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केजरीवाल के पीछे : कहीं विदेशी करेंसी ( धन ) का खेल तो नहीं

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केजरीवाल के पीछे : कहीं विदेशी करेंसी ( धन ) का खेल तो नहीं अन्ना आंदोलन को धूलधूसरित कर अपनी धधकती इच्छाओं की ज्वालामुखी में देश के ‘लोकतंत्र’ के प्रति अविश्वास पैदा करने की साजिश में लगी अरविंद केजरीवाल की टीम निश्चित ही उन लोगों के इशारे पर खेल रही है जिसे भारतमाता से प्यार नहीं है। केन्द्र सरकार को इस आशय की गंभीर छानबीन करनी चाहिए। केजरीवाल का खेल करेंसी का हो सकता है। अब जानना यह है कि यह करेंसी भारत की है या फिर भारत को कमजोर करने वाली शक्तियों की। ‘सुपारी’ किसने दी है यह पता तो डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार को लगाना ही चाहिए। ‘केजरीवाल’ को शायद यह नहीं पता कि जिस दिन उन्होंने राजनीति में आने और चुनाव लड़ने की घोषणा की उसी दिन उसका सेंसेक्स लुढका ही नहीं, जमीन पर आ गया। स्थिति ध्ाीरे-ध्ाीरे स्पष्ट होती जा रही है। मुझे ध्यान है कि एक दिन अन्ना ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बारे में कहा था कि इन्हें तो पूना भेज देना चाहिए। लेकिन आज हम कहना चाह रहे हैं कि अन्ना ‘‘अरविंद केजरीवाल’’ को कहां रखना चाहेंगे! कहा जाता है कि व्यक्ति को अपने गुणों से सम

शहीद कारसेवको शत-शत नमन : 30 अक्टूबर 1990

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अयोध्या आन्दोलन को जानने के लिये अवश्य पढे़ याद रहे कारसेवक शहीदों का बलिदान    !! 30 अक्टूबर 1990 !! कुंवर ऋतेश सिंह (विश्व हिन्दू परिषद्) आज ही के दिन अयोध्या में मुल्ला-यम सरकार ने निहत्थे कारसेवकों पर गोलिया चलवाई थी जिसमे ६ कारसेवक शहीद हो गए थे. आइये अब आप सब को बताते है की उस दिन अयोध्या में हुआ क्या था ??? ३० अक्टूबर १९९० को विश्व हिन्दू परिषद् ने गुम्बद नुमा ईमारत को हटाने के लिए कारसेवा की शुरुआत की. आल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ,कांग्रेस पार्टी,मार्क्सवादी पार्टी और कुछ छद्म धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के द्वारा इस कारसेवा को समूचे विश्व में मस्जिद के लिए खतरा बताया गया. जबकि ये सर्वविदित है की अयोध्या "राम लला" की जन्मस्थली है और उस जन्मस्थली को तोड़कर वह एक अवैध मस्जिद नुमा ईमारत का निर्माण किया गया था. परन्तु मुस्लिम वोटो के लालच में तत्कालीन प्रधानमंत्री "विपी सिंह" और उस समय के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री "मुल्ला-यम सिंह" मस्जिद बचाने की दौड़ में शामिल हो गए. लगभग ४० हजार CRPF के जवान और

ख़म ठोक ठेलता हे जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड

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श्री कृष्ण का दूत कार्य (समय निकाल कर अवश्य पड़े ) हे कौन विघ्न ऐसा जग में,टिक सके आदमी के मग में | ख़म ठोक ठेलता हे जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड ||१ || मानव जब जोर लगाता हे, पत्थर पानी बन जाता हे | गुण बड़े एक से एक प्रखर ,हे छिपे मानव के भीतर ||२|| मेहंदी में जैसे लाली हो , वर्तिका बीच उजियारी हो | बत्ती जो नहीं जलाता है रौशनी नहीं वो पता हे ||३|| पीसा जाता जब इक्षुदंड बहती रस की धरा अखंड | मेहंदी जब सहती प्रहार बनती ललनाओ का श्रृंगार ||४|| जब फूल पिरोये जाते है हम उनको गले लगाते है | कंकड़िया जिनकी सेज सुघर छाया देता केवल अम्बर ||५|| विपदाए दूध पिलाती है लोरी आंधिया सुनाती है | जो लाक्षाग्रह में जलते है वही सूरमा निकलते है ||६|| वर्षो तक वन में घूम घूम , बाधा विघ्नों को चूम चूम | सह धुप छाँव पानी पत्थर,पांडव आये कुछ और निखर ||७|| सोभाग्य न सब दिन सोता है, देखे आगे अब क्या होता है | मैत्री की रह बताने को सबको सुमार्ग पर लाने को ||८|| दुर्योधन को समझाने को भीषण विध्वंश बचाने को | भगवान हस्तिनापुर आये पांडवो का संदेशा लाये | दो न्याय अगर तो आधा दो पर इसमे भी यदि बाधा हो | दे दो ह