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मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से नाराज गहलोत ने मंच छोड़ा

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- अरविन्द सिसोदिया  जयपुर में चल रहे प्रवासी भारतीय सम्मलेन में मुख्यमंत्रियों के सत्र में जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के असहयोग के चलते भी गुजरात की तस्वीर बदलने के आंकड़े पेश किये तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केन्द्रीय मन्त्र वायलर रवी अपना आप खो  बैठे और मंच से भी कार्यक्रम को प्रभावित करने की कोशिश की......  मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि जिन प्रदेशों में विपक्षी दलों का शासन है, उन्हें केंद्र का ‘आशीर्वाद’ नहीं मिला हुआ है और उनके राज्य ने जितनी भी प्रगति की है, वह अपने संसाधनों के बलबूते की है। श्रोताओं की तालियों के बीच मोदी ने अपने तैयार भाषण से हटते हुए बाहर से आए भारतीयों के सामने केंद्र की खासी आलोचना की।    ---------------------- केंद्र पर जमकर बरसे नरेंद्र मोदी Monday, January 9, 2012       जयपुर : प्रवासी भारतीय दिवस के मंच का केंद्र पर हमला बोलने में इस्तेमाल करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि जिन प्रदेशों में विपक्षी दलों का शासन है, उन्हें केंद्र का ‘आशीर्वाद’ नहीं मिला हुआ है और उनके राज्य

इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

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------------- फ़िल्म - जागृति (Jagriti) गायक - मो रफी संगीत - हेमंत कुमार गीत - प्रदीप पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के (हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के) -2 तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा रक्खा है ये चिराग़ शहीदों ने बाल के, इस देश को... दुनिया के दांव पेंच से रखना ना वास्ता मंज़िल तुम्हारी दूर है लम्बा है रास्ता भटका ना दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के, इस देश को... ऐटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया तुम हर कदम उठाना ज़रा देख भाल के, इस देश को... आराम की तुम भूल भुलय्या में ना भूलो सपनों के हिंडोलों पे मगन होके ना झूलो अब वक़्त आ गया है मेरे हँसते हुए फूलों उठो छलाँग मार के आकाश को छू लो तुम गाड़ दो गगन पे तिरंगा उछाल के, इस देश को... हम लाए हैं तूफ़ान से कश्त