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पंजाब में तीन दिन का शोक,सरबजीत की हत्‍या, केंद्र की नाकामी : मोदी

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सरबजीत के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता, पंजाब में तीन दिन का शोक Bhasha, मई 2, 2013 चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने सरबजीत सिंह के परिवार को एक करोड़ रपये की वित्तीय सहायता देने की गुरुवार को घोषणा करने के साथ ही तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। भारतीय कैदी सरबजीत सिंह पर पाकिस्तानी जेल में नृशंस हमला किया गया था और उन्होंने बुधवार को लाहौर के अस्पताल में दम तोड़ दिया था। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यहां कहा कि सभी सरकारी इमारतों पर झंड़े आधे झुके रहेंगे और इस दौरान कोई आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सरबजीत के परिवार के लिए एक करोड़ रपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि सरबजीत की दोनों पुत्रियों स्वप्नदीप कौर और पूनम को पंजाब में सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। बादल ने सरबजीत सिंह के परिवार को भरोसा दिया कि पंजाब सरकार उनकी पूरी मदद और समर्थन करेगी। सरबजीत की हत्‍या, केंद्र की नाकामी: मोदी  http://aajtak.intoday.in आज तक ब्यूरो | मैंगलोर, 2 मई 2013 | कर्नाटक विधानसभा चुनाव| कर्नाटक में चुनाव प्

विश्व के प्रथम पत्रकार : ब्रह्म ऋषि नारद जी

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विश्व के प्रथम पत्रकार : ब्रह्म ऋषि  नारद जी http://bharatdiscovery.org "अहो! ये देवर्षि नारद हैं, जो वीणा बजाते हैं, हरिगुण गाते, मस्त दशा में तीनों लोकों में घूम कर दु:खी संसार को आनंदित करते हैं।" खड़ी शिखा, हाथ में वीणा, मुख से 'नारायण' शब्द का जाप, पवन पादुका पर मनचाहे वहाँ विचरण करने वाले नारद से सभी परिचित हैं। श्रीकृष्ण देवर्षियों में नारद को अपनी विभूति बताते हैं । वैदिक साहित्य, रामायण, महाभारत, पुराण, स्मृतियाँ, सभी शास्त्रों में कहीं ना कहीं नारद का निर्देश निश्चित रूप से होता ही है। ऋग्वेद मंडल में 8-9 के कई सूक्तों के दृष्टा नारद हैं। अथर्ववेद, ऐतरेय ब्राह्मण, मैत्रायणी संहिता आदि में नारद का उल्लेख है। पूर्व कल्प में नारद 'उपबर्हण' नाम के गंधर्व थे। उन्हें अपने रूप पर अभिमान था। एक बार जब ब्रह्मा की सेवा में अप्सराएँ और गंधर्व गीत और नृत्य से जगत्सृष्टा की आराधना कर रहे थे, उपबर्हण स्त्रियों के साथ श्रृंगार भाव से वंहा आया। उपबर्हण का यह अशिष्ट आचरण देख कर ब्रह्मा कुपित हो गये और उन्होंने उसे 'शूद्र योनि' में जन्म लेने का शाप द

श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा, राजस्थान

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श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा, श्रीनाथजी मंदिर एक प्राचीन धार्मिक स्थल है जो 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह मंदिर हिन्दुओं के भगवान कृष्ण को समर्पित है। भगवान की मूर्ती काले मार्बल से काट कर बनायी गयी थी। रोचक बात यह है कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के बाद श्रीनाथजी मंदिर को दूसरा सबसे धनी भारतीय मंदिर माना जाता है।  श्रद्धालु इस मंदिर को देखने ज़रूर आता है। श्रीनाथजी राजस्थान राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। इतिहास माना जाता है, श्री वल्लभाचार्य जी को ही गोवर्धन पर्वत पर श्रीनाथ जी की मूर्ति मिली थी। इस सम्प्रदाय की प्रसिद्धि समय के साथ बढ़ती गई। पहली बार वल्लभाचार्य के द्वितीय पुत्र विट्ठलनाथ जी को गुंसाई (गोस्वामी) पदवी मिली तब से उनकी संताने गुसांई कहलाने लगीं। विट्ठलनाथ जी के कुल सात पुत्रों की पूजन की मूर्तियाँ अलग - अलग थीं। वैष्णवों में यह सात स्वरूप के नाम से प्रसिद्ध हैं। गिरिधर जी टिकायत (तिलकायत) उनके ज्येष्ठ पुत्र थे। इसी से उनके वंशल नाथद्वारे के गुसांई जी टिकायत महाराज कहलाने लगे। श्रीनाथ जी की मूर्ति गिरिधर जी के पूजन में रही। औरंगजेब ने जब हिंदुओ