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जनवरी 13, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अखंडता पर सवाल : धारा ३७० : मुकेश कुमार

अखंडता पर सवाल:धारा ३७० (Article 370:A Threat to Nation's Integrity) लेखक: मुकेश कुमार कितने आश्चर्य की बात है की देश के किसी भी भाग में बसने की हमारी संवैधानिक स्वतंत्रता जम्मू-कश्मीर की सीमा के पास जाकर घुटने टेक देती है. वर्षों से जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए जान की वाजी लगाकर डटे रहनेवाले भारतीय सैनिक जम्मू-कश्मीर में दो गज जमीन पाने के हकदार नही है. वहाँ की नागरिकता पृथक मानी जाती है. करोडो भारतियों का गौरव भारतीय सम्विधान जम्मू-कश्मीर में कुछ लाख लोंगो के बिच गौरवहिन हो जाती है क्योंकि जम्मू-कश्मीर का अपना अलग सम्विधान है. यहाँ तक की भारतियों की आँखों का तारा तिरंगा झंडा, जिसके लिए हजारों लोगों ने हंसते-हंसते प्राण न्योछावर किये है वही जम्मू-कश्मीर में महत्वहीन हो जाते है. स्वतंत्रता पश्चात सरदार पटेल के नेतृत्व में देश के तमाम रियासतों के झंडे अतीत के गर्भ में विलीन हो चुके है, परन्तु जम्मू-कश्मीर का झंडा देश की सम्प्रभुता पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए बचा ही है. संविधान में वर्णित राज्य के नीति के निदेशक तत्वों से जम्मू-कश्मीर राज्य को कोई सरोकार नही है. जम्मू-कश्म

कब-कब लगता है कुंभ मेला?

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Allahabad Kumbhamela Holy Bathing 27th Jan 2013 Paush Purnima 06th Feb 2013 Ekadashi Snan 10th Feb 2013 Mauni Amavasya Snan 15th Feb 2013 Basant Panchami Snan 17th Feb 2013 Rath Saptami Snan 18th Feb 2013 Bhisma Ekadashi Snan 25th Feb 2013 Maghi Purnima Snan क्‍यों महत्‍वपूर्ण है महाकुंभ, कब करें स्‍नान  में गंगा नदी के तट पर महाकुंभ का मेला चल रहा है। इस मेले में करोड़ों लोग अगले दस दिनों तक गंगा नदी में डुबकी लगायेंगे। करोड़ों लोगों की आस्‍था इस महापर्व से जुड़ी हुई है। ऐसे मौके पर लखनऊ के ज्‍योतिषाचार्य पं. अनुज के शुक्‍ला बता रहे हैं कुंभ का इतिहास, उसका महत्‍व और कब-कब आप गंगा नदी में स्‍नान करें। विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक व सामाजिक उत्सव वाला महाकुंभ एक व्यापक जनसम्पर्क का स्थान है। महाकुंभ भारत का धार्मिक ही नहीं, अपितु यह एक सामाजिक उत्सव भी है। यहां आने वाले सभी श्रद्धालु एक धर्म यात्री है, जिसमें सम्पूर्ण भारत के प्रतिनिधि एकत्रित होकर परस्पर परिचय प्राप्त के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं पर विचार कर उनके समाधान के मार्ग खोजने का एक सामूहिक केन्द्

महाकुम्भ प्रयाग : पृथ्वी पर सबसे बड़ा मेला

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इलाहाबाद कुम्भ मेला 2013 : मुख्य स्नान तिथियां जब सूर्य एवं चंद्र मकर राशि में होते हैं और अमावस्या होती है तथा मेष अथवा वृषभ के बृहस्पति होते हैं तो प्रयाग में कुम्भ महापर्व का योग होता है। मुख्य स्नान तिथियों पर सूर्योदय के समय रथ और हाथी पर संतों के रंगारंग जुलूस का भव्य आयोजन होता है। पवित्र गंगा नदी में संतों द्वारा डुबकी लगाई जाती है। विक्रम संवत् 2069 में प्रयागराज (इलाहाबाद) में पड़ने वाले महापर्व में निम्न शाही स्नान और सामान्य स्नान की तिथियां यहां प्रस्तुत हैं - स्नान सूची पर्व नाम दिनांक वार स्नान महत्व प्रथम स्नान मकर संक्रांति 14 जनवरी 2013 सोमवार शाही स्नान द्वितिय स्नान पौष पूर्णिमा 27 जनवरी 2013 रविवार शाही स्नान तृतीय स्नान एकादशी 6 फरवरी 2013 गुरुवार सामान्य स्नान चतुर्थ स्नान मौनी अमावस्या 10 फरवरी 2013 रविवार शाही स्नान पंचम स्नान बसंत पंचमी 15 फरवरी 2013 शुक्रवार शाही स्नान छठवां स्नान रथ सप्तमी 17 फरवरी 2013 रविवार सामान्य स्नान सप्तम स्नान भीष्म एकादशी 18 फरवरी 2013 सोमवार सामान्य स्नान अष्टम स्नान माघी पूर्णिमा 25 फरवरी 2013 सोमवार शाही स्नान

पवित्र मकर संक्राति

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                                                  गंगा स्नान करते श्रद्धालु , मकर संक्राति पर मकर संक्रांति भारत डिस्कवरी प्रस्तुति    http://bharatdiscovery.org/india मकर संक्रान्ति भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष जनवरी महीने में समस्त भारत में मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। परम्परा से यह विश्वास किया जाता है कि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। यह वैदिक उत्सव है। इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़–तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बाँटा जाता है। इस त्यौहार का सम्बन्ध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। ये तीनों चीजें ही जीवन का आधार हैं। प्रकृति के कारक के तौर पर इस पर्व में सूर्य देव को पूजा जाता है, जिन्हें शास्त्रों में भौतिक एवं अभौतिक तत्वों की आत्मा कहा गया है। इन्हीं की स्थिति के अनुसार ऋतु परिवर्तन होता है और धरती अनाज उत्पन्न करती है, जिससे जीव समुदाय का भरण-पोषण होता है। सूर्य प्रार्थना संस्कृत प्रार्थना के अनुसार "हे सूर्य देव, आपका दण्डवत प्रणाम, आप ही इस जग