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अनाज के सपने और भूख का कानून : एन के सिंह

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अनाज के सपने और भूख का कानून एन के सिंह, राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय सचिव संसद का बजट सत्र अचानक ही खत्म हो गया। बाधाओं के कारण खासकर सत्र के उत्तरार्ध में कोई विधायी काम नहीं हो सका। लोकसभा में पेश किए गए खाद्य सुरक्षा विधेयक पर भी विचार नहीं हो सका। अगर राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ठ होते हैं कि इस काम को करना इतना जरूरी है कि इसके लिए अगले सत्र का इंतजार भी नहीं किया जा सकता तो खाद्य सुरक्षा के लिए सरकार अध्यादेश ला सकती है। फिलहाल यह विधेयक जिस रूप में पेश हुआ है मैं उससे सहमत नहीं हूं। मुङो लगता है कि इससे न तो भुखमरी को रोका जा सकता है और न कुपोषण को खत्म किया जा सकता है। यहां इस विधेयक की मुख्य विशेषताओं का जिक्र जरूरी है। एक तो इस विधेयक से ग्रामीण क्षेत्र की 75 फीसदी आबादी और शहरी क्षेत्र की 50 फीसदी आबादी सस्ता खाद्यान्न प्राप्त करने की हकदार होगी। ग्रामीण क्षेत्र की 46 और शहरी क्षेत्र की 28 फीसदी आबादी को प्राथमिकता का दर्जा दिया जाएगा। बाकी का दर्जा सामान्य का होगा। विधेयक में गर्भवती औरतों, बच्चों को दूध पिलाने वाली माताएं और कुपोषित बच्चों के लिए विशेष प्रा