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अगस्त 1, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फिर गुलामी न आये....!

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- अरविन्द सीसौदिया शहीदों को सलाम....! न फूल चढ़े, न दीप जले, न नाम तुम्हारे जानें हैं। पर लक्ष्य तुम्हारा गंगा सा पावन, साहस तुम्हारा हिमालय से ऊंचा। तुम बलिदान हुए, देश आजाद हुआ, शत-शत तुम्हें प्रणाम हमारा है।। आत्मनिरीक्षण अवश्य हो....! आजादी की बात यहीं से शुरू होगी। क्योंकि कंगुरों पर किसने ध्वज लहराये, सत्ता का सुख किसने भोगा, उसका महत्त्व नहीं है। महत्त्व इसका है कि इस मजबूत नींव में कौन-कौन समाये हैं। किनके बलिदान पर यह स्वतंत्रता की इमारत खड़ी है। इस इमारत में कौन से रंग भरने के सपने देखे थे, कौन-कौन पूरे हुए और कौन-कौन अधूरे हैं....। फिर गुलामी न आये....! तथ्य की बात यह हे कि यह आजादी एक बहुत बड़ी कीमत अदा करके मिली है, इसे अक्ष्क्षुण्ण रखना होगा और यह भी याद रखना होगा कि अबके अगर गुलाम हुए तो शायद फिर आजाद नहीं हो पायेंगे। पिछले साठ साल की उपलब्धि है कि हम आजाद हैं, हमारी सीमायें काफी हद तक यथावत है। पड़ौसी चीन और पाकिस्तान ने हमारे कुछ भू भाग दबा रखे हैं, उन्हें मुक्त करवाना है। सत्ता की अदला बदली हो गई, मगर शेष स्वतंत्रतायें बाकी हैं, गुलामी के अवशेष हटाने हैं। पश्चिम

जनता के प्रति जबावदेही के लिए ; राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे..!

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- अरविन्द सीसौदिया हमारी स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रपति पद का कितना महत्व है, यह समझने के लिए हमें 25 जून 1975 की रात्रि 11 बजकर 45 मिनिट पर, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के कहने पर, लगाये गये आपातकाल को समझना होगा। जिसमें राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आंतरिक आपातकाल लगा दिया था। जेलों में डाले गये निर्दोषों को न्यायालय मुक्त न कर पाये, इसलिये ‘मीसा’ कानून को न्यायालय के क्षैत्राधिकार से बाहर कर दिया गया था।  लोगों की जबरिया नसबंदी कर दी गई थी, जबरिया मकान तोड़ दिये गये थे। कोई भी अखबार सरकार के खिलाफ लिख नहीं सकता था, विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं रही थी। व्यक्तिगत स्वतंत्रता समाप्त हो गई थी। सोचने समझने वाली बात यह है कि ऐसा क्यों हुआ! राष्ट्रपति ने बिना जनता की परवाह किये आपातकाल क्यों लगा दिया! इसके दो कारण थे, पहला कारण तो राष्ट्रपति जनता के द्वारा चुना नहीं जाता जो वह जनता के प्रति जवाबदेह होता........, क्योंकि उसको चुनने वाला निर्वाचक मण्डल सांसद और    विधायक होते हैं। जनता इस चुनाव की महज दर्शक होत

3 अगस्त : भाजपा किसान मोर्चा की ओर से नई दिल्ली में संसद पर प्रदर्शन किया जाएगा

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कोटा |  भाजपा किसान मोर्चा की ओर से किसानों की समस्याओं और कृषि भूमि अवाप्ति को लेकर नई नीति बनाने की मांग को लेकर 3 अगस्त 2011को नई दिल्ली में संसद पर प्रदर्शन किया जाएगा।  मोर्चा के राजस्थान प्रदेश उपाध्यक्ष डा.एल. एन. शर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि इस प्रदर्शन में हाडोती से भी  कार्यकर्ता  शामिल होंगे हैं। वार्ता में मौजूद भाजपा कोटा जिला उपाध्यक्ष अरविन्द सिसोदिया ,  मोर्चा के प्रदेश मंत्री ब्रजराज सिंह गावड़ी,प्रदेश प्रवक्ता केवलकृष्ण बांगड़ ,मोर्चा अध्यक्ष रामलाल माली , मोर्चा महामंत्री मुकुट  नागर , मोर्च के जिला उपाध्यक्ष डा. आर. सी. गौतम इत्यादि !    इस रैली को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश धनकड़ सहित वरिष्ठ नेता संबोघित करेंगे। शिमला— बीज विधेयक-भूमि अधिग्रहण बिल पारित करने को देश भर के किसान दिल्ली में जुटेंगे। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक भाजपा प्रदेश कार्यालय दीपकमल में प्रदेशाध्यक्ष प्यारे लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में किसान