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सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल : दंगों को नए सिरे से भड़कानें कि साजिस

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यह बिल कोंग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता का परिचायक हे , सबसे पहले कांग्रेस  बताये उसने हिंदुओं को अपमानित करने और लज्जित करने का साहस  कैसे किया ? वे हिंदुस्तान में हें या पाकिस्तान में …इस तरह की भाषा आपने लिख कैसे दी , ऐशा संविधान विरोधी कानून बनाने कि सोची कैसे ? सबसे पहले इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए ? असल मानसिकता और असल उद्देश्य सामने लाये जाएँ ! -------------------------- दंगा बिल पर झुक गई सरकार, बहुसंख्यक नहीं होंगे जिम्मेदार आईबीएन-7 | Dec 05, 2013 नई दिल्ली। चौतरफा विरोध के बीच सरकार ने विवादित सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल में अहम बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब दंगे के लिए बहुसंख्यकों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। साथ ही, राज्य सरकार की सिफारिश के बाद ही केंद्रीय बलों को दंगाग्रस्त इलाकों में भेजा जाएगा। बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक दल इस बिल को संघीय ढांचे पर कुठाराघात बताते हुए विरोध में जुटे थे। हालांकि सरकार ने पहले ही कहा था कि वो सबकी राय के बाद ही बिल पेश करेगी। सरकार संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में इस बिल को पेश करना चाहती है। सूत्रों के मुताबि

सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने पीएम को लिखा खत

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सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने पीएम को लिखा खत Thursday, December 05, 2013, 14:15 सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने पीएम को लिखा खतअहमदाबाद: बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है। मोदी ने कहा है कि सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल से समाज बंटेगा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का विरोध किया और कहा कि प्रस्तावित विधेयक ‘तबाही का नुस्खा’ है। मोदी ने विधेयक को राज्यों के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण का प्रयास का आरोप लगाते हुए कहा कि इस संबंध में आगे कोई कदम उठाने से पहले इस पर राज्य सरकारों, राजनीतिक पार्टियों, पुलिस और सुरक्षा एजेंसी जैसे साझेदारों से व्यापक विचार विमर्श किया जाना चाहिए। मोदी का यह पत्र संसद के शीत सत्र की शुरूआत पर सुबह आया है। मौजूदा सत्र में विधेयक पर चर्चा