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मार्च 23, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नवरात्र : 9 दिन, 9 देवी स्वरूपों की उपासना

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नवरात्र : 9 दिन, 9 देवी पं. केवल आनंद जोशी नवरात्र के 9 दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की उपासना के लिए निर्धारित हैं। ये देवियां भक्तों की पूजा से प्रसन्न होकर उनकी कामनाएं पूर्ण करती हैं। शैलपुत्री: पहले स्वरूप में मां पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में विराजमान हैं। नंदी नामक वृषभ पर सवार 'शैलपुत्री' के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। इन्हें समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक माना जाता है। दुर्गम स्थलों पर स्थित बस्तियों में सबसे पहले शैलपुत्री के मंदिर की स्थापना इसीलिए की जाती है कि वह स्थान सुरक्षित रह सके। उपासना मंत्र : वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।। ब्रह्मचारिणी: दूसरी दुर्गा 'ब्रह्मचारिणी' को समस्त विद्याओं की ज्ञाता माना गया है। इनकी आराधना से अनंत फल की प्राप्ति और तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है। 'ब्रह्मचारिणी' का अर्थ हुआ, तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। यह स्

अंग्रेज ए.ओ. ह्यूम : भारतीयों की चिन्ता क्यों ?

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ह्यूम को भारतीयों के हित की ऐसी क्या चिन्ता हो गई जो उसने कांग्रेस बनायी ? आप जानते ही होंगे कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किसी भारतीय ने नहीं बल्कि एक अंग्रेज ए.ओ. (अलेन ऑक्टेवियन) ह्यूम ने सन् 1885 में, ब्रिटिश शासन की अनुमति से, किया था। कांग्रेस एक राजनैतिक पार्टी थी और इसका उद्देश्य था अंग्रेजी शासन व्यवस्था में भारतीयों की भागीदारी दिलाना। ब्रिटिश पार्लियामेंट में विरोधी पार्टी की हैसियत से काम करना। अब प्रश्नयह उठता है कि ह्यूम ,सिविल सर्विस से अवकाश प्राप्त अफसर था, को ही भारतीयों के राजनैतिक हित की चिन्ता क्यों जाग गई? सन् 1885 से पहले अंग्रेज अपनी शासन व्यवस्था में भारतीयों का जरा भी दखलअंदाजी पसंद नहीं करते थे। तो फिर एक बार फिर प्रश्न उठता है कि आखिर क्यों दी ब्रिटिशशासन ने एक भारतीय राजनैतिक पार्टी बनाने की अनुमति? यदि उपरोक्त दोनों प्रश्नों का उत्तर खोजें तो स्पष्ट हो जाता है कि भारतीयों को अपनी राजनीति में स्थान देना अंग्रेजों की मजबूरी बन गई थी। सन् 1857 की क्रान्ति ने अंग्रेजों की आँखें खोल दी थी।अपने ऊपर आए इतनी बड़ी आफत का विश्लेषण करने पर उन्हें समझ

काकोरी काण्ड : सजाये-मौत : अशफाक

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अशफ़ाक उल्ला ख़ाँ वारसी हसरत यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि काकोरी काण्ड का फैसला ६ अप्रैल १९२६ को सुना दिया गया था। अशफाक उल्ला खाँ और शचीन्द्रनाथ बख्शी को पुलिस बहुत बाद में गिरफ्तार कर पायी थी अत: स्पेशल सेशन जज जे०आर०डब्लू० बैनेट[3] की अदालत में ७ दिसम्बर १९२६ को एक पूरक मुकदमा दायर किया गया। मुकदमे के मजिस्ट्रेट ऐनुद्दीन ने अशफाक को सलाह दी कि वे किसी मुस्लिम वकील को अपने केस के लिये नियुक्त करें किन्तु अशफाक ने जिद करके कृपाशंकर हजेला को अपना वकील चुना। इस पर एक दिन सी०आई०डी० के पुलिस कप्तान खानबहादुर तसद्दुक हुसैन ने जेल में जाकर अशफाक से मिले और उन्हें फाँसी की सजा से बचने के लिये सरकारी गवाह बनने की सलाह दी। जब अशफाक ने उनकी सलाह को तबज्जो नहीं दी तो उन्होंने एकान्त में जाकर अशफाक को समझाया- "देखो अशफाक भाई! तुम भी मुस्लिम हो और अल्लाह के फजल से मैं भी एक मुस्लिम हूँ इस बास्ते तुम्हें आगाह कर रहा हूँ। ये राम प्रसाद बिस्मिल बगैरा सारे लोग हिन्दू हैं। ये यहाँ हिन्दू सल्तनत कायम करना चाहते हैं। तुम कहाँ इन काफिरों के चक्कर में आकर अपनी जिन्दगी जाया करने की जिद पर तुले हुए

भारतीय नव-वर्ष दिन - चैत्र शुक्ला प्रतिपदा की महिमा

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सन २०१४ में ३१ मार्च  को है भारतीय नव संवत्सर विक्रम २०७१ ! नए वर्ष की बधाइयाँ !! भारतीय नव-वर्ष दिन - चैत्र शुक्ला प्रतिपदा की महिमा ध्यान से पढ़ने की कृपा कीजिये - १- यह भारतीय काल गणना का प्रथम दिन है ! भारतीय काल गणना संसार की सब से प्राचीन काल गणना है जो कि पूर्णतः वैज्ञानिक भी है ! इसलिए भारतीय नव वर्ष - हमें स्वतन्त्र हिन्दुस्थान में अपने गौरव पूर्ण स्वत्व का स्मरण दिलाता है ! जब कि '' अंगरेजी न्यू इयर '' पूर्णतः अवैज्ञानिक भी है और अपनी '' गुलामी '' को भी दर्शाता है ! २- यह सृष्टि के प्रारम्भ का दिन है ! ब्रह्मा जी ने इसी दिन से सृष्टि रचना प्रारम्भ की थी ! यह सृष्टि संवत का प्रथम दिन है इसलिए यह सारे ससार का प्रथम दिन है, चाहे कोई माने या ना माने ! वैसे भी जिनको बाद में काल गणना की सूझ आयी और जो काल गणना आज तक भी अवैज्ञानिक है, उनके '' न्यू इयर '' को महत्व देना कोई बुद्धिमानी नहीं है ! हमारा अपना नव वर्ष इसलिए भी सही है कि हमारी यह सृष्टि संवत की गणना पृथ्वी की आयु की वैज्ञानिक गणना से मेल खाती है !