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स्वतंत्रता संग्राम से जन्मा: हिन्दुत्व का महानायक केशव

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- अरविन्द सीसौदिया राष्ट्र धर्म का एक तपस्वी, स्वतंत्रता संग्राम से जन्मा: हिन्दुत्व का महानायक केशव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिसे संक्षिप्त में ‘संघ’ अथवा ‘आर.एस.एस.’ के नाम से सम्बोधित किया जाता है, जो आज भारत का ही नहीं वरन् विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है, जिसका विविध क्षैत्र में विविध संस्थाओं के माध्यम से एक वटवृक्ष जैसे विशाल स्वरूप है। जो देश के राष्ट्र जीवन में एक विशिष्ट स्थान रखता है। इस महान संगठन के संस्थापक डॉ.केशवराव बलीराम हेडगेवार थे । आज हमारे देश में जितने भी राष्ट्रवादी कार्यक्रम सामाजिक क्षैत्र में आयोजित होते है और उनमें दो चित्र प्रायः देखने को मिल जाते हे। वे ही चित्र बहुत सारे केन्द्रीय मंत्रियों,सांसदों, विधायकों, राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों, नेताओं और सामाजिक कार्यकताओं के घरों पर, अक्सर एक साथ देखने को मिलते है। एक ओर कालीटोपी और रौबदार मूछों वाले आदरणीय डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार और दूसरी ओर प्रभावशाली दाढ़ी वाले संत स्वरूपा आदरणीय माधव सदाशिवराव गोलवालकर अर्थात पूज्यश्री गुरूजी। यह दोनों चित्र राष्ट्रीय स्वयं

पं. दीनदयाल उपाध्याय : राष्ट्रवादी राजनीति का प्रकाश

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एक अन्य लेख ........ दीनदयाल उपाध्याय,एक रहस्यमय राजनैतिक हत्या http://arvindsisodiakota.blogspot.in/2011/02/blog-post_5610.html ========= 25 सितम्बर, जयन्ति पर /11 फरवरी पुण्यतिथि विशेष प्रकाश राजनीति राष्ट्र के लिए - पं. दीनदयाल उपाध्याय  अरविन्द सीसौदिया स्वतंत्र भारत में, कांग्रेस का राजनैतिक विकल्प और राष्ट्रवाद का सबसे अधिक शुभ चिन्तक दल स्थापित करने और उसे समर्थ बनाने का सबसे ज्यादा श्रेय यदि किसी को मिलता है तो वह नाम भारतीय जनसंघ के संस्थापक, अखिल भारतीय महामंत्री एवं अध्यक्ष रहे, पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी को जाता है। भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक की 55 वर्षो से अधिक की स्वर्ण जयंति यात्रा में उपाध्याय जी के विचार, मार्गदर्शन एवं कार्यपद्धति इस संगठन की सड़क बनकर लक्ष्य तक पहुँचाने का काम करती रही है। यही कारण है कि आज भी भारतीय जनता पार्टी का कोई भी कार्यक्रम उपाध्याय जी के चित्र पर माल्यार्पण के बिना प्रारम्भ नहीं होता है। “दीनदयाल उपाध्याय अमर रहें“ के नारे गूंजते है। कहीं दीनदयाल भवन है, कहीं दीनदयाल पार्क है, कहीं दीनदयाल चौराहा है, उनके नाम पर