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ऐतिहासिक कोटड़ा किला बनाने वाले कारीगर के हाथ काट दिए थे

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विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष आलेख Rajasthan Culture  से साभार ..... ऐतिहासिक कोटड़ा किला बनाने वाले कारीगर के हाथ काट दिए थे बाड़मेर से लगभग 53 किलोमीटर दूर शिव तहसील के कोटड़ा ग्र्राम में रेतीले भूभाग में एक छोटी सी पहाड़ी पर कलाकृतियों से अलंकृत ऐतिहासिक किला बना हुआ है । कोटड़े का किला मारवाड़ के सर्वश्रेण्ठ नव कोटो (दुर्ग) में से एक है। कोटड़ा की गिनती मण्डोर, आबू, जालोर, बाड़मेर, परकारां, जैसलमेर, अजमेर व मारु के किलो के साथ की जाती है। बाड़मेर जिले की ऐतिहासिक धरा पर जहां किराडू, खेड़ जूना गोहणा भाखर जैसे दार्नीय पुरात्तव स्थल है। वहीं एक छोटी सी पहाड़ी पर कलाकृतियों से अंलकृत कोटड़ा किला है। इस किले के चारो ओर बड़ी बड़ी आठ बुर्जे बनी हुई है। इन बुर्जो के बीच बीच में विल ऊंची दीवारो के मध्य कई महल और मकान है। बुर्जो व मध्य स्थित दीवारो में दुमनो से मुकाबले हेतु मोर्चे बने हुए है। इस किले को बनाने की प्रेरणा जैसलमेर का सोनार किला है। कोटड़ा का किला भारी चट्टानो को काट कर सोनार किले कि तरह बनाने का अद्भुत प्रयास किया गया है। किले के स्वामित्व के सम्बन्ध में एक िलालेख उपलब्ध