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भ्रष्टाचार मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है ....

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- अरविन्द सिसोदिया     एक तरफ तो अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा जनता के बिच सार्वजानिक करने का दौर चल रहा है .. दूसरी तरफ बालाकृष्णन जैसे लोग .. जो सर्वोच्च न्यायलय के सर्वे सर्व रहे हों ...? अभी अभी हटे सतर्कता आयुक्त थामस साहब जो पोमा आयल में भ्रष्टाचार के लिए नाम जद थे ..! ए राजा जो केन्द्रीय मंत्री थे ... सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस की प्रमुख टीम में सचिव थे संसद हैं .., नाम जितने आरोप उतनें.., जैसे ही लोग तो शिखर पर हैं .. , उनमें से ही एक लोकपाल होगा तब अन्ना क्या करेंगें ...!!  खबर है तिरुवनंतपुरम से ....... देश के  वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष  एवं  पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने अपनी संपत्ति के खुलासे से इंकार किया है। उनका कहना है कि ये उनकी निजता का हनन है। साथ ही उन्होने आयकर विभाग को ये सूचना भी भेजी है कि वह अपनी संपत्ति का खुलासा इसलिए नहीं करना चाहते क्योंकि ये किसी भी प्रकार से जनकल्याण के मुद्दे से जुड़ी नहीं है। उल्लेखनीय है कि अत्याधिक दबाव के बाद बालकृष्णन पिछले महीने अपनी संपत्ति के खुलासे के लिए तैयार हुए थे।  मालूम हो कि जब पिछले साल न्यायाधी

मझधार जीवन है ..,

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- अरविन्द सिसोदिया ,  कोटा , राजस्थान | एक कविता  किनारा वह नीरस है .., जो सारी हलचल देख कर भी कुछ नहीं कर पाया..! ठगा सा देखता रहता है .., अलसाया , उनिंदासा..,   समय के धारों की उत्ताम निनाद  को ..;   मझधार वह जीवन है .., जिसे निरंतर झंझावत के साथ बहते  रहना है ..!! जीवन का रस यही है कि.., तूफ़ान कि गती पैरों में लिए ..,  बड़ते रहो बड़ते रहो ..!! न थका वह सूरज कभी.., न थका वह चाँद  कभी.., जो थक गया वह अस्तित्व में है नहीं ..!! चरैवेती - चरैवेती - चरैवेती ..!!!  यही जीवन का सच है ...!