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विवेकानन्द ने काशी से ही शिकागो जाने निर्णय लिया था

Sunday, July 7, 2013 स्वामी विवेकानन्द ने काशी से ही शिकागो जाने निर्णय लिया था भगवान शंकर की पवित्र नगरी काशी में ही स्वामी विवेकानंद ने धर्म संसद शिकागो जाने का निर्णय लिया था। वर्ष 1889 में प्रतिज्ञा की थी कि ‘शरीर वा पातयामि, मंत्र वा साधयामि’ (आदर्श की उपलब्धि करूंगा, नहीं तो देह का ही नाश कर दूंगा)। अर्दली बाजार स्थित ‘गोपाल लाल विला’ (अब एलटी कालेज परिसर) से स्वामी विवेकानंद का जन्म से नाता रहा है, वह यहां अनेक बार स्वास्थ्य लाभ के लिए आए। कई संदर्भ इतिहास के पन्नों में मिलता है। वह प्रवास स्थल आज भी है। यह कभी ‘गोपाल लाल विला’ के नाम से जाना जाता था। स्वामी जी ने ‘गोपाल लाल विला’ को अपने स्वास्थ्य लाभ की दृष्टि से उत्तम स्थान माना था। स्वामीजी ने भगिनी निवेदिता, स्वामी ब्रतानंद व सुश्री वुली बुल को जो पत्र लिखा था, उसमें इसका उल्लेख है। स्वामी विवेकानंद ने काशी की अंतिम यात्रा 1902 में की थी। उस दौरान वह बीमार थे। वह ‘गोपाल लाल विला’ में ठहरे व एक महीने तक यहीं स्वास्थ्य लाभ किया। 14 मार्च, 1902 को यहां से बहन निवेदिता को भेजे पत्र में लिखा था कि ‘मुझे सांस लेने में काफी

बिहार में : 10 प्रमुख दागदार नेताओं के बारे में

इनके 'दामन' पर लग चुका है 'दाग', अब बजेगी इन 10 नेताओं की 'पुंगी'! Dainikbhaskar.com   |  Jul 12, 2013, http://www.bhaskar.com पटना। जन प्रतिनिधित्व कानून पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कानून बनाने वाले नेताओं और राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। औपचारिक रूप से कांग्रेस, भाजपा समेत दूसरे दल भले ही इसका स्वागत करें। लेकिन, सच्चाई यह है कि अधिकतर दलों के छोटे-बड़े नेताओं पर इसकी गाज गिर सकती है। इससे पहले जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (4) के मुताबिक अगर कोई सांसद या विधायक को दो वर्ष से ज्यादा के कारावास की सजा सुनाई जाती है और वह तीन महीने के अंदर ऊपरी अदालत में अपील दाखिल कर देता है तो वह सदस्यता से अयोग्य नहीं माना जाएगा। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह धारा निरस्त हो गई है और सरकार के लिए आगे इस तरह का कोई कानूनी इंतजाम करने का रास्ता भी बंद हो गया है। इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने 2004 में गैर सरकारी संगठन जन-चौकीदार की याचिका स्वीकार करते हुए जेल में बंद व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। पटना हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट के इस फैसल

ईश्वरीय वैभव जगाने का पर्व : गुरुपूर्णिमा

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 22 जुलाई 2013 (सोमवार) को अपना ईश्वरीय वैभव जगाने का पर्व : गुरुपूर्णिमा (पूज्यश्री की दिव्य अमृतवाणी) गुरुपूर्णिमा का दूसरा नाम है व्यासपूर्णिमा । वेद के गूढ रहस्यों का विभाग करनेवाले कृष्णद्वैपायन की याद में यह गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया जाता है । भगवान वेदव्यास ने बहुत कुछ दिया मानव-जाति को । विश्व में जो भी ग्रंथ हैं, जो भी मत, मजहब, पंथ हैं उनमें अगर कोई ऊँची बात है, बडी बात है तो व्यासजी का ही प्रसाद है । व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वम् । एक लाख श्लोकों का ग्रंथ ‘महाभारत' रचा उन महापुरुष ने और यह दावा किया कि जो महाभारत में है वही और जगह है व जो महाभारत में नहीं है वह दूसरे ग्रंथों में नहीं है : यन्न भारते तन्न भारते । चुनौती दे दी और आज तक उनकी चुनौती को कोई स्वीकार नहीं कर सका । ऐसे व्यासजी, इतने दिव्य दृष्टिसम्पन्न थे कि पद-पद पर पांडवों को बताते कि अब ऐसा होगा और कौरवों को भी बताते कि तुम ऐसा न करो । व्यासजी का दिव्य ज्ञान और आभा देखकर उनके द्वारा ध्यानावस्था में बोले गये ‘महाभारत' के श्लोकों का लेखनकार्य करने के लिए गणपतिजी राजी हो गये । कैसे दिव्य आर्षद्रष्ट