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भारत जागो विश्व जगाओ महा अभियान

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  ‘‘आज हमारे देश की आवश्यकता है लोहे की मांसपेशियाँ और फौलाद के स्नायु तंत्र, ऐसी प्रचण्ड इच्छाशक्ति जिसे कोई न रोक सके, जो समस्त विश्व के रहस्यों की गहराई में जाकर अपने उद्देश्यों को सभी प्रकार से प्राप्त कर सके। इस हेतु समुद्र के तल तक क्यों न जाना पड़े या मृत्यु का ही सामना क्यों न करना पड़े।’’ -स्वामी विवेकानन्द भारत जागो विश्व जगाओ महा अभियान श्रीस्वामी रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य, स्वामी विवेकानन्द आधुनिक समय के प्रथम धर्म-प्रचारक थे जिन्होने विदेश जाकर विश्व के सम्मुख सनातन धर्म के सर्वासमावेशक, वैश्विक संदेश को पुनःप्रतिपादित किया। ऐसा संदेश जो सब को स्वीकार करता है किसी भी मत, सम्प्रदाय को नकारता नहीं।     स्वामीजी एक प्रखर देशभक्त, राष्ट्र-निर्माता, समाजशास्त्री तथा महासंगठक थे। विदेशी शासन से विदीर्ण शक्ति, परास्त मन व आत्मग्लानी से परिपूर्ण राष्ट्र के पुनर्निमाण हेतु राष्ट्रवादी पुनर्जारण को प्रज्वलित करनेवाले पुरोधा स्वामी विवेकानन्द ही थे। भारत को उसकी आत्मा हिन्दू धर्म के प्रति सजग कर उन्हांेने इस पुनर्जागरण की नीव  रखी। स्वामी विवेकानन्द की 150 वी जय