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भारत बंद नही,प्रचंड महाबंद....!

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कांग्रेस का हाथ गरीव कि गर्दन  पर ...!! दलगत राजनीती से उपर उठें मंहगाई के मुद्दे पर !!! सरकारी मानसिकता काली इमरजेंसी कि और ...!!!! - अरविन्द सीसोदिया ५ जुलाई का भारत बंद सिर्फ ओपचारिकता नही थी बल्कि इसमें जनता कि भागेदारी  ने इसे महाबंद बना दिया .कम से कम २१वी सदी में इतना सफल बंद कभी नही रहा . मिडिया के  कुछ बन्धु दबे  स्वर और कुछ मुखर हो कर समाचार कि सत्यता के साथ खड़े हुये हैं.  यह सही है कि १९७४/७५ में तत्कालीन प्रधान मंत्री  इंदिरा गाँधी के विरोध  जयप्रकाश नारायण के नेत्रत्व में समग्र क्रांति के उस आन्दोलन कि याद इस महाबंद ने ताजा करदी हैं.    आज सवाल यह नही है कि बंद किसने आयोजित किया है,सवाल यह है कि बंद के प्लेटफोर्म पर आम व्यक्ति कि उपस्थिति हुई.घर से निकल कर आम आदमी सडक पर आया . क्यों को आम आदमी के मान में भी सवाल यह है कि क्या यह मन्हगाई बडाई जानी जरुरी थी? यदि आम आदमी को यह मन्हगाई वाजिव लगती तो इस  बंद का भी वही हाल होता जो पहले अन्य बन्दों के हुआ करते थे. मागार इस महंगी ने उसकी साँस रोकी है , जीना मुहाल किया है.   बंद कि एक भी तस्वीर ऐसी नही थी जिससे कांग्रेस को