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नैतिकता ही सब कुछ - प. पू सरसंघचालक डा मोहन जी भागवत

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नैतिकता ही सब कुछ - प. पू  सरसंघचालक डा मोहन जी भागवत लाडनू (नागौर ) ६ अगस्त २०१३ . राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूजनीय डा मोहन जी भागवत ने राजनीति  और नैतिकता विषय पर अपना उध्बोधन देते हुए कहा कि समाज में विपरीत स्थिती में लगता है की नैतिकता चाहिए लेकिन कैसे आती है ? नैतिकता के मूल में आत्मीयता है. जहाँ मैं ही हूँ, मेरा ही  विचार है,  मेरा ही भला होना चाहिये  , मुझे ही सब कुछ मिलना चाहिए  नैतिकता नहीं होती , वहां स्वार्थ होता है. जहाँ सभी है, सभी को होना चाहिए  सभी को मिलना चाहिए वहां आदमी अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर सबके लिए कार्य करता है. वह नैतिकता है. जैन विश्व भारती में तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण की उपस्तिथि में राजनीति और नैतिकता पर जनमानस  को संबोधित करते हुए भागवत  जी ने राजनीती और नैतिकता पर बोलते हुए  कहा की समाज या  प्रवाह जैसा है उसकी एक गति है, उसमे जो कुछ गिरेगा वो उस गति के साथ हो जायेगा।  नैतिक  व्यक्ति सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलता है।  त्याग और संयम आना चाहिए।  नैतिकता भाषणों  से नहीं आएगी। श्रद्धा को जगाना होगा और उदाहरण  से विश्वास पैदा करना यही