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सुभाष जिनकी मृत्यु भी रहस्यमय है ..

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http://srijanshilpi.com/archives/९५ ' सृजन शिल्पी ' का यह लेख अत्यंत अच्छा है , इसे यथावत यहाँ दिया जाता है .... नेताजी सुभाष : सत्य की अनवरत तलाश Feb 8th, 2007  | विषय-वस्तु : नेताजी का रहस्य, विश्लेषण, समसामयिक  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिन पर प्रकाशित  मेरे लेख  पर पाठकों की व्यापक प्रतिक्रियाएँ आई थीं। आपमें से कई पाठकों ने मुझसे नेताजी से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तार से लिखने का आग्रह किया था। लेकिन विषय अत्यंत संवेदनशील होने के कारण मैं कुछ नए प्रमाणों के उपलब्ध होने का इंतजार कर रहा था, जिसे सूचना के अधिकार के तहत हासिल किए जाने के  प्रयास  चल रहे थे। हालाँकि इन प्रयासों में अभी तक कोई विशेष महत्वपूर्ण सफलता हासिल नहीं हुई है, फिर भी आशा है कि केन्द्रीय सूचना आयोग के  सख्त आदेश  के बाद अगले माह होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को उजागर करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने को बाध्य होगी।  नेताजी के कथित रूप से लापता हो जाने से संबंधित अधिकांश आधिकारिक दस्तावेजों को सरकार ने अब तक अति गोपनीय श्रेणी में रखा है। यहाँ तक कि कोलकाता उच्च न

कालेधन को कांग्रेस का ही अति आशीर्वाद

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- अरविन्द सीसोदिया  देश में काला धन किसका ? विदेश में काला धन किसका ? ?  यह प्रश्न बार बार उठता जरुर है और मगर बड़ी बेसर्मी  के साथ , यह प्रश्न लुप्त  कर दिया जाता है! क्यों कि यह धन उन लोगों का है जो इसे झुपाना चाहते हैं..! सही रास्ते का यह धन है भी नहीं , इस कारण झुपाना चाहते हैं !! मगर यह धन देश के लोगों का तो  है ! सच यह है कि व्यवसाही  वर्ग के काकस  ने लोकतंत्र पर कब्ज़ा कर लिया है ! राजनेताओं के बिकाऊ हो जानें से , लोकतंत्र लूट तंत्र में बदल गया ! कांग्रेस इस परिस्थिति से कैसे बच सकत है ? उसने १९४७ से १९७७ तक लगातार देश पर राज किया है और देश में काले धन का कारोबार इस  दौरान न केवल मजबूत हुआ बल्कि राजनीती पर हावी हो गया ..!! घोटालों  और राजनीति से लाभ बटोरनें का भी यही वह दौर था जिसमें लूट तंत्र की तमाम नींबें मजबूत हुई..? इस दौरान जिस घरानें नें देश पर राज किया वह नेहरु वंश ही था ..? विदेशी काले धन और स्विस बैंकों में धन जमा होने का बड़ा खुलासा भी इसी   वंश  के शासकों के नाम आया ..!! मतलब यह है की लूट तंत्र की सारी की सारी नींव तो कांग्रेस कस शासन काल में ही दली , फली