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जून 3, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गौमाता की दुर्दशा

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गौमाता की दुर्दशा ( स्थानीय / सामाजिक समस्याएं ) भारत में वैदिक काल से ही गाय को माता का स्थान दिया गया है। परन्तु वर्तमान में गाय की दुर्दशा शहरों की सडकों पर एक समस्या के रूप ले चुकी है। सडकों पर गायों के झुण्ड दुर्घटना के कारण बनते हैं जिससे गौ एवं जन हॉनी होती है। सडकों पर गौ मातायें सुरक्षित भी नहीं हैं, क्यों कि गौ तस्कर इन्हे बूचडखानों में बेंच देते हैं। जिससे हमारी गौ माता की अकाल हत्या हो जाती है। सरकार / प्रशासन ने भी गौ माताओं के पालन पोषण के लिये स्थानीय निकायों द्वारा गौ शालाओं की स्थापना की है, परन्तु उनकी दशा भी अत्यंत हदय विदारक है। गौशालाओं में पीनें का पानी,खानें का चारा,रहने को छायादार जगह,बीमारी में उचित चिकित्सक का अभाव हमेशा ही बना रहता है। वहीं वर्षा के दिनों में पानी भर जानें से कीचड आदि हो जाता है। स्थानीय प्रशासन एवं जागरूक नागरिकों को इन गौशालाओं की अव्यवस्थाओं पर ध्यान देकर उचित प्रबंधन करना चाहिये। जिससे गौमाताओं की तस्करी व गौ हत्याओं को रोका जा सकेै, साथ ही पशुपालकों में भी चेतना जाग्रत करनी चाहिये, जिससे वे अपने पशुओं को खुले में न छोड कर यथा स्थान

केरल में माकपा ने की प्रतिद्वंद्वियों की ‘हत्या’ की स्विकारोक्ती

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केरल में माकपा ने की प्रतिद्वंद्वियों की ‘हत्या’ की स्विकारोक्ती  केरल में वरिष्ठ माकपा नेता एमएम मणि के भाषण में प्रतिद्वंद्वियों की ‘हत्या’ की स्विकारोक्ती विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि कुछ मौके ऐसे आए थे, जब राज्य में पार्टी ने अपने विरोधियों की ‘हत्या’ करने से गुरेज नहीं किया। मणि इडुक्की जिले के माकपा सचिव हैं,उन्होंने थोडुपाजा में एक सर्वाजनिक सभा के दौरान यह विवादास्पद वक्तव्य दिया। विडंबना यह कि मणि यहां लोगों से कहने आए थे कि रिवोल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी के लोकप्रिय नेता चंद्रशेखरन की हत्या में माकपा का हाथ नहीं है। पुलिस ने इस सिलसिले में कुछ माकपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। लेकिन बातों-बातों में मणि ने लोगों को याद दिलाया कि कैसे माकपा ने इडुक्की में कुछ राजनीति प्रतिद्वंद्वियों की हत्या की।      वामपंथियों का हिंसा से चोलीदामन का साथ रहा है। यह आज भी माओवाद और नक्सलवाद के रूप में यह हमारे सामने है। जरूरत इस बात की है कि सिर्फ माकपा ही नहीं समस्त वामपंथ पर श्वेतपत्र प्रकाशित हो और उसमें इनकी हिंसक गतिविधियों का पर्दाफास हो तथा हिंसा का सहारा लेन

राष्ट्रवाद के महानायक ‘‘परमपूज्य श्री गुरूजी’

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5 जून पूज्य श्री गुरूजी की पुण्यतिथि पर विशेष राष्ट्रवाद के महानायक ‘‘परमपूज्य श्री गुरूजी’  - अरविन्द सीसौदिया भारतीय राजनैतिक क्षितिज में जिन व्यक्तित्वों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है , उनमें से एक प्रखर राष्ट्रवादी ‘माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर’ उपनाम ‘श्री गुरूजी’ थे। जिन्होने भारतीय जनसंघ जैसा राजनैतिक दल देश को दिया जो आज भारतीय जनता पार्टी के नाम से जाना जाता है। स्वतंत्र भारत में जब राष्ट्रहित और न्याय की रक्षा की महती आवश्यकता थी तब तत्कालीन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक गुरूजी की प्रेरणा से ही जनसंघ का जन्म हुआ और इसे खडा करने में सभी स्तरों पर स्वंययेवकों को राजनीति में भेजा गया हे। उनकेे प्रखर व्यक्तित्व का सम्मान उनके स्वर्गवास होने तक बना रहा और आज भी वे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सबसे आदरणीय प्रथम दो में से एक हैं। इसी कारण पूज्य श्रीगुरूजी के संदर्भ में बी.बी.सी. लंदन ने तब अपने प्रसारण में कहा था ‘‘नेहरू और सरदार पटेल के बाद कौन....? इस प्रश्न का उत्तर वामपंथियों के नेता नहीं, संघ प्रमुख गोलवलकर हैं।’’ श्रीगुरूजी के कृतित्व और व्यक्तित्व के संदर्भ में