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कांग्रेस की साम्प्रदायिकता : हसन अली आजाद है .., प्रज्ञा ठाकुर जेल में है ..?

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- अरविन्द सिसोदिया    भारत देश में क्या हो रहा है ...? सरकारी विभाग और जांच एजेंसियां किस तरह से काम  कर रहीं है .., कांग्रेस किस हद तक साम्प्रदायिकता  पर उतारू है ....! किस बेरहमी से देश में राष्ट्रिय एकता को कांग्रेस सरकारों द्वारा तोडा जा रहा है ...? केन्द्रीय और राज्य स्तरीय पुलिस तंत्र का खुल्लम खुल्ला दुरूपयोग होते देख कर भी विवस विपक्ष पर भी दया आती है ..? उनकी योग्यता और क्षमता पर भी दया आरही है ..! इतनी   कायरता  कभी भी जांच एजेंसियों और सरकारी कर्मचारियों से नहीं देखी गई थी..? सत्ता  पक्ष के लिए कठ पुतली  बनने  और गुलामों की तरह हुकम बजानें से कहीं डूब मरना बेहतर होता है ...! न्यायलय किसा तरह   न्याय  की रक्षा कर सकता है जब उसके हाथ - पाँव , नाक - कान और आँख कही जाने वाली जांच एजेंसियां और सरकारी विभाग ही अन्याय और अधर्म के साथ खड़े हो जाएँ ...! दो उदहारण  देखिये "हसन अली के संबंध हथियारों के अंतरराष्ट्रीय सरगना अदनान खगोशी से होनें की बात आ चुकी है .., मगर उस पर मकोका नहीं लगेगा .., क्यों की वह मुस्लमान है और सरकार उसे बचाना चाहती है ...! वह आजाद घूमेगा .., क्यों की उस

जापान : वक़्त की सुनामी

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- अरविन्द सिसोदिया जापान में सुनामी में बहुत ही बड़ा कहर ढाया है , हजारों लोग काल के गाल में समा गए हैं , बेघर और घायलों ही की संख्या असंख्य है....दुःख और पीड़ा की इस घड़ी में हम क्या कर सकते हैं ..? हम ईश्वर से प्रार्थना करें उनके दुखों का शीघ्र अंत हो और वे पुनः अपना सुखी जीवन प्रारंभ कर सकें ..! प्रार्थना में बहुत दम होती है ..! * १९६५ की मशहूर फिल्म फिल्म - वक़्त गीत - साहिर   आवाज - मोहम्मद रफी  संगीतकार - रवि http://www.lyricsindia.net/songs/show/2454 वक़्त से दिन और रात वक़्त से कल और आज वक़्त की हर शह ग़ुलाम वक़्त का हर शह पे राज वक़्त की पाबन्द हैं आते जाते रौनके वक़्त है फूलों की सेज वक़्त है काँटों का ताज वक़्त से दिन और रात ... आदमी को चाहिये वक़्त से डर कर रहे कौन जाने किस घड़ी वक़्त का बदले मिजाज़ वक़्त से दिन और रात ... ----- vaqt se din aur raat vaqt se kal aur aaj vaqt kii har shah Gulaam vaqt kaa har shah pe raaj vaqt kii paaband hai.n aate jaate raunake vaqt hai phuulo.n kii sej vaqt hai kaa.NTo.n kaa taaj vaqt se din aur raat ... aadamii ko chaahiye