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योजना आयोग का गरीब बनाने का अभियान

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- अरविन्द सीसौदिया जानकारी में आया है कि योजना आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि जिसकी खर्च क्षमता शहरी क्षैत्र में 20  रूपये  है और ग्रामीण क्षैत्र में 15 रूपये है। उसे गरीब नहीं माना जा सकता। यह इस देश के गरीब का मजाक उडाया जाना मात्र नहीं है। बल्कि उसे गरीब बना कर फिर इसाई मिशनरियों की दया से उपकृत कर इसाई में धर्मांतरित करने की दीर्घगामी योजना अधिक  प्रतीत   होती है। जिस पर कांग्रेस नेतृत्व सरकार चल रही हे। -------- अनिल जैन http://hindi.webdunia.com जिस तरह भारत कृषि प्रधान देश है, उसी तरह गरीबी प्रधान देश भी है यानी भारत की बहुसंख्य आबादी गरीब है। इस जगजाहिर हकीकत के बावजूद किसी को यह ठीक-ठीक मालूम ही नहीं है कि गरीबी का यह हिंद महासागर कितना विशाल है यानी देश में गरीब आबादी का वास्तविक आँकड़ा क्या है। देश और समाज की जमीनी हकीकत से हमारे नीति-नियामकों की बेखबरी की यह इंतहा ही है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने लंबी ऊहापोह के बाद फैसला किया है कि 2011 की जनगणना के साथ जातियों के आँकड़े जुटाने के साथ ही गरीबी  रेखा  से नीचे जीवन-यापन करने वाली आबादी के आँकड़े भी जुटाए ज

टू जी: क्या समर्थन की कीमत वसूली है

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- अरविन्द सीसौदिया * डीएमके ने जिस तरह से दूरसंचार मंत्रालय को लूट का साधन बनाया, उसकी जांच होनी चाहिये, कहीं यह मामला सरकार बनाने के लिये समर्थन कांग्रेस पार्टी के द्वारा खरीदा तो नहीं गया था। यह जांच उच्चस्तरीय पैनल से हो तभी सच्चाई सामने आ सकती है। * टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला, एस बैण्ड स्पैक्ट्रम घोटाला , हसन अली खान,आदर्श सोसायटी क्या पस बात के सबूत नहीं हैं कि भारत का राजनैतिक तंत्र धन की अथाह भूख में फंस गया है। वह स्वंय अति सम्पनन बनने और सम्पन्न वर्ग के हित साधने मात्र का साधन रह गया है। * देश की अकूत संपदा से , गरीबी को दूर किया जा सकता था। मगर देश की सम्पदा बेंच कर स्वंय पूंजीपति बनने और पूंजीपतियों के द्वारा विदेशी बैंकों की तिजोरियों को भरने का औजार बन गई है,लोकतंत्र प्रणाली!! * यदि गरीब एक जुट हो कर अपनी , खुर्द बुर्द की जा रही संम्पदा को बचानें आगे नहीं आयेगा। अपने हिस्से और हिसाब की मांग नहीं करेगा। तो ये लूट देश को नंगा करके छोडेगी !