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विजयादशमी,दसों दिशाओं पर विजय...

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दशहरा (विजयादशमी) - अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान दसों दिशाओं में जायें ..., दल - बादल से छा जायें । उमड़ - घुमड़ कर हर धरती को, नंदनवन सा लहरायें।। http://balsanskar.com/hindi/lekh/303.html बाल संस्कार पर यह लेख बहुत सुन्दर प्रस्तुति से लिखा गया है... १. दशहरा (विजयादशमी) अर्थ: दश यानी दस व हरा यानी हार गए हैं । दशहरेके पहले नौ दिनोंके नवरात्रिमें दसों दिशाएं देवीकी शक्तिसे प्रभारित होती हैं व उनपर नियंत्रण प्राप्त होता है, दसों दिशाओंपर विजय प्राप्त हुई होती है । आश्विन शुक्ल दशमीको विजयादशमी कहा जाता है । विजयके संदर्भमें इस दिनके दशहरा, विजयादशमी इत्यादि नाम हैं । यह साडेतीन मुहूर्तोंमेंसे एक है । दुर्गानवरात्रिकी समाप्तिपर यह दिन आता है; इसलिए इसे `नवरात्रिका समाप्ति-दिन' भी मानते हैं । कुछ स्थानोंपर नवराथि नवमीके दिन, तो कुछ स्थानोंपर दशमीके दिन विसर्जित करते है । इस दिन सीमोल्लंघन, शमीपूजन, अपराजितापूजन व शस्त्रपूजा, ये चार विधियां की जाती हैं ।  १.१. इतिहास रामके पूर्वज अयोध्याधीश रघुने विश्वजीत यज्ञ किया । सर्व संपत्ति दान कर वे एक पर्णकुटीमें ( पत्तो द

गंदी हो गई, राजनीति...

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- अरविन्द सीसौदिया * जो जो भी नेता अपने को अच्छा साफ सुथरा बताते हैं, उनकी वास्तविकता में पहली पशंद माल कमा कर देने वाला होता है।राज - दरवार में जिस तरह महफिलें सजतीं थी , सुरा सुंदरी दौर चलता था । वह आज भी बदले रूप में नेताओं के चरित्र में मौजूद है। इन नेताओं के लिये गुंडे बदमाश सुरक्षा कर्मी की तरह जरूरी हैं।जो इनके काले पीले कामों पर जोर जबरदस्ती के द्वारा पर्दा डाल सकें । जिस तरह भंवरी को एक नामीं गुडे के द्वारा ही उठवाया गया ... अब उसके सच के सबूत दफन हो जायेंगें। * राजनीति में अब नेता वह होता है जो समाज से सरकार से कुछ ले सके...., लूट का नेतृत्व करने वाला नेता है। आज हर दल में , हर शहर में बहुत से इस तरह के नेताजी मिल जायेंगें, जिन पर आय के ज्ञात स्त्रोत ही नहीं हैं मगर वे करोडपति , अरबपति बन गये। सही बात यह है कि आयकर विभाग की कायरतापूर्ण अनदेखी के कारण ही पूरे देश में राजनीति भ्रष्टाचार के केंसर में फंस गई । * अब राजनीति में विचारों और लोककल्याण की भावना नहीं रही है। अब तो सबसे पहले अति सुन्दर को प्राथमिकता है जैसे भंवरी देवी , फिर मेरा चमचा, फिर मरर्डर यानी बाहूबली , माफिया ज