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परमपूज्य डॉक्टर हेडगेवार : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रणेता

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- हरिकिशन पुरोहित (फलोदी से हैं , जोधपुर में रहते हैं ) ( पुरोहित ने यह लेख facebook पर डाला हुआ है , मेंने यह उठा कर यहाँ आप सब के लिए प्रस्तुत भर कर दिया है | )       आन्ध्र प्रदेश के कन्द्कुर्ती गाँव में हेडगेवार परिवार रहता था। उसकी एक शाखा महाराष्ट्र के नागपुर में आ गयी थी। इसी शाखा के एक कर्मनिष्ठ और परोपकारी व्यक्ति, बलिराम हेडगेवार और उनकी सहृदय पत्नी, रेवती सुशीला के यहाँ केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म हुआ। इनका जन्म एक अप्रैल, 1889 को गुढी पाडवा पर्व के दिन हुआ। गुढ़ी पाड़वा का अर्थ है—ध्वजारोहण करना। इस दिन सभी लोग अपने घरों पर झंडा फहराते हैं एवं द्वारों पर तोरणादि बांधकर उल्लास प्रदर्शित करते हैं। यह दिन बड़ा शुभ माना जाता है। शुभ दिवस और पुत्र जन्म से हेडगेवार परिवार में दोहरा हर्ष छा गया। लोग बालक को बड़ा पराक्रमी एवं भाग्यशाली मान रहे थे। दरअसल गुढ़ी-पाड़वा दिवस का इतिहास ही पराक्रम एवं विजय से परिपूर्ण रहा है। हजारों वर्ष पूर्व आज ही के दिन लंका विजय के बाद भगवान राम ने अयोध्या में प्रवेश किया था और इसी दिन राजा शालिवाहन ने मिट्टी के घुड़सवारों में प्राण फूंककर

विक्रम संवत के प्रवर्तक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य

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सन् 2016 में नव संवतसर 08 अप्रैल  को विक्रम 2073  विक्रम संवत के प्रवर्तक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य  - अरविन्द सिसोदिया यो रुमदेशधिपति शकेश्वरं जित्वा गृहीत्वोज्जयिनी महाहवे | आनीय संभ्राम्य मुमोचयत्यहो स विक्रमार्कः समस हयाचिक्र्मः|| (- 'ज्योतिविर्दाभरण ' नमक ज्योतिष ग्रन्थ २२/ १७ से .......)     यह श्लोक स्पष्टतः यह बता  रहा है कि रुमदेशधिपति .. रोम देश के स्वामी शकराज ( विदेशी राजाओं को तत्कालीन भाषा में शक ही कहते थे , तब शकों के आक्रमण से भारत त्रस्त था ) को पराजित करके विक्रमादित्य ने बंदी बना लिया और उसे उज्जैनी नगर में घुमा कर छोड़ दिया था | यही वह शौर्य है जो पाश्चात्य देशों के ईसाई वर्चस्व वाले इतिहास करों को असहज कर देता है और इससे बच निकालनें के लिए वे एक ही शब्द का उपयोग करते हैं 'यह मिथक है '/ 'यह सही नहीं है'...| उनके साम्राज्य में पूछे भी कौन कि हमारी सही  बातें गलत हैं तो आपकी बातें सही कैसे हैं ..? यही कारण है कि आज जो इतिहास हमारे सामनें है वह भ्रामक और झूठा होनें के साथ साथ योजना पूर्वक कमजोर किया गया इतिहास है | पाश्चत्