पोस्ट

अक्तूबर 7, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सर्वोच्च न्यायालय के दर्पण में हिन्दुत्व - डा. सतीश चन्द्र मित्तल 

चित्र
पाञ्चजन्य http://balapte.blogspot.in/ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद सर्वोच्च न्यायालय के दर्पण में हिन्दुत्व तारीख: 14 Sep 2013  - डा. सतीश चन्द्र मित्तल  गत 25 अगस्त को विश्व हिन्दू परिषद् की 200 संतों की चौरासी कोसी परिक्रमा को लेकर उत्तर प्रदेश की सरकार ने उसके दमन के लिए 23000 अर्द्धसैनिक बलों की नियुक्ति की। इसके साथ ही लगभग ढ़ाई हजारों व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में केन्द्र सरकार की अकर्मण्यता तथा उदासीनता, दोनों  स्तरों पर विवेकहीनता तथा आवश्यक जानकारी का अभाव दर्शाती है। साथ ही बहुसंख्यक हिन्दू समाज के प्रति विरोधी मानसिकता को प्रकट करती है। चुनावी वोट बैंक तथा मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं किस सीमा तक जा सकती हैं, यह इसका एक भावी संकेत है। वैसे भी छद्म सेकुलरवादी, संस्कृति विहीन वामपंथी, कुछ मुल्ले-मौलवी, ईसाई पादरी तथा क्रिप्टो हिन्दू (जो गुप्त रूप से ईसाइयत में आस्था रखते हैं)  पहले से ही हिन्दू समाज को  गुमराह करने का प्रयत्न करते रहे हैं।भारतीय संविधान में भारतीय संस्कृति तथा भारतीयता का इसके निर्माण के समय पूर्णत: अभाव रहा है।