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दीनदयाल उपाध्याय,एक रहस्यमय राजनैतिक हत्या

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- अरविन्द सीसोदिया         ११ फरवरी १९६८ के दिन एक विस्मयकारी खबर आई कि भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनदयाल उपाध्याय का मृत शव मुगलसराय रेवे स्टेशन के निकट मिला है | स्तब्ध कर देने बाले इस समाचार के साथ कई प्रश्न उभर कर देश के सामने खड़े हुए ..! उनकी यह दुर्घटनात्म मृत्यु कैसे हुई और किननें की.....????? यह एक अनुतरित सवाल निरंतर बना हुआ है? इससे पूर्व में भी भारतीय जनसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष डा. श्यामाप्रशाद मुखर्जी की जम्मू - कश्मीर की जेल में रहस्यमय मृत्यु  हुई थी !  याद रहे कि १९६७ में कांग्रेस को पहलीवार देश में बड़ी शिकस्त गैर कांग्रेसी दलों नें भारतीय जनसंघ की अगुवाई में दी थी बहुत से प्रान्तों में गैर कांग्रेसी सरकारों का गठन हुआ था , केंद्र में भी बहुत ही कम मार्जिन से कांग्रेस सरकार बनीं थी ! इसके बाद हुई उनकी रहस्यमय मृत्यु को देश एक राजनैतिक हत्या के रूप में देखता है ..!   भारत के पूर्व उपप्रधान मंत्री लाल कृष्ण अडवाणी ने अपने ब्लाग पर लिखा है ......  भारतीय विचारधारा के महामनीषी......            पंडित दीनदयाल उपाध्याय 1953 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के नेता रहे। वे ए

Pandit Deendayal Upadhyaya : ' A Rashtra Dharmaa'

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http://deendayalupadhyaya.org/about_pandit.html A SHORT BIOGRAPHY  Pandit Deendayal Upadhyaya   was born on Monday September 25, 1916, (Ashwin Krishna Trayodashi, Samvat 1973) in the Dhankya , jaipur District { Rajsthan }  पंडित दीनदयाल उपाध्याय का पैतृक गांव नंगला - चन्द्रभान, मथुरा जिले में है, उनके दादाजी वहां के सुप्रसिद्ध ज्योतिषी पं. हरीरामजी शास्त्री थे,  पिता श्री भगवती प्रसाद उपाध्याय, रेल्वे स्टेशन मास्टर, जलेसर रोड़, उ.प्र. और माता श्रीमती रामप्यारी देवी थीं। उनकी प्रथम संतान दीनदयाल एवं द्वितीय संतान शिवदयाल जी थे।  दीनदयाल जी की माता श्रीमती रामप्यारी देवी श्री चुन्नीलाल शुक्ल, स्टेशन मास्टर धानकिया रेल्वे स्टेशन, जयपुर- अजमेर रेल मार्ग, जयपुर की पुत्री थीं, दीनदयाल जी का जन्म भी नानाजी के यहां धानकिया जिला जयपुर, राजस्थान में ही, 25 सितम्बर 1916 में हुआ था। जब वे मात्र 3 वर्ष के थे तब पिताजी का तथा 8 वर्ष के थे तब माताजी का एवं जब वे 16 वर्ष के थे तब छोटे भाई का निधन हो गया।  उनका लालन-पालन नाना- मामा के पास ही हुआ। मामा राधारमण शुक्ल रेल्वें में गंगापुर सिट

एकात्म मानववाद : भारतीय संस्कृति एकात्म है

 अरविन्द सीसोदिया एकात्म मानववाद: भारतीय समाज व्यवस्था का मूलभूत अध्ययन  भारतीय जनता पार्टी का दर्शन, एकात्म मानववाद पहली बार पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा मुम्बई में 22 से 25 अप्रैल, 1965 को चार व्याख्यानों के रूप में प्रस्तुत किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर, 1916 को उत्तरप्रदेश के मथुरा जिले में नंगला चन्द्रभान गांव में हुआ था। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए अजमेर से उत्तीर्ण की एवं दो स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उन्होंने पुन: इन्टर की परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करते हुए दो स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उन्होंने अंकगणित में प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पंडित जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1937 में शामिल होने वाले पहले कुछ स्वयंसेवकों में से तथा अन्तत: संयुक्त प्रान्तीय प्रचारक बने। वे जनसंघ में 1952 में सम्मिलित हुए एवं 1967 में पार्टी का अध्यक्ष बनने तक महासचिव के पद पर नियुक्त रहे। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के पश्चात् उन्होंने पार्टी के निर्माण की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली एवं इस कार्य में शानदा