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देश में अराजकता की स्थिति

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- अरविन्द सीसोदिया    देश में आज आराजकता कि स्थिति नजर आने लगी हर ओर अपराधवाद हावी हो चुका है, नैतिकता और व्यवस्था नाम की चीज बची नहीं है ! देश को संभालने वाले असहाय नजर आरहे हैं ! अव्यवस्थाएं चरम पर हैं .....! आप जिस तरफ नजर दौड़ाएंगे उस तरफ ही अव्यवस्था ही अव्यवस्था नजर आयेगी !! इस घटना के लिए बिना व्यवस्था किये बेरोजगार युवकों को बुलाना ओर फिर बिना निर्णय किये उन्हें लौटना रहा है !        एक बड़ी और दुखद खबर उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर से आ रही है जहां बरेली में आईटीबीपी में भर्ती के लिए आये बेरोजगार युवक ,   घर लौटते हेतु  ट्रेन से सफर कर रहे कई छात्रों की मौत हो गई है। जो खबर मिल रही है उससे पता चल रहा है कि ये सभी छात्र ट्रेन की छत पर बैठे थे, जो कि हाईटेंशन तार की चपेट में आ गये, जिससे उनकी मौत हो गई। हादसे में कई छात्र घायल भी हो गए हैं, घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरने वालों की संख्या के बारे में अभी ठीक से पता नहीं चल पाया है क्योंकि जीआरपी की ओर से कोई बयान नहीं आया है।   एक ओवरब्रिज से टकरा जाने पर हिमगिरि एक्सप्रेस की छत पर सवार १३  युवकों की मौत हो गई, जबक

राष्ट्रद्रोही सफ़ेदपोशों का सच : सुरेश चिपलुकर का आलेख

 अवश्य पढ़ें .... पूरा पढनें के लिए नीचे दी गई वेव साईड को खोलें ...... Sunday 30 January 2011 अज़ीज़ बर्नी की अक्ल ठिकाने लगाने हेतु श्री विनय जोशी को बधाईयाँ… ... Aziz Burney Apologized, Book 26/11 RSS कांस्पिराच्य http://blog.sureshchiplunkar.com/2011/01/aziz-burney-apologized-book-2611-rss.html?utm_source=feedburner&utm_medium=feed&utm_campaign=Feed:+sureshChiplunkar+(%3F%3F%3F%3F%3F%3F+%3F%3F+%3F%3F%3F%3F%3F+%3F%3F%3F%3F%3F%3F%3F%3F+(Suresh+Chiplunkar))          मुम्बई हमले के बाद से लगातार पिछले 2 साल से राष्ट्रीय सहारा (उर्दू) के सम्पादक अज़ीज़ बर्नी ने 100 से अधिक लेख एवं एक पुस्तक “26/11, RSS Conspiracy” नाम की बेहूदा और देशद्रोही पुस्तक लिखकर न सिर्फ़ देश को अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर शर्मिन्दा किया बल्कि RSS एवं हिन्दुओं के खिलाफ़ सतत जहर उगलते रहे। इनकी हाँ में हाँ मिलाने व पिछलग्गूपन को मात करते हुए दिग्विजय सिंह भी इसकी पुस्तकों के विमोचन समारोहों में जाते रहे, संघ को गरियाते रहे।           अब राष्ट्रीय सहारा ने अज़ीज़ बर्नी का खेद व माफ़ीनामा प्रकाशित