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संविधान के पुनर्लेखन की जरूरत

- अरविन्द सिसोदिया        यह सही है की जब भारत का संविधान बना तब , भारत पर अंग्रेजों का अत्यधिक प्रभाव था , जवाहरलाल नेहरु परोक्ष गुलामी के दस्ताबेज कामनवेल्थ पर दस्तखत करके , ब्रिटेन की महारानी और अंग्रेजी ताज के प्रति प्रतिवद्धता संधि कर चुके थे ! अंगेजो और नेहरूजी की सांठ - गांठ से बना संविधान देश पर तब  लागू हुआ | उसमें आज तक लगभग १०० से अधिक संशोधन हो चुके हैं | इसे भारतीय स्थिति के प्रतिकूल ; संघ के पूर्व सरसंघ चालक सम्मानीय  सुदर्शन जी ने भी ठहराया था, भारतीय स्थिति,देशहित और  वास्तविक लोकतंत्र के लिए संविधान को नए सिरे से लिखे जाने की जरूरत बताया था | इसलिए डॉ. मुरली मनोहर जोशी के वक्तव्य का स्वागत किया जाना चाहिए |  *  लोक लेखा समिति के अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने बदलते समय और राष्ट्रीय भावना की मांग के अनुसार भारतीय संविधान के पुनर्लेखन की जरूरत पर जोर दिया है। लागू संविधान को ब्रितानी हुकूमत के नियमों का रूपांतर करार देते हुए भाजपा नेता ने प्रकारांतर से इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस की शुरूआत की। उनका कहना था कि यह संविधान भारत की मनीषा से न