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जनवरी 11, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रियल पब्लिक हीरो ..जनता के असली जननायक

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जनता के असली जननायक रियल पब्लिक हीरो ... 7 अक्टूबर 2001 से लगातार जनता के द्वारा निर्वाचित होता आ रहा मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी । जिसे तीन विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहूमत से जनता ने मुख्यमंत्री बनाया । यही तो है असली आम आदमी की पशंद !! रियल पब्लिक हीरो ... ... शिवराज सिंह चौहान .......लगातार 5 बार लोकसभा चुनाव जीते और चार बार विधायक चुने गये शिवराज सिंह को तीसरी वार लगातार मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। रियल पब्लिक हीरो ... रमन सिंह..... 1990 और 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। उसके बाद सन्1999 में वे लोकसभा के सदस्य चुने गये। 1999 और 2003 में उन्होंने भारत सरकार में राज्य मंत्री का भी पद संभाला। 2003 में हुये विधानसभा के चुनावों में उन्होंने सफलता पाई और 7 दिसंबर 2003 छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री बने , 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने फिर से सफलता पायी और राज्य के तीसरी वार मुख्यमंत्री बने। रियल पब्लिक हीरो ... वसुंधरा राजे ..... लगातार 5 बार लोकसभा सांसद और चार बार विधानसभा सदस्य , लगाता

एक और स्वामी विवेकानन्द चाहिए - डा. सतीशचन्द्र मित्तल

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एक और स्वामी विवेकानन्द चाहिए साप्ताहिक पांचजन्य के ताजा अंक से  / तारीख: 11 Jan 2014 न मैकालेवादी,न मार्क्सवादी, न छद्म सेकुलरवादी, हम हैं भारतवासी -डा. सतीश चन्द्र मित्तल- स्वतंत्रता मिलने वाले के बाद  भारतीयों की स्वाभाविक आकांक्षा रही कि ब्रिटिश साम्राज्य की समाप्ती के साथ भारत की सोच तथा प्रशासनिक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन होंगे, लेकिन देश में राजनीतिक सत्ता हस्तांतरण के अलावा कोई भी क्रांतिकारी परिवर्तन  नहीं हुआ। पिछले 67 वर्षों से शिक्षा, भाषा, सामाजिक व आर्थिक संरचना, संस्कृति, धर्म तथा अध्यात्म के क्षेत्रों में एक पत्नोन्मुख भटकाव की स्थिति बनी हुई है। प्रश्न है आखिर भारतीयों की मूल सोच क्या है? शिक्षा पर कुठाराघात सामान्यत: भारत जीवन की रीढ़-शिक्षा व्यवस्था अनेकों विदेशी आक्रमण व  घुसपैठ होने पर भी मनु से महात्मा गांधी तक सबल, सुदृढ़ तथा अक्षुण्ण रही। पठान और मुगल शासकों ने भी इसमें व्यवधान न डाला। परन्तु 1835 ई. में धूर्त मैकाले तथा बगुले विलियम बैटिंक ने अपनी गुप्त शिक्षा टिप्पणी तथा प्रस्ताव से भारतीयों के लिए अंग्रेजी शिक्षा माध्यम तथा यूरोपीय साहित्य, दर्शन तथा इ

स्वतंत्रता संग्राम के पितामह ”साइक्लॉनिक हिन्दू संत स्वामी विवेकानन्दजी “

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12 जनवरी स्वामी विवेकानन्दजी की जयन्ति पर विषेश स्वतंत्रता संग्राम के पितामह  ”साइक्लॉनिक हिन्दू संत स्वामी विवेकानन्दजी “ - अरविन्द सिसोदिया स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य, स्वामी विवेकानन्दजी के स्मरण मात्र से भारतवासी स्वाभिमान से भर उठते हैं और भारत की युवा शक्ति के वे पिछले 125 वर्षों से आईकाॅन हैं। स्वामीजी भारतमाता के वह सपूत थे जिन्हे स्वंय ईश्वर ने ही भारत के उद्दार के लिये,  उत्थान के लिये और पराधीनता से मुक्ति के स्वाभिमान जागरण हेतु भेजा था। उनमें अत्यंत विलक्षण प्रतिभा थी। वे परोक्ष रूप से भगवान शिव के अवतार माने जाते रहे हैं।      उन्होने अमरीका के शिकागो शहर में 1893 में आयोजित उस विश्व धर्म संसद को अच्ंाभित कर दिया जो मात्र ईसाई श्रैष्ठता पर मुहर लगवानें के लिये आयोजित की गई थी। आयोजक स्वामीजी के बौद्धिक क्षमता से चकित थे उनके सम्बोधन प्रभाव और उसके धाराप्रवाह माधुर्य पर मोहित थे, वे उन्हे सबसे अंतिम वक्ताओं अर्थात प्रमुख वक्ता के रूप में बुलवाते थे ताकि धर्म संसद में आये श्रोता उन्हे सुनने के लोभ में रूके रहें । पूरा अमरीका उन पर मोहित था और तत्कालीन अमरीकन प्रेस
http://ahwanmag.com/Critique-of-Aam-Admi-party अरविन्द केजरीवाल राजीव गांधी फाउण्डेशन राष्ट्रीय सलाहकार परिषद अरविन्द केजरीवाल-कम्युनिस्ट एक्टिविस्ट (सोनिया गांधी कि सलाहकार अरुणा रॉय कि टीम का मेंबर (2005-06) केजरीवाल का लेफ्ट ..... 21-05-2005 राजीव गांधी फाउन्डेशन नई दिल्ली की ओर से आयोजित सर्वेक्षण में देश के सभी राज्यों में गुजरात को श्रेष्ठ राज्य का ..... उन्होंने इसकी अन्तिम किश्त 2010 में दी गयी बतलायी और यह भी बतलाया कि 2011 में भी फाउण्डेशन ने एन.जी.ओ. एक बहुत ही महत्वपूर्ण पोस्ट मुझे पढ़ने को मिली है , मुझे लगा कि यह आपको भी प्रस्तुत किया जाये  Saturday, December 28, 2013 http://gauravharidwar.blogspot.in/2013/12/blog-post_2858.html कैसे और क्‍यों बनाया अमेरिका ने अरविंद केजरीवाल को कैसे और क्‍यों बनाया अमेरिका ने अरविंद केजरीवाल को, पढि़ए पूरी कहानी! by -Sundeep Dev 28 December 2013 संदीप देव, नई दिल्‍ली।  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली एनजीओ गिरोह ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी)’ ने घोर सांप्रदायिक ‘सांप्रदायिक और लक्ष्य केंद्रित हिंसा निव