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मार्च 4, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

20 साल पहले : 2.5 Billions Swiss Francs in Rajiv Ji's account | 19 Nov 1991

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रंगरंगीला परजातंतर 2.5 Billions Swiss Francs in Rajiv Ji's account | 19 Nov 1991 http://www.facebook.com/photo.php?fbid=157835170937109&set=at.108255112561782.22908.107805679273392.100000510523662.100000485228885.100001803484335.706920839&theater हमेशा गाँधी परिवार पर आरोप लगते रहे है की इस परिवार का बहुत सा काला धन स्विस बैंक तथा अन्य कई बैंकों में में जमा है, इसी सन्दर्भ में स्विट्ज़रलैंड की एक नामी पत्रिका ने 19 नवम्बर 1991 में उन तानाशाह और राजनेताओं के नाम उजागर किये थे जिनका काला धन स्विस बैंक में जमा है | (नीचे फोटो ) इस पत्रिका ने गाँधी परिवार के बड़े पुत्र और भारत के पूर्व युवा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का फोटो सहित विवरण छापा, इस पत्रिका के अनुसार 1991 में कांग्रेस पार्टी के नेता राजीव गाँधी के स्विस बैंक में 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक जमा थे यदि रुपए में बदले तो यह राशि 2500000000 × 48 रुपए (आज की स्विस फ्रैंक की स्थिति के अनुसार) होगी | अब सोचने वाली बात ये है की 20 साल पहले गाँधी परिवार का सिर्फ एक खाते में 2.5 बिलियन जमा था, ये तब की बात है जब भारत की

" भारत में भय हो... , स्विस बैंकों की जय हो... "

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- अरविन्द सिसोदिया   हमारे देश में कई तरह के नारे चुनावों के दौरान लगते हैं , हाल ही में चुनाव आयोग नें पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है ..! पिछले चुनाव में कांग्रेस ने एक नारा लगाया था "जय हो !" तब भाजपा ने भी एक नारा दिया था "भय हो !" अब इस नारे का मतलब तो मेरी समझ में यह आरहा है की .. " भारत में भय हो... , स्विस बैंकों की जय हो... " क्यों की भारत में तो भयानक   भ्रष्टाचार की लूट  मची है, लूट की रकम में कितनी बिंदियाँ लगी हैं यह भी ठीक से कहना मुस्किल होता है ..! इस तरह की लूट ईस्ट इण्डिया कंपनी ने भी क्या की होगी ..! हर लूट पर स्विस बैंक  खुश होते हैं .., उन्हें मालूम है की यह पैसा उनके यहाँ या उन जैसे ही किसी दुसरे देश में जमा होने वाला है ..!    भारत में भय इस लिए व्याप्त है की रोज रोज मंहगाई बढती है , बेरोएजगार रेलों से गिर कर मर रहे हैं , किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं ..!! - ----------- http://www.dw-world.de/dw/article/0,,14774034,00.html 19.01.2011 विकीलीक्स की सूची में भारतीयों जैसे नाम एक टेलीविजन चैनल ने दावा किया है

भारत सरकार मेरी जेब में- हसन अली खान : Who is Hassan Ali Khan ?

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- अरविन्द सिसोदिया   जिस तरह से विहल होकर सर्वोच्च न्यायलय ने काले धन के महा माफिया कहे जा रहे, घो़डा व्यापारी हसन अली खान और अन्य कथित दोषियों को हिरासत में लेकर पूछताछ क्यों नहीं करनें पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है , उससे तो लगता है कि यह  हसन अली खान साहब सिगरेट पीते हुए; काश छोडनें के साथ जैसे कह रहे हों कि भारत सर्कार मेरी जेब में है ..!          सर्वोच्च अदालत ने काला धन जमा करने वालों के खिलाफ ठोस कदम उठाने में विफल रहने पर सरकार को क़डी फटकार लगाई और पूछा कि घो़डा व्यापारी हसन अली खान और अन्य कथित दोषियों को हिरासत में लेकर पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है, जबकि जांच एजेंसियों के पास इस मामले में पर्याप्त सबूत हैं। कोर्ट ने इसी के साथ ही पुणे के व्यवसायी हसन अली खान के विदेशी मुद्रा के उल्लंघन के मामले में जांच के बीच ही हटाए गए तीन प्रवर्तन अधिकारियों का तबादला निरस्त कर बहाल करने का आदेश दिया।      जस्टिस सुदर्शन रेड्डी और एसएस निज्जर की बेंच ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार कोई कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो वह दोषियों के खिलाफ जांच की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी

थामस की नियुक्ती रद्द : क्या जबाव है प्रधानमंत्रीजी और गृहमंत्रीजी ...

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- अरविन्द सिसोदिया      नया केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त आना तय ...       दिनांक ३ मार्च २०११ , आज सर्वोच्च न्यायलय ने केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त पी जे थामस की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है..! वहीं केंद्र सरकार ने जल्द ही नए केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त के चयन की बात कही है ! वहीं मिडिया में यह भी संभावना आई है की ..,सीवीसी अधिनियम, 2003 की धारा 10 (1) के अध्याय तीन के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के निधन, इस्तीफे या अन्य किसी कारण से पद खाली होने की स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी करके केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के तौर पर किसी सतर्कता आयुक्त को अधिकृत किया जा सकता है जब तक खाली पद पर नए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति नहीं हो जाती। सर्वोच्च न्यायलय का आदेश केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त पी जे थामस की बर्खास्तगी           लेकिन थॉमस के वकील विल्स मैथ्यूज ने कहा कि उन्होंने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि यह गलत है। थॉमस ने इस्तीफा नहीं दिया है। हमें फैसले की प्रति तक नहीं मिली है। हम फैसले को देखेंगे और गहराई से इसका अध्ययन करेंगे। उसके बाद हम भविष्य की कार्रवाई के बारे