाद की अस्थियाँ चुनकर युवकों का एक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में इतनी ज्यादा भीड थी कि इलाहाबाद की मुख्य सडकों पर जाम लग गया। ऐसा लग रहा था जैसे इलाहाबाद की जनता के रूप में सारा हिन्दुस्तान अपने इस सपूत को अंतिम विदाई देने उमड पड़ा हो। जुलूस के बाद सभा हुई। सभा को शचीन्द्रनाथ सान्याल की पत्नी प्रतिभा सान्याल ने सम्बोधित करते हुए कहा कि जैसे बंगाल में खुदीराम बोस की बलिदान के बाद उनकी राख को लोगों ने घर में रखकर सम्मानित किया वैसे ही आज़ाद को भी सम्मान मिलेगा। सभा को कमला नेहरू तथा पुरुषोत्तम दास टंडन ने भी सम्बोधित किया। इससे कुछ ही दिन पूर्व ६ फ़रवरी १९३१ को पण्डित मोतीलाल नेहरू के देहान्त के बाद आज़ाद भेस बदलकर उनकी शवयात्रा में शामिल हुए थे।

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आज ही 1931 में शहीद हुये थे चंद्रशेखर आजाद, पढ़िये कैसे अकेले भिड़े थे अंग्रेजों से
By अमरीष मनीष शुक्ला  | Updated: Monday,July 23, 2018

इलाहाबाद। हिंदुस्तान के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। यह दिन उस वीर क्रांतिकारी के जीवन का आखिरी दिन था जिसके नाम से अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारी कांप जाया करते थे। हालांकि बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि आज के ही दिन महान क्रांतिकारी पंडित चंद्रशेखर आजाद तिवारी वीरगति को प्राप्त हुए थे। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद में अंग्रेजी फौज से अकेले ही भिड़े आजाद ने अपनी कसम को पूरा करने के लिए उस वक्त खुद पर गोली चलाई जब उनके पिस्टल से सिर्फ एक गोली बची थी। 15 अंग्रेज सिपाहियों को निशाना बनाने के बाद जब आजाद की पिस्टल में आखरी गोली बची थी तब उस गोली को खुद को मार कर देश के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान कर गए थे। वह आखिरी दिन आज भी कई बुजुर्गों को याद हैं और जाने कितनी किताबों में यह घटनाक्रम हमेशा के लिए अमर हो गया है। आइये हम आपको आजाद के उस आखिरी दिन की कहानी से रूबरू कराते हैं और आजादी के नायक वीर योद्धा को श्रद्धांजलि देते हैं।

अल्फ्रेड पार्क चल रहा था विचार विमर्श
 भगत सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें फांसी दिए जाने की तैयारियां चल रही थी। चंदशेखर आजाद इसे लेकर बहुत ज्यादा परेशान थे। वह जेल तोड़कर भगत सिंह को छुड़ाने की योजना बना चुके थे, लेकिन भगत सिंह जेल से इस तरह बाहर निकलने को तैयार नहीं थे। परेशान चंदशेखर आजाद हर तरह से भगत को की फांसी रोकने का प्रयास कर रहे थे। आजाद अपने साथी सुखदेव आदि के साथ आनंद भवन के नजदीक अल्फ्रेड पार्क में बैठे थे। वहां वह आगामी योजनाओं के विषय पर विचार-विमर्श कर ही रहे थे कि आजाद के अल्फ्रेड पार्क में होने की सूचना अंग्रेजों को दे दी गई। मुखबिरी मिलते ही अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को घेर लिया। अंग्रेजों की कई टुकड़ियां पार्क के अंदर घुस आई जबकि पूरे पार्क को बाहर से भी घेर लिया गया। उस समय किसी का भी पार्क से बचकर निकल पाना मुश्किल था, लेकिन आजाद यूं ही आजाद नहीं बन गए थे । अपनी पिस्टल के दम पर उन्होंने पहले अपने साथियों को पेड़ों की आड़ से बाहर निकाला और खुद अंग्रेजों से अकेले ही भिड़ गए । हाथ में मौजूद पिस्टल और उसमें रही 8 गोलियां खत्म हो गई। आजाद ने अपने पास रखी 8 गोलियों की दूसरी मैगजीन फिर से पिस्टल में लोड कर ली और रुक रुक कर अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब देते रहे।

15 अंग्रेस सिपाहियों को बना था निशाना
चंद्रशेखर आजाद ने जितनी भी गोलियां चलाई हर बार अचूक निशाने पर लगी और कोई न कोई वर्दीधारी मारा गया। दहशत के कारण अंग्रेज भी पेड़ों की आड़ में छुप चुके थे। एक अकेले क्रांतिकारी के सामने सैकड़ों अंग्रेज सिपाहियों की टोली बौनी साबित हो रही थी। चंदशेखर आजाद ने 15 वर्दीधारियों को अपना निशाना बना लिया था, लेकिन अब उनकी गोलियां खत्म होने वाली थी। चंदशेखर आजाद ने अपनी पिस्टल चेक की तो अब सिर्फ एक गोली बची हुई थी। वह चाहते तो एक और अंग्रेज अधिकारी को गोली मार सकते थे, लेकिन उन्होंने कसम खाई थी कि जीते जी उन्हें कोई भी अंग्रेज हाथ नहीं लगा सकेगा। इस कसम को पूरी करने के लिए आखिरकार उस महान योद्धा ने वह फैसला लिया जिसे जिससे वह हमेशा के लिए आजाद हो गए। 27 फरवरी 1931 का वह दिन आजाद के लिये अंतिम दिन बन गया। चंदशेखर आजाद ने पिस्टल की आखिरी गोली अपनी कनपटी पर चला दी और वहीं पेड़ के नीचे हमेशा के लिए शांत होकर अमर हो गए।

'आजाद' नाम से डरते थे अंग्रेज
आजाद की ओर से गोलियां चलनी बंद हुई और लगभग आधे घंटे तक जब एक भी गोली नहीं चली तो अंग्रेज सिपाही धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे, लेकिन आजाद का खौफ इस तरह था कि एक एक कदम आगे बढ़ने वाले सिपाही जमीन पर रेंगते हुए अब आजाद की ओर बढ रहे थे । आजाद के मृत शरीर पर जब अंग्रेजों की नजर पड़ी तो उन्होंने राहत की सांस ली , लेकिन अंग्रेजो के अंदर चंद्रशेखर आजाद का भय इतना था कि किसी को भी उनके मृत शरीर के पास जाने तक की हिम्मत नहीं थी। उनके मृत शरीर पर भी गोलियाँ चलाई गयी और जब अंग्रेज आश्वस्त हुये तब आजाद की मृत्यु की पुष्टि हुई। यह आज भी कयी किताबों में लिखा है कि आजाद की मुखबिरी एक बड़े नेता ने की थी और यह राज आज भी भारत सरकार के पास सुरक्षित फाइलों में दफन है।

चंद्रशेखर आजाद का परिचय
चंद्रशेखर आज़ाद का पूरा नाम चंद्रशेखर तिवारी था, इनका नाम 23 जुलाई, 1906 को उत्‍तर प्रदेश के उन्‍नाव जिले के बदरका गांव में 1906 में हुआ था लेकिन इनका पूरा बचपन एमपी में बीता। 1922 में चंद्रशेखर की मुलाकात राम प्रसाद बिस्मिल से हुई और चंद्रशेखर क्रांतिकारी बन गये। चंद्रशेखर आजाद ने हिंदुस्तान रिपब्लिकन क्रांतिकारी दल का पुनर्गठन किया और भगवतीचरण वोहरा, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु आदि के साथ अंग्रेजी हुकूमत में दहशत फैला दी। आजाद के नाम से अंग्रेजी हुकूमत में इतनी दहशत थी कि पुलिस की एक्का दुक्का टुकड़ी सूचना मिलने के बाद छापेमारी में भी दहशत खाती थी। 17 जनवरी 1931 को आजाद पर इनाम की घोषणा कर दी गयी। 27 फरवरी 1931 को वह इलाहाबाद में अंग्रेजों के साथ मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

साथियों से क्या कहते थे आजाद
 "गिरफ़्तार होकर अदालत में हाथ बांध बंदरिया का नाच मुझे नहीं नाचना है। मेरी पिस्तौल में आठ गोली हैं और आठ की दूसरी मैगजीन भी है। पन्द्रह दुश्मन पर चलाऊंगा और सोलहवीं खुद पर !" "लेकिन जीते जी अंग्रेजों के हाथ नहीं आउंगा। जिंदा रहते हुये अंग्रेज मुझे हाथ भी नहीं लगा पायेंगे आजाद हूं और आजाद रहूंगा "- चंद्रशेखर आज़ाद !

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

NamasteTrump : 'नमस्ते ट्रंप'

'नमस्ते ट्रंप'   NamasteTrump 



US राष्ट्रपति ने किया पाकिस्तान का जिक्र, अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत आने के लिए ट्रंप का आभार जताया. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने भाषण दिया. ट्रंप ने अपने संबोधन में पाकिस्तान और आतंकवाद का भी जिक्र किया.
Edited by: राहुल सिंह, Updated: 24 फ़रवरी, 2020

खास बातें
दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं डोनाल्ड ट्रंप
मोटेरा स्टेडियम में किया गया 'नमस्ते ट्रंप' का आयोजन
ट्रंप ने भाषण में किया पाकिस्तान और आतंकवाद का जिक्र

अहमदाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच चुके हैं. उनके साथ उनका परिवार भी है. अहमदाबाद एयरपोर्ट पर पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बेहद गर्मजोशी से ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप (Melania Trump) का स्वागत किया. एयरपोर्ट से उनका काफिला सीधे साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) पहुंचा. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति और पीएम मोदी मोटेरा स्टेडियम (Motera Stadium) पहुंचे. दुनिया के सबसे बड़े इस क्रिकेट स्टेडियम में ही 'नमस्ते ट्रंप' (Namaste Trump) कार्यक्रम का आयोजन किया गया. वहां करीब एक लाख लोग उन्हें सुनने पहुंचे. सबसे पहले पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित किया. अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने भारत आने के लिए ट्रंप का आभार जताया. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने भाषण दिया. ट्रंप ने अपनी स्पीच में पाकिस्तान और आतंकवाद का भी जिक्र किया.
डोनाल्ड ट्रंप ने 'नमस्ते' कहते हुए अपना भाषण शुरू किया. उन्होंने कहा, 'यहां होना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात है. अमेरिका हमेशा भारत का एक वफादार ओर निष्ठावान मित्र रहा है और हमेशा रहेगा. भव्य स्वागत के लिए भारत का शुक्रिया. अमेरिका भारत से प्यार करता है और इतने बड़े लोकतंत्रिक देश का सम्मान करता है. भारत आना मेरे लिए सौभाग्य है. ये मेरे लिए बहुत बडे़ सम्मान की बात है. सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में ऐसे स्वागत के लिए अभिभूत हूं. 1.25 लाख लोगों का इस स्वागत के लिए धन्यवाद.'


अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, 'भारत और अमेरिका, दोनों ही आतंकवाद से पीड़ित हैं. कट्टर इस्लामी आतंकवाद से निपटने में भारत-अमेरिका हमेशा साथ रहेंगे. भारत और अमेरिका आतंकवाद के खात्मे के लिए एक साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम आतंकवाद की विचारधारा से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मेरी सरकार सकारात्मक रूप से पाकिस्तान के साथ आतंकियों और आतंकी संगठनों, जो बॉर्डर से ऑपरेट होते हैं, के खात्मे को लेकर काम कर रही है. मैं पाकिस्तान के समक्ष उसकी धरती से आतंकवाद के संचालित होने का मुद्दा भी उठाऊंगा.'


उन्होंने आगे कहा, 'अगले 10 साल में भारत से गरीबी हट जाएगी. भारत की तरक्की हर देश के लिए एक मिसाल है. यह स्वामी विवेकानंद का देश है. भारत में हर नागरिक के हक का सम्मान है. पीएम मोदी एक अद्भुत नेता हैं, वह भारत के लिए दिन-रात काम करते हैं. इस देश में हर साल दो हजार फिल्में बनाई जाती हैं. दुनियाभर में भारत का संगीत सुना जाता है. यहां अलग-अलग धर्म के लोग साथ मिलकर रहते हैं. सभी मिलकर प्रार्थना करते हैं. यह सभी चीजें मिलकर एक महान भारत बनाती हैं.'

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली का भी नाम लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने सोमवार को हिंदी में दो ट्वीट भी किए. भारत पहुंचने से पहले अपने पहले ट्वीट में ट्रंप लिखा, 'हम भारत आने के लिए तत्पर हैं. हम रास्ते में हैं, कुछ ही घंटों में हम सबसे मिलेंगे!' एक अन्य ट्वीट में 'नमस्ते ट्रंप' का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'प्रथम महिला और मैं इस देश के हर नागरिक को एक सन्देश देने के लिए दुनिया का 8000 मील का चक्कर लगा कर यहां आये हैं. अमेरिका भारत को प्रेम करता है. अमेरिका भारत का सम्मान करता है और अमरीका के लोग हमेशा भारत के लोगों के सच्चे और निष्ठावान दोस्त रहेंगे.'

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भारत आने से पहले दिखा डोनाल्ड ट्रंप का हिंदी प्रेम, 'हम रास्ते में हैं, कुछ घंटों में सबसे मिलेंगे'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत आने से पहले हिंदी में ट्वीट किया है. ट्रंप का भारत दौरा खास बनाने के लिए अहमदाबाद को सजाया गया है.

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शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

देश का बुरा करने वालों से सावधान रहनें की आज जरूरत ज्यादा हो गई - सिसोदिया

देश का बुरा करने वालों से सावधान रहनें की आज जरूरत ज्यादा हो गई - सिसोदिया



सीएए से किसी भी भारतीय नागरिक को नुकसान नहीं पहुंच रहा, बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांगलादेश में, अल्पसंख्यों पर जो अत्याचार हो रहे हैं, उस पर पूरे विश्व का ध्यान केन्द्रित हुआ है। मगर जिस तरह के झूठ को फैला कर धार्मिक अराजकता कांग्रेस उत्पन्न करना चाहती है, उसके खिलाफ देश के मूल स्वामी हिन्दू को भी जाग्रत प्रतिकार करना पढेगा - अरविन्द सिसौदिया

सीएए के पक्ष में जनजागरण करने का संकल्प लिया
सोगरिया में आयोजित हुआ सुभाष जयंती पर व्याख्यान
देश का बुरा करने वालों से सावधान रहनें की आज जरूरत ज्यादा हो गई - सिसोदिया
मोदी सरकार ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस से जुड़ी गोपनीय फाईलों को सार्वजनिक करनें का बड़ा काम किया - सिसौदिया

   कोटा 24 जनवरी । भाजपा शहर जिला कोटा के आव्हान पर भाजपा बोरखेडा मण्डल में सोगरिया नई बस्ती में चैथमाता मंदिर परिसर में गुरूवार रात्रि 8 बजे से नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की जयंती पर व्याख्यान हुआ,जिसमें मुख्य अतिथि एवं मुख्यवक्ता भाजपा जिला महामंत्री अरविन्द सिसौदिया थे। कार्यक्रम संयोजक पंकज वात्स्य ने स्वागत सम्बोधन किया एवं धन्यवाद दिग्विजय सिंह दिया । कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपानेता मायाराम स्वामी एवं सुरेन्द्र सिंह राणावत सहित लल्लन शर्मा,नरेश नागर, रवि शर्मा, राजकुमार वर्मा, घनश्याम पांचाल आदि ने भी संझिप्त संबोधन दिये। कार्यक्रम में नेताजी के आनलाईन भाषण एवं तत्कानील गीत को सुनवाया गया। देर रात्रि तक कार्यक्रम चलता रहा । कार्यक्रम के अंत में सभी मौजूद लोगों ने सीएए के पक्ष में व्यापक जनजागरण कर कांग्रेस द्वारा चलाये जा रहे झूठ के कुचक्र से आमजन को अवगत करवाये जानें का संकल्प लिया एवं 25 जनवरी शनीवार अपराहन 3 बजे जवाहरलाल नेहरू विद्यालय कोटा जंक्शन से प्रारम्भ हो कर बजरिया में निकलनें वाली सीएए के पक्ष में विशाल रैली में भाग लेनें का आव्हान किया।
    मुख्यअतिथि के रूप में बोलते हुये भाजपा महामंत्री सिसौदिया ने कहा “ नेताजी सुभाषचन्द्र बोस भारत की प्रथम स्वतंत्र सरकार के प्रधान थे, उनकी आजाद हिन्द सरकार ने आजाद भारत की पहली मुद्रा, पहला राष्ट्रगान, पहला राष्ट्रीय ध्वज देश को दिये थे। मगर इसे बहुत ही सफाई से देश के इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से साफ कर दिया गया।“
  उन्होने कहा कि “ कांग्रेस राज में नेताजी से जुडी फाइलें तक गोपनीय रहीं, आजाद हिन्द फौज के सैनिकों को न तो सेना में शामिल किया गया न सम्मान दिया गया। जबकि पाकिस्तान में आजाद हिन्द फौज के सैनिकों को सेना में सम्मिलित किया गया। आजाद हिन्द फौज का खजाना भी रहस्य बना हुआ है। आजाद हिन्द फौज के संघर्ष और शौर्य पर बडे अनुसंधान और इतिहास में स्थान दिये जानें की आवश्यकता है।”
    सीसौदिया ने कहा “ भाजपा की मोदी सरकार ने ही नेताजी सुभाषचन्द्र बोस से जुडी फाइलों को सार्वजनिक किया और आजाद हिन्द फौज के सैनिकों सहित सैनिकों के शौर्य को निरंतर याद रखे जानें हेतु बार म्युजियम बनानें का काम किया।“ उन्होने कहा “ कांग्रेस की सरकारों ने एक परिवार को महान बनानें के लिये लाखों देशभक्तों के बलिदान और योगदान को छुपानें और अत्यंत सूक्ष्म करनें की कोशिश का अपराध किया है। ”
    सीसौदिया ने कहा “ नेताजी बोस में राजनीति की सर्वश्रेष्ठ समझ थी। विदेश की धरती पर जा कर देश के लिये लड़ने वाली सेना तैयार करना और सर्वशक्तिमान देशों के गुट को पराजित करते हुये स्वतंत्र भारत की पहली आजाद हिन्द सरकार बना लेना एक आश्चर्य से कम नहीं था। उनके महान शौर्य और परिणामों की व्यापक चर्चा आवश्यक है। जिसे जान बूझ कर कांग्रेस और साम्यवादियों ने छुपाये रखा। ”

  सीसौदिया ने कहा “ जब देश की आजादी का संघर्ष चल रहा था तब भी देश का बुरा करने वाले हमारे बीच मौजूद थे और उन्होने देश का विभाजन स्विकार कर बुरा किया भी । आज भी वे वोट बैंक की राजनीति के लिये अनापसनाप झूठ बोल कर देश में आराजकता उत्पन्न करवानें में लगे हुये है। सीएए एक भी भारतीय नागरिक के खिलाफ नहीं हे। मगर झूठ का वातावरण इस तरह का बनाया जा रहा है कि मानों कोई बहुत बडा अत्याचार हो रहा हे। इस झूठ को पूरी तरह से साफ करने और झूठ फैलानें वालों के चेहरे बेनकाव करने में सभी देश भक्तों को जुटना होगा।

भवदीय
अरविन्द सिसौदिया,
जिला महामंत्री, कोटा,
9414180151