पोस्ट

अक्तूबर 20, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ए मेरे वतन के लोगो,ज़रा आँख में भर लो पानी

इमेज
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखों में आंसू लाने वाले कवि प्रदीप के गीत ‘ए मेरे वतन के लोगो’ ने चीन से 1962 के युद्ध के बाद देश में संवेदना की एक लहर पैदा कर दी थी और नेहरू इस गीत से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने लता को गले लगा लिया.  ए मेरे वतन के लोगो ए मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो -2 जो लौट के घर न आए -2 ए मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लादे वोः फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गए अमर बलिदानी जो शहीद... जब देश में थी दिवाली वोः खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में वोः झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वोः आपने थी धन्य वोः उनकी जवानी जो शहीद ... कोई सिख कोई जात मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पे मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वोः खून था हिन्दुस्तानी जो शहीद... थी खून से लात-पथ काया फिर भी बन्दूक उठाके दस-दस को एक

अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों..

इमेज
Movie/Album: हकीकत (1964) Music By: मदन मोहन Lyrics By: कैफ़ी आज़मी Performed By: मो.रफ़ी फिल्म हकीकत के गीत ...कैफी आज़मी अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों.. कर चले हम फ़िदा, जन-ओ-तन साथियों.. अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों.. कर चले हम फ़िदा, जन-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों, कर चले हम फ़िदा, जन-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों, साँस थम थी गई, नब्ज़ जम थो गई, फिर भी बदठे कदम को न रुख ने दिया, कट गए सर हमारे, थो कुछ गम नहीं, सर हिमालय का हमने न झुक ने दिया, मरते मरते रहा बांक पण साथियों, अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों.. कर चले हम फ़िदा, जन-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों.. जिंदा रहेने के मौसम, बहुत है मगर, जान देने की रुत रोज़ आती नहीं, हुस्न और इश्क दोनों को रुसवा करे, वोह जवानी जो खून में नाहाठी नहीं, आज धरती बनी है दुल्हन साथियों, अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों.. कर चले हम फ़िदा, जन-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों.. राह कुर्बानियों की न वीरान हो, तुम सजाते ही रहना नए काफिले, फाथे का जश्न इस जश्न के बाद हैं, जिंदगी मौत से मिल रही है