पोस्ट

अगस्त 8, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारत विभाजन से जुड़े गद्दारों की संपत्तियां मुक्त ना हों

चित्र
शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, २०१० पारित कर, भारत सरकार सावित करे की वह पाकिस्तानियों की नहीं है......! - अरविन्द सीसोदिया    लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान, अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में  उपस्थित किए गए  प्रस्ताव शत्रु सम्पत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, 2010 (2010 का सं. 4) को सरकार पारित नही करवाना चाहती . क्यों कि मुस्लिम सांसदों ने  अति  संपन्न पाकिस्तान भागे मुस्लिमों के हितों के लिए  भारी  दवाव बनाया है . सरकार बिना कुछ समझे ही यह ना समझी का कदम उठाने जा रही है . पूर्व में इस तरह की संपत्तियों के मामले में सर्वोच्च  न्यायालय ने कानूनी खामियों के कारण, इन संपत्तियों का निस्तारण   पाकिस्तान भागे मुस्लिमों के भारत में रह रहे वंशज  या अन्य दावेदारों के पक्ष में कर दिए थे . सरकार ने इन संपत्तियों  को पुनः कब्जे  में लेने के लिए उपरोक्त  सन्दर्भ ऐसा अध्यादेश निकला हुआ है,  . यदी यह विधेयक पारित  नहीं किया गया तो ,इस आध्यादेश  का प्रभाव स्वतः ही समाप्त हो जाएगा. हजारों करोड़ की वह सम्पत्ती  जो देश विभाजन के समय पाकिस्तान चले गये शत्रु लोगों की सरकार के पास