पोस्ट

मार्च 10, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शंकर जी की आरती : जय शिव ओंकारा

इमेज
शंकर जी की आरती जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी । सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा । पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा । भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला । शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥ ॐ जय शिव ओंकारा काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी । नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा त्रिगुणस्वामी जी की

अफ्रीका में विश्व की सबसे ऊंची अर्धनारीश्वर शिव प्रतिमा का अनावरण

इमेज
अफ्रीका में विश्व की सबसे ऊंची अर्धनारीश्वर शिव प्रतिमा का अनावरण Sun, 10 Mar 2013 जोहांसबर्ग। दक्षिण अफ्रीका में दुनिया की सबसे ऊंची शिव-शक्ति की प्रतिमा का अनावरण किया गया है। शिव हिंदुओं के आराध्य देव हैं और शक्ति उनकी अर्धागिनी हैं। बीस मीटर ऊंची इस प्रतिमा को बनाने में करीब 90 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है। प्रतिमा में आधी आकृति शिव की है और आधी मां शक्ति की। भारत से आए दस कलाकारों ने दस महीने की कड़ी मेहनत के बाद इस प्रतिमा को तैयार किया है। यह प्रतिमा बेनोनी शहर के एकटोनविले में स्थापित की गई है। बेनोनी तमिल स्कूल बोर्ड की चेयरमैन कार्थी मुत्थुसामी ने कहा, 'दक्षिण अफ्रीका में मौजूदा समय में महिलाओं के प्रति सम्मान में कमी आ रही है। समुदाय के तौर पर हम शक्ति को एक नारी और मां होने के नाते सम्मान देना चाहते हैं। इससे समाज में महिला पुरुष की बराबरी का संदेश जाएगा।' मुत्थुसामी ने बताया कि तीन साल पहले मारीशस की यात्रा के दौरान उन्होंने ऐसी मूर्ति देखी थी, जिसके बाद वह इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हुई। तमिल फेडरेशन ऑफ गौतेंग के अध्यक्ष नडास पिल्लई ने कहा कि

Lord Shiva's Maha Shivaratri : Pr. Neena Sharma ,

इमेज
लेखिका - प्रो . नीना शर्मा ,  Maha Shivaratri : Pr.Neena Sharma , Maha Shivratri is a Hindu festival celebrated every year in reverence of Lord Shiva. Maha Shivaratri Maha Shivratri is a Hindu festival celebrated every year in reverence of Lord Shiva.It is also known as padmarajarathri. Alternate common names/spellings include Maha Sivaratri, Shivaratri, Sivarathri, and Shivaratri. Shivaratri literally means the great night of Shiva or the night of Shiva. It is celebrated every year on the 13th night/14th day of the Maagha or Phalguna month of the Hindu calendar. Since many different calendars are followed by various ethno-linguistic groups of India, the month and the Tithi name are not uniform all over India and Nepal. Celebrated in the dark fortnight or Krishna Paksha(waning moon) of the month of Maagha according to the Shalivahana or Gujarati Vikrama or Phalguna according to the Vikrama era.[2][3] The festival is principally celebrated by offerings of Bael or Bilva/Vil

सृष्टि सृजन का महापर्व,महाशिवरात्रि - प्रो रजनी भारद्वाज

इमेज
संकलन - प्रो रजनी भारद्वाज , जयपुर  महाशिरात्री जिसकी सुबह सृष्टि की सृर्जक होती है। सृष्टि के सृजनकर्ता शिव और शक्ति स्परूपा पार्वती के मिलन के इस महान योग महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें। आज का दिन आपको मंगलमय हो... शिव--महापर्व शिवरात्रि. .. संकलन- रजनी भारद्वाज शिव ईश्वर का संहारक रूप हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धाङ्गिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र स्कन्द और गणेश हैं। शिव अधिक्तर योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा लिंग के रूप में की जाती है । भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। शिव में परस्पर विरोधी भावों का सामंजस्य देखने को मिलता है। शिव के मस्तक पर ए

महाशिवरात्रि : सृष्टि के सृजनकर्ता शिव और शक्ति स्परूपा पार्वती के मिलन का महान योग

इमेज
सन २०१४ में यह पर्व २७ मार्च २०१४ को है ---------- सृष्टि के सृजनकर्ता शिव और शक्ति स्परूपा पार्वती के मिलन के इस महान योग महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें। आज का दिन आपको मंगलमय हो...   मार्च 2013 महाशिवरात्रि पर कल्याण के देवता की पूजा शिव शब्द का अर्थ ही कल्याण है। भगवान शिव को कल्याणकर्ता इसलिए भी कहा गया है, क्योंकि उन्होंने सृष्टि का सृजन किया है। वे संपूर्ण ब्रह्मांड के रचयिता हैं। वे निराकार और अनादि हैं। वे सदा हैं और सर्वदा रहें। इसीलिए उन्हें सदाशिव भी कहा गया है। इसका यह भी अर्थ है कि वे सदा ही सबका कल्याण करते हैं। उनकी विशेषता यह है कि वे आशुतोष अर्थात बहुत थोड़े से संतुष्ट होने वाले हैं। इसीलिए उनकी पहुंच तो सब तक है ही, वे भी सभी की पहुंच में हैं। उनकी प्रसन्नता के लिए केवल उनका ध्यान और थोड़ा-सा जल ही पर्याप्त है। उनकी कोई जन्मतिथि नहीं है, क्योंकि जब से यह संसार है, वे तभी से हैं। बल्कि उसके पहले से हैं और जब प्रलय में सारी सृष्टि विलीन हो जाएगी, तब भी केवल वे ही रहें। इसीलिए वे शाश्वत हैं। यही कारण है अन्य देवताओं की जहां जयंती या प्राकट्य दिवस मनाया ज