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महर्षि वाल्मीकि : 'रामायण' के रचयिता

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महर्षि वाल्मीकि भारत डिस्कवरी प्रस्तुति महर्षि वाल्मीकि संस्कृत भाषा के आदि कवि और हिन्दुओं के आदि काव्य 'रामायण' के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध है। महर्षि कश्यप और अदिति के नवम पुत्र वरुण (आदित्य) से इनका जन्म हुआ। इनकी माता चर्षणी और भाई भृगु थे। वरुण का एक नाम प्रचेत भी है, इसलिये इन्हें प्राचेतस् नाम से उल्लेखित किया जाता है। उपनिषद के विवरण के अनुसार ये भी अपने भाई भृगु की भांति परम ज्ञानी थे। एक बार ध्यान में बैठे हुए वरुण-पुत्र के शरीर को दीमकों ने अपना ढूह (बाँबी) बनाकर ढक लिया था। साधना पूरी करके जब ये दीमक-ढूह से जिसे वाल्मीकि कहते हैं, बाहर निकले तो लोग इन्हें वाल्मीकि कहने लगे। तमसा नदी के तट पर व्याध द्वारा कोंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार डालने पर वाल्मीकि के मुंह से व्याध के लिए शाप के जो उद्गार निकले वे लौकिक छंद में एक श्लोक के रूप में थे। इसी छंद में उन्होंने नारद से सुनी राम की कथा के आधार पर रामायण की रचना की। कुछ लोगों का अनुमान है कि हो सकता है, महाभारत की भांति रामायण भी समय-समय पर कई व्यक्तियों ने लिखी हो और अतिम रूप किसी एक ने दिया हो और वह

२१ अक्टूबर १९४३ में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के नेतृत्व में बनी थी स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार

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२१ अक्टूबर १९४३ में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के  नेतृत्व में बनी थी भारत की प्रथम स्वतंत्र सरकार आज़ाद हिन्द फ़ौज http://hi.wikipedia.org/s/ep मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से आज़ाद हिन्द फौज़ के सर्वोच्च सेनापति सुभाष चन्द्र बोस अपने पूर्ण सैनिक वेश में आज़ाद हिन्द फ़ौज सबसे पहले राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने 29 अक्तूबर 1915 को अफगानिस्तान में बनायी थी। मूलत: यह 'आजाद हिन्द सरकार' की सेना थी जो अंग्रेजों से लड़कर भारत को मुक्त कराने के लक्ष्य से ही बनायी गयी थी।  रासबिहारी बोस ने जापानियों के प्रभाव और सहायता से दक्षिण-पूर्वी एशिया से जापान द्वारा एकत्रित क़रीब 40,000 भारतीय स्त्री-पुरुषों की प्रशिक्षित सेना का गठन शुरू किया था और उसे आज़ाद हिन्द फ़ौज। बाद में उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आज़ाद हिन्द फौज़ का सर्वोच्च कमाण्डर नियुक्त करके उनके हाथों में इसकी कमान सौंप दी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सन 1942 में भारत को अंग्रेजों के कब्जे से स्वतन्त्र कराने के लिये आजाद हिन्द फौज या इन्डियन नेशनल आर्मी (INA) नामक सशस्त्र सेना का संगठन किया गया। इसकी संरचना रासबिहारी

शरद पूर्णिमा

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शरद पूर्णिमा यूं तो भगवान कृष्ण के द्वारा गोपियों के सामनें अपने ईश्वरत्व प्रगट करने के कारण  अधिक मशहूर हे ! किन्तु यह पर्व संतान के हित चिंतन का है !! शरद पूर्णिमा का पर्व 18 अक्टूबर 2013 आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस पूर्णिमा को चंद्रमा पूरा नजर आने से इसे महा पूर्णिमा भी कहते हैं। चंद्रमा इस दिन 16 कलाओं से युक्त रहता है। ये कलाएं मनुष्य के लिए सुख-सिद्धि दायक एवं उन्नति कारक मानी है। सर्वार्थसिद्घ और अमृत सिद्ध का संयोग भी इस दिन बन रहा है। खरीद-फरोख्त और नए कार्य आरंभ से लेकर पूजा-पाठ, दान-पुण्य इस दिन होंगे। महंत श्री कृष्णदास के मुताबिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन चंद्रमा की 16 कलाएं खिलती हैं। जिनमें औषधीय गुण माने हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे उत्तम माना है। व्रत-उपवास के साथ लोग रात्रि में खीर बनाकर भगवान विष्णु को सबसे पहले भोग लगाते हैं। चंद्रमा का इसलिए भी महत्व है कि इसे समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक मानते है। ======== नई दिल्ली| आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है ऐसा इसलिए क