पोस्ट

दिसंबर 18, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चीन का एक व्यापारी के रूप में भी भारत पर हमला ...

इमेज
- अरविन्द सीसोदिया  काफी समय से चीन बेहद सस्ते भाव में अपने सामान बेचता रहा। इसका असर यह हुआ कि चीनी सामान सारी दुनिया में छा गए। भारत के कोने-कोने में चीनी सामान बिकने लगे। बड़े पैमाने पर स्थानीय  कारखाने एवं लघु उद्योग  बंद हो गए। नेल कटर से लेकर रोशनी के लिए घरों पर लगाई  जानें वाली बिजली की लड़ियों तक , खिलोनों से लेकर इलेक्ट्रोनिक आइटम तक , जड़ी बूटियों से लेकर ओषध निर्माण  तक में चीन ने न केवल भारत बल्कि समूचे विश्व कि एक प्रकार से शिकश्त  दी है | प्रक्षेपास्त्र से लेकर इंटरनेट और सूचना क्षैत्र तक में उसने उन्नति का  एक उदहारण  पेश किया है | जो हमारे देश के राजनैतिज्ञों और नोकरशाही के निकम्मेपन की पोल खोलता है ! राष्ट्र निर्माण के रूपमें चीन ने एक मिशाल कायम कि है जो हम नहीं कर पाए !     कई बड़ी भारतीय कंपनियों ने अपने यहां उत्पादन बंद कर सीधे चीन से सामान मंगाकर अपना ठप्पा लगाकर बेचना शुरू कर दिया। यह उन्हें सस्ता पड़ रहा था और इस तरह से उन्होंने खूब मुनाफा कमाया। यह एक प्रकार का चीन का भारतीय उद्योगों पर हमला है जिसे अभी तक भी अनदेखा किया जा रहा है ! इसके पांच  कारण  हैं :- १