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“साम्प्रदायिकता और लक्षित हिंसा निवारण विधेयक 2011” संसद में नहीं लाया जाये

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- अरविन्द सीसौदिया   मुम्बई में हुए सीरिएल बम धमाकों के बाद...., हमें फिर से यह तय करना चाहिये कि देश को विभाजित कर देनें की मानसिकता से तैयार किया गया सोनिया जी का “साम्प्रदायिकता और लक्षित हिंसा निवारण विधेयक 2011” संसद में नहीं लाया जाये। अन्यथा देश की हर गली चैराहे पर दंगे होंगे और दंगाईओं के खिलाफ पुलिस कार्यवाही तक नहीं हो सकेगी।  ------- 'सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक-2011'- SICKULAR और McCauley पुत्रों द्वारा ... शर्म-निरपेक्षता और सांप्रदायिक-सापेक्षता का मिला जुला संगम 1- 'बहुसंख्यक' हत्यारे, हिंसक और दंगाई प्रवृति के होते हैं। (विकीलीक्स के खुलासे में सामने आया था क ि देश के बहुसंख्यकों को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की इस तरह की मानसिकता है।) जबकि 'अल्पसंख्यक' तो दूध के दुले हैं। वे तो करुणा के सागर होते हैं। अल्पसंख्यक समुदायक के तो सब लोग अब तक संत ही निकले हैं। 2- दंगो और सांप्रदायिक हिंसा के दौरान नारी बलात्कार अपराधों को तभी दंडनीय मानने की बात कही गई है अगर वह अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों के साथ हो। यानी अगर किसी बहु

मुंबई आतंकी धमाकों को रोकने में : व्यवस्थाएं स्वत: कायर

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  बृहस्पतिवार, १४ जुलाई २०११ आप तो नहीं कर पाएंगे किन्तु योद्धाओं को मत रोकिएगा अब गंभीर चेहरे मत बनाइएगा। झूठे सांत्वना के शब्द मत उगलिएगा। सच्ची ही होगी, किन्तु श्रद्धांजलि मत दीजिएगा। पाकिस्तान का नाम मत लीजिएगा। ख़ासकर उसे सुबूत सौंपने की हल्की बात मत कहिएगा। आपात बैठकें लेते रहें, किन्तु उनमें कितनी ठोस बातें कीं, यह मत बताइएगा। घिन आती है। घबराहट होती है। घुटन होती है। चाहे जैसी सत्ता चलाते रहें, लेकिन हम आम लोगों को ख़ास सपने मत दिखाइएगा। आतंक के विरुद्ध युद्ध का दावा तो भूलकर भी मत कीजिएगा। मुंबई के सिलसिलेवार धमाकों पर भी भारी पड़ने वाले वाचालों को तो बिल्कुल मत बोलने दीजिएगा। गेटवे के विस्फोटों से लेकर 26/11 के हमलों में किए कागजी उपायों को मत दोहराइएगा। और सुरक्षा के लिए चिंता या कड़े कदम अब कतई मत उठाइएगा। टीस सी उठती है। टूट से जाते हैं। टकराकर लौट आती है- हर आस। हमलों से समूचा राष्ट्र भले ही दहल गया हो, आप हिम्मत मत दिखाइएगा। अकेले मुंबई में ही 1993 से सिलसिलेवार हमलों में अब तक 700 निर्दोषों की जान जाने के सिलसिले पर बेबसी मत जताइएगा। और स

मुम्बई के हमलावरों के घर में घुस कर मारकाट मचाओ....

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- अरविन्द सीसौदिया सच यह है कि इस कांग्रेस सरकार को निकम्मापन और कायरता छोडनी होगी , राष्ट्र स्वाभिमान जगाना होगा। पाकिस्तान पर हमले की तैयारी करनी होगी, पाकिस्तान से परोक्ष युद्ध तो किया ही जा सकता है। उसे उसकी जमीन पर ही परेशानी में डालना होगा। जब तक युद्ध के लिये तत्पर नहीं होगे ,तब तक यह समस्या हल नहीं हो सकती। हमको जिन्दा रहने के लिये हमें मारने वाले को मारना ही पडेगा। यही तो सुरक्षा राजनीति कहती है। ------ मुम्बई में फिर से तीन जगह सीरियल ब्लास्ट हुये।  इसे कसाब के जन्मदिन आतंकी जश्न माना जा रहा है।  21 के लगभग मारे गये,200 के लगभग घायल !! चिदम्बरम ने पूर्व गृहमंत्रीयों की तरह संवेदना और सूचनायें पढी... पोटा को हटा कर कांग्रेस ने देश को आतंकवाद दिया.., क्या राहुल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को बदलेंगे..? -------           वे हमले पर हमले किये जा रहे हैं,मारते जा रहे हैं, हमारे पास आॅफिस जाते,मंदिर जाते,घर लौटते,खरीददारी करते,मारे जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं हे। सरकार कहती है। हमने 31 महीने से मुम्बई को बचा कर रखा !! 9/11 के बाद अमरीका में एक भी आतंकी हमला नहीं हु