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देख न लेना नीचे झुक कर; गांधी हिन्दुस्तान को

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- अरविन्द सीसोदिया  देख न लेना नीचे झुक कर; गांधी  हिन्दुस्तान को , फफक - फफक कर रो उठेगो ;  अपने  स्वाभिमान को !  --१-- गांधी तेरी विरासत पर ; नेहरूवंश का कब्जा है,  गांधी तेरी फ़ोटू नीचे ही  ; बट्टा ही बट्टा है , गेहू चावल  दाल ओ घानी ; सब पर सट्टा ही सट्टा है , तू नहीं झुका अंग्रेजों से; पर अब अंग्रेजी का पट्टा है ! --२-- राजनीति के ऊचे हिमालय से ; भ्रष्टाचार क़ी गंगा बहती हैं ,  इसी त्रिवेणी  के संगम में ; सरस्वती भी बैठी है , कहाँ तुम भारत माता को खोजोगे; डिस्को के  वियावान में , वह तो बंद पड़ी है ; संसद के सन्दूकदान में ! --३-- रघुपति राघव राजा राम ; आपका था प्रिय धाम , उन्हें भी बंदी बनाया ; बरसों चला यह अपमान,  प्रातिबंध और आपातकाल ; बने लोकतंत्र का मान, सत्य अहिंसा और धर्म को ; भूल गई तेरी संतान,  --४-- गाँव गरीवी की गर्त में ; गायें क़त्ल खानों में , इलाज हुआ हैवान  यहाँ ; शिक्षा पूंजीवाद के नाम ,  क्या हुआ तेरी वसीयत का..; कहाँ तेरे सपनों की शान..! -------