पोस्ट

सितंबर 9, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मनमोहन सिंह, प्रधानमन्त्री अवसाद क़ी स्थिती

इमेज
कुछ कर दिखाने का बहुत सीमित समय  - अरविन्द सीसोदिया      हलांकि यह माना जा रहा है क़ी यू पी चुनाव के बाद देश की बागडोर राहुलगांधी संभाल लेंगे..., उनके नेतृत्व में ही अगला चुनाव लड़ा जाएगा, कांग्रेस क़ी सोच एक हद तक सही भी है क़ी प्रधानमंत्री  पद पर रहने के लाभ उठाते हुए ही चुनाव लड़ा जाये...! उसके कई फायदे भी हैं , जो सुरक्षा देते हैं और खर्चा बचाते हैं..!! मनमोहन सिंह निश्चित ही रिटायर्मेंट को कुछ दूर धकेलना चाहेंगे..., यह उन्हें करना भी चाहिए , इसी का नतीजा है क़ी वे कुछ स्वतंत्र विचारों के शक्ती समूह जैसे शरद पंवार , पी चिदम्बरम   और करुनानिधि को अपने पक्ष में कर रहे  है...!        भारत के प्रधानमंत्री ने हाल ही में समाचार पत्रों के संपादकों के एक समूह से बात करते हुए खुद की पीठ थपथपाई है जो कि अनुचित है ...!  क्यों कि वे एक तो पूर्व प्रधानमंत्रीयों  विशेष कर जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी के समक्ष कहीं भी नहीं हैं , दूसरा उनकी सफलता यही है कि वे सोनिया गांधी की गुडबुक में रहनें में अभी तक हैं ...! राजनीति  में इतने  समय तक एक व्यक्ती किसी क़ी गुड बुक में रह जाये यह संभव नही