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भारत की आध्यात्मिक विश्व विजय का स्मरण ; 11 सितम्बर 1893 : शिकागो सर्वपंथ सभा

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भारत की आध्यात्मिक विश्व विजय का स्मरण पांचजन्य / तारीख: 30 Aug 2013  मन के हारे हार है मन के जीते जीत’, यह कहावत जितनी व्यक्ति पर लागू होती है उतनी ही समाज पर भी लागू होती है। विजय की आकांक्षा व विजय की अनूभूति समाज मन का शक्तिवर्धन करती हैं। जब समूचा राष्टÑ ही अपनी निहित शक्तियों के प्रति अनभिज्ञ होने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही उसे मानसिक लकवे से बाहर ला सकती है। आत्म-विस्मृति की मानसिकता पराभव की मानसिकता होती है, अकर्मण्यता की मानसिकता होती है। ऐसे में स्वप्न भी संकुचित हो जाते हैं। 19 वीं शताब्दी के अंत में भारत की यही स्थिति थी। कहीं से कोई आशा नहीं दिखाई देती थी। पराधीनता तो थी ही, स्वाधीनता के लिए प्रयत्न करने का आत्मविश्वास भी नष्ट प्राय: सा हो गया था। इस बौद्घिक, मानसिक व आर्थिक दासता की पृष्ठभूमि में 11 सितम्बर 1893 को शिकागो की सर्वपंथ सभा में हुए दिग्विजयी चमत्कार को समझा जाना चाहिए। सनातन हिंदू धर्म का गर्वोन्नत प्रतिनिधित्व करते हुए युवा संन्यासी स्वामी विवेकानन्द ने प्राचीन ऋषियों के दिव्य सम्बोधन जब समूचे विश्व के सामने रख

स्वामी विवेकानन्द का शिकागो धर्मसंसद में ऐतिहासिक भाषण

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शिकागो धर्मसंसद में स्वामी विवेकानन्द का ऐतिहासिक भाषण अमेरिकावासी बहनों और भाइयों , आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है , उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खडा होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा है । संसार में सन्यासियों की सबसे प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ , धर्मो की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि - कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ । मैं इस मंच पर बोलने वाले उन कतिपय वक्ताओं के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ जिन्होंने प्राची के प्रतिनिधियों का उल्लेख करते समय आपको यह बताया है कि सुदूर देशों के ये लोग सहिष्णुता का भाव विविध देशों में प्रसारित करने के गौरव का दावा कर सकते है । मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूँ जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति दोनों की ही शिक्षा दी है । हम लोग सब धर्मो के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते वरन् समस्त धर्मो को सच्चा मानकर स्वीकार करते है । मुझे एक ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है ज

Meaning Of Lord GANESHA - Neena sharma

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 बहुत सारे गणेशजी अपने अपने जजमानों के घर प्रस्थान कर गये हें। कल गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक भक्तों के साथ रहेगे । Neena sharma Meaning Of Lord GANESHA G- Get A- Always N- New E- Energy S- Spirit & H- Happiness A- At All Times! Happy Ganesh Chaturthi! विघ्नहर्ता,मंगलकर्ता आप सब के जीवन में नूतन उत्साह का संचार करे समस्त विपत्तियों से आप सबकी और आपके परिवार की रक्षा करे...हे गणपति बप्पा सारी बुराइयो से दूर रख कर आप हमें अपने चरणों में स्थान दे...!!! गणपति बाप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया सिद्धि विनायक चतुर्थी | Siddhi Vinayaka Chaturthi 2013 (Vinayak Chaturthi Vrat Method) Ganesh Chaturthi Vrat Katha in Hindi-- भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन सिद्धि विनायक व्रत किया जाता है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार वर्ष 2013, में यह व्रत 9 सितम्बर, सोमवार के दिन किया जायेगा. इस व्रत के फल इस व्रत के अनुसार प्राप्त होते है. भगवान श्री गणेश को जीवन की विध्न-बाधाएं हटाने वाला कहा गया है. और श्री गणेश सभी कि मनोकामनाएं पूरी करते है. गणेशजी को सभी देवों में सबसे अधिक महत्व दिया गय