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टूजी घोटाले की महाभारत : कैग, जेपीसी, पीएसी

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- अरविन्द सीसोदिया कुल मिला कर सोनिया - मनमोहन कहते फिर रहे हैं कि उन पर छुपाने के लिए कुछ नहींहै , मगर हम जांच वह नहीं करवाएंगे जो जनता के बीच  तथ्यों  को सही ढंग से रख पाए ..! जहाँ झुपाया जा सके और तथ्यों को दफनाया जा सके जांच वहीं करवाएंगे ? मतलव क्या है ?? देश के मालिक तो सोनिया और मनमोहन हो नहीं गये ..!! जे पी सी भी एक व्यवस्था है .., जब आप चोर नहीं हैं तो डर कैसा ..?        लोक लेखा समिति (पीएसी) के सामने पेश होने की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पेशकश के बाद भाजपा ने अपनी मांग से पीछे नहीं हटते हुए कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच के लिए सरकार को संयुक्त संसदीय समिति का गठन करना चाहिए. पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री अगर पीएसी का सामना करने को तैयार हैं तो फ़िर उन्हें जेपीसी से जांच कराने में क्या एतराज है. अगर जांच की आवश्यकता है तो सरकार द्वारा खुद जज तय करना गलत है.       उन्होंने कहा कि पीएसी की तरह जेपीसी में कांग्रेस के प्रतिनिधि होंगे. ऐसे में विपक्ष की मांग को मानने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. गडकरी ने कहा, संसदीय समिति होने के कारण पीए

संघ ; हिन्दुओं के लिए पोप की तरह पवित्र और आदरणीय

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- अरविन्द सीसोदिया          बुरारी में हुए कांग्रेस के ८३ वें अधिवेशन से बुराई ही बुराई सामनें आई हैं , पूरा अधिवेशन सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं को कोसनें में ही ब्यतीत किया गया ..! यदी इस समय का उपयोग  रचनात्मक  दृष्टिकोण  से किया होता तो देश को भी और कांग्रेस को भी नया रास्ता मिलता ...! मगर अनुभव हीन और निरंतर राजकाज में अनुतीर्ण हो रही कांग्रेस ने पुराना ढर्रा ही सामने रखा , घरमें बुरे दिन हो तो पडौसी से लड़ने लगो ..!        हिन्दू आमतौर पर शांत और अभडकाऊ व्यक्तित्व है , इसी कारण तो :- १- राम राम जाप कर गांधीजी ने हिंदुओंकी दम पर स्वतंत्रता आन्दोलन चलाया और जब जब हिन्दू हित की बात आई कांग्रेस मुकर गई , देश का विभाजन किसने स्वीकार किया ..? ये दुष्कर्म भाजपा ने तो नहीं किया ..! २- हिन्दुओं के  आराध्य श्री राम वर्षों तक तालें में बंद रहे , सिखों के पवित्र धर्म स्थल पर आप टैंक लेकर जा पहुंचे..! श्री लंका में वहां कि सिहल उन्हें वैध्य अधिकार भी नहीं दे रहे , उनके साथ दुर्भाग्यतम नाइंसाफी हो रही है , आप शांती सेना के नाम से उन्हें मारने जा पहुचें...?  इस तरह का व्यवहार और किसी पंथ के खिल