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जनवरी 11, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देश ने युद्ध में जितना,लालबहादुर शास्त्रीजी ने सिखाया था

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- अरविन्द सिसोदिया          भारत रत्न लालबहादुर शास्त्री जी वह पहले भारतीय प्रधान मंत्री रहे हैं .., जिन्होनें आधिकारिक रूप से भारत को प्रथम युद्ध विजय दिलाई...., देश ने युद्ध में जीतना  उन्ही के कार्यकाल में सिखा .., सिर्फ युद्ध ही नहीं ..भुखमरी से मुक्ती के लिए भरपूर अनाज उगाने की विधा  भी उन्होंने ही देश को दी..आज ११ जनवरी को उनकी  पुन्य तिथि पर कोटि कोटि नमन ......! लालबहादुर शास्त्री श्री लालबहादुर शास्त्री (2 अक्तूबर, 1904 - 11 जनवरी, 1966), भारत के दूसरे स्थायी प्रधानमंत्री थे । जवाहर लाल नेहरु जी की मृत्यु के पश्चात वह 1963-1965 के बीच भारत के प्रधान मन्त्री थे। उनका जन्म मुगलसराय, उत्तर प्रदेश मे हुआ था।  लालबहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में लाल बहादुर श्रीवास्तव के रुप में हुआ था। उनके पिता शारदा प्रसाद एक गरीब शिक्षक थे, जो बाद में राजस्व कार्यालय में लिपिक (क्लर्क) बने।             भारत की स्वतंत्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रुप में नियुक्त किया गया था। वो गोविंद बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्र

कागजी शेर,चुहे निकले..... वाह अन्ना टीम, भाग निकले....!!!

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- अरविन्द सिसोदिया  कागजी शेर,चुहे निकले..... वाह अन्ना टीम, भाग निकले....!!! मैंनें जब बहुत पहले यह कहा था कि अन्ना टीम में दम नहीं है,ये सब एन जी ओ चलाने वाले लोग हैं तब किसी को विश्वास नहीं था, कि ये इस तरह से पीछे हटेंगे कि देश शर्मसार हो जायेगा...। अन्ना और अन्ना टीम में 3 और 6 के अंतर वाली है। अन्ना ने कभी फायदा उठाया नहीं , इन्होने हमेशा ही फायदे के लिये लडाई लडी.....!!! सच यह है कि अन्ना के आंदोलन को इन छदम वेष धारियों से मुक्त करना ही सबसे पहली जरूरत है। कांग्रेस ने बाबा रामदेव और अन्ना हजारे दोनों को ही सब्ज बाग दिखाये, बहलाया फुसलाया, फिर मारा पीटा और भगाया....!!! इनका पहला धर्म था कि भ्रष्टाचार को शिष्टाचार में बदलने वाली कांग्रेस का खुल कर विरोध करते उसे ताकतवर होने से रोकते........!!!! विश्व की सबसे बडी भ्रष्टाचार पोषक इस पार्टी के असली चेहरे को सामने लाते !!!! मगर भयभीत और डरे हुये एन जी ओ वाले अपनी कलई खुलने और नुकसान होने से डर गये और भाग निकले......। अन्ना के आंदोलन को प्रबलता से जारी रखना अब हमारा कर्त्तव्य है और देश को लुटने से बचाने के लिये , देश को लुटवाने