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अप्रैल 24, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

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Om G Bhai Sab मित्रों आज शिवाजी जयंती है। 1303 इ. में मेवाड़ से महाराणा हम्मीर के चचेरे भाई सज्जन सिह कोल्हापुर चले गए थे। इन्ही की 18 व़ी पीढ़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज पैदा हुए थे। ये सिसोदिया थे। सिसोदिया राजपूत वंश के कुलनायक महाराणा प्रताप के वंशज छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है ... शूरवीरता के साक्षात अवतार लोकराज के पुरोधा छत्रपति शिवाजी महाराज के इस जन्मोत्सव पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें ----------------------- लिंक      http://hi.wikipedia.org/ राज्याभिषेक सन् १६७४ तक शिवाजी ने उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था जो पुरन्दर की संधि के अन्तर्गत उन्हें मुगलों को देने पड़े थे। पश्चिमी महारष्ट्र में स्वतंत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक करना चाहा, परन्तु ब्राहमणों ने उनका घोर विरोध किया। शिवाजी के निजी सचीव बालाजी आव जी ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और उन्होंने ने काशी में गंगाभ नमक ब्राहमण के पास तीन दूतो को भेजा, किन्तु गंगा ने प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योकि शिवाजी क्षत्रिय नहीं थे ,  उसने कहा की क्षत्र

कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके

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माता का भजन - १ कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके चली आना मैया जी चली आना तुम कन्या रूप में आना, तुम दुर्गा रूप में आना सिंह साथ लेके, त्रिशूल हाथ लेके, चली आना मैया जी चली आना ................ तुम काली रूप में आना, तुम तारा रूप में आना खप्पर हाथ लेके, शांति साथ लेके, चली आना मैया जी चली आना ................ तुम लक्ष्मी रूप में आना, तुम माया रूप में आना उल्लू साथ लेके, दौलत हाथ लेके, चली आना मैया जी चली आना ................ तुम शीतला रूप में नाना, तुम ठन्डे रूप में आना झाड़ू हाथ लेके, गदहा साथ लेके, चली आना मैया जी चली आना ................ तुम सरस्वती रूप में आना, तुम विध्या रूप में आना हंस साथ लेके, वीणा हाथ लेके, चली आना मैया जी चली आना ...............

राधिका गोरी से, बृज की छोरी से, मैया करा दे मेरा व्याह..

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राधिका गोरी से बृज की छोरी से मैया करा दे मेरा व्याह जो नहीं व्याह करावे तेरी गैया नहीं चरावु आज के बाद मोरी मैया तेरी देहली पर न आवु आएगा रे - २  मजा रे मजा अब जीत हार का राधिका गोरी से बृज............ चन्दन की चौकी पर मैया तुझे बैठाऊ अपनी राधिका से मै चरण तोरे दबवाऊ भोजन बनवाऊंगा -२  मै छत्तीस प्रकार के राधिका गोरी से बृज............ छोटी सी दुलहनिया जब आँगन में डोलेगी तेरे सामने मैया वो घुंघट न खोलेगी दाऊ से जा कहो -२  वो बैठेगे द्वार पे राधिका गोरी से बृज............ सुन कर बातें लल्ला की मैया बैठी मुस्कराए लेकर बलैया मैया, हिवडे से अपने लगाये नजर कहीं न लगे - २ न लगे मेरे लाल को राधिका गोरी से बृज............ ------------------ कृष्णा कन्हैया का भजन - १ वृन्दावन का कृष्ण कन्हैया, सबकी आँखों का तारा मन ही मन क्यों जले राधिका, मोहन तो है सबका प्यारा यमुना तट पर नन्द का लाला, जब जब रास रचाए रे तन मन डोले कान्हा ऐसी, बंसी मधुर बजाए रे सुध-बुध खोये कड़ी गोपिया, जाने कैसा जादू डारा वृन्दावन का कृष्ण कन्हैया.................. रंग सलोना ऐसा जैसे