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दस सालों के अंदर नक्सलियों की ताकत 10 गुना बढ़ चुकी है

रायपुर. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर नियंत्रण, उनके पैर उखड़ने जैसे सरकारी दावों के विपरीत सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस सालों के अंदर नक्सलियों की ताकत 10 गुना बढ़ चुकी है। केंद्रीय और स्थानीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच प्रशिक्षित हथियारबंद नक्सलियों की संख्या एक हजार से बढ़कर 10 हजार हो चुकी है। सबसे घातक मिलिटरी इकाई पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की कंपनियां तीन से दस हो चुकी हैं। वे लगातार इलाके का विस्तार और सदस्यों की संख्या बढ़ा रहे हैं। एक माह पहले ही उन्होंने कांकेर और राजनांदगांव के इलाके को मिलाकर नया डिवीजन बनाया है। हाल में हुई कुछ मुठभेड़ों के आधार पर राज्य के गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दावा किया था कि नक्सली कमजोर पड़े हैं। उनके पैर उखड़ने लगे हैं। भास्कर ने जब इस बारे में पड़ताल की, तो सच्चाई इसके विपरीत नजर आई। खुफिया एजेंसियों ने पिछले 10-11 सालों में नक्सलियों की ताकत पर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कहा गया है कि उनका पूरा जोर बड़े हमलों की जगह छोटे हमले, अपनी ताकत बढ़ाने और इलाका विस्तार पर है। हालांकि साल 2006 या 2008 की त

कांग्रेस को ही बताना है कि उनमें कौन था जिसने नक्सलियों के हमले को सफल बनबाया

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कांग्रेस को ही बताना है कि उनमें कौन था जिसने नक्सलियों के हमले को सफल बनबाया साजिश का शक और गहराया, परिवर्तन यात्रा के तयशुदा कार्यक्रम में भी किया था बदलाव! शिव दुबे  |  May 28, 2013, रायपुर. नंदकुमार पटेल और महेंद्र कर्मा की हत्या की साजिश और गहरा गई है। परिवर्तन यात्रा के तयशुदा कार्यक्रम में किया गया बदलाव कई संदेहों को जन्म दे रहा है।  निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक परिवर्तन यात्रा के तहत कांग्रेस विधायक कवासी लखमा के विधानसभा क्षेत्र (कोंटा) के सुकमा में 22 मई को सभा रखी गई थी। इस दिन सिर्फ यही एक कार्यक्रम तय था, लेकिन बाद में इस मूल कार्यक्रम में दो बड़े बदलाव किए गए। पहला- सुकमा की 22 मई को होने वाली सभा 25 मई को कर दी गई और दूसरा- सुकमा के साथ ही एक और सभा दरभा में भी रख दी गई और उसी दिन कांग्रेस नेताओं के सुकमा से दरभा जाने के दौरान ही नक्सलियांे ने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया। यह किसी का आरोप नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति से ही साफ हो रहा है। 2 अप्रैल को प्रदेश कांग्रेस की आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया था कि परिवर्तन यात्रा के तहत 22 म

नक्सली हिंसा को राष्ट्रीय संकट माना जाए

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नक्सली हिंसा को राष्ट्रीय संकट माना जाए - रमेश नैय्यर लेख - दैनिक भास्कर २ ८ मई २ ० १ ३   वाम चरमपंथ भारतीय राजनीति, रणनीति, आर्थिकी और सामाजिक विमर्श का एक बड़ा विषय बना हुआ है। उसे चर्चा के केन्द्र में रखे रहने में अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे गए कुछ लेखकों-पत्रकारों की सक्रियता विस्मित करती है। उनके हितैषी महिमामंडित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद और योजना आयोग में भी स्थापित हैं। अनेक राजनीतिज्ञ भी वक्त पडऩे पर उनके पक्ष में मुखर होते पाए जाते हैं। वे योजनाबद्ध ढंग से नृशंस हत्याएं करते हैं। 'जन-अदालतें' लगाकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और आम आदिवासियों के सरेआम गले रेत देते हैं। इधर उन्होंने विद्यार्थियों और पत्रकारों को भी पुलिस मुखबिर करार देकर मारना शुरू कर दिया है। साधारण वेतन पर अपने परिजनों से बहुत दूर बीहड़ इलाकों में पदस्थ सुरक्षाकर्मियों की हत्याएं तो वे अपना फर्ज मानते हैं। इस दहकते यथार्थ से वाकिफ तो रसीली भाषा-शैली में अंग्रेजी लेखन करने वाले कई साहित्यकार भी हैं, परंतु इस सच को वे बयान नहीं करते। बल्कि इन माओवादियों को 'बंदूकधारी

सबल समाज से अच्छे-अच्छे उद्दण्ड कांपते हैं - सावरकर जी

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- अरविन्द सीसौदिया नामर्दी के बुतों को चौराहों से उतार फैंकना होगा, देश को दिशा दे सकें, वें तस्वीरें लगानी होगी। उन विचारों को खाक पढ़े, जो कायरता में डूबे हों, पढें वह,जो ज्वालामुखी सा तेज हर ललाट पर लाये। स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की भूमिका न केवल महत्वपूर्ण थी, अपितु अंग्रेजों की असल नींद हराम  इसी रास्ते पर चले महान योद्धाओं ने की थी। स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर इस यशस्वी श्रृंखला की एक प्रमुख कडी थे। उनके ओजस्वी लेखन से ब्रिटिश सरकार कांपती थी। उन्हंे राजद्रोह के अपराध में, दो जन्मों की कैद की सजा सुनाई गई थी, अर्थात कम से कम 50 वर्ष उन्हें काले पानी की जेल में कोल्हू फेरते-फेरते और नारियल की रस्सी बनाते-बनाते बिताने थे। महाराष्ट्र के नासिक जनपद में एक छोटा सा स्थान भगूर है। इसी में दामोदर पंत सावरकर एवं उनकी              धर्मपत्नि राधादेवी के चार संताने थीं। बडे पुत्र का नाम गणेश, दूसरे का नाम विनायक तीसरा के नाम नारायण था एवं पुत्री थी मैना। ये तीनों पुत्र महान स्वतंत्रता सैनानी हुये। माता-पिता का निधन बचपन में ही प्लेग की महामारी में हो गया